मध्य पूर्व (Middle East) के इतिहास में मार्च 2026 का महीना एक ऐसे भू-राजनीतिक भूकंप के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान (Islamic Republic of Iran) की पूरी दिशा और दशा को बदलकर रख दिया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों (जिन्हें ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ कहा गया) में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, देश में पैदा हुआ नेतृत्व का शून्य अब भर गया है।
8 मार्च 2026 को, ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (Assembly of Experts) ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसले में अयातुल्लाह खामेनेई के 56 वर्षीय मंझले बेटे, मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei), को देश का तीसरा ‘सर्वोच्च नेता’ (Supreme Leader) घोषित कर दिया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद 47 वर्षों के इतिहास में यह सत्ता का केवल दूसरा हस्तांतरण है।
1. कौन हैं मोजतबा खामेनेई? (Early Life and Background)
मोजतबा हुसैनी खामेनेई, जो अब तक ईरान की राजनीति में एक ‘शैडो फिगर’ (छायादार व्यक्तित्व) माने जाते थे, अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली और विवादास्पद नेताओं की सूची में आ गए हैं। उनका जीवन एक सामान्य मौलवी से लेकर देश की सर्वोच्च सत्ता तक पहुंचने की एक जटिल कहानी है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन: मोजतबा का जन्म 8 सितंबर 1969 को पूर्वोत्तर ईरान के पवित्र शहर मशहद (Mashhad) में हुआ था। वह अयातुल्लाह अली खामेनेई और मंसूरेह खोजस्तेह बघेरजादेह की छह संतानों में से दूसरे बेटे हैं। उनका बचपन एक ऐसे समय में बीता जब उनके पिता शाह मोहम्मद रजा पहलवी (Shah Mohammad Reza Pahlavi) के राजशाही शासन के खिलाफ एक प्रमुख क्रांतिकारी के रूप में उभर रहे थे। बचपन के शुरुआती सात साल उन्होंने उत्तर-पश्चिमी ईरान के सरदाश्त और महाबाद शहरों में बिताए।
शिक्षा और सैन्य अनुभव: उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा तेहरान के प्रतिष्ठित ‘अलवी हाई स्कूल’ (Alavi High School) से पूरी की। यह वही स्कूल है जिसने ईरान के कई शीर्ष नेताओं (जैसे पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़) को आकार दिया है। 1987 में, 17 वर्ष की आयु में स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के तुरंत बाद, मोजतबा ने ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) में प्रवेश लिया। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध (1980-1988) के अंतिम वर्षों में ‘हबीब बिन मुजाहिर बटालियन’ के हिस्से के रूप में मोर्चे पर लड़ाई लड़ी। उन्होंने ऑपरेशन बैत-उल-मुकद्दस 2, ऑपरेशन डॉन 10 और ऑपरेशन मरसाद जैसे प्रमुख सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। इस सैन्य अनुभव ने उन्हें IRGC के कमांडरों के साथ गहरे और स्थायी संबंध बनाने में मदद की।
धार्मिक और कूटनीतिक शिक्षा: युद्ध के बाद, मोजतबा ने शिया धर्मशास्त्र के प्रमुख केंद्र कोम (Qom) शहर में अपना रुख किया। वहां उन्होंने अपने पिता और अयातुल्लाह महमूद हाशमी शाहरौदी, अयातुल्लाह लोतफुल्लाह सफी गोलपायगानी और मोहम्मद-ताकी मेस्बाह-यज़्दी जैसे प्रमुख रूढ़िवादी विद्वानों के मार्गदर्शन में इस्लामी न्यायशास्त्र (Islamic Jurisprudence) का अध्ययन किया। उन्हें अरबी और अंग्रेजी भाषाओं पर अच्छी पकड़ है और उन्होंने मनोविज्ञान (Psychology) का भी विशेष अध्ययन किया है।
