राजनीतिक सरगर्मी के बीच एक ‘पॉज’ और स्वास्थ्य की चिंता
भारतीय राजनीति, विशेषकर महाराष्ट्र की राजनीति, एक ऐसा अखाड़ा है जहाँ एक दिन का भी विश्राम राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। इस अखाड़े के सबसे अनुभवी, चतुर और अजेय योद्धाओं में से एक माने जाते हैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar)। आज, यानी 22 फरवरी 2026 को, देश और राज्य के राजनीतिक हलकों में उस समय बेचैनी फैल गई जब यह खबर आई कि 85 वर्षीय दिग्गज नेता को अचानक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
प्रारंभिक रिपोर्टों ने समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी, लेकिन जल्द ही जारी किए गए मेडिकल बुलेटिन ने स्पष्ट किया कि उन्हें डिहाइड्रेशन (Dehydration – निर्जलीकरण) और अत्यधिक थकान के कारण भर्ती कराया गया है, और राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर (Stable) है।
एक राजनीतिक और स्वास्थ्य विश्लेषक के रूप में, मैं इस घटना को केवल एक ‘मेडिकल अपडेट’ के रूप में नहीं देखता। जब शरद पवार जैसे कद का कोई नेता, जो एक पूरे गठबंधन (महा विकास अघाड़ी) की धुरी है, अस्पताल के बिस्तर पर होता है, तो इसके राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक निहितार्थ बहुत गहरे होते हैं।
1. अस्पताल में भर्ती होने का घटनाक्रम: आखिर क्या हुआ? (The Timeline)
शरद पवार का दैनिक कार्यक्रम किसी भी युवा राजनेता को थका देने वाला होता है। लगातार बैठकें, जनसभाएं, राज्य भर के दौरे और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं।
- लक्षण और अस्पताल ले जाना: पिछले कुछ दिनों से लगातार यात्राओं और महाराष्ट्र के बदलते मौसम (बढ़ती गर्मी और शुष्कता) के कारण उन्हें कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत हुई। उनके निजी चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें एहतियात के तौर पर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल (Breach Candy Hospital) या समकक्ष शीर्ष चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराया गया।
- मेडिकल बुलेटिन (Medical Bulletin): डॉक्टरों की टीम द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बुलेटिन में स्पष्ट किया गया है कि चिंता की कोई गंभीर बात नहीं है। शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes) की कमी के कारण उन्हें इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड्स दिए जा रहे हैं। उनके सभी वाइटल पैरामीटर्स (Blood Pressure, Heart Rate, Oxygen levels) सामान्य हैं।
- परिवार और पार्टी का बयान: उनकी बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अस्पताल के बाहर भीड़ न लगाएं और पवार साहब को आराम करने दें। उन्होंने पुष्टि की है कि पवार साहब जल्द ही स्वस्थ होकर मैदान में लौटेंगे।
2. चिकित्सा विज्ञान: वरिष्ठ नागरिकों में डिहाइड्रेशन का खतरा (The Science of Dehydration in the Elderly)

यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि डिहाइड्रेशन जिसे युवा लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, वह 80 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने का कारण क्यों बन जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ मानव शरीर की शारीरिक रचना (Physiology) में कई बदलाव आते हैं:
