शादी को लेकर युवाओं की सोच क्यों बदल रही है?

आज के दौर में विवाह (Marriage) को लेकर युवाओं के नजरिए में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। जहाँ पहले शादी को जीवन का एक अनिवार्य और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता था, वहीं आज की पीढ़ी यानी ‘जेन-जी’ (Gen-Z) और ‘मिलेनियल्स’ के लिए यह एक विकल्प (Choice) बन गया है, अनिवार्यता नहीं।

शादी को लेकर युवाओं की सोच

1. आर्थिक आत्मनिर्भरता (Financial Independence)

पुराने समय में शादी को आर्थिक सुरक्षा का जरिया माना जाता था, खासकर महिलाओं के लिए। लेकिन आज युवा—चाहे महिला हो या पुरुष—अपने करियर को प्राथमिकता दे रहे हैं। वे पहले आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहते हैं। जब व्यक्ति खुद का खर्चा उठाने में सक्षम होता है, तो वह शादी के लिए जल्दबाजी नहीं करता।

शादी को लेकर युवाओं की सोच क्यों बदल रही है?

2. व्यक्तिगत स्वतंत्रता और करियर (Personal Freedom & Career)

आज के युवा अपनी ‘इंडिविजुअलिटी’ यानी व्यक्तिगत पहचान को बहुत महत्व देते हैं। उन्हें डर होता है कि शादी के बाद की जिम्मेदारियां उनके करियर के लक्ष्यों या उनके घूमने-फिरने और शौक पूरा करने की आजादी को सीमित कर देंगी। वे ‘सेल्फ-ग्रोथ’ पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

3. बदलती सामाजिक प्राथमिकताएं (Changing Social Priorities)

अब समाज में ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ या ‘सिंगल’ रहने को लेकर पहले जैसी कट्टरता नहीं रही। युवाओं को लगता है कि किसी के साथ जीवन बिताने के लिए कानूनी दस्तावेज (शादी) से ज्यादा आपसी समझ जरूरी है। कई युवा अब ‘चाइल्ड-फ्री’ (बच्चे न करने का फैसला) रहने की सोच भी रख रहे हैं, जो पारंपरिक शादी के ढांचे में फिट नहीं बैठता।

4. असफल शादियों और तलाक का डर (Fear of Commitment & Divorce)

आजकल हमारे आसपास तलाक के मामले और बिखरते परिवारों की संख्या बढ़ी है। सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से युवा इन कड़वी सच्चाइयों को देख रहे हैं। “गलत व्यक्ति से शादी करने से बेहतर है कि अकेले रहा जाए”—यह सोच युवाओं में घर कर रही है।

5. शादी का भारी खर्च और दिखावा (Huge Expenses)

आजकल शादियाँ मिलन का उत्सव कम और दिखावे का बाजार ज्यादा बन गई हैं। करोड़ों का खर्च और भव्य आयोजनों का दबाव युवाओं को तनाव देता है। वे इस पैसे को दिखावे में उड़ाने के बजाय अनुभव बटोरने या निवेश करने में समझदारी समझते हैं।

6. भावनात्मक परिपक्वता की तलाश (Search for Emotional Compatibility)

अब युवा सिर्फ ‘अच्छे खानदान’ या ‘सूरत’ को देखकर शादी नहीं करना चाहते। उन्हें एक ऐसा साथी चाहिए जो उनके मानसिक स्वास्थ्य, विचारों और जीवन के नजरिए को समझे। इस ‘परफेक्ट मैच’ की तलाश में शादी की उम्र बढ़ती जा रही है।

शादी को लेकर युवाओं की सोच क्यों बदल रही है?

