गुजरात की राजनीति में आज का दिन, 17 फरवरी 2026, एक नए अध्याय की शुरुआत लेकर आया है। गांधीनगर स्थित विट्ठलभाई पटेल भवन (गुजरात विधानसभा) में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और सूरत पश्चिम से विधायक पूर्णेश मोदी (Purnesh Modi) को गुजरात विधानसभा का नया उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) चुना गया है।
यह खबर केवल एक पद की नियुक्ति भर नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। पूर्णेश मोदी वही चेहरा हैं जिन्होंने ‘मोदी सरनेम’ मानहानि मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी और उन्हें संसद की सदस्यता गंवानी पड़ी थी। आज उसी पूर्णेश मोदी को गुजरात की सबसे बड़ी पंचायत में एक संवैधानिक पद से नवाजा गया है।
1. आज विधानसभा में क्या हुआ? (The Inside Story)
गुजरात की 15वीं विधानसभा का बजट सत्र कल (16 फरवरी) से शुरू हुआ था। आज सत्र के दूसरे दिन उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव निर्धारित था।
प्रक्रिया और चुनाव:
- प्रस्ताव: मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने सदन के पटल पर पूर्णेश मोदी का नाम उपाध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया।
- समर्थन: संसदीय कार्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ भाजपा विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
- विपक्ष का दांव: परंपरा के अनुसार, उपाध्यक्ष का पद अक्सर विपक्ष को दिया जाता है। इसी उम्मीद में कांग्रेस ने अपनी तरफ से वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार को मैदान में उतारा था।
- मतदान/निर्णय: चूंकि विधानसभा में भाजपा के पास 156 सीटों का ऐतिहासिक बहुमत है, इसलिए आंकड़ों का खेल पहले से ही स्पष्ट था। ध्वनिमत (Voice Vote) और संख्या बल के आधार पर पूर्णेश मोदी को विजय घोषित किया गया।
- शपथ: विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) श्री शंकर चौधरी ने नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष पूर्णेश मोदी को बधाई दी और उन्हें आसन ग्रहण कराया।

2. कौन हैं पूर्णेश मोदी? (Profile of Purnesh Modi)
पूर्णेश मोदी का नाम गुजरात की राजनीति में नया नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर वे पिछले 2-3 वर्षों में चर्चा में आए। आइए उनके सफर पर एक नजर डालते हैं।
(A) सूरत का मजबूत किला:
पूर्णेश मोदी दक्षिण गुजरात के सूरत शहर से आते हैं, जो भाजपा का अभेद्य किला माना जाता है। वे सूरत पश्चिम (Surat West) विधानसभा सीट से विधायक हैं। यह वही सीट है जहां से वे लगातार जीतते आ रहे हैं।
(B) संगठनात्मक कौशल:
वे भाजपा के एक समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने सूरत नगर निगम में पार्षद के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। बाद में वे सूरत भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। संगठन में उनकी पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है।
(C) मंत्री पद का अनुभव:
भूपेंद्र पटेल की पिछली सरकार (2021-2022) में पूर्णेश मोदी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उनके पास ‘मार्ग और मकान’ (Roads & Buildings) जैसा भारी-भरकम विभाग था। हालांकि, बाद में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था, जिसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। लेकिन आज उन्हें उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने उनका पुनर्वास (Rehabilitation) किया है।
(D) राहुल गांधी केस और ‘जायंट किलर’ की छवि:
पूर्णेश मोदी को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि तब मिली जब उन्होंने 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया।
- मामला: कर्नाटक की एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था, “सारे चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?”
