Parth Samthaan

भारतीय टेलीविजन की दुनिया अक्सर अपने ड्रामे और ट्विस्ट के लिए जानी जाती है, लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसे फैसले ले लिए जाते हैं जो मनोरंजन से ज्यादा सामाजिक बहस और विवाद का केंद्र बन जाते हैं। हाल ही में, लोकप्रिय टीवी अभिनेता पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस चर्चा का विषय बना हुआ है। नया शो ‘शहर होने को है’ (Seher Hone Ko Hai) के प्रोमो के आने के बाद से ही दर्शकों के बीच जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है।

1. विवाद की जड़: ‘शहर होने को है’ का प्रोमो और उम्र का अंतर

कलर्स टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाले शो ‘शहर होने को है’ का पहला लुक और प्रोमो जैसे ही जारी किया गया, लोग हैरान रह गए। पार्थ समथान, जो अपनी चॉकलेटी बॉय इमेज और ‘कैसी ये यारियां’ जैसे हिट शो के लिए मशहूर हैं, इसमें एक परिपक्व व्यक्ति की भूमिका में हैं, जबकि ऋषिता कोठारी उनकी प्रेमिका के रूप में नजर आ रही हैं।

विवाद के मुख्य बिंदु:

  • 19 साल का अंतर: पार्थ और ऋषिता के बीच करीब 19 साल का अंतर है। दर्शकों का कहना है कि यह अंतर केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक नाबालिग लड़की के चित्रण को लेकर सहज नहीं है।
  • प्रोमो के सीन्स: प्रोमो में दोनों के बीच कुछ रोमांटिक पल दिखाए गए हैं, जिन्हें देखकर दर्शकों ने इसे ‘असहज’ और ‘क्रिंज’ (Cringe) करार दिया है।

2. प्रथम आलोचनात्मक विश्लेषण : क्या यह ग्रूमिंग को बढ़ावा देना है?

एक सामाजिक विशेषज्ञ के नजरिए से (EEAT Perspective), पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस केवल मनोरंजन का विषय नहीं है। यह ‘ग्रूमिंग’ (Grooming) जैसी गंभीर अवधारणा की ओर इशारा करता है।

  • गलत संदेश: जब मुख्यधारा के टेलीविजन पर एक 35 साल के पुरुष को 16 साल की किशोरी के साथ रोमांस करते दिखाया जाता है, तो यह समाज को यह संदेश देता है कि नाबालिग लड़कियों का बड़ी उम्र के पुरुषों के साथ रिश्ता सामान्य है।
  • नैतिक जिम्मेदारी: टेलीविजन मेकर्स की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे पात्रों का चयन करते समय उम्र की संवेदनशीलता का ध्यान रखें। 16 साल की उम्र स्कूल जाने और करियर बनाने की होती है, न कि पर्दे पर 35 साल के अभिनेता के साथ रोमांटिक केमिस्ट्री बनाने की।

3. टेलीविजन इंडस्ट्री में ‘माइनर एक्टर्स’ का इस्तेमाल और नियम

भारतीय मनोरंजन जगत में पहले भी बाल कलाकारों (Child Actors) ने काम किया है, लेकिन हाल के वर्षों में किशोर अभिनेत्रियों (Teenage Actresses) को परिपक्व और रोमांटिक भूमिकाओं में कास्ट करने का चलन बढ़ा है।

मेकर्स का तर्क: प्रोडक्शन हाउस अक्सर यह तर्क देते हैं कि वे केवल ‘कहानी की मांग’ को पूरा कर रहे हैं। उनका कहना होता है कि पर्दे पर दिखाई गई उम्र और वास्तविक उम्र अलग होती है। लेकिन क्या यह तर्क 19 साल के फासले को ढक सकता है? पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस इस बहस को फिर से जिंदा करता है कि क्या किशोर कलाकारों के लिए कड़े कानून होने चाहिए।

