Budget Session 2026

नई दिल्ली के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में आज सुबह से ही गहमागहमी तेज है। रायसीना हिल्स पर हलचल सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक है। इसका मुख्य कारण राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक है, जिसने देश के आर्थिक विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों के कान खड़े कर दिए हैं। 15 जनवरी 2026 की यह तारीख शायद भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद की जाएगी। संसद के आगामी Budget Session 2026 से ठीक पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री के बीच हुई इस मैराथन बैठक ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि सरकार इस बार केवल बही-खाता पेश करने नहीं जा रही है, बल्कि कुछ ऐसे क्रांतिकारी कदम उठाने की तैयारी में है जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की नींव को और गहरा करेंगे।

आमतौर पर बजट से पहले राष्ट्रपति के साथ बैठकें शिष्टाचार या औपचारिक briefing तक सीमित होती हैं। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आज की बैठक का एजेंडा केवल औपचारिकता नहीं था। इसमें देश के दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप और कुछ कड़े संरचनात्मक सुधारों पर राष्ट्रपति का मार्गदर्शन और सहमति ली गई है। क्या भारत “बिग बैंग रिफॉर्म्स” (Big Bang Reforms) के दूसरे चरण में प्रवेश करने वाला है? क्या यह बजट मध्यम वर्ग, किसानों और उद्योग जगत के लिए नियमों को पूरी तरह बदल देगा?

1. राष्ट्रपति मुर्मू की बैठक: परंपरा या बड़ा संकेत?

भारतीय लोकतंत्र में राष्ट्रपति का पद केवल रबर स्टैम्प नहीं है, विशेषकर तब जब सरकार को कोई ऐसा निर्णय लेना हो जो संवैधानिक ढांचे या देश की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर व्यापक प्रभाव डालता हो। संसद का सत्र राष्ट्रपति के अभिभाषण से शुरू होता है, जो सरकार की नीतियों का दस्तावेज होता है। लेकिन Budget Session 2026 से पहले प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का राष्ट्रपति के साथ घंटों मंत्रणा करना यह दर्शाता है कि सरकार इस सत्र में कुछ ऐसे विधेयक या नीतियां ला सकती है जिसके लिए राष्ट्रपति के पूर्ण विश्वास और समर्थन की आवश्यकता पहले दिन से होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के आर्थिक प्रभावों, समान नागरिक संहिता के वित्तीय पहलुओं और लेबर कोड (Labor Codes) के पूर्ण कार्यान्वयन जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो सकती है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जब ये सुधार संसद के पटल पर रखे जाएं, तो राष्ट्रपति भवन और सरकार के बीच पूर्ण समन्वय हो। यह बैठक इस बात का भी संकेत है कि आने वाला बजट लोकलुभावन होने के बजाय “यथार्थवादी और सुधारवादी” होगा।

2. 2026 का आर्थिक परिदृश्य: भारत कहां खड़ा है?

इस बजट के महत्व को समझने के लिए हमें 2026 के आर्थिक कैनवास को देखना होगा। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के बेहद करीब है (या उसे छू रहा है)। वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच भारत ‘ग्लोबल साउथ’ का इंजन बना हुआ है। लेकिन, अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग चेतावनी दे रहा है कि यदि भारत ने अब अपने विनिर्माण (Manufacturing) और कृषि क्षेत्र में Economic Reforms की गति नहीं बढ़ाई, तो हम ‘मिडिल इनकम ट्रैप’ (Middle Income Trap) में फंस सकते हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती और पश्चिमी देशों में मंदी ने भारत के लिए एक अवसर की खिड़की खोल दी है। सरकार जानती है कि यह समय ‘धीरे चलो’ की नीति का नहीं, बल्कि ‘लंबी छलांग’ लगाने का है। इसलिए, Budget Session 2026 को एक लॉन्चपैड के रूप में देखा जा रहा है जो भारत को अगली औद्योगिक क्रांति में अग्रणी बनाएगा। महंगाई नियंत्रण में है, विदेशी मुद्रा भंडार भरा हुआ है, और कर संग्रह रिकॉर्ड स्तर पर है—यह किसी भी सरकार के लिए कड़े फैसले लेने का सबसे उपयुक्त समय है।

Budget Session 2026

3. ‘बड़े आर्थिक सुधार’: क्या उम्मीद कर सकता है देश?

