ब्रह्मांड की गहराइयों में मानव बस्तियों की नींव रखने का सपना अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के जरिए सच हो रहा है। लेकिन पृथ्वी से सैकड़ों मील ऊपर रह रहे वैज्ञानिकों को जीवित रखने के लिए समय-समय पर रसद की आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती है। इसी कड़ी में, रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस (Roscosmos) का मानवरहित कार्गो यान Progress 95 सफलतापूर्वक आईएसएस पर पहुँच गया है। यह यान न केवल भोजन और ऑक्सीजन लेकर गया है, बल्कि स्टेशन के इंजनों को चलाने के लिए महत्वपूर्ण ईंधन भी इसके पेलोड का हिस्सा है।
Progress 95 की यह सफल डॉकिंग अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से लॉन्च किए गए इस यान ने लगभग दो दिनों की यात्रा के बाद अंतरिक्ष स्टेशन के ‘ज़्वेज़्दा’ (Zvezda) मॉड्यूल के साथ खुद को जोड़ा। इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता और इसमें भेजा गया विशेष वैज्ञानिक सामान है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर ‘प्रोग्रेस’ सीरीज के ये यान क्या होते हैं और Progress 95 अपने साथ क्या-क्या लेकर गया है।
क्या है प्रोग्रेस 95 (Progress 95) और इसकी कार्यप्रणाली?
रूस का ‘प्रोग्रेस’ यान दुनिया के सबसे भरोसेमंद कार्गो जहाजों में से एक माना जाता है।
- मानवरहित मिशन: इसमें कोई चालक दल (Crew) नहीं होता। यह पूरी तरह से स्वचालित (Automated) होता है और पृथ्वी से नियंत्रित किया जाता है।
- लॉन्च वेहिकल: इसे सोयुज (Soyuz 2.1a) रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा जाता है।
- डिजाइन: Progress 95 को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है—एक कार्गो कम्पार्टमेंट, एक रिफ्यूलिंग कम्पार्टमेंट और एक इंस्ट्रूमेंट सेक्शन।
पेलोड का विवरण: ISS के लिए क्या-क्या भेजा गया?
अंतरिक्ष यात्रियों के लिए Progress 95 किसी ‘सांता क्लॉज’ से कम नहीं है। इस बार यान लगभग 2,500 किलोग्राम से अधिक सामग्री लेकर गया है:

- शुष्क कार्गो (Dry Cargo): इसमें लगभग 1,200 किलोग्राम वजन के भोजन पैकेट, ताजे फल, चिकित्सा उपकरण और व्यक्तिगत स्वच्छता की चीजें शामिल हैं।
- ईंधन (Fuel): स्टेशन के ऑर्बिट को बनाए रखने के लिए करीब 880 किलोग्राम ईंधन भेजा गया है।
- पानी और गैस: वैज्ञानिकों के लिए 420 लीटर पीने का पानी और 40 किलोग्राम संपीड़ित नाइट्रोजन और ऑक्सीजन।
- वैज्ञानिक प्रयोग: इसमें कई ऐसे उपकरण हैं जो अंतरिक्ष में पौधों को उगाने और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में धातुओं के व्यवहार का अध्ययन करने के लिए उपयोग किए जाएंगे।
डॉकिंग प्रक्रिया: 28,000 किमी/घंटा की रफ़्तार पर सटीक मिलन
Progress 95 का आईएसएस के साथ जुड़ना इंजीनियरिंग का एक चमत्कार है।
- ऑटोमेटेड डॉकिंग: यान ‘कुर्स’ (Kurs) नामक नेविगेशन सिस्टम का उपयोग करता है, जो इसे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्टेशन के करीब ले जाता है।
- सटीकता: अंतरिक्ष स्टेशन 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है। इतनी तेज रफ़्तार में सेंटीमीटर की सटीकता के साथ जुड़ना Progress 95 की बड़ी खूबी है।
- बैकअप: यदि स्वचालित प्रणाली विफल हो जाती है, तो स्टेशन पर मौजूद रूसी अंतरिक्ष यात्री मैन्युअल रूप से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
अंतरिक्ष स्टेशन पर रसद का महत्व
आईएसएस एक आत्मनिर्भर इकाई नहीं है। वहां मौजूद वैज्ञानिकों को हर कुछ महीनों में Progress 95 जैसे मिशनों की जरूरत होती है।
- कचरा प्रबंधन: यह यान केवल सामान ले जाने के काम नहीं आता। मिशन पूरा होने के बाद, अंतरिक्ष यात्री स्टेशन का कचरा इसमें भर देते हैं।
- डिस्पोजल: जब प्रोग्रेस यान अनडॉक होता है, तो वह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय सुरक्षित रूप से जलकर नष्ट हो जाता है।
- स्टेशन की ऊंचाई बढ़ाना: प्रोग्रेस यान के इंजनों का उपयोग समय-समय पर आईएसएस की कक्षा (Orbit) को ऊपर उठाने के लिए भी किया जाता है, क्योंकि वायुमंडलीय घर्षण के कारण स्टेशन धीरे-धीरे नीचे आने लगता है।
रूस और नासा का सहयोग: विज्ञान के लिए साथ
भले ही पृथ्वी पर देशों के बीच राजनीतिक तनाव हो, लेकिन अंतरिक्ष में Progress 95 जैसे मिशन आपसी सहयोग की मिसाल हैं। रूस की यह सप्लाई नासा के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि रूसी कॉस्मोनॉट्स के लिए। यह मिशन दर्शाता है कि मानवता के बड़े लक्ष्यों के लिए दुनिया की महाशक्तियों का साथ आना कितना आवश्यक है।

भविष्य के मिशनों की ओर बढ़ते कदम
निष्कर्ष के तौर पर, Progress 95 का सफल मिशन हमें यह याद दिलाता है कि हम अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति को स्थायी बनाने के कितने करीब हैं। भोजन, पानी और ईंधन की ये निरंतर आपूर्ति ही वैज्ञानिकों को मंगल और चंद्रमा जैसे कठिन मिशनों के लिए शोध करने की शक्ति देती है। प्रोग्रेस सीरीज के यान न केवल आईएसएस की लाइफलाइन हैं, बल्कि वे उस तकनीक का आधार भी हैं जो भविष्य में हमारे ‘स्पेस लॉजिस्टिक्स’ को और भी उन्नत बनाएगी।
Progress 95 FAQs:
प्रोग्रेस 95 (Progress 95) क्या है?
यह रूस द्वारा विकसित एक मानवरहित कार्गो अंतरिक्ष यान है, जिसका उपयोग अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर सामग्री पहुँचाने के लिए किया जाता है।
इस यान में ईंधन क्यों भेजा जाता है?
अंतरिक्ष स्टेशन को अपनी कक्षा (Orbit) में बने रहने के लिए समय-समय पर बूस्ट की जरूरत होती है। Progress 95 द्वारा ले जाया गया ईंधन आईएसएस के इंजनों को ऊर्जा प्रदान करता है।
क्या Progress 95 पृथ्वी पर वापस आता है?
नहीं, अपना मिशन पूरा करने के बाद यह यान स्टेशन के कचरे के साथ वापस आता है और पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय पूरी तरह जलकर नष्ट हो जाता है।

भावेश Tez Khabri के सह-संस्थापक और प्रबंध संपादक हैं। अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज में पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं। भावेश जी मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम और शिक्षा से जुड़ी खबरों का नेतृत्व करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हर खबर पूरी तरह से सत्यापित (Verified) हो।