- प्यास लगने की भावना में कमी (Decreased Thirst Mechanism): उम्र के साथ, मस्तिष्क का वह हिस्सा (Hypothalamus) जो प्यास के संकेत भेजता है, कमजोर हो जाता है। इसका मतलब है कि शरद पवार जैसे वरिष्ठ नागरिकों के शरीर को पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें ‘प्यास’ का अनुभव नहीं होता, जिससे वे पर्याप्त पानी नहीं पीते।
- गुर्दे की कार्यक्षमता (Renal Function): उम्र के साथ किडनी की पानी को रोके रखने (Conserve) की क्षमता कम हो जाती है, जिससे यूरिन के जरिए अधिक पानी शरीर से बाहर निकल जाता है।
- दवाओं का प्रभाव (Medication Side-effects): पवार साहब अपनी उम्र के लिहाज से कई नियमित दवाएं (जैसे ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी) लेते होंगे। कई दवाएं ‘मूत्रवर्धक’ (Diuretics) होती हैं, जो डिहाइड्रेशन के खतरे को बढ़ा देती हैं।
- कैंसर सर्वाइवर (Cancer Survivor): यह भी याद रखना चाहिए कि शरद पवार ओरल कैंसर (Oral Cancer) के सर्वाइवर हैं। उन्होंने कई सर्जरी और रेडिएशन झेला है, जो शरीर की समग्र सहनशक्ति (Endurance) को प्रभावित करता है।
कड़ी धूप में रैलियां करना और लगातार बोलना शरीर से नमी छीन लेता है, जिसे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन (Electrolyte Imbalance) कहा जाता है। यही कारण है कि उन्हें तुरंत अस्पताल में आईवी (IV) ड्रिप की आवश्यकता पड़ी।
3. उम्र बनाम इच्छाशक्ति: शरद पवार की अथक राजनीतिक शैली
भारतीय राजनीति में शरद पवार को ‘चाणक्य’ (Chanakya) कहा जाता है। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी शारीरिक बीमारियों पर उनकी मानसिक इच्छाशक्ति (Willpower) की जीत है।
- बारिश में वह ऐतिहासिक भाषण: 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान सतारा (Satara) में भारी बारिश के बीच भीगते हुए उनका भाषण आज भी राजनीतिक इतिहास में एक आइकॉनिक पल माना जाता है। उस एक भाषण ने चुनाव का रुख बदल दिया था।
- अथक यात्राएं: 85 वर्ष की आयु में, जब अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर आराम का जीवन जीते हैं, शरद पवार हेलीकॉप्टर, कार और वाणिज्यिक उड़ानों से पूरे महाराष्ट्र का दौरा करते हैं। वे सुबह 6 बजे से अपनी बैठकें शुरू करते हैं और देर रात तक कार्यकर्ताओं से मिलते हैं।
- अजित पवार की बगावत के बाद की सक्रियता: जब उनके भतीजे अजित पवार ने पार्टी को विभाजित किया (NCP vs NCP-SP) और चुनाव चिह्न छीन लिया, तो शरद पवार टूटे नहीं। उन्होंने अपनी पार्टी को शून्य से फिर से खड़ा करने के लिए अपनी यात्राएं और जनसंपर्क दोगुना कर दिया। यह अत्यधिक शारीरिक श्रम ही उनके वर्तमान डिहाइड्रेशन का प्राथमिक कारण है।
4. महाराष्ट्र की राजनीति पर प्रभाव: महा विकास अघाड़ी (MVA) की धुरी
शरद पवार केवल एक पार्टी के नेता नहीं हैं; वे महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (MVA) — जिसमें शिवसेना (UBT), कांग्रेस और NCP (SP) शामिल हैं — के आर्किटेक्ट और ‘गोंद’ (Glue) हैं जो इस बेमेल गठबंधन को एक साथ साधे हुए हैं।
उनके अस्पताल में रहने का राजनीतिक असर क्या होगा?
