भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग (Golden Era) की बात हो और वैजयंतीमाला (Vyjayanthimala) का नाम न आए, यह नामुमकिन है। वह न केवल एक उत्कृष्ट अभिनेत्री थीं, बल्कि एक ऐसी नृत्यांगना भी थीं, जिन्होंने बॉलीवुड में शास्त्रीय नृत्य (Classical Dance) को एक नई पहचान और गरिमा प्रदान की। “ट्विंकल टोज़” (Twinkle Toes) के नाम से मशहूर वैजयंतीमाला भारतीय परदे की पहली ‘फीमेल सुपरस्टार’ मानी जाती हैं।
1. प्रारंभिक जीवन और कलात्मक जड़ें: एक सुपरस्टार का जन्म
वैजयंतीमाला का जन्म 13 अगस्त 1933 को मद्रास (अब चेन्नई) के एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके घर का माहौल पूरी तरह से कलात्मक और आध्यात्मिक था। उनकी माँ, वसुंधरा देवी, 1940 के दशक की एक प्रसिद्ध तमिल अभिनेत्री थीं।
बचपन और पहला नृत्य प्रदर्शन: हैरानी की बात यह है कि वैजयंतीमाला ने महज 7 साल की उम्र में वेटिकन सिटी में पोप पायस XII (Pope Pius XII) के सामने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी थी। उनकी परवरिश उनकी नानी यदुगिरी देवी ने की, जो कला के प्रति बहुत सख्त और अनुशासित थीं। उन्होंने सुनिश्चित किया कि वैजयंतीमाला न केवल नृत्य में बल्कि कर्नाटक संगीत (Carnatic Music) में भी पारंगत हों।
वैजयंतीमाला ने गुरु वज़ुवूर रमैया पिल्लई से भरतनाट्यम सीखा। उनके जीवन की नींव इन्हीं शास्त्रीय मूल्यों पर टिकी थी, जिसने बाद में उन्हें दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना के रूप में विश्वविख्यात बनाया।
2. दक्षिण से उत्तर तक का सफर: पहली भारतीय ‘फीमेल सुपरस्टार’
1949 में, मात्र 16 वर्ष की आयु में, वैजयंतीमाला ने तमिल फिल्म ‘वज़काई’ (Vaazhkai) से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। यह फिल्म जबरदस्त हिट रही और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
बॉलीवुड में ‘बहार’: 1951 में फिल्म ‘बहार’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। उस दौर में दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों के लिए हिंदी बोलना और डबिंग करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन वैजयंतीमाला ने अपनी मेहनत से हिंदी पर पकड़ बनाई और वह पहली ऐसी साउथ इंडियन एक्ट्रेस बनीं जो बिना किसी लहजे (Accent) के स्पष्ट हिंदी बोलती थीं।
‘नागिन’ (1954) और नृत्य का जादू: फिल्म ‘नागिन’ ने वैजयंतीमाला को रातों-रात नेशनल क्रश बना दिया। इस फिल्म का गाना “मन डोले, मेरा तन डोले” आज भी उनके बेहतरीन नृत्य के लिए याद किया जाता है। उन्होंने बॉलीवुड में नृत्य को केवल एक मनोरंजन का जरिया नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक ‘कला’ के रूप में स्थापित किया। दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना होने के नाते उन्होंने सेमी-क्लासिकल डांस को मुख्यधारा के सिनेमा का हिस्सा बनाया।

3. सिनेमाई उपलब्धियां: देवदास से संगम तक का सफर
वैजयंतीमाला का अभिनय करियर सफलताओं और पुरस्कारों की एक लंबी गाथा है। उन्होंने दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद जैसे उस दौर के सभी महानायकों के साथ काम किया।
- देवदास (1955): बिमल रॉय की इस फिल्म में उन्होंने ‘चंद्रमुखी’ का किरदार निभाया। हालांकि उन्हें इसके लिए फिल्मफेयर ‘सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री’ का पुरस्कार दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि चंद्रमुखी का किरदार ‘पारो’ से कम महत्वपूर्ण नहीं है, और वह मुख्य अभिनेत्री हैं। यह उनके स्वाभिमान और कला के प्रति निष्ठा का उदाहरण था।
- मधुमती (1958): पुनर्जन्म पर आधारित इस फिल्म में उनकी और दिलीप कुमार की जोड़ी को खूब सराहा गया।
- गंगा जमुना (1961): एक देहाती लड़की ‘धन्नो’ के रूप में उन्होंने अपने अभिनय की विविधता साबित की। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।