जब हम Budget Session 2026 में बड़े सुधारों की बात करते हैं, तो इसका दायरा बहुत विस्तृत है। आइए उन प्रमुख क्षेत्रों का विश्लेषण करें जहां सरकार बड़े धमाके कर सकती है।

क. प्रत्यक्ष कर संहिता (Direct Tax Code – DTC) का नया अवतार

दशकों पुराने आयकर अधिनियम 1961 को बदलने की चर्चा कई सालों से चल रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बजट में सरकार ‘प्रत्यक्ष कर संहिता’ का एक नया और सरल रूप पेश कर सकती है।

  • उद्देश्य: कर अनुपालन (Tax Compliance) को आसान बनाना और मुकदमों को कम करना।
  • मध्यम वर्ग के लिए: क्या टैक्स स्लैब की संख्या कम की जाएगी? क्या 10 लाख तक की आय को कर-मुक्त किया जा सकता है? सरकार का फोकस अब ‘कटौतियों’ (Deductions) वाली पुरानी व्यवस्था को खत्म कर एक फ्लैट और कम टैक्स दर वाली व्यवस्था को अनिवार्य बनाने पर हो सकता है।
  • कॉरपोरेट टैक्स: वैश्विक न्यूनतम कर (Global Minimum Tax) के मानकों को अपनाते हुए कॉरपोरेट टैक्स को तर्कसंगत बनाया जा सकता है ताकि विदेशी निवेश आकर्षित हो सके।

ख. कृषि क्षेत्र: सब्सिडी से निवेश की ओर

भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन कृषि अभी भी मानसून और सब्सिडी पर निर्भर है। राष्ट्रपति मुर्मू, जो स्वयं ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं, के साथ बैठक में कृषि सुधारों पर निश्चित रूप से चर्चा हुई होगी।

  • स्मार्ट फार्मिंग: सरकार एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी देने के बजाय, ‘इनकम सपोर्ट’ (जैसे पीएम किसान सम्मान निधि) की राशि को दोगुना कर सकती है और उसे सीधे उत्पादकता से जोड़ सकती है।
  • एग्री-टेक: ड्रोन दीदी योजना की सफलता के बाद, कृषि में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग के लिए एक विशाल फंड की घोषणा हो सकती है।
  • खाद सब्सिडी में सुधार: रासायनिक खादों पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी को कम करके उसे जैविक और नैनो-फर्टिलाइजर्स की ओर मोड़ा जा सकता है। यह एक कड़ा फैसला होगा जिसका राजनीतिक विरोध संभव है, लेकिन मिट्टी की सेहत और राजकोषीय घाटे के लिए यह अनिवार्य है।

ग. विनिवेश और निजीकरण 2.0

“सरकार का काम बिजनेस करना नहीं है”—प्रधानमंत्री का यह मंत्र 2026 में अपने चरम पर पहुंच सकता है। Budget Session 2026 में उन सरकारी बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण की अंतिम सूची जारी हो सकती है जो रणनीतिक क्षेत्र (Strategic Sector) में नहीं आते।

  • पीएसयू (PSU) की जमीन का मुद्रीकरण: बंद पड़ी सरकारी कंपनियों और रेलवे की अतिरिक्त जमीन का उपयोग बुनियादी ढांचे के विकास के लिए करने हेतु एक नई नीति या प्राधिकरण की घोषणा की जा सकती है। इससे सरकार को बिना टैक्स बढ़ाए हजारों करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

4. विनिर्माण और पीएलआई (PLI): चीन का विकल्प बनना

सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने अच्छे परिणाम दिए हैं, लेकिन अभी भी हम चीन के विनिर्माण पैमाने से पीछे हैं। इस बजट में ‘पीएलआई स्कीम’ (Production Linked Incentive) का विस्तार उन क्षेत्रों में किया जा सकता है जहां रोजगार की संभावनाएं सबसे अधिक हैं, जैसे—चमड़ा उद्योग, खिलौना निर्माण और वस्त्र उद्योग।

सेमीकंडक्टर मिशन: भारत सेमीकंडक्टर का हब बनने की राह पर है। गुजरात और असम में प्लांट्स लगने शुरू हो गए हैं। इस बजट में सेमीकंडक्टर रिसर्च और डिजाइन के लिए विशेष आवंटन किया जा सकता है। सरकार चाहती है कि 2030 तक दुनिया की हर तीसरी चिप भारत में डिजाइन या निर्मित हो। राष्ट्रपति के साथ बैठक में इस रणनीतिक क्षेत्र की सुरक्षा और भू-राजनीतिक महत्व पर भी चर्चा होने की संभावना है।

5. लेबर कोड्स का कार्यान्वयन: कड़वी गोली?

