पश्चिम बंगाल की राजनीति में मई 2026 का महीना एक युगांतरकारी बदलाव का गवाह बना है। नबन्ना (Nabanna) के गलियारों से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, शासन व्यवस्था की नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नवगठित सरकार ने अपने काम-काज की रफ्तार को दोगुना कर दिया है। इसी कड़ी में, 18 मई 2026 को हुई सरकार की दूसरी महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में कई ऐसे लोक-लुभावन और कड़े फैसले लिए गए हैं, जो बंगाल के भविष्य की नई इबारत लिखेंगे।
कैबिनेट बैठक के बाद महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने एक व्यापक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के संकल्पों को जनता के सामने रखा। इस बैठक में लिए गए Suvendu Adhikari Cabinet Decisions मुख्य रूप से महिला सशक्तिकरण, राज्य सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर केंद्रित रहे। इन फैसलों में जहां महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद और मुफ्त यात्रा का तोहफा दिया गया है, वहीं वर्षों से लंबित 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) को भी हरी झंडी दिखा दी गई है।
आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि शुभेंदु कैबिनेट की इस दूसरी बैठक में कौन से 5 बड़े फैसले लिए गए हैं और इनका आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है।

1. ‘लक्ष्मी भंडार’ की जगह ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ को मंजूरी
शुभेंदु सरकार का सबसे पहला और बड़ा मास्टरस्ट्रोक महिलाओं को दी जाने वाली मासिक वित्तीय सहायता से जुड़ा है। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को अब नए रूप और बढ़ी हुई राशि के साथ ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ में बदल दिया गया है।
- ₹3,000 की मासिक सहायता: इस योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं को अब हर महीने ₹3,000 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में (DBT के माध्यम से) ट्रांसफर की जाएगी। यह राशि पहले दी जाने वाली सहायता से काफी अधिक है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में बड़ी मदद मिलेगी।
- लागू होने की तिथि: यह योजना 1 जून 2026 से पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी।
- पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया: मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने स्पष्ट किया कि जो महिलाएं पहले से लक्ष्मी भंडार का लाभ ले रही थीं, उन्हें स्वचालित रूप से ‘अन्नपूर्णा भंडार’ का लाभ मिलने लगेगा। इसके अलावा, जिन पात्र महिलाओं को अब तक यह लाभ नहीं मिल पाया था, उनके लिए सरकार जल्द ही एक नया समर्पित पोर्टल खोलने जा रही है, जहां वे आसानी से आवेदन कर सकेंगी।
- CAA आवेदकों को भी लाभ: इस फैसले में एक और महत्वपूर्ण मानवीय और रणनीतिक बिंदु जोड़ा गया है। जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदन किया है और जिनके मामले फिलहाल ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, उन परिवारों की महिलाओं को भी अन्नपूर्णा भंडार योजना का पूरा लाभ दिया जाएगा।
2. महिलाओं के लिए सरकारी बसों में ‘फ्री बस राइड’
महिलाओं के जीवन को सुगम बनाने और उनके यात्रा खर्च को कम करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने एक और बड़ा जनहितैषी निर्णय लिया है।
1 जून 2026 से पश्चिम बंगाल की सभी सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा (Free Bus Travel) की सुविधा शुरू होने जा रही है। दिल्ली और कर्नाटक जैसी सरकारों की तर्ज पर उठाया गया यह कदम बंगाल की कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और दैनिक यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत साबित होगा। इस योजना से न केवल महिलाओं की गतिशीलता (Mobility) बढ़ेगी, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी अधिक बचत कर सकेंगी।
3. 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन को हरी झंडी
पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी पिछले कई वर्षों से केंद्रीय तर्ज पर डीए (महंगाई भत्ता) और 7वें वेतन आयोग को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत थे। नई सरकार ने उनकी इस पुरानी और जायज मांग को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।
इस Suvendu Adhikari Cabinet Decisions के तहत राज्य में 7वें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। इस आयोग के गठन से राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान, भत्तों और अन्य लाभों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें केंद्रीय कर्मचारियों के समकक्ष लाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस फैसले से राज्य के सरकारी कर्मचारियों में भारी उत्साह का माहौल है, क्योंकि यह उनके आर्थिक हितों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।
4. धर्म आधारित सहायता योजनाएं होंगी पूरी तरह बंद
प्रशासनिक स्तर पर सेक्युलरिज्म और समानता को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने एक बेहद कड़ा और साहसिक फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग के तहत चल रही वैसी वित्तीय सहायता योजनाएं, जो केवल धर्म के आधार पर भेदभाव करती हैं या किसी एक विशेष वर्ग को लक्षित करती हैं, उन्हें बंद किया जाएगा।
