HPV Vaccine

नई दिल्ली, 28 फरवरी 2026: भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। देश की लाखों बेटियों को सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त तत्वावधान में एक राष्ट्रव्यापी मेगा स्वास्थ्य मुहिम का शंखनाद हो चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, HPV टीकाकरण अभियान आज से, 14 साल की लड़कियों पर रहेगा फोकस, और इसे पूरे देश के स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) के माध्यम से युद्धस्तर पर लागू किया जाएगा।

यह न्यूज़ ब्लॉग आपको इस ऐतिहासिक टीकाकरण अभियान के हर पहलू, सर्वाइकल कैंसर की गंभीरता, स्वदेशी वैक्सीन ‘Cervavac’ की खूबियों और इस महाभियान के पीछे की वैज्ञानिक और रणनीतिक सोच के बारे में विस्तृत जानकारी देगा। यदि आप एक माता-पिता हैं, शिक्षक हैं, या स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हैं, तो यह विस्तृत रिपोर्ट आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सर्वाइकल कैंसर: भारत के लिए एक मूक हत्यारा (The Silent Killer)

इस टीकाकरण अभियान की आवश्यकता को समझने के लिए हमें सर्वाइकल कैंसर के भयावह आंकड़ों पर गौर करना होगा। स्तन कैंसर (Breast Cancer) के बाद, सर्वाइकल कैंसर भारतीय महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल लाखों महिलाएं इस बीमारी की चपेट में आती हैं और हजारों की संख्या में अपनी जान गंवा देती हैं।

सर्वाइकल कैंसर क्या है?

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) में होता है, जो गर्भाशय (Uterus) का निचला हिस्सा है और योनि (Vagina) से जुड़ता है।

इस कैंसर का 95% से अधिक कारण एक विशेष वायरस का संक्रमण है, जिसे ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV – Human Papillomavirus) कहा जाता है। यह वायरस मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। हालांकि HPV के कई स्ट्रेन (प्रकार) होते हैं, लेकिन इनमें से स्ट्रेन 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर के सबसे बड़े कारक माने जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस संक्रमण के शुरुआती वर्षों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जिसके कारण अक्सर बीमारी का पता तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।Human Papillomavirus (HPV) structure, AI generated

9 से 14 वर्ष की आयु ही क्यों? अभियान की वैज्ञानिक रणनीति

जैसे ही यह खबर सामने आई कि HPV टीकाकरण अभियान आज से, 14 साल की लड़कियों पर रहेगा फोकस, कई लोगों के मन में यह सवाल उठा कि आखिर सरकार ने इस विशिष्ट आयु वर्ग (विशेषकर 14 वर्ष की किशोरियों) को ही प्राथमिकता क्यों दी है? इसके पीछे एक बहुत ही ठोस और प्रमाणित वैज्ञानिक कारण (Scientific Rationale) है।

HPV टीकाकरण अभियान

1. अधिकतम प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Maximum Immune Response)

चिकित्सीय शोध यह साबित करते हैं कि HPV वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी तब होती है जब इसे 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच दिया जाए। इस उम्र में किशोरियों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) बहुत मजबूत होती है और वे वैक्सीन के प्रति बेहतरीन एंटीबॉडी रिस्पॉन्स (Antibody Response) पैदा करती हैं। इस आयु वर्ग में केवल दो खुराकों (Doses) की आवश्यकता होती है, जबकि 15 वर्ष की आयु के बाद तीन खुराकों की आवश्यकता पड़ती है।

2. संक्रमण से पहले सुरक्षा (Protection Before Exposure)

HPV वैक्सीन एक ‘प्रिवेंटिव’ (निवारक) वैक्सीन है, ‘क्यूरेटिव’ (उपचारात्मक) नहीं। इसका मतलब है कि यह वैक्सीन तब सबसे ज्यादा कारगर होती है जब इसे किसी भी प्रकार के यौन संपर्क (Sexual Exposure) और HPV संक्रमण होने से पहले दिया जाए। 14 साल की लड़कियों पर विशेष फोकस यह सुनिश्चित करता है कि संक्रमण के जोखिम से पहले ही उन्हें 100% सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया जाए।

