Hormuz

नई दिल्ली/लंदन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारत ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है।

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वार्ता (Iran War Talks) में भारत ने साफ शब्दों में दुनिया को एक कड़वी सच्चाई बताई है। भारत ने कहा है कि हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के तनाव में जान गंवाने वाले नाविक केवल भारतीय थे।

विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम कर रहे कम से कम तीन भारतीय नाविकों की अब तक मौत हो चुकी है और एक गंभीर रूप से घायल है।

आखिर भारत ने वैश्विक मंच पर अचानक इतनी सख्ती क्यों दिखाई? क्या ईरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा की गारंटी लेगा? आइए बिना किसी लाग-लपेट के पूरे मामले की ज़मीनी हकीकत समझते हैं।

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विदेशी जहाजों पर फंसे हैं भारतीय नाविक

पूरी दुनिया जानती है कि मध्य पूर्व का यह समुद्री रास्ता तेल व्यापार की सबसे बड़ी नस है।

युद्ध शुरू होने के बाद से ही इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया गया है। भारत की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि कई विदेशी जहाजों पर भारतीय कर्मचारी काम कर रहे हैं।

जब इन जहाजों पर मिसाइल हमले होते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान भारतीयों को ही उठाना पड़ रहा है।

जयशंकर की कूटनीति से मिली थोड़ी राहत

भारत सरकार लगातार बातचीत के जरिए इस मसले को सुलझाने में लगी है।

हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी नेताओं से सीधी बातचीत की थी। इस कूटनीति का सीधा असर भी दिखा है।

ईरान ने भारत को अपना दोस्त बताते हुए दो भारतीय गैस टैंकरों (शिवालिक और नंदा देवी) को सुरक्षित निकलने का रास्ता दे दिया था। लेकिन अन्य देशों के झंडे वाले जहाजों पर अभी भी खतरा लगातार मंडरा रहा है।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदुसीधे तथ्य
हमले की जगहहर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)
भारतीयों का नुकसान3 नाविकों की मौत, 1 घायल
जहाजों की स्थितिविदेशी झंडे वाले जहाज (समुद्र में फंसे हुए)
भारत की मांगयुद्ध को तुरंत शांत किया जाए (De-escalation)
सुरक्षित निकाले गए जहाजशिवालिक और नंदा देवी (LPG टैंकर)

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एक्सपर्ट की राय: भारत के कड़े बयान का क्या असर होगा?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह बयान कूटनीतिक रूप से बहुत बड़ा कदम है।

अब तक पश्चिमी देश केवल अपने व्यापार और तेल के नुकसान का रोना रो रहे थे। भारत ने दुनिया को याद दिलाया है कि इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत निर्दोष इंसानों को चुकानी पड़ रही है।

इस बयान के बाद ईरान और अमेरिका दोनों पर नागरिक सुरक्षा को लेकर भारी दबाव बनेगा। भारत अपनी तटस्थ नीति पर कायम रहते हुए भी अपने नागरिकों के लिए आवाज़ उठाना अच्छी तरह जानता है।

ईरान युद्ध और भारत से जुड़े आम सवाल (FAQs)

हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कितने भारतीय नाविकों की जान गई है?

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस समुद्री रास्ते में फंसे विदेशी जहाजों पर हमलों के कारण अब तक 3 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक नाविक बुरी तरह घायल है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय युद्ध वार्ता में क्या कड़ा बयान दिया है?

भारत ने स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने कहा है कि इस पूरे युद्ध और तनाव के बीच केवल भारत ही ऐसा देश है जिसने समुद्र में काम कर रहे अपने निर्दोष नाविकों को खोया है।

क्या ईरान भारतीय जहाजों को हर्मुज से निकलने दे रहा है?

हाँ, कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने हाल ही में दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित निकलने दिया था। ईरान ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भारतीय नागरिक उनके सुरक्षित हाथों में हैं।

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