संसद ने चार लेबर कोड्स (श्रम संहिता) पारित कर दिए हैं, लेकिन राज्यों की सहमति और राजनीतिक कारणों से इन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। 2026 का बजट सत्र वह समय हो सकता है जब सरकार इन्हें लागू करने की समय सीमा घोषित कर दे।

  • फायदा: इससे कंपनियों के लिए भारत में बिजनेस करना आसान होगा। ‘हायर एंड फायर’ की नीतियां लचीली होंगी।
  • चुनौती: यूनियनों का विरोध। सरकार गिग वर्कर्स (जैसे जोमैटो, उबर ड्राइवर्स) के लिए सामाजिक सुरक्षा का एक बड़ा पैकेज घोषित करके इस विरोध को कम करने की कोशिश कर सकती है। यह भारत के श्रम बाजार का सबसे बड़ा सुधार होगा।

6. डिजिटल इंडिया और एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर

2026 में ‘डेटा’ नया तेल नहीं, बल्कि नई हवा बन चुका है। भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है—आधार, यूपीआई और ओएनडीसी।

Budget Session 2026
  • सॉवरेन एआई (Sovereign AI): सरकार अपना खुद का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल विकसित करने के लिए बजट में भारी निवेश की घोषणा कर सकती है। हम एआई के लिए गूगल या ओपनएआई पर निर्भर नहीं रहना चाहते।
  • डिजिटल करेंसी: आरबीआई के ई-रुपये (e-Rupee) को अब पायलट प्रोजेक्ट से निकालकर मुख्यधारा में लाने के लिए प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं।
  • साइबर सुरक्षा: जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था डिजिटल हो रही है, साइबर खतरे बढ़ रहे हैं। रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा अब ‘साइबर वारफेयर’ और डेटा सुरक्षा के लिए आवंटित किया जा सकता है।

7. ऊर्जा सुरक्षा: ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर पावर

प्रधानमंत्री मोदी ने 2070 तक भारत को ‘नेट ज़ीरो’ बनाने का वादा किया है। यह बजट भारत की ऊर्जा सुरक्षा को पुनर्परिभाषित करेगा।

  • ग्रीन हाइड्रोजन: भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात का केंद्र बनाने के लिए बुनियादी ढांचे (पाइपलाइन्स, स्टोरेज) पर खर्च बढ़ाया जाएगा।
  • सोलर रूफटॉप: पीएम सूर्य घर योजना का विस्तार करके हर मध्यमवर्गीय परिवार को बिजली बिल से मुक्त करने का लक्ष्य और आक्रामक किया जा सकता है।
  • कार्बन टैक्स: क्या सरकार प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कोई नया ‘कार्बन टैक्स’ या ‘ग्रीन सेस’ लगा सकती है? यह पर्यावरणविदों की मांग रही है, और 2026 में इसे लागू करना भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करेगा।

8. आधारभूत ढांचा (Infrastructure): गति शक्ति का विस्तार

पिछले 10 वर्षों में भारत ने सड़कों, रेलवे और हवाई अड्डों के निर्माण में रिकॉर्ड बनाया है। Budget Session 2026 में इस गति को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) में और वृद्धि की उम्मीद है।

  • रेलवे: वंदे भारत ट्रेनों के स्लीपर वर्जन और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के पहले चरण के उद्घाटन की तैयारियों के बीच, रेलवे सुरक्षा (कवच सिस्टम) के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटित हो सकता है।
  • नेक्स्ट-जेन हाइवे: अब सरकार का फोकस केवल सड़कें बनाने पर नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट हाइवे’ और ‘इलेक्ट्रिक हाइवे’ बनाने पर है जहां चलते-चलते इलेक्ट्रिक गाड़ियां चार्ज हो सकें।

9. सामाजिक क्षेत्र: जनसंख्या नियंत्रण और महिला सशक्तिकरण

राष्ट्रपति मुर्मू महिला सशक्तिकरण की प्रतीक हैं। उनके साथ बैठक में ‘लखपति दीदी’ योजना के विस्तार पर चर्चा हुई होगी।