भारत का अपना सुरक्षा कवच: स्वदेशी वैक्सीन ‘Cervavac’

कुछ वर्षों पहले तक भारत में HPV वैक्सीन बहुत महंगी हुआ करती थी। विदेशी कंपनियों (जैसे मर्क की Gardasil) की वैक्सीन की कीमत प्रति डोज 3,000 से 4,000 रुपये के बीच थी, जो आम भारतीय परिवार के लिए वहन करना लगभग असंभव था।

लेकिन ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India – SII) ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के सहयोग से भारत की पहली स्वदेशी क्वाड्रिवेलेंट HPV वैक्सीन ‘सर्वावैक’ (CERVAVAC) विकसित की।

सर्वावैक (CERVAVAC) की मुख्य विशेषताएं:

  • क्वाड्रिवेलेंट सुरक्षा: यह वैक्सीन HPV के चार सबसे खतरनाक स्ट्रेन्स (प्रकार 6, 11, 16 और 18) के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करती है।
  • लागत प्रभावी (Cost-Effective): स्वदेशी होने के कारण इसकी कीमत विदेशी वैक्सीन्स की तुलना में काफी कम है, जिससे सरकार के लिए इसे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme – UIP) में शामिल करना संभव हो पाया है।
  • उच्च प्रभावशीलता: क्लिनिकल ट्रायल्स में इसने लगभग 100% प्रभावकारिता (Efficacy) दिखाई है, जो सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ योनि और गुदा के कैंसर से भी बचाव करती है।

कैसे चलेगा यह राष्ट्रव्यापी महाभियान? (Campaign Rollout Plan)

चूंकि HPV टीकाकरण अभियान आज से, 14 साल की लड़कियों पर रहेगा फोकस, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर एक अभूतपूर्व माइक्रो-प्लानिंग (Micro-planning) की है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित रणनीति अपनाई जा रही है:

1. स्कूल-आधारित दृष्टिकोण (School-Based Approach)

अभियान का मुख्य केंद्र देश भर के सरकारी और निजी स्कूल होंगे। चूंकि 9-14 आयु वर्ग की अधिकांश लड़कियां स्कूलों में नामांकित होती हैं, इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें सीधे स्कूलों में जाकर टीकाकरण कैंप आयोजित कर रही हैं। इसके लिए स्कूल प्रशासन को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

2. यू-विन (U-WIN) पोर्टल द्वारा डिजिटल ट्रैकिंग

कोविड-19 के दौरान CoWIN पोर्टल की अपार सफलता के बाद, भारत सरकार ने नियमित टीकाकरण के लिए U-WIN पोर्टल लॉन्च किया है। इस अभियान के तहत दी जाने वाली हर एक डोज का डिजिटल रिकॉर्ड U-WIN पर रखा जाएगा। माता-पिता इस पोर्टल के माध्यम से अपनी बेटियों का रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं और टीकाकरण के बाद डिजिटल सर्टिफिकेट भी डाउनलोड कर सकते हैं।

3. ड्रॉप-आउट्स और गैर-स्कूली लड़कियों के लिए आउटरीच

जो लड़कियां किसी कारणवश स्कूल नहीं जाती हैं या ड्रॉप-आउट हो चुकी हैं, उन तक पहुंचने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (AWWs) और आशा (ASHA) वर्कर्स की मदद ली जा रही है। ऐसे मामलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।

4. माता-पिता की सहमति (Parental Consent)

चूंकि यह किशोरियों से जुड़ा मामला है, इसलिए टीकाकरण से पहले माता-पिता या अभिभावकों की लिखित सहमति (Informed Consent) अनिवार्य की गई है। इसके लिए स्कूलों द्वारा पिछले एक महीने से ‘पेरेंट-टीचर मीटिंग्स’ (PTM) के जरिए जागरूकता फैलाई जा रही थी।