इसके तहत मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के माध्यम से संचालित होने वाली सभी धर्म-आधारित सहायता योजनाओं को अगले महीने (जून 2026) से पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि सरकारी खजाने और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर सभी नागरिकों का समान अधिकार होना चाहिए, न कि धर्म के आधार पर किसी को विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
5. धार्मिक परियोजनाओं से जुड़े कामों पर रोक
इसी वैचारिक नीति को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने पांचवां बड़ा फैसला धार्मिक गतिविधियों से जुड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को लेकर किया है।
कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया गया कि विभिन्न विभागों द्वारा वित्तपोषित धार्मिक गतिविधियों या परियोजनाओं से जुड़े जो भी काम वर्तमान में चल रहे हैं, वे केवल इस महीने (मई 2026) के अंत तक ही जारी रहेंगे। 1 जून 2026 से ऐसे सभी धार्मिक प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा। सरकार भविष्य में अपना पूरा ध्यान और वित्तीय संसाधन केवल ढांचागत विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और शुद्ध लोक कल्याणकारी योजनाओं पर ही केंद्रित करेगी।
एक नजर में: शुभेंदु कैबिनेट के 5 बड़े फैसले
| फैसला संख्या | योजना/निर्णय का नाम | मुख्य लाभ / प्रभाव | लागू होने की तिथि |
| 1 | अन्नपूर्णा भंडार योजना | महिलाओं को ₹3,000 प्रति माह आर्थिक मदद (CAA आवेदकों को भी शामिल किया गया)। | 1 जून 2026 |
| 2 | मुफ्त बस यात्रा | राज्य की सभी सरकारी बसों में महिलाओं का सफर बिल्कुल मुफ्त होगा। | 1 जून 2026 |
| 3 | 7वां वेतन आयोग | राज्य कर्मचारियों के लिए आयोग का गठन, वेतन और भत्तों में होगी भारी बढ़ोतरी। | तत्काल प्रभावी |
| 4 | धर्म आधारित योजनाएं बंद | मदरसा और सांस्कृतिक विभाग की मजहब-आधारित वित्तीय सहायता पर रोक। | अगले महीने से |
| 5 | धार्मिक प्रोजेक्ट्स पर रोक | सरकारी खर्च पर होने वाले धार्मिक गतिविधियों से जुड़े कार्यों को बंद किया जाएगा। | 1 जून 2026 |
राजनीतिक विश्लेषण: क्या हैं इन फैसलों के मायने?
अगर हम एक विश्लेषक के नजरिए से देखें, तो ये Suvendu Adhikari Cabinet Decisions केवल सामान्य प्रशासनिक आदेश नहीं हैं, बल्कि यह बंगाल की राजनीति में एक गहरी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ (Social Engineering) का हिस्सा हैं।
ममता बनर्जी सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना महिलाओं के बीच बेहद लोकप्रिय थी। शुभेंदु सरकार ने उसे बंद करने के बजाय, उसकी राशि को बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया और उसका नाम ‘अन्नपूर्णा भंडार’ रख दिया। यह सीधे तौर पर आधी आबादी के बीच अपनी पैठ को और मजबूत करने का एक जबरदस्त प्रयास हैटन।
इसके अलावा, 7वें वेतन आयोग को लागू करना मध्यमवर्ग और नौकरीपेशा समाज को साधने का एक बड़ा जरिया है, जो लंबे समय से पिछली सरकार की आर्थिक नीतियों से नाराज चल रहा था। वहीं, धर्म-आधारित योजनाओं को बंद करना और CAA आवेदकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना, नए शासन के वैचारिक एजेंडे और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को धरातल पर उतारने की कोशिश है।
विकास और बदलाव की नई राह पर बंगाल
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की दूसरी कैबिनेट बैठक के फैसले यह साफ संकेत देते हैं कि बंगाल में अब शासन की शैली पूरी तरह बदलने वाली है। तुष्टिकरण की राजनीति को दरकिनार कर विकास, पारदर्शी गवर्नेंस और सीधे जनता तक लाभ पहुंचाने वाली (Direct Benefit Transfer) योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
महिलाओं को ₹3,000 की मदद, फ्री बस सफर और कर्मचारियों को वेतन आयोग का तोहफा देकर सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही जनता का भरोसा जीतने का एक बड़ा दांव खेला है। अब देखना यह होगा कि इन विशाल योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सरकार वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन किस प्रकार करती है और आने वाले दिनों में इन फैसलों का बंगाल की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।
FAQ – शुभेंदु कैबिनेट फैसलों से जुड़े आम सवाल
अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ पाने के लिए क्या करना होगा?
जो महिलाएं पहले से ही लक्ष्मी भंडार योजना का लाभ उठा रही थीं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है; उन्हें यह लाभ अपने आप मिलने लगेगा। अन्य पात्र महिलाओं के लिए सरकार जल्द ही एक नया ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करेगी।
महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा किन बसों में मान्य होगी?
यह सेवा केवल पश्चिम बंगाल सरकार के अधीन चलने वाली सभी सरकारी (Government) बसों में ही मान्य होगी। प्राइवेट बसों में यह नियम लागू नहीं होगा।
क्या 7वें वेतन आयोग के गठन से पेंशनभोगियों को भी फायदा होगा?
जी हाँ, 7वें वेतन आयोग के दायरे में राज्य के मौजूदा कर्मचारियों के साथ-साथ सभी सेवानिवृत्त पेंशनभोगी भी आएंगे, जिससे उनकी पेंशन राशि में सम्मानजनक वृद्धि होगी।

भावेश Tez Khabri के सह-संस्थापक और प्रबंध संपादक हैं। अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज में पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं। भावेश जी मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम और शिक्षा से जुड़ी खबरों का नेतृत्व करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हर खबर पूरी तरह से सत्यापित (Verified) हो।