  • महिला बजट: जेंडर बजटिंग के तहत महिलाओं के स्वामित्व वाले स्टार्टअप्स और एमएसएमई (MSME) को विशेष कर छूट या सस्ता ऋण दिया जा सकता है।
  • जनसंख्या और डेमोग्राफी: क्या बजट में उन राज्यों को अधिक फंड देने का प्रावधान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा प्रदर्शन किया है? या दक्षिण भारत और उत्तर भारत के बीच संसाधनों के बंटवारे को लेकर कोई नया फॉर्मूला पेश किया जाएगा? यह एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा है जिसे बजट भाषण में सावधानी से संबोधित किया जा सकता है।

10. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) और वित्तीय अनुशासन

चुनावी वर्ष न होने के कारण सरकार के पास राजकोषीय घाटे को कम करने का मौका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही संकेत दिया है कि वे राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) के पथ पर बनी रहेंगी।

  • सरकार का लक्ष्य घाटे को जीडीपी के 4.5% से नीचे लाना होगा।
  • इसका मतलब है कि मुफ्त की रेवड़ियों (Freebies) पर लगाम लग सकती है और उत्पादक व्यय (Productive Expenditure) पर जोर दिया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा, जिससे भारत के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाएगा।

11. वैश्विक परिदृश्य और रक्षा बजट

दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (चाहे वह मध्य पूर्व हो या यूरेशिया) को देखते हुए, भारत अपनी रक्षा तैयारियों में कोई कोताही नहीं बरत सकता। Budget Session 2026 में रक्षा बजट में ‘आत्मनिर्भरता’ पर सबसे ज्यादा जोर होगा।

  • आयात में कमी: विदेशी हथियारों की खरीद को कम करके घरेलू रक्षा निर्माताओं (जैसे DRDO, HAL और निजी क्षेत्र) को बड़े ऑर्डर दिए जाएंगे।
  • आर एंड डी (R&D): रक्षा अनुसंधान के लिए बजट का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 25%) निजी स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों के लिए आरक्षित किया जा सकता है।

12. विपक्ष की प्रतिक्रिया और संसद का गणित

Budget Session 2026 हंगामेदार होने की पूरी संभावना है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और मणिपुर जैसे मुद्दों पर घेरेगा।

  • सरकार को अपने ‘बड़े सुधारों’ को पास कराने के लिए राज्यसभा में कुशल फ्लोर मैनेजमेंट की जरूरत होगी।
  • राष्ट्रपति के साथ पीएम की बैठक इस रणनीति का भी हिस्सा हो सकती है कि कैसे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए विपक्ष के विरोध का सामना किया जाए।

13. आम आदमी की उम्मीदें

सारे आर्थिक आंकड़ों और जीडीपी के शोर के बीच, आम आदमी का सवाल एक ही है—”मेरे लिए इसमें क्या है?”

  • महंगाई: क्या पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की कोई घोषणा होगी?
  • होम लोन: क्या घर खरीदारों को ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा (जो अभी 2 लाख है) को बढ़ाकर 5 लाख किया जाएगा?
  • बचत: क्या पीपीएफ (PPF) की निवेश सीमा (1.5 लाख) बढ़ाई जाएगी? 2026 का बजट मध्यम वर्ग के धैर्य की परीक्षा भी है और उनके सपनों की उड़ान भी।

14. निष्कर्ष: 2047 की ओर एक साहसिक कदम

अंत में, 15 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक कोई सामान्य घटना नहीं है। यह एक संकेत है कि सरकार “यथास्थिति” (Status Quo) से संतुष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि 2047 के ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य पुराने कानूनों और पुरानी सोच के साथ हासिल नहीं किया जा सकता।

आने वाला Budget Session 2026 भारत के आर्थिक इतिहास में एक “वाटरशेड मोमेंट” (Watershed Moment) साबित हो सकता है। सरकार कड़े फैसले लेने के मूड में है—चाहे वह टैक्स हो, सब्सिडी हो या श्रम कानून। राष्ट्रपति मुर्मू का समर्थन सरकार को इन सुधारों को लागू करने का नैतिक और संवैधानिक बल प्रदान करता है।

क्या ये सुधार कड़वी गोली साबित होंगे या जादू की छड़ी? इसका पता तो 1 फरवरी को वित्त मंत्री के बजट भाषण से ही चलेगा। लेकिन एक बात तय है—भारत बदलने के लिए तैयार है, और सरकार उस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए कमर कस चुकी है। हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहां आर्थिक राष्ट्रवाद और वैश्वीकरण एक साथ चलेंगे।

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