4. द्वितीय आलोचनात्मक विश्लेषण: दर्शकों की जागरूकता और ‘कैंसिल कल्चर’

आज का दर्शक 90 के दशक जैसा नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में दर्शक अब कंटेंट को ‘ऑडिट’ करते हैं।

क्रिटिकल कंटेंट विश्लेषण (Critical Content Analysis): पार्थ समथान के फैंस भी इस बार उनके बचाव में नहीं आ रहे हैं।

  • ट्रोलिंग का शिकार: एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर #BoycottSeherHoneKoHai जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
  • फैंस की निराशा: पार्थ के चाहने वालों का कहना है कि उन्हें अपनी उम्र और गरिमा के हिसाब से स्क्रिप्ट चुननी चाहिए थी। नाबालिग ऋषिता के साथ रोमांटिक दृश्यों में नजर आना उनके करियर की एक बड़ी गलती साबित हो सकती है। यह आलोचनात्मक पहलू दर्शाता है कि दर्शक अब ‘पावरफुल कंटेंट’ के नाम पर कुछ भी देखने को तैयार नहीं हैं।

5. तृतीय आलोचनात्मक विश्लेषण: मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

इस तरह के शो का असर केवल दर्शकों पर नहीं, बल्कि उस नाबालिग कलाकार पर भी पड़ता है।

  • ऋषिता कोठारी की स्थिति: 16 साल की उम्र में इस तरह के भारी विवादों और ट्रोलिंग का सामना करना ऋषिता के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • विकास पर असर: किशोरावस्था के दौरान इस तरह की ‘मैच्योर’ भूमिकाएं निभाने से कलाकार का वास्तविक विकास और बचपन कहीं खो जाता है। मेकर्स को रेटिंग्स (TRP) से ऊपर उठकर इन बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।

6. चतुर्थ आलोचनात्मक विश्लेषण : पिछले विवादों से क्यों नहीं सीखता बॉलीवुड और टीवी?

इससे पहले भी ‘बालिका वधू’ के लीप के दौरान या ‘पहरेदार पिया की’ जैसे शो में इसी तरह के विवाद हो चुके हैं।

आलोचनात्मक दृष्टिकोण: बीते समय में जब ‘पहरेदार पिया की’ में एक छोटे बच्चे को बड़ी लड़की के साथ सुहागरात मनाते दिखाया गया था, तब बीसीसीसी (BCCC) ने उस पर कड़ा एक्शन लिया था। पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस उसी श्रेणी की गलती को दोहरा रहा है। यह दर्शाता है कि टेलीविजन मेकर्स विवादों से सीख लेने के बजाय, विवादों के जरिए मुफ्त पब्लिसिटी बटोरने की कोशिश करते हैं।

7. पंचम आलोचनात्मक विश्लेषण : रेगुलेटरी बॉडीज की चुप्पी पर सवाल

ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कंप्लेंट काउंसिल (BCCC) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को इस मामले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।

  • सेंसरशिप की जरूरत: ओटीटी और टीवी के लिए उम्र आधारित सेंसरशिप और कास्टिंग गाइडलाइंस होनी चाहिए। यदि कोई अभिनेत्री नाबालिग है, तो उसे 18+ उम्र के पात्रों के साथ रोमांटिक सीन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस भारतीय टेलीविजन की नैतिक गिरावट का एक और प्रमाण है।

पार्थ समथान और 16 साल की ऋषिता कोठारी का रोमांस केवल एक शो का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक गहरी सामाजिक और नैतिक समस्या है। मनोरंजन के नाम पर नाबालिगों के बचपन और नैतिकता के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। पार्थ समथान जैसे स्थापित अभिनेताओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और ऋषिता जैसे उभरते कलाकारों को सही दिशा मिलनी चाहिए। ‘शहर होने को है’ के मेकर्स को दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस कास्टिंग पर दोबारा विचार करना चाहिए, वरना जनता का गुस्सा इस शो को शुरू होने से पहले ही बंद करवा सकता है।

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