Bhagwant Mann Foreign Visit Controversy

भारतीय राजनीति में केंद्र सरकार और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य सरकारों के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। कभी राज्यपाल की शक्तियों को लेकर, कभी फंड के आवंटन को लेकर, तो कभी प्रशासनिक अधिकारियों के तबादलों को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते रहे हैं। लेकिन आज, 14 जनवरी 2026 को एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) की बहस को फिर से गरमा दिया है। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है।

आम आदमी पार्टी का दावा है कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को विदेशी निवेश और कृषि तकनीकों के अध्ययन के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) और इजराइल जाना था, लेकिन केंद्र सरकार ने भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं दी। ‘पोलिटिकल क्लियरेंस’ (Political Clearance) न मिलने के कारण मुख्यमंत्री को अपना यह महत्वपूर्ण दौरा रद्द करना पड़ा है।

1. क्या है पूरा मामला? विवाद की जड़

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जनवरी 2026 में विदेश यात्रा की योजना बनाई थी। इस दौरे का उद्देश्य दो प्रमुख देशों—ब्रिटेन और इजराइल—का दौरा करना था। किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री या उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी को विदेश जाने से पहले विदेश मंत्रालय (MEA) से ‘राजनीतिक मंजूरी’ (Political Clearance) लेनी पड़ती है। यह एक मानक प्रोटोकॉल है।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं का आरोप है कि पंजाब सरकार ने समय रहते सभी आवश्यक दस्तावेज केंद्र सरकार के पास भेज दिए थे। लेकिन अंतिम समय तक फाइल को लटकाए रखा गया और अंततः भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं दी गई।

पार्टी के प्रवक्ता मालविंदर सिंह कंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह सीधे तौर पर पंजाब के विकास को रोकने की साजिश है। मोदी सरकार नहीं चाहती कि पंजाब तरक्की करे। जब बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विदेश जाते हैं, तो उन्हें रेड कार्पेट मिलता है, लेकिन जब हमारे मुख्यमंत्री राज्य के भले के लिए जाना चाहते हैं, तो उन्हें रोका जाता है।”

यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी और केंद्र सरकार इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी सिंगापुर जाने से रोका गया था, जिसे लेकर काफी बवाल हुआ था।

2. इजराइल और यूके ही क्यों? दौरे का महत्व

इस विवाद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर भगवंत मान इन दो देशों में क्यों जाना चाहते थे। यह कोई छुट्टियों का दौरा नहीं था, बल्कि इसके पीछे पंजाब की अर्थव्यवस्था और कृषि को सुधारने का एक ठोस रोडमैप था।

इजराइल: खेती और पानी का संकट पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन आज वह गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भूजल स्तर (Groundwater Level) खतरनाक स्तर तक नीचे गिर चुका है। इजराइल दुनिया का वह देश है जिसने रेगिस्तान में भी खेती करके दिखाई है।

  • ड्रिप इरिगेशन: भगवंत मान वहां आधुनिक सिंचाई तकनीकों, विशेषकर ‘ड्रिप इरिगेशन’ और ‘वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट’ को समझने जा रहे थे।
  • फसल विविधीकरण: पंजाब के किसान गेहूं और धान के चक्र में फंसे हैं। इजराइल की तकनीक से कम पानी वाली फसलों को उगाने की योजना थी।
  • इस दौरे के रद्द होने से पंजाब के कृषि क्षेत्र में सुधार की एक बड़ी संभावना को झटका लगा है।
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यूनाइटेड किंगडम: निवेश और प्रवासी भारतीय यूके में पंजाबियों की एक बहुत बड़ी आबादी (Diaspora) रहती है।

  • निवेश: मुख्यमंत्री वहां उद्योगपतियों से मिल कर पंजाब में निवेश (Investment) लाने की कोशिश करने वाले थे।
  • सीधी उड़ानें: वे यूके और पंजाब के बीच और अधिक सीधी उड़ानों के लिए भी चर्चा करने वाले थे। पंजाब पर भारी कर्ज है, और राज्य को आर्थिक रूप से पटरी पर लाने के लिए विदेशी निवेश की सख्त जरूरत है। भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं मिलने का सीधा असर राज्य की संभावित आर्थिक डील्स पर पड़ेगा।

3. ‘राजनीतिक मंजूरी’ क्या है और यह क्यों जरूरी है?

