Trump admin says war in Iran

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और सैन्य तनाव (US-Iran Conflict) में एक नया और बेहद दिलचस्प कानूनी व राजनीतिक मोड़ आ गया है। वैश्विक राजनीति की नज़रें इस समय वाशिंगटन पर टिकी हैं क्योंकि हाल ही में यह खबर आई है कि Trump admin says war in Iran has been ‘terminated’ before 60-day deadline यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब 1973 के वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन (War Powers Resolution) के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से औपचारिक मंजूरी लेने की 60 दिन की समय सीमा समाप्त हो रही थी।

इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि ट्रम्प प्रशासन के इस बयान का असली मतलब क्या है, इसके पीछे के कानूनी दांव-पेंच क्या हैं, और ज़मीनी हकीकत पर इसका क्या असर हो रहा है।

क्या है 60 दिन की डेडलाइन और वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन?

इस विवाद को समझने के लिए अमेरिका के घरेलू कानून को समझना जरूरी है। अमेरिका में 1973 का वॉर पॉवर्स एक्ट (War Powers Act) राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को सीमित करने के लिए बनाया गया था। इसके तहत, यदि अमेरिकी सेना किसी विदेशी युद्ध या संघर्ष में शामिल होती है, तो राष्ट्रपति को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से आधिकारिक अनुमति (Congressional Approval) लेनी होती है। यदि कांग्रेस मंजूरी नहीं देती है, तो राष्ट्रपति को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ती है।

ईरान के साथ हालिया तनाव और सैन्य संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इस हिसाब से यह 60 दिन की डेडलाइन शुक्रवार (1 मई 2026) को समाप्त हो रही थी। लेकिन इस समय सीमा के खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प प्रशासन ने एक नया तर्क पेश किया है, जिसके अनुसार Trump admin says war in Iran has been ‘terminated’ before 60-day deadline

Trump admin says war in Iran

ट्रम्प प्रशासन का कानूनी तर्क

व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) का तर्क है कि 7 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच शुरू हुए सीजफायर (युद्धविराम) के कारण युद्ध पहले ही खत्म हो चुका है। अमेरिकी रक्षा सचिव (Defense Secretary) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने सीनेट के सामने गवाही देते हुए कहा कि सीजफायर ने प्रभावी रूप से युद्ध को रोक दिया है, और इस वजह से 60-दिन की घड़ी (60-day clock) अब रुक गई है या समाप्त हो गई है।

एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर पुष्टि की कि “28 फरवरी को शुरू हुई शत्रुता समाप्त हो गई है” क्योंकि दो सप्ताह के सीजफायर के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कोई गोलाबारी या सीधा सैन्य टकराव नहीं हुआ है। इसी तकनीकी आधार पर व्हाइट हाउस कांग्रेस की मंजूरी लेने की अनिवार्यता से बचना चाहता है।

ज़मीनी हकीकत: नाकेबंदी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट

भले ही प्रशासन के दावों के आधार पर आधिकारिक रूप से गोलीबारी रुक गई हो, लेकिन ज़मीनी और समुद्री हकीकत काफी जटिल है। भले ही Trump admin says war in Iran has been ‘terminated’ before 60-day deadline, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान का सख्त नियंत्रण और नाकेबंदी अभी भी जारी है।

इसके जवाब में, अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने भी एक मजबूत ब्लॉकड (Blockade) लगा रखा है ताकि ईरान के तेल टैंकर समुद्र से बाहर न निकल सकें। यह नाकेबंदी और तनावपूर्ण माहौल तकनीकी रूप से किसी शांतिपूर्ण स्थिति को नहीं दर्शाते, बल्कि यह एक प्रकार के “कोल्ड वॉर” या गंभीर गतिरोध का संकेत है। जब तक जलमार्ग पूरी तरह से नहीं खुल जाता, तब तक इसे पूर्ण शांति नहीं कहा जा सकता।