- एक्शन: पूर्णेश मोदी ने इसे पूरे ‘मोदी समाज’ का अपमान बताया और सूरत कोर्ट में केस किया।
- परिणाम: उनकी कानूनी लड़ाई के कारण राहुल गांधी को 2 साल की सजा हुई और उनकी संसद सदस्यता रद्द हो गई (जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्टे किया)। इस घटना ने पूर्णेश मोदी को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजरों में एक ‘वफादार सिपाही’ बना दिया।
3. भाजपा ने पूर्णेश मोदी को ही क्यों चुना? (Decoding the Strategy)
राजनीति में कोई भी फैसला बेवजह नहीं होता। पूर्णेश मोदी को उपाध्यक्ष बनाने के पीछे भाजपा के कई रणनीतिक समीकरण हैं।

1. ओबीसी (OBC) कार्ड:
पूर्णेश मोदी ‘मोध वणिक’ (OBC) समाज से आते हैं। गुजरात की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी समाज से आते हैं। पूर्णेश मोदी को यह पद देकर भाजपा ने ओबीसी समाज को साधने की कोशिश की है।
2. दक्षिण गुजरात का प्रतिनिधित्व:
सूरत और दक्षिण गुजरात भाजपा की रीढ़ की हड्डी है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने पिछले कुछ सालों में सूरत में सेंध लगाने की कोशिश की है। ऐसे में, सूरत के एक कद्दावर नेता को संवैधानिक पद देकर भाजपा ने दक्षिण गुजरात में अपनी पकड़ और मजबूत की है।
3. वफादारी का इनाम:
जैसा कि हमने ऊपर चर्चा की, राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का इनाम उन्हें मिलना बाकी था। मंत्री पद जाने के बाद वे संगठन के लिए काम कर रहे थे। उपाध्यक्ष का पद देकर पार्टी ने संदेश दिया है कि जो पार्टी के लिए लड़ता है, पार्टी उसका ध्यान रखती है।
4. आक्रामक छवि बनाम संवैधानिक पद:
पूर्णेश मोदी एक आक्रामक वक्ता माने जाते हैं। उपाध्यक्ष का पद तटस्थता (Neutrality) की मांग करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्हें यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक ‘कड़क’ व्यक्ति को कुर्सी पर बैठाया है।
4. विपक्ष (कांग्रेस) का विरोध: परंपरा टूटने का दर्द
आज विधानसभा में कांग्रेस ने अपनी नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस विधायक दल के नेता अमित चावड़ा ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार, “अध्यक्ष (Speaker) सत्ता पक्ष का होता है और उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) विपक्ष का होना चाहिए।”
- इतिहास: गुजरात में कई वर्षों तक यह परंपरा रही थी कि उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिया जाता था।
- वर्तमान: पिछले कुछ कार्यकालों से भाजपा ने इस परंपरा को तोड़ दिया है। 2026 में भी, भाजपा ने अपने ही विधायक को उपाध्यक्ष बनाया।
- शैलेश परमार की हार: कांग्रेस ने शैलेश परमार को उम्मीदवार बनाया था, जो संसदीय नियमों के अच्छे जानकार हैं। लेकिन संख्या बल (156 vs 17) के आगे उनकी हार निश्चित थी। कांग्रेस ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया।
5. उपाध्यक्ष (Deputy Speaker) की शक्तियां और कार्य
कई पाठकों के मन में सवाल होगा कि आखिर उपाध्यक्ष का काम क्या होता है? क्या यह सिर्फ एक शोभा का पद है? जी नहीं, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 178 के तहत यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद है।

- अध्यक्ष की अनुपस्थिति में: जब स्पीकर (शंकर चौधरी) सदन में मौजूद नहीं होते, या बीमार होते हैं, या विदेश दौरे पर होते हैं, तब उपाध्यक्ष ही सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं। उस समय उनके पास स्पीकर की सभी शक्तियां होती हैं।
- तटस्थता: कुर्सी पर बैठने के बाद पूर्णेश मोदी अब भाजपा के विधायक नहीं, बल्कि सदन के कस्टोडियन हैं। उन्हें पक्ष और विपक्ष दोनों को बोलने का समान मौका देना होगा।
- बजट सत्र में भूमिका: अभी बजट सत्र चल रहा है जो लंबा चलेगा। स्पीकर अकेले पूरा समय सदन में नहीं बैठ सकते। ऐसे में, पूर्णेश मोदी की भूमिका अगले एक महीने तक बहुत महत्वपूर्ण रहेगी।
6. सदन का माहौल: बधाई और अपेक्षाएं
चुनाव जीतने के बाद, पूर्णेश मोदी को पारंपरिक रूप से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और नेता प्रतिपक्ष (अमित चावड़ा) दोनों मिलकर सम्मानपूर्वक उनके आसन तक ले गए।
- सीएम भूपेंद्र पटेल: “पूर्णेशभाई एक अनुभवी नेता हैं। मुझे विश्वास है कि वे सदन की गरिमा बनाए रखेंगे और स्वस्थ चर्चा को बढ़ावा देंगे।”
- स्पीकर शंकर चौधरी: “मैं पूर्णेशजी का स्वागत करता हूं। हम दोनों मिलकर गुजरात की जनता के हित में सदन का संचालन करेंगे।”
- पूर्णेश मोदी का वक्तव्य: अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा, “यह जिम्मेदारी देने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और नड्डा जी का आभारी हूं। मैं विश्वास दिलाता हूं कि जब मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा, तो मेरे लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं होगा, सिर्फ गुजरात का हित होगा।”
7. राजनीतिक भविष्य: क्या यह ‘रिटायरमेंट’ है या ‘प्रमोशन’?
राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि सक्रिय नेताओं को संवैधानिक पद (जैसे राज्यपाल या स्पीकर) देकर उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया जाता है। क्या पूर्णेश मोदी के साथ भी ऐसा हुआ है?
विशेषज्ञों की राय:
- कुछ का मानना है कि उन्हें कैबिनेट मंत्री न बनाकर उपाध्यक्ष बनाना एक तरह का ‘साइडलाइन’ करना है, क्योंकि अब वे सरकार के फैसलों में सीधे भागीदार नहीं होंगे।
- वहीं, दूसरा पक्ष मानता है कि यह एक ‘प्रमोशन’ है। विधानसभा उपाध्यक्ष का प्रोटोकॉल कैबिनेट मंत्री के बराबर या उससे ऊपर होता है। यह उन्हें राज्य स्तर पर एक बड़ी पहचान देता है। साथ ही, 2027 के चुनाव से पहले सूरत में उनका कद बढ़ा रहेगा।
8. गुजरात विधानसभा का इतिहास
गुजरात विधानसभा का इतिहास गौरवशाली रहा है। विट्ठलभाई पटेल से लेकर आज शंकर चौधरी तक, कई दिग्गजों ने इस सदन की शोभा बढ़ाई है। पूर्णेश मोदी अब उस सूची में शामिल हो गए हैं।
यह 15वीं विधानसभा है। 2022 के चुनावों में भाजपा ने 182 में से 156 सीटें जीतकर इतिहास रचा था। इतनी बड़ी बहुमत वाली सरकार में उपाध्यक्ष की भूमिका और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि विपक्ष बहुत कमजोर (संख्या में) है। ऐसे में, विपक्ष की आवाज को दबने न देना एक अच्छे उपाध्यक्ष की निशानी होती है।
9. अगला एक महीना: बजट सत्र की हलचल
कल वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने बजट पेश किया है। अब अगले कुछ हफ्तों तक इस बजट पर चर्चा होगी।
- कांग्रेस आक्रामक तेवर में है (जैसा कि कल की जन आक्रोश यात्रा से दिखा)।
- आम आदमी पार्टी (AAP) भी सवाल पूछ रही है।
- ऐसे में, पूर्णेश मोदी को सदन में हंगामे और शोरगुल को नियंत्रित करना होगा। उनकी असली परीक्षा कल से शुरू होगी जब वे आसन संभालेंगे।
10. एक नई पारी की शुरुआत
सूरत की गलियों से निकलकर, वकालत की पढ़ाई करके, पार्षद बनकर, मंत्री बनकर और अब विधानसभा के उपाध्यक्ष बनकर—पूर्णेश मोदी का सफर प्रेरणादायक है।
राहुल गांधी के खिलाफ ‘मोदी सरनेम’ केस ने उन्हें देशभर में चर्चित किया, लेकिन अब उन्हें यह सिद्ध करना होगा कि वे सदन के संचालन में भी उतने ही माहिर हैं जितने कानूनी लड़ाई में।
गुजरात की जनता उम्मीद करती है कि नए उपाध्यक्ष के कार्यकाल में विधानसभा में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा।
बधाई पूर्णेश मोदी जी!

भावेश Tez Khabri के सह-संस्थापक और प्रबंध संपादक हैं। अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज में पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं। भावेश जी मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम और शिक्षा से जुड़ी खबरों का नेतृत्व करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हर खबर पूरी तरह से सत्यापित (Verified) हो।