एक आम नागरिक सोच सकता है कि अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री विदेश जाना चाहता है, तो केंद्र सरकार उसे क्यों रोकेगी? इसके लिए हमें भारत की संवैधानिक व्यवस्था को समझना होगा।

भारत के संविधान के तहत, ‘विदेश मामले’ (Foreign Affairs) पूरी तरह से केंद्र सरकार (Union List) का विषय है। राज्य सरकारें स्वतंत्र रूप से किसी देश के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं बना सकतीं। इसलिए, जब भी कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति (जैसे सीएम, मंत्री, जज) विदेश जाता है, तो उसे विदेश मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है।

मंजूरी देने के पैमाने:

  1. यात्रा का उद्देश्य: क्या यह यात्रा भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है?
  2. कूटनीतिक संबंध: क्या उस देश के साथ भारत के संबंध ऐसे हैं कि सीएम की यात्रा उचित हो?
  3. सुरक्षा: क्या उस देश में सीएम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है?
  4. पद की गरिमा: क्या जिस कार्यक्रम में सीएम जा रहे हैं, वह उनके पद की गरिमा के अनुकूल है?

केंद्र सरकार अक्सर इन तकनीकी कारणों का हवाला देकर मंजूरी देने या रोकने का निर्णय लेती है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस ‘वीटो पावर’ का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए किया जाता है।

4. आप (AAP) का तर्क: “दोहरे मापदंड और भेदभाव”

आम आदमी पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका तर्क है कि यह फैसला तकनीकी नहीं, बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। उन्होंने कई उदाहरण पेश किए हैं जो केंद्र सरकार के कथित ‘दोहरे मापदंड’ को उजागर करते हैं।

बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के दौरे: AAP नेताओं ने सवाल उठाया है कि हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने कई विदेशी दौरे किए।

  • क्या उन्हें कभी रोका गया?
  • क्या उनकी यात्राओं से पहले इतनी जांच-पड़ताल की गई?
  • गुजरात के मुख्यमंत्री अक्सर निवेश सम्मेलनों (Vibrant Gujarat) के लिए विदेश जाते हैं।

आप का कहना है कि चूंकि पंजाब में बीजेपी की सरकार नहीं है और वहां AAP ने उन्हें बुरी तरह हराया है, इसलिए केंद्र सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं देना, इस बात का सबूत है कि केंद्र सरकार ‘सहकारी संघवाद’ के नारे को खोखला साबित कर रही है।

अरविंद केजरीवाल का उदाहरण: पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के सिंगापुर दौरे के किस्से को भी याद दिलाया। 2022 में, केजरीवाल को ‘वर्ल्ड सिटीज समिट’ में आमंत्रित किया गया था, जहां उन्हें दिल्ली मॉडल पेश करना था। तब केंद्र ने यह कहकर मंजूरी नहीं दी थी कि यह “मेयरों का सम्मेलन” है और सीएम का वहां जाना प्रोटोकॉल के खिलाफ है। AAP का कहना है कि यह पैटर्न बन गया है—जहाँ भी AAP के नेता अपनी उपलब्धियां दिखाने या कुछ नया सीखने जाना चाहते हैं, वहां बैरियर लगा दिए जाते हैं।

5. केंद्र सरकार का पक्ष (संभावित दृष्टिकोण)

हालांकि केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है (ब्लॉग लिखे जाने तक), लेकिन आमतौर पर ऐसे मामलों में केंद्र के अपने तर्क होते हैं।

इजराइल की सुरक्षा स्थिति: हम जानते हैं कि इजराइल और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति अस्थिर रहती है। हो सकता है कि सुरक्षा एजेंसियों ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई हो। एक वीआईपी की सुरक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिकता होती है। अगर वहां युद्ध जैसी स्थिति या तनाव है, तो कूटनीतिक शिष्टाचार के तहत ऐसी यात्राओं को टाला जाता है।

यात्रा का औचित्य: कई बार विदेश मंत्रालय यह देखता है कि क्या सीएम जिस काम के लिए जा रहे हैं, वह काम दूतावास के अधिकारी या निचले स्तर का प्रतिनिधिमंडल कर सकता है? अगर निवेश के लिए जाना है, तो क्या ऑनलाइन बैठकें हो सकती थीं?

