भारत में 6G टेक्नोलॉजी को लेकर उत्साह चरम पर है। केंद्र सरकार ने ‘भारत 6G मिशन’ के तहत 2030 तक देश को इस क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने का लक्ष्य रखा है। हाल ही में (दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की शुरुआत में) सरकार ने स्पेक्ट्रम आवंटन और टेस्टिंग को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं।
6G टेक्नोलॉजी का रोडमैप जारी
1. 6G की मुख्य विशेषताएं: 5G से कितना आगे?

6G केवल इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि यह संचार के तरीके को पूरी तरह बदल देगा।
- अल्ट्रा-फास्ट स्पीड: 6G की स्पीड 1 Tbps (टेराबिट प्रति सेकंड) तक पहुँच सकती है, जो 5G से लगभग 100 गुना तेज़ होगी।
- शून्य लेटेन्सी (Near-Zero Latency): इसका रिस्पॉन्स टाइम 100 माइक्रोसेकंड से भी कम होगा। इसका मतलब है कि वीडियो कॉल या ऑनलाइन गेमिंग में कोई ‘लैग’ नहीं होगा।
- AI इंटीग्रेशन: 6G नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पहले से ही इन-बिल्ट होगा, जिससे नेटवर्क खुद को जरूरत के हिसाब से ऑप्टिमाइज़ कर सकेगा।
2. भारत 6G मिशन का रोडमैप (दो चरण)
सरकार ने इस मिशन को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
- चरण 1 (2023 – 2025): इस दौरान विचारों पर काम किया गया और ‘टेस्टबेड’ (परीक्षण केंद्र) स्थापित किए गए। 100 से अधिक रिसर्च प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई।
- चरण 2 (2025 – 2030): यह चरण अब शुरू हो चुका है। इसका मुख्य लक्ष्य स्वदेशी 6G मानकों को विकसित करना, कमर्शियल रोलआउट की तैयारी करना और चिपसेट निर्माण को बढ़ावा देना है।
3. हालिया अपडेट: NFAP-2025 और स्पेक्ट्रम आवंटन
दिसंबर 2025 के अंत में सरकार ने नेशनल फ्रीक्वेंसी एलोकेशन प्लान (NFAP-2025) लागू किया है:
- 6GHz बैंड: सरकार ने 6GHz बैंड की पहचान की है, जो 5G एडवांस्ड और भविष्य की 6G सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- स्वदेशी चिपसेट: पीएम मोदी ने घोषणा की है कि 2025 के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप्स बाजार में आ जाएंगे, जो 6G उपकरणों के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होंगे।

4. 6G से क्या बदलेगा? (Use Cases)
6G के आने से हमारे जीवन में निम्नलिखित बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
- होलोग्राफिक संचार: भविष्य में वीडियो कॉल के बजाय आप सामने वाले व्यक्ति की 3D इमेज (होलोग्राम) अपने कमरे में देख सकेंगे।
- रिमोट सर्जरी: डॉक्टर मीलों दूर बैठकर रोबोटिक आर्म्स के जरिए सर्जरी कर सकेंगे, जिसमें ज़रा सा भी टाइम डिले नहीं होगा।
- स्मार्ट सिटीज और ऑटोनॉमस वाहन: लाखों की संख्या में सेंसर्स और बिना ड्राइवर वाली गाड़ियाँ एक-दूसरे से रीयल-टाइम में संवाद कर सकेंगी।
5. आर्थिक प्रभाव
भारत का लक्ष्य 2035 तक टेलीकॉम सेक्टर के जरिए जीडीपी में $1.2 ट्रिलियन का योगदान देना है। साथ ही, भारत दुनिया के कुल 6G पेटेंट्स में 10% हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- लॉन्च का लक्ष्य: 2030 तक कमर्शियल रोलआउट।
- परीक्षण: 2026-2027 के बीच बड़े पैमाने पर ट्रायल शुरू होने की उम्मीद।