A. सीट-बंटवारे और रणनीतिक बैठकों पर रोक: गठबंधन की राजनीति में बैठकों का दौर कभी खत्म नहीं होता। उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व के बीच जब भी किसी सीट या नीति को लेकर गतिरोध (Deadlock) होता है, तो मध्यस्थता के लिए अंतिम दरवाजा ‘सिल्वर ओक’ (शरद पवार का निवास) ही होता है। उनके कुछ दिनों के लिए अस्पताल में होने से महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय और वार्ताएं अस्थायी रूप से रुक सकती हैं।

B. विरोधियों का मनोवैज्ञानिक दबाव: सत्तारूढ़ महायुति (Mahayuti) गठबंधन (भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी) इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। हालांकि राजनीतिक शिष्टाचार के नाते सभी ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है, लेकिन पर्दे के पीछे विरोधी खेमा यह मान सकता है कि पवार साहब की शारीरिक अनुपस्थिति MVA के चुनाव प्रचार को धीमा कर देगी।
C. सहानुभूति की लहर (Sympathy Wave): राजनीति में बीमारी अक्सर एक मजबूत भावनात्मक हथियार बन जाती है। जब महाराष्ट्र के ग्रामीण मतदाता (विशेषकर पश्चिमी महाराष्ट्र के किसान) अपने 85 वर्षीय नेता को अस्पताल के बिस्तर पर देखते हैं, तो उनके प्रति सहानुभूति और मजबूत होती है। अजित पवार गुट के लिए यह एक नुकसानदेह स्थिति हो सकती है, क्योंकि मराठी मानुष (Marathi Manoos) में ‘पवार साहब’ के प्रति एक गहरा आदर है।
5. एनसीपी (SP) के भीतर उत्तराधिकार और जिम्मेदारी का हस्तांतरण
शरद पवार की यह बीमारी उनकी पार्टी के भीतर ‘उत्तराधिकार योजना’ (Succession Planning) की तत्काल आवश्यकता को एक बार फिर से रेखांकित करती है।
अजित पवार के जाने के बाद, पार्टी का पूरा दारोमदार मुख्य रूप से दो कंधों पर है:
- सुप्रिया सुले (Supriya Sule): वे राष्ट्रीय राजनीति, संसदीय कार्य और पार्टी की वैचारिक लाइन को संभाल रही हैं। पवार साहब की अनुपस्थिति में, उन्हें पार्टी अध्यक्ष के रूप में अधिक मुखर (Vocal) भूमिका निभानी होगी। उन्हें यह साबित करना होगा कि वे केवल दिल्ली की नेता नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र की जमीनी राजनीति भी संभाल सकती हैं।
- जयंत पाटिल (Jayant Patil) और रोहित पवार (Rohit Pawar): जयंत पाटिल राज्य संगठन को संभाल रहे हैं, जबकि युवा विधायक रोहित पवार (शरद पवार के पोते) युवा वोटरों को आकर्षित कर रहे हैं।
अस्पताल में भर्ती होने की यह घटना इन ‘सेकंड-लाइन’ (Second-line) नेताओं के लिए एक ‘फायर टेस्ट’ (Fire Test) है कि वे पवार साहब के सीधे निर्देश के बिना पार्टी के काडर को कैसे एकजुट रखते हैं।
6. भारतीय राजनीति और उम्र की बहस (The Age Factor in Indian Politics)
शरद पवार का डिहाइड्रेशन एक व्यापक समाजशास्त्रीय और राजनीतिक बहस को भी जन्म देता है—क्या भारतीय राजनेताओं के लिए सेवानिवृत्ति (Retirement) की कोई उम्र होनी चाहिए?