7. ‘सोलमेट’ (Soulmate) बनाम ‘समझौता’

पुरानी पीढ़ी का मानना था कि “शादी के बाद प्यार हो जाता है” और लोग स्वभाव में समझौता कर लेते थे। लेकिन आज के युवा ‘सेटल’ (Settle) होने के बजाय ‘कंपैटिबिलिटी’ (Compatibility) पर जोर देते हैं। वे ऐसे साथी की तलाश में हैं जो उनके मानसिक स्तर (Intellectual level) और जीवन के प्रति उनके दृष्टिकोण से मेल खाता हो। उनके लिए ‘अकेले रहना’ किसी ‘दमघोंटू रिश्ते’ में रहने से कहीं बेहतर है।

8. पैरेंटिंग का बदलता नजरिया (Fear of Responsibility)

आज के युवा बच्चे पैदा करने और उनकी परवरिश की जिम्मेदारी को बहुत गंभीरता से लेते हैं। वे देख रहे हैं कि आज की महंगाई और आपाधापी वाली जिंदगी में बच्चे को सही समय और संस्कार देना कितना कठिन है। कई युवा ‘DINK’ (Double Income, No Kid) लाइफस्टाइल को अपना रहे हैं, जहाँ वे शादी तो करते हैं लेकिन बच्चा न करने का फैसला लेते हैं, ताकि वे अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जी सकें।

9. डिजिटल दुनिया और डेटिंग ऐप्स का प्रभाव

टिंडर, बम्बल और हिंग जैसे डेटिंग ऐप्स ने रिश्तों को ‘डिस्पोजेबल’ या ‘विकल्पों से भरा’ बना दिया है। युवाओं को लगता है कि “शायद इससे बेहतर कोई और मिल जाए”। इस ‘पैરાडॉक्स ऑफ चॉइस’ (Paradox of Choice) के कारण वे किसी एक व्यक्ति के साथ जीवनभर के लिए प्रतिबद्ध (Commit) होने में हिचकिचाते हैं।

शादी को लेकर युवाओं की सोच क्यों बदल रही है?

10. मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता (Mental Health Awareness)

आज की पीढ़ी मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। वे जानते हैं कि एक टॉक्सिक या गलत शादी उनके मानसिक सुकून को छीन सकती है। वे शादी से पहले प्री-मैरिटल काउंसलिंग या पार्टनर के पास्ट और उसके व्यवहार को समझने में समय बिताना चाहते हैं। वे अब समाज के डर से अपनी खुशियों की बलि देने को तैयार नहीं हैं।

11. परिवार के ढांचे में बदलाव (Nuclear Families)

संयुक्त परिवारों (Joint Families) के टूटने और एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ने से भी सोच बदली है। पहले परिवार के बड़े-बुजुर्ग शादी के लिए दबाव बनाते थे और रिश्ता निभाने में मदद करते थे। अब युवा स्वतंत्र हैं और उन पर सामाजिक दबाव कम हुआ है, जिससे उन्हें अपने फैसले लेने की आजादी मिली है।

तुलनात्मक विश्लेषण: पुरानी पीढ़ी बनाम नई पीढ़ी

आधारपुरानी पीढ़ी की सोचनई पीढ़ी (युवाओं) की सोच
शादी का उद्देश्यसामाजिक मर्यादा और वंश वृद्धि।व्यक्तिगत खुशी और पार्टनरशिप।
सही उम्र20 से 25 साल (जल्द से जल्द)।जब करियर और मन स्थिर हो (अक्सर 30 के बाद)।
शादी का आधारकुंडली और खानदान।आपसी समझ और मानसिक मेल।
विवाद का हलसहना और समझौता करना।बातचीत या अलग हो जाना।

निष्कर्ष

शादी को लेकर यह बदलाव समाज के ‘सामूहिक’ (Collective) होने से ‘व्यक्तिगत’ (Individualistic) होने की यात्रा है। युवा अब शादी को एक “चेकलिस्ट” की तरह नहीं देखते जिसे समाज के लिए पूरा करना है, बल्कि वे इसे एक ऐसे सफर के रूप में देखते हैं जिसे वे अपनी शर्तों पर और सही इंसान के साथ तय करना चाहते हैं।

शादी को लेकर बदलती यह सोच यह नहीं दर्शाती कि युवा प्रेम या रिश्तों के खिलाफ हैं। बल्कि, यह दिखाता है कि वे अब दबाव के बजाय समझदारी और जरूरत के बजाय खुशी के आधार पर रिश्ते जोड़ना चाहते हैं। वे शादी को ‘बोझ’ नहीं, बल्कि ‘साझेदारी’ के रूप में देखना चाहते हैं।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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