2. परदे के पीछे का शक्ति केंद्र: “मिनी सुप्रीम लीडर” (The Shadow Power Broker)
मोजतबा खामेनेई की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उन्होंने कभी भी कोई औपचारिक सरकारी पद, निर्वाचित पद या कार्यकारी कार्यालय नहीं संभाला। उन्होंने कोई सार्वजनिक भाषण नहीं दिया, शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व नहीं किया और मीडिया को कोई साक्षात्कार नहीं दिया। कई ईरानियों ने तो दशकों तक उनकी आवाज तक नहीं सुनी थी। फिर भी, वे ईरान की व्यवस्था के भीतर सबसे प्रभावशाली व्यक्ति बन गए।
सर्वोच्च नेता के कार्यालय पर नियंत्रण: वर्षों तक, मोजतबा ने अपने पिता के ‘सर्वोच्च नेता के कार्यालय’ (Office of the Supreme Leader) में ‘डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ’ (राजनीतिक और सुरक्षा मामले) के रूप में कार्य किया। वे अपने पिता तक पहुंचने वाले हर रास्ते के ‘गेटकीपर’ (Gatekeeper) थे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उन्होंने पर्दे के पीछे से राजनीतिक और सुरक्षा निर्णयों को आकार दिया, जिसके कारण उन्हें पश्चिमी थिंक-टैंक अक्सर “मिनी सुप्रीम लीडर” कहते थे।
IRGC और बासिज (Basij) के साथ गठबंधन: मोजतबा की असली ताकत देश के सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों, विशेषकर IRGC और स्वयंसेवक अर्धसैनिक बल ‘बासिज’ (Basij) के साथ उनके गहरे संबंधों में निहित है। 2009 के विवादास्पद राष्ट्रपति चुनावों और 2022 के सरकार विरोधी प्रदर्शनों (महसा अमिनी विरोध) के दौरान, विरोधियों को कुचलने के लिए की गई क्रूर कार्रवाई के पीछे मोजतबा खामेनेई और उनके विश्वासपात्र होसैन तायब (IRGC इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख) का ही दिमाग माना जाता है। इसी प्रभाव के कारण 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury Department) ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिए थे।

धार्मिक पदोन्नति (Clerical Elevation): सर्वोच्च नेता बनने के लिए इस्लामी न्यायशास्त्र में एक उच्च पद होना आवश्यक है। मोजतबा लंबे समय तक ‘होजत-उल-इस्लाम’ (एक मध्य-स्तरीय मौलवी पद) रहे। लेकिन सत्ता हस्तांतरण की जमीन तैयार करने के लिए, उन्होंने कोम में ‘दर्स-ए खाजेर’ (dars-e kharej – इस्लामी शिक्षा का उच्चतम स्तर) पढ़ाना शुरू किया। अगस्त 2022 में, कोम के मदरसों से जुड़ी मीडिया ने उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘अयातुल्लाह’ (Ayatollah) कहकर संबोधित करना शुरू कर दिया, जो उनके उत्तराधिकार की दिशा में एक स्पष्ट संकेत था।
3. ईरान के संविधान में उत्तराधिकार की प्रक्रिया और ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (The Selection Process)
मोजतबा खामेनेई का चुनाव कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि यह ईरान के संविधान में निहित एक जटिल प्रक्रिया का हिस्सा है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या के बाद, इस प्रक्रिया को युद्ध की भयंकर परिस्थितियों के बीच अंजाम दिया गया।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (Assembly of Experts): ईरान के संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार, सर्वोच्च नेता की नियुक्ति का अधिकार ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (Majles-e Khobregan-e Rahbari) के पास है। यह 88 वरिष्ठ इस्लामी न्यायविदों और मौलवियों का एक निकाय है, जिन्हें जनता द्वारा 8 साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। (हालांकि, इन उम्मीदवारों को पहले ‘गार्जियन काउंसिल’ द्वारा परखा और स्वीकृत किया जाता है, जिसके सदस्यों की नियुक्ति स्वयं सर्वोच्च नेता करते हैं)।
संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार, सर्वोच्च नेता के लिए उम्मीदवार में ये योग्यताएं होनी चाहिए:
- इस्लामी छात्रवृत्ति और न्यायशास्त्र (Fiqh) का गहरा ज्ञान।
- न्याय, पवित्रता और उच्च चरित्र।
- सही राजनीतिक और सामाजिक दूरदृष्टि, विवेक, साहस, प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व के लिए पर्याप्त योग्यता।
वैकल्पिक नेतृत्व परिषद (Interim Leadership Council): 28 फरवरी को जब अली खामेनेई की मृत्यु हुई, तो संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत तुरंत एक ‘अंतरिम नेतृत्व परिषद’ का गठन किया गया। इस 3-सदस्यीय परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian), न्यायपालिका के प्रमुख गोलम-होसैन मोहसेनी ईजेई (Gholamhossein Mohseni Ejei) और गार्जियन काउंसिल के एक वरिष्ठ मौलवी अलिरेज़ा अराफ़ी शामिल थे। इस परिषद ने तब तक देश का संचालन किया जब तक कि असेंबली ने अपना निर्णय नहीं सुना दिया।
वोटिंग और सुरक्षा चुनौतियां: रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल द्वारा कोम और तेहरान में की जा रही भारी बमबारी के कारण असेंबली की बैठकें गुप्त और सुरक्षित स्थानों पर, और कुछ हद तक वर्चुअली (Virtually) आयोजित की गईं। इजरायली सेना ने खुले तौर पर धमकी दी थी कि असेंबली की बैठक में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाया जाएगा। इन असाधारण युद्धकालीन परिस्थितियों के बीच, 88 सदस्यीय असेंबली ने दो-तिहाई कोरम (Quorum) के साथ बैठक की और पूर्ण बहुमत से मोजतबा खामेनेई को अपना नया नेता चुन लिया।

4. एक विरोधाभास: इस्लामिक रिपब्लिक में वंशानुगत शासन? (The Hereditary Gamble)
मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के मूल सिद्धांतों पर एक बहुत बड़ा वैचारिक प्रहार है।
राजशाही के खिलाफ बनी व्यवस्था में ‘राजशाही’: अयातुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी (Ayatollah Ruhollah Khomeini) ने 1979 में शाह के खिलाफ जो क्रांति की थी, उसका मुख्य नारा था कि वंशानुगत सत्ता (Dynastic Rule) इस्लाम के खिलाफ है। ईरान के राजनीतिक परिदृश्य में ‘विलायत-ए-फकीह’ (Velayat-e Faqih – इस्लामी न्यायविद् का शासन) की स्थापना इसी आधार पर की गई थी कि शासन योग्यता के आधार पर होगा, खून के रिश्ते के आधार पर नहीं।
स्वयं अली खामेनेई ने भी अतीत में वंशानुगत उत्तराधिकार का विरोध किया था। लेकिन मोजतबा की नियुक्ति ने ईरान के आलोचकों और सुधारवादी (Reformist) धड़े को यह कहने का मौका दे दिया है कि ईरान वापस उसी राजशाही (Pahlavi style dictatorship) की ओर लौट गया है, जिसे उखाड़ फेंकने का उसने दावा किया था।
IRGC का दबाव: कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों (जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट) का मानना है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने यह फैसला स्वतंत्र रूप से नहीं लिया है। शक्तिशाली IRGC ने मोजतबा के नाम पर मुहर लगाने के लिए मौलवियों पर भारी दबाव डाला। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ईरान विशेषज्ञ वली नस्र (Vali Nasr) के अनुसार, सैन्य और सुरक्षा तंत्र को एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता थी जो उनके साथ गहराई से जुड़ा हो और जो इस अभूतपूर्व संकट (अमेरिका-इजरायल युद्ध) में सुरक्षा तंत्र के समन्वय को बनाए रख सके। मोजतबा इस खांचे में बिल्कुल फिट बैठते हैं।