- वैश्विक परिदृश्य देखें तो अमेरिका में जो बाइडेन (Joe Biden) की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भारी बहस छिड़ी रही है।
- भारतीय राजनीति का स्वरूप ‘व्यक्ति-केंद्रित’ (Personality-driven) है। यहाँ नेता का मतलब ही पार्टी होता है। कांग्रेस के लिए जो महत्व गांधी परिवार का है, वही एनसीपी के लिए शरद पवार का है।
- शरीर भले ही कमजोर हो जाए, लेकिन भारतीय मतदाता नेता के ‘अनुभव’ और ‘करिश्मे’ को वोट देते हैं। पवार का राजनीतिक मस्तिष्क आज भी कई युवा राजनेताओं से अधिक तेज और रणनीतिक रूप से उन्नत माना जाता है।
- फिर भी, यह घटना इस बात की चेतावनी है कि नेताओं को अपने स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं करना चाहिए और एक ‘डेलिगेशन’ (Delegation of power) मॉडल अपनाना चाहिए।

7. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: शिष्टाचार और कूटनीति
भारत की राजनीतिक संस्कृति की एक अच्छी बात यह है कि स्वास्थ्य आपातकाल के समय राजनीतिक कटुता भुला दी जाती है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अतीत में शरद पवार को अपना ‘राजनीतिक गुरु’ बताया है (भले ही आज दोनों धुर विरोधी हैं)। यह स्वाभाविक है कि पीएम कार्यालय ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली होगी।
- उद्धव ठाकरे और संजय राउत के लिए यह खबर चिंताजनक थी, क्योंकि वे पवार को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
- सबसे दिलचस्प प्रतिक्रिया अजित पवार (Ajit Pawar) गुट की होती है। राजनीतिक रूप से अलग होने के बावजूद, पारिवारिक रिश्ते बने हुए हैं। अजित पवार या उनके गुट के नेताओं का अस्पताल जाना या बयान देना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहता है।
8. अस्पताल से ‘वर्चुअल’ कमान: आगे की राह
डॉक्टरों के अनुसार, शरद पवार की हालत स्थिर है और उन्हें केवल रिहाइड्रेशन (Rehydration) और आराम की आवश्यकता है। कुछ ही दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी (Discharge) मिल जाने की उम्मीद है।
लेकिन क्या शरद पवार आराम करेंगे? उनका इतिहास बताता है कि वे ऐसा नहीं करेंगे।
- अस्पताल से निर्देश: ऐसा माना जाता है कि अपने अस्पताल के कमरे से भी वे फोन कॉल के जरिए अपनी पार्टी के प्रमुख नेताओं को निर्देश दे रहे होंगे।
- वर्चुअल रैलियां: आने वाले कुछ हफ्तों के लिए, डॉक्टर उन्हें धूप में निकलने या हवाई यात्रा करने से रोक सकते हैं। ऐसे में पवार तकनीक का सहारा लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।
- रणनीतिक बदलाव: यह घटना MVA को अपने चुनाव प्रचार की रणनीति बदलने पर मजबूर कर सकती है। अब सारा बोझ पवार साहब पर डालने के बजाय, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं को महाराष्ट्र के उन क्षेत्रों में अधिक मेहनत करनी होगी जहाँ एनसीपी (SP) का प्रभाव है।
एक अदम्य योद्धा का ‘पिट स्टॉप’
22 फरवरी 2026 की यह घटना—शरद पवार का डिहाइड्रेशन के कारण अस्पताल में भर्ती होना—महाराष्ट्र की राजनीति में कोई स्थायी विराम नहीं है; यह फॉर्मूला 1 रेस के बीच में एक ‘पिट स्टॉप’ (Pit Stop) की तरह है।
85 वर्ष की आयु में, शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं, और प्रकृति अक्सर अपनी मांगें मनवा लेती है। लेकिन शरद पवार ने बार-बार यह साबित किया है कि उनका राजनीतिक कौशल उनके भौतिक शरीर की सीमाओं से बहुत आगे है। अस्पताल में स्थिर हालत की खबर ने न केवल उनके समर्थकों को राहत दी है, बल्कि पूरे विपक्ष को यह आश्वासन भी दिया है कि उनका ‘कमांडर-इन-चीफ’ जल्द ही वापस मैदान में होगा।
महाराष्ट्र का राजनीतिक भविष्य अभी कई करवटें लेगा, और यह तय है कि इस भविष्य की पटकथा लिखने वाले प्रमुख हाथों में से एक हाथ शरद पवार का ही होगा। फिलहाल, राजनीति से ऊपर उठकर, देश भर के नागरिक एक वरिष्ठ और सम्मानित राजनेता के शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