भ्रांतियों को तोड़ना: वैक्सीन से जुड़े भ्रम और उनका वैज्ञानिक सच

किसी भी नए टीकाकरण अभियान के साथ कुछ भ्रांतियां (Myths) जुड़ जाना आम बात है। वैक्सीन हिचकिचाहट (Vaccine Hesitancy) से निपटने के लिए सरकार और चिकित्सा विशेषज्ञ लगातार तथ्यों के साथ सामने आ रहे हैं।

  • भ्रम: यह वैक्सीन लड़कियों में बांझपन (Infertility) का कारण बन सकती है।
    • सच्चाई: यह पूरी तरह से निराधार और वैज्ञानिक रूप से गलत है। WHO और दुनिया भर के प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों ने स्पष्ट किया है कि HPV वैक्सीन का प्रजनन क्षमता (Fertility) पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके विपरीत, यह कैंसर से बचाकर महिलाओं के स्वास्थ्य को सुरक्षित करती है।
  • भ्रम: वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स होते हैं।
    • सच्चाई: किसी भी अन्य वैक्सीन की तरह, इसमें भी इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन, या हल्का बुखार जैसे सामान्य और अस्थायी साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है और दुनिया भर में करोड़ों लड़कियों को सफलतापूर्वक दी जा चुकी है।
  • भ्रम: अगर परिवार में कैंसर का इतिहास नहीं है, तो वैक्सीन की जरूरत नहीं है।
    • सच्चाई: सर्वाइकल कैंसर आनुवांशिक (Genetic) से ज्यादा HPV संक्रमण के कारण होता है। इसलिए, हर लड़की को इस सुरक्षा चक्र की आवश्यकता है, चाहे उसका पारिवारिक इतिहास कुछ भी हो।
HPV टीकाकरण अभियान

WHO का ’90-70-90′ लक्ष्य और भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्वाइकल कैंसर को दुनिया से पूरी तरह खत्म (Eliminate) करने के लिए एक वैश्विक रणनीति बनाई है, जिसे ’90-70-90′ लक्ष्य कहा जाता है। इस लक्ष्य को 2030 तक हासिल किया जाना है:

  1. 90% लड़कियों का टीकाकरण: 15 वर्ष की आयु तक 90% लड़कियों को HPV वैक्सीन पूरी तरह से लग जानी चाहिए।
  2. 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग: 35 और 45 वर्ष की आयु तक 70% महिलाओं की उच्च-प्रदर्शन परीक्षण (High-performance test) के माध्यम से जांच होनी चाहिए।
  3. 90% महिलाओं का उपचार: जिन महिलाओं में सर्वाइकल बीमारी या कैंसर की पहचान होती है, उनमें से 90% का उचित उपचार होना चाहिए।

भारत का यह नया टीकाकरण अभियान सीधे तौर पर WHO के पहले लक्ष्य (90% टीकाकरण) को पूरा करने की दिशा में एक विशाल छलांग है। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के रूप में, भारत की सफलता वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर के खात्मे में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

एक सुरक्षित और स्वस्थ ‘नारी शक्ति’ की ओर बढ़ता कदम

आज का दिन भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए एक मील का पत्थर है। HPV टीकाकरण अभियान आज से, 14 साल की लड़कियों पर रहेगा फोकस, यह सिर्फ एक हेडलाइन नहीं है, बल्कि यह देश की आने वाली पीढ़ियों को एक भयानक और दर्दनाक बीमारी से बचाने का एक पुख्ता वादा है। सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे रोका जा सकता है (Preventable) और समय पर पता चलने पर इसका इलाज भी संभव है।

अब जिम्मेदारी समाज की है। माता-पिता, शिक्षकों, और समुदाय के नेताओं को आगे आकर इस अभियान का समर्थन करना चाहिए। अपनी बेटियों को यह संजीवनी टीका लगवाकर हम न केवल उनका जीवन सुरक्षित कर रहे हैं, बल्कि एक मजबूत और स्वस्थ राष्ट्र की नींव भी रख रहे हैं।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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