लेकिन विपक्ष इन तर्कों को खारिज करता है। उनका कहना है कि अगर सुरक्षा का मसला होता, तो केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से बता सकती थी। और अगर उद्देश्य निवेश है, तो सीएम के जाने से जो प्रभाव पड़ता है, वह अधिकारियों के जाने से नहीं पड़ता।

6. पंजाब के किसानों और उद्योग का नुकसान

राजनीति अपनी जगह है, लेकिन इस खींचतान में सबसे बड़ा नुकसान पंजाब की जनता का हो रहा है। भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं मिलने के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

कृषि संकट: पंजाब का किसान बेहाल है। भूजल स्तर हर साल मीटरों नीचे जा रहा है। अगर जल्द ही कोई ठोस तकनीक नहीं अपनाई गई, तो पंजाब बंजर होने की कगार पर आ जाएगा। इजराइल जल संरक्षण में विश्व गुरु है। भगवंत मान वहां से जो तकनीक या समझौता (MoU) करके लाते, उससे पंजाब के लाखों किसानों को फायदा हो सकता था। केंद्र द्वारा इसे रोकना परोक्ष रूप से पंजाब के कृषि भविष्य पर प्रहार माना जा रहा है।

औद्योगिक पलायन: पंजाब से इंडस्ट्री बाहर जा रही है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में मिलने वाली रियायतों के कारण पंजाब का उद्योग पिछड़ रहा है। ऐसे समय में यूके जैसे देशों से विदेशी निवेश लाना संजीवनी बूटी जैसा होता। सीएम का दौरा रद्द होने से निवेशकों में एक नकारात्मक संदेश जाता है कि राज्य सरकार अपने फैसले लेने में स्वतंत्र नहीं है या केंद्र के साथ उसके संबंध खराब हैं, जो ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

Bhagwant Mann Foreign Visit Controversy

7. संघवाद पर खतरा? (Threat to Federalism)

यह मुद्दा सिर्फ भगवंत मान या AAP का नहीं है, यह भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) का है। संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने एक ऐसी व्यवस्था की कल्पना की थी जहां केंद्र मजबूत हो, लेकिन राज्य कमजोर न हों।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों (जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, दिल्ली) और केंद्र के बीच खाई चौड़ी होती जा रही है।

  • राज्यपालों द्वारा बिल रोकना।
  • केंद्रीय एजेंसियों (ED/CBI) का कथित दुरुपयोग।
  • फंड जारी करने में देरी।
  • और अब, भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं देना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं है। राज्य के मुख्यमंत्री जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। उन्हें अपने राज्य के विकास के लिए प्रयास करने का पूरा अधिकार होना चाहिए। केंद्र सरकार को एक ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभानी चाहिए, न कि ‘बिग बॉस’ की। अगर मुख्यमंत्रियों को विदेशी मंचों पर जाने से रोका जाएगा, तो यह भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और राज्यों की ‘पैरा-डिप्लोमेसी’ (Para-diplomacy) को कमजोर करेगा।

8. क्या यह “डबल इंजन” की राजनीति है?

बीजेपी अक्सर चुनावों में “डबल इंजन सरकार” (केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार) का नारा देती है। उनका तर्क होता है कि अगर दोनों जगह एक ही पार्टी होगी तो विकास तेजी से होगा।

विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार जानबूझकर गैर-बीजेपी राज्यों के कामों में अड़ंगा लगाती है ताकि वे जनता के सामने यह साबित कर सकें कि “देखो, दूसरी पार्टी की सरकार काम नहीं कर पा रही है।” AAP का आरोप है कि भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं देना इसी रणनीति का हिस्सा है। वे पंजाब की जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि अगर पंजाब का विकास चाहिए, तो उन्हें केंद्र के साथ चलने वाली सरकार चुननी होगी। यह राजनीति का एक क्रूर चेहरा है जहां जनता के हितों की बलि चढ़ा दी जाती है।

9. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया: जनमत का बंटवारा

इस खबर के आते ही सोशल मीडिया पर #PunjabCM, #BhagwantMann और #CentreGovt ट्रेंड करने लगे। जनमत स्पष्ट रूप से दो भागों में बंटा हुआ है।

समर्थकों का कहना है:

  • “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।”
  • “क्या पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है? सीएम को विदेश जाने से क्यों रोका गया?”
  • “यह तानाशाही है। मोदी जी विपक्ष को खत्म करना चाहते हैं।”

आलोचकों का कहना है:

  • “भगवंत मान को पंजाब में रहकर काम करना चाहिए, विदेश घूमने की क्या जरूरत है?”
  • “पंजाब का खजाना खाली है और सीएम विदेश यात्रा का खर्चा कर रहे हैं, केंद्र ने सही किया।”
  • “शायद सुरक्षा कारणों से रोका गया होगा, हर चीज में राजनीति नहीं देखनी चाहिए।”

लेकिन एक बात स्पष्ट है कि इस मुद्दे ने पंजाब के लोगों की भावनाओं को उभारा है। पंजाब में पहले से ही केंद्र के प्रति (किसान आंदोलन के कारण) अविश्वास की भावना है, और यह घटना उस आग में घी का काम करेगी।

10. भविष्य की राह: अब AAP क्या करेगी?

भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं मिलने के बाद आम आदमी पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है।

कानूनी विकल्प: क्या भगवंत मान इसके खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं? हां, केरल सरकार ने हाल ही में केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की हैं। AAP भी इस मुद्दे को लेकर न्यायपालिका का दरवाजा खटखटा सकती है और पूछ सकती है कि ‘राजनीतिक मंजूरी’ देने के लिए क्या दिशानिर्देश हैं और क्या इसे मनमाने ढंग से नकारा जा सकता है?

सड़क पर संघर्ष: AAP एक आंदोलनकारी पार्टी है। वे इस मुद्दे को लेकर पंजाब के गांवों तक जाएंगे। वे इसे ‘पंजाब की अस्मिता’ (Pride of Punjab) का मुद्दा बनाएंगे। आने वाले चुनावों में (चाहे वह निकाय चुनाव हों या लोकसभा), वे जनता को बताएंगे कि कैसे केंद्र सरकार ने उनके मुख्यमंत्री को रोककर पंजाब का अपमान किया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: हो सकता है कि भगवंत मान अब उन निवेशकों और इजरायली विशेषज्ञों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें करें और दुनिया को दिखाएं कि उन्हें रोका जा सकता है, लेकिन उनके काम को नहीं।

11. पिछले उदाहरण और इतिहास

यह समझना भी जरूरी है कि क्या यह सिर्फ मोदी सरकार के दौरान हो रहा है? इतिहास पर नजर डालें तो कांग्रेस के शासनकाल में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं जब विपक्षी मुख्यमंत्रियों को विदेश जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल की पूर्व वामपंथी सरकार के दौरान ज्योति बसु के कई दौरों को लेकर विवाद हुआ था।

हालांकि, वर्तमान दौर में यह आवृत्ति (Frequency) बहुत बढ़ गई है। ममता बनर्जी को रोम (इटली) जाने से रोका गया, केजरीवाल को सिंगापुर जाने से रोका गया, और अब भगवंत मान को यूके जाने से रोका गया। यह एक व्यवस्थित पैटर्न (Systematic Pattern) की ओर इशारा करता है जो केंद्रवाद (Centralization) को बढ़ावा देता है।

12. कूटनीति बनाम राजनीति: एक संतुलन की जरूरत

भारत एक विशाल देश है। यहां हर राज्य की अपनी जरूरतें हैं और अपनी क्षमताएं हैं। तमिलनाडु को मैन्युफैक्चरिंग के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया से संबंध बनाने की जरूरत हो सकती है, तो पंजाब को कृषि के लिए इजराइल या कनाडा से।

समय की मांग है कि केंद्र सरकार राज्यों को अपनी ‘सब-नेशनल डिप्लोमेसी’ (Sub-national Diplomacy) चलाने के लिए प्रोत्साहित करे। अगर कोई राज्य विदेशी निवेश लाता है, तो अंततः जीडीपी (GDP) भारत की ही बढ़ती है। अगर पंजाब के खेत हरे-भरे होते हैं, तो अन्न का भंडार भारत का ही भरता है।

भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं देने का निर्णय अगर केवल राजनीतिक ईर्ष्या पर आधारित है, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन अगर इसके पीछे कोई गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का कारण है, तो केंद्र सरकार को पारदर्शिता के साथ उसे पंजाब के मुख्यमंत्री और जनता के सामने रखना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।

13. जनता की अदालत में फैसला

अंततः, लोकतंत्र में सबसे बड़ी अदालत जनता की होती है। भगवंत मान के विदेशी दौरे को मंजूरी नहीं मिलने की घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या हम एक सच्चे संघीय ढांचे की ओर बढ़ रहे हैं या एकात्मक शासन की ओर?

पंजाब के लोग यह सब देख रहे हैं। वे देख रहे हैं कि उनका चुना हुआ प्रतिनिधि राज्य के विकास के लिए प्रयास कर रहा है, और कौन उस प्रयास में बाधा बन रहा है। यह घटना केंद्र और पंजाब के रिश्तों में और खटास पैदा करेगी, जो सीमावर्ती राज्य (Border State) होने के नाते राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है।

हमें उम्मीद करनी चाहिए कि आने वाले समय में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और राज्यहित को प्राथमिकता दी जाएगी। भगवंत मान का विमान भले ही उड़ान न भर सका हो, लेकिन इस मुद्दे ने राजनीतिक पारे को आसमान पर पहुंचा दिया है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस पर क्या सफाई देती है और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को किस हद तक ले जाती है।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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