- संगम (1964): राज कपूर के साथ इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। “बुड्ढा मिल गया” गाने में उनकी चपलता और अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना के रूप में उनका सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने हर फिल्म में अपने नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को जीवंत रखा।
4. नृत्य के प्रति अटूट समर्पण: भरतनाट्यम का वैश्विक चेहरा
अभिनय की दुनिया से 1970 में संन्यास लेने के बाद, वैजयंतीमाला ने खुद को पूरी तरह से नृत्य के प्रति समर्पित कर दिया। उनके लिए नृत्य केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक ‘साधना’ है।
परंपरा के प्रति निष्ठा: आजकल के फ्यूजन और आधुनिक नृत्य के दौर में भी वैजयंतीमाला भरतनाट्यम की शुद्धता (Purity) को बनाए रखने की पक्षधर रही हैं। उन्होंने भूली-बिसरी मंदिर नृत्य शैलियों पर शोध किया और उन्हें पुनर्जीवित किया।
90 वर्ष की आयु में, फरवरी 2024 में अयोध्या के राम मंदिर में ‘राग सेवा’ के तहत उनकी भरतनाट्यम प्रस्तुति ने दुनिया को हैरान कर दिया। वह इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि कला की कोई उम्र नहीं होती। दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना के रूप में उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शिका है।
5. वैजयंतीमाला का राजनीतिक सफर: संसद तक की यात्रा
सिनेमा और कला के अलावा, वैजयंतीमाला ने सार्वजनिक सेवा में भी अपना योगदान दिया।
- वह 1980 के दशक में राजनीति में सक्रिय हुईं।
- वह तीन बार संसद सदस्य (MP) रहीं—दो बार लोकसभा के लिए और एक बार राज्यसभा के लिए नामांकित हुईं। उन्होंने संसद में भी कला और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, बाद में वैचारिक मतभेदों के कारण उन्होंने राजनीति छोड़ दी, लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी हमेशा बनी रही।

6. सम्मान और पुरस्कार: राष्ट्र की ओर से कृतज्ञता
वैजयंतीमाला के असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा है:
- पद्म श्री (1968): कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1982): भरतनाट्यम के क्षेत्र में उनकी साधना के लिए।
- पद्म विभूषण (2024): उनके जीवनभर की उपलब्धियों और भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए।
इन पुरस्कारों के अलावा, उन्हें पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिले हैं। दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना वैजयंतीमाला के नाम के साथ जुड़े ये सम्मान उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा की गवाही देते हैं।
7. अनकहा सच: व्यक्तिगत जीवन और विवादों से दूरी
वैजयंतीमाला का जीवन काफी हद तक निजी रहा है। 1968 में उन्होंने डॉ. चमनलाल बाली से शादी की और चेन्नई बस गईं। शादी के बाद उन्होंने फिल्मों को अलविदा कह दिया ताकि वह अपने परिवार और नृत्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
उनकी आत्मकथा ‘बॉन्डिंग’ (Bonding) में उन्होंने राज कपूर के साथ अपने कथित संबंधों की खबरों को खारिज किया और स्पष्ट किया कि वह हमेशा से अपनी कला और परिवार के प्रति ईमानदार रही हैं। वह एक शुद्ध शाकाहारी और धर्मपरायण वैष्णव हिंदू हैं, जो हर प्रदर्शन से पहले माँ सरस्वती की पूजा करती हैं।
वैजयंतीमाला केवल एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक युग हैं। उन्होंने भारतीय नारी की गरिमा, कला की शुद्धता और पेशेवर उत्कृष्टता का जो मानक स्थापित किया है, उसे छू पाना कठिन है। दिग्गज अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना के रूप में उनकी यात्रा हमें सिखाती है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही सच्ची महानता है।
आज 92 वर्ष की आयु में भी उनकी आँखों की चमक और नृत्य की मुद्राएँ वैसी ही प्रभावशाली हैं, जैसी ‘नागिन’ या ‘मधुमती’ के समय थीं। वह वास्तव में भारतीय सिनेमा की शाश्वत रानी (Eternal Queen) हैं।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