5. व्यक्तिगत त्रासदी और 2026 का महायुद्ध (Personal Loss Amidst National Crisis)
मोजतबा खामेनेई ने ऐसे समय में सत्ता संभाली है जब ईरान अपनी स्थापना के बाद से सबसे बड़े अस्तित्वगत संकट (Existential Crisis) का सामना कर रहा है।
28 फरवरी का वह मनहूस दिन: अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान में खामेनेई परिवार के आवासीय परिसर पर गिराए गए बंकर-बस्टर बमों ने केवल उनके पिता की ही जान नहीं ली। ईरानी राज्य मीडिया और आधिकारिक बयानों के अनुसार, इस भीषण हमले में मोजतबा की पत्नी जहरा हद्दाद-आदेल (Zahra Haddad-Adel), उनकी मां मंसूरेह, उनकी एक बहन और उनके स्वयं के बेटों में से एक की दर्दनाक मृत्यु हो गई। मोजतबा संयोगवश उस समय परिसर में मौजूद नहीं थे और बच गए।
अपनी पत्नी (जो एक प्रमुख रूढ़िवादी राजनेता घोलाम-अली हद्दाद-आदेल की बेटी थीं) और लगभग पूरे परिवार को एक ही झटके में खो देने का यह व्यक्तिगत आघात मोजतबा की भविष्य की नीतियों और अमेरिका/इजरायल के प्रति उनके दृष्टिकोण (Hardline approach) को और भी अधिक आक्रामक बना सकता है। वे अब बदला लेने की व्यक्तिगत और राष्ट्रीय, दोनों भावनाएं लेकर सर्वोच्च कुर्सी पर बैठे हैं।
6. विदेशी संपत्तियों का आरोप: क्या मोजतबा के पास है एक गुप्त अरबपति साम्राज्य? (The Alleged Global Wealth)
एक तरफ मोजतबा को एक धार्मिक और सैन्य विचारक के रूप में पेश किया जाता है, वहीं दूसरी ओर उनके आलोचक और अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ता उनके एक विशाल और गुप्त वित्तीय साम्राज्य की ओर इशारा करते हैं।
लंदन से दुबई तक संपत्तियां: मार्च 2026 में सामने आई ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद मोजतबा खामेनेई ने कथित तौर पर यूरोप और मध्य पूर्व में अरबों डॉलर का संपत्ति नेटवर्क (Global Property Empire) खड़ा किया है।
- लंदन की ‘बिलियनेयर्स रो’: बताया जाता है कि लंदन के सबसे पॉश इलाके ‘द बिशप एवेन्यू’ (The Bishops Avenue) में मोजतबा से जुड़ी शेल कंपनियों के माध्यम से 33.7 मिलियन पाउंड की हवेली खरीदी गई है। यूके में उनकी कुल अचल संपत्ति 138 मिलियन डॉलर से अधिक आंकी गई है।
- दुबई और यूरोप: नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों में दुबई के विला, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में लग्जरी होटल, स्पेन के मैलोर्का और टोरंटो के फोर सीजन्स में पेंटहाउस (जिसे 2020 में बेचा गया) शामिल होने का दावा किया गया है।
अली अंसारी और शेल कंपनियां: माना जाता है कि यह सारा पैसा ईरान के तेल व्यापार (Oil Trade) से निकाला गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाने के लिए ईरानी व्यवसायी अली अंसारी जैसे बिचौलियों और ‘शेल कंपनियों’ (Shell companies) के जटिल नेटवर्क के जरिए स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और यूएई के बैंकों में घुमाया गया। हालांकि अंसारी ने इन दावों का खंडन किया है, लेकिन ये खुलासे ईरान की आम जनता (जो भयंकर मुद्रास्फीति और गरीबी से जूझ रही है) के बीच नए सर्वोच्च नेता की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

7. मोजतबा खामेनेई के सामने 4 सबसे बड़ी और ऐतिहासिक चुनौतियां