विशेषज्ञों और कांग्रेस के नेताओं की आलोचना

प्रशासन के इस कानूनी बचाव की कई राजनेताओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के कानूनी विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। मेन (Maine) राज्य की रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स (Susan Collins) ने प्रशासन के इस रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि, “वह डेडलाइन कोई सुझाव नहीं है; यह एक कानूनी आवश्यकता है।” उन्होंने एक ऐसे प्रस्ताव के पक्ष में भी मतदान किया जो ईरान में सैन्य कार्रवाई को समाप्त कर देगा क्योंकि कांग्रेस ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।

Trump admin says war in Iran

ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस (Brennan Center for Justice) की कानूनी विशेषज्ञ कैथरीन योन एब्राइट (Katherine Yon Ebright) ने इस कदम को “कानूनी चालबाजी का एक विशाल विस्तार” (sizeable extension of legal gamesmanship) बताया है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि वॉर पॉवर्स रेजोल्यूशन के डिज़ाइन में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह सुझाव देता हो कि सीजफायर के आधार पर 60-दिन की घड़ी को रोका या समाप्त किया जा सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान: “ईरान समझौता करने के लिए बेताब है”

इस पूरे विवाद के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का आत्मविश्वास से भरा नज़रिया सामने आया है। ट्रम्प ने हाल ही में ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि संघर्ष को अब एक ‘सैन्य अभियान’ (military operation) के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से पंगु बना दिया है—ईरान की नौसेना, वायुसेना और ड्रोन फैक्ट्रियां 80% से 90% तक नष्ट हो चुकी हैं।

ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था ढह रही है और ईरान तेल से कोई पैसा नहीं कमा पा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि “ईरान समझौता करने के लिए बेताब है” (Iran is dying to make a deal)। इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रम्प बिना किसी लंबे और आधिकारिक युद्ध में फंसे, कड़े आर्थिक और सीमित सैन्य दबाव के ज़रिए ईरान को एक नई न्यूक्लियर डील के लिए बातचीत की मेज पर लाना चाहते हैं।

ईरान की आंतरिक स्थिति और वैश्विक प्रभाव

युद्ध भले ही थमा हुआ बताया जा रहा हो, लेकिन ईरान के अंदर इसके परिणाम विनाशकारी रहे हैं। लगातार चार महीनों से इंटरनेट शटडाउन के कारण ईरान के ऑनलाइन व्यवसाय और डिजिटल अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो गई है। लाखों लोगों की नौकरियां चली गई हैं। वहीं दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारत जैसे तेल-आयात पर निर्भर देशों में महंगाई का संकट गहरा गया है।

हाल ही में दुनिया भर में मनाए गए ‘मई दिवस’ (May Day) की रैलियों में भी लाखों मज़दूरों ने शांति की अपील की है, क्योंकि मध्य पूर्व के इस युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतें और जीवन यापन की लागत (Cost of living) विश्व स्तर पर तेज़ी से बढ़ी है।

आगे का रास्ता क्या है?

कुछ पूर्व अमेरिकी अधिकारियों, जैसे रिचर्ड गोल्डबर्ग, ने सुझाव दिया है कि कांग्रेस की डेडलाइन से बचने के लिए अमेरिका एक नए ‘सेल्फ-डिफेंस ऑपरेशन’ (जैसे ‘Epic Passage’) की घोषणा कर सकता है, जिसका उद्देश्य सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना होगा।

निष्कर्ष के तौर पर, यह खबर कि Trump admin says war in Iran has been ‘terminated’ before 60-day deadline, मुख्य रूप से एक कानूनी रणनीति है ताकि घरेलू राजनीति और कांग्रेस की बाधाओं से बचा जा सके। यद्यपि सीजफायर लागू है और गोलाबारी रुकी हुई है, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव अभी भी चरम पर है। जब तक तेल मार्गों की नाकेबंदी खत्म नहीं होती और दोनों देशों के बीच एक ठोस समझौता नहीं होता, तब तक विश्व अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के बादल मंडराते रहेंगे। आने वाले कुछ सप्ताह अमेरिकी घरेलू राजनीति और वैश्विक कूटनीति, दोनों के लिए निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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