बस्तर की धरती पर दशकों से जारी लाल आतंक के खात्मे की दिशा में आज एक ऐसी ऐतिहासिक सफलता मिली है, जिसने नक्सली विचारधारा की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से महज 20 दिन पहले, छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में 108 माओवादियों ने एक साथ हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है।
1. ऐतिहासिक आत्मसमर्पण: 108 माओवादियों ने चुनी ‘नई राह’
बुधवार, 11 मार्च 2026 को जगदलपुर (बस्तर संभाग मुख्यालय) में आयोजित एक भव्य समारोह में, डंडाकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण करने वालों का विवरण:
- कुल संख्या: 108 माओवादी (64 पुरुष और 44 महिलाएं)।
- इनामी राशि: इन सभी कैडरों पर सामूहिक रूप से 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
- प्रमुख नाम: आत्मसमर्पण करने वालों में 6 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM) शामिल हैं, जिनमें राहुल तेलम, पांडु कोवासी और झितरू ओयाम जैसे बड़े नाम हैं।
- क्षेत्रवार विवरण: सबसे अधिक 37 कैडर बीजापुर से, 30 दंतेवाड़ा से और 18 सुकमा जिले से हैं।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. के अनुसार, यह आत्मसमर्पण नक्सलियों की गिरती सैन्य क्षमता और विचारधारा के प्रति बढ़ते मोहभंग का स्पष्ट संकेत है।

2. देश का सबसे बड़ा नक्सल रिकवरी: कैश, सोना और हथियारों का जखीरा
इस आत्मसमर्पण के साथ ही सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के उन गुप्त ठिकानों (Dumps) पर छापा मारा, जिनकी जानकारी आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने दी थी। यह रिकवरी भारतीय आतंकवाद विरोधी इतिहास में ‘अनसुनी’ मानी जा रही है।
बरामदगी की सूची:
- नकद राशि: 3.61 करोड़ रुपये (जो नक्सलियों ने लेवी और वसूली के जरिए बीजापुर के इंद्रावती क्षेत्र से जमा किए थे)।
- कीमती धातु: 1 किलोग्राम सोना (जिसकी कीमत लगभग 1.64 करोड़ रुपये है)।
- हथियार (Total 101): 7 एके-47 राइफल, 10 इंसास (INSAS), 5 एसएलआर (SLR), 4 लाइट मशीन गन (LMG) और 11 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (BGL)।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और आधुनिक हथियारों का हाथ से निकलना माओवादी संगठन की कमर तोड़ने के समान है। यह धन जंगलों में अपनी पकड़ बनाए रखने और नए लड़कों की भर्ती के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
3. सफलता का मंत्र: ‘पूना नारघम’ और ‘पुनर्वास नीति 2025’
छत्तीसगढ़ सरकार की इस बड़ी कामयाबी के पीछे ‘पुनर्वास से कायाकल्प’ (Poona Margham – Rehabilitation to Rejuvenation) अभियान है, जिसे जुलाई 2025 में शुरू किया गया था।
क्रिटिकल कंटेंट विश्लेषण (Critical Content Analysis): जब हम बस्तर माओवादी आत्मसमर्पण की बात करते हैं, तो हमें सरकार की नई ‘नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति 2025’ को समझना होगा।
- बढ़ा हुआ प्रोत्साहन: अब हथियार डालने पर एक एलएमजी (LMG) के लिए 5 लाख, एके-47 के लिए 4 लाख और इंसास के लिए 2 लाख रुपये का तत्काल नकद इनाम दिया जाता है।
- आवास और जमीन: इनामी नक्सलियों को शहर में 4 डेसीमल जमीन या ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हेक्टेयर कृषि भूमि दी जा रही है।
- कानूनी रियायत: राज्य कैबिनेट ने आत्मसमर्पण करने वाले उन नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी के लिए एक संरचित तंत्र को मंजूरी दी है, जो मुख्यधारा में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
यह नीति केवल हथियार डलवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बस्तर फाइटर्स और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) में भर्ती कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका भी प्रदान कर रही है।
4. गृह मंत्रालय की डेडलाइन: 31 मार्च 2026 और अंतिम प्रहार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार दोहराया है कि 31 मार्च 2026 तक भारत से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पिछले 26 महीनों में राज्य में कुल 2,714 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा है।

वर्तमान स्थिति: सुरक्षा बलों के दबाव और ‘प्रेसर बम’ जैसे अभियानों के कारण अब बस्तर में गिने-चुने सशस्त्र कैडर ही बचे हैं। बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर अब माओवादियों के अंतिम गढ़ रह गए हैं। आज के इस बड़े आत्मसमर्पण के बाद, डंडाकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति में अब केवल दो केंद्रीय समिति सदस्य ही वांछित बचे हैं।
5. सामाजिक प्रभाव: बस्तर में अमन की नई सुबह
नक्सलवाद के खात्मे का मतलब केवल गोलियों का बंद होना नहीं है, बल्कि यह बस्तर के आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसे बुनियादी अधिकारों की बहाली है।
- आर्थिक विकास: जंगलों में जो जमीन बारूद के लिए जानी जाती थी, अब वहां ‘कोदो-कुटकी’ और ‘रागी’ (Millets) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- शिक्षा: आत्मसमर्पित नक्सलियों के बच्चों को ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों और ‘एकलव्य’ स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।
जगदलपुर में 108 नक्सलियों का यह ऐतिहासिक आत्मसमर्पण और 3.61 करोड़ की रिकॉर्ड बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि बस्तर माओवादी आत्मसमर्पण अब एक लहर बन चुका है। नक्सली विचारधारा अब अप्रासंगिक हो चुकी है और जंगल के लड़ाके अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब एक वास्तविकता नजर आ रही है। सुरक्षा बलों के साहस और सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति ने मिलकर बस्तर के ‘लाल आतंक’ को इतिहास बनाने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा दिया है।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