देश के सर्वोच्च नेता (Rahbar) के रूप में, मोजतबा के पास अपार शक्तियां हैं। वे गार्जियन काउंसिल के आधे सदस्यों, न्यायपालिका के प्रमुख, राज्य प्रसारण एजेंसी (State TV) के प्रमुख और सशस्त्र बलों (IRGC और सेना) के शीर्ष कमांडरों की नियुक्ति और बर्खास्तगी का अधिकार रखते हैं। लेकिन इन शक्तियों के साथ उन पर चुनौतियों का पहाड़ भी है:
A. युद्ध का प्रबंधन और राज्य का अस्तित्व बचाना: उनकी सबसे तात्कालिक और बड़ी चुनौती इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे पूर्ण-स्तरीय युद्ध का प्रबंधन करना है। इजरायली सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि मोजतबा भी उनके निशाने पर हैं। ईरान को अपनी सैन्य क्षमता (विशेष रूप से मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क) का इस्तेमाल इस तरह करना होगा कि वह दुश्मनों को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सके, बिना देश को पूरी तरह से नष्ट किए।
B. आंतरिक वैधता और जनता का विश्वास: ईरान की जनता पिछले कई सालों से आर्थिक प्रतिबंधों, हिजाब विरोधी प्रदर्शनों और दमनकारी नीतियों के कारण सरकार से नाराज है। मोजतबा, जिन्हें जनता एक पर्दे के पीछे रहने वाले क्रूर व्यक्ति के रूप में जानती है, उन्हें यह साबित करना होगा कि उनका नेतृत्व एक ‘राजशाही’ नहीं है, बल्कि इस्लामी क्रांति की निरंतरता है। यदि वे जनता को शांत करने में विफल रहते हैं, तो देश के भीतर एक नए गृहयुद्ध (Civil unrest) की चिंगारी भड़क सकती है।
C. सेना (IRGC) और मौलवियों के बीच संतुलन: अटलांटिक काउंसिल (Atlantic Council) की रिपोर्ट के अनुसार, मोजतबा वैचारिक रूप से अति-कट्टरपंथी (Ultraconservative) धड़े से आते हैं। यह चिंता जताई जा रही है कि वे अपने पिता की तुलना में ‘आईआरजीसी की ताकत पर बहुत अधिक निर्भर’ (Lean heavily on IRGC) रहेंगे। यदि IRGC की ताकत बहुत अधिक बढ़ गई, तो कोम के पारंपरिक मौलवी हाशिए पर चले जाएंगे, जिससे सत्ता के भीतर ही दरारें पैदा हो सकती हैं।
D. अर्थव्यवस्था और वैश्विक कूटनीति: ईरान की मुद्रा (Rial) अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर है। मोजतबा को एक तरफ प्रतिबंधों का सामना करना है और दूसरी तरफ रूस और चीन (Russia and China) के साथ अपने रणनीतिक गठबंधनों को मजबूत करना है ताकि देश की जीवनरेखा बनी रहे। कुछ राजनेताओं (जैसे अब्दोलरेज़ा दावरी) का मानना है कि मोजतबा एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए सऊदी अरब के ‘मोहम्मद बिन सलमान’ (MBS) की तरह एक रूढ़िवादी ढांचे के भीतर कुछ सामाजिक सुधार ला सकते हैं, ताकि युवाओं का गुस्सा शांत किया जा सके।
मोजतबा खामेनेई का ईरान के तीसरे सर्वोच्च नेता के रूप में राज्याभिषेक केवल एक नेतृत्व परिवर्तन नहीं है; यह एक नए, अधिक सैन्यीकृत और अप्रत्याशित ईरान (Unpredictable Iran) का उदय है। अपने पिता की विरासत, IRGC के समर्थन और परिवार को खोने के गहरे घाव के साथ, मोजतबा के हाथ में अब एक ऐसे देश की कमान है जो चारों ओर से आग में घिरा है।
आने वाले दिन, हफ्ते और महीने यह तय करेंगे कि मोजतबा खामेनेई ईरान को एक सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाते हैं, या उनकी वंशानुगत ताजपोशी उसी इस्लामी गणराज्य के पतन का कारण बनती है जिसकी स्थापना 1979 में की गई थी। पूरी दुनिया की नजरें अब तेहरान के इस नए और रहस्यमयी नेता के अगले कदमों पर टिकी हैं।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
