मध्य पूर्व (Middle East) इस समय इतिहास के सबसे विनाशकारी और भयानक दौर से गुजर रहा है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान ने पूरे क्षेत्र को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) और ‘रोअरिंग लायन’ (Roaring Lion) नाम से शुरू किए गए इस सैन्य अभियान का उद्देश्य ईरान के नेतृत्व और सैन्य ढांचे को खत्म करना था।
इस युद्ध के महज 9 दिनों के भीतर ही ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत हो चुकी है, हजारों बेगुनाह लोग मारे गए हैं, और यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित न रहकर लेबनान, सीरिया, इराक और यहाँ तक कि खाड़ी देशों (UAE, कुवैत, बहरीन) तक फैल चुका है।
1. युद्ध का ग्राउंड जीरो: मौतों और घायलों का खौफनाक देश-वार आंकड़ा
युद्ध की विभीषिका का असली अंदाजा उन आंकड़ों से लगता है, जो हर दिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, रेड क्रिसेंट (Red Crescent) और सरकारों द्वारा जारी किए जा रहे हैं। 9 मार्च 2026 तक, इस संघर्ष में 1,500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों घायल हैं। नीचे दी गई तालिका (Table) में देश-वार मौतों और घायलों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
| देश का नाम (Country) | मौतों की संख्या (Death Toll) | घायलों की संख्या (Injured) | मुख्य कारण / प्रभावित क्षेत्र |
| ईरान (Iran) | 1,332+ | 5,800+ | अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले, मिनाब स्कूल हमला, तेहरान और इस्फहान में सैन्य ठिकानों पर बमबारी। |
| लेबनान (Lebanon) | 394+ | 1,130+ | इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान और बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भारी बमबारी। |
| इजरायल (Israel) | 13 (नागरिक) | 2,000+ | ईरान और हिजबुल्लाह द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन (विशेषकर बेत शेमेश और तेल अवीव)। |
| अमेरिका (USA) | 8 (सैनिक) | 18+ | कुवैत में अमेरिकी सैन्य बेस पर ईरानी ड्रोन हमला। |
| कुवैत (Kuwait) | 6 | दर्जनों | ईरानी मिसाइल हमले और सैन्य ठिकानों पर क्रॉसफायर। |
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | 4 | 112 | मिसाइल इंटरसेप्शन का मलबा और ईरानी ड्रोन हमले। |
| इराक (Iraq) | 13 | 50+ | अमेरिकी और ईरानी समर्थित मिलिशिया के बीच झड़पें। |
| सीरिया (Syria) | 4 | अज्ञात | दक्षिणी सीरियाई शहर स्वेदा (Sweida) में मिसाइल हमला। |
| सऊदी अरब (Saudi Arabia) | 2 | 12 | रियाद में अमेरिकी दूतावास के पास ड्रोन हमला और रास तनूरा रिफाइनरी पर असर। |
| बहरीन (Bahrain) | 1 | 40 | सलमान इंडस्ट्रियल सिटी में मिसाइल इंटरसेप्शन के बाद आग। |
| ओमान (Oman) | 1 | 5 | मस्कट के तट पर कमर्शियल टैंकर पर मिसाइल स्ट्राइक। |
| अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (Sri Lanka Coast) | 87 (ईरानी नौसैनिक) | 32 (बचाए गए) | हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत ‘IRIS Dena’ को डुबाया जाना। |
| भारत (India) | 2 (मर्चेंट नेवी) | 1 (लापता) | कमर्शियल शिपिंग लाइन्स पर हमले की चपेट में आए। |

2. ईरान में तबाही का मंजर: नेतृत्व का खात्मा और नागरिकों की मौतें
इस युद्ध का सबसे बड़ा केंद्र ईरान है। अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने ईरान के भीतर 100 से अधिक लड़ाकू विमानों (जिसमें B-2 बॉम्बर और F-35 शामिल हैं) का उपयोग करके एक अभूतपूर्व हमला किया।
अयातुल्लाह खामेनेई की मौत (The Decapitation Strike):
युद्ध के पहले ही दिन इजरायल और अमेरिका ने एक ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ (Decapitation Strike) को अंजाम दिया। सीआईए (CIA) की खुफिया जानकारी के आधार पर तेहरान में एक अंडरग्राउंड बंकर को निशाना बनाया गया, जहां ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और 40 से अधिक शीर्ष कमांडर मौजूद थे। लगभग 100 बंकर-बस्टर बमों (Bunker-buster bombs) के प्रहार से इस पूरे ढांचे को नष्ट कर दिया गया। आईआरजीसी (IRGC) के चीफ होसैन सलामी और एयरोस्पेस कमांडर अमीर अली हाजीजादेह सहित पूरा शीर्ष नेतृत्व एक ही झटके में खत्म हो गया।
मिनाब स्कूल का दर्दनाक हादसा:
ईरान में नागरिकों की मौतों का आंकड़ा 1,300 को पार कर गया है। सबसे दर्दनाक घटना दक्षिणी शहर मिनाब (Minab) में घटी, जहां एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से 175 स्कूली छात्राओं और शिक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले का ठीकरा ईरान पर ही फोड़ते हुए कहा कि यह ईरान की अपनी ही “गलत दिशा में दागी गई मिसाइल” (Inaccurate munitions) का नतीजा था, जबकि ईरानी प्रशासन ने इसे इजरायली बर्बरता करार दिया है।
3. अमेरिका और इजरायल को हुआ भारी नुकसान: अजेय होने का भ्रम टूटा
भले ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान के नेतृत्व को खत्म कर दिया हो, लेकिन ईरान के पलटवार ने साबित कर दिया है कि उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं दुनिया की किसी भी रक्षा प्रणाली को भेद सकती हैं।
अमेरिका का 16 हजार करोड़ का नुकसान:
युद्ध के शुरुआती चार दिनों में ही ईरान ने अमेरिका के गुरूर को बड़ा झटका दिया। ईरान के अचूक मिसाइल हमलों ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिका के लगभग 2 अरब डॉलर (करीब 16,000 करोड़ रुपये) के रक्षा उपकरणों को नष्ट कर दिया। इसमें अमेरिका की सबसे अत्याधुनिक ‘थाड’ (THAAD – Terminal High Altitude Area Defense) रक्षा प्रणाली, महंगे रडार सिस्टम और सैन्य संचार उपकरण शामिल हैं।
कुवैत में 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत:
ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य बेस (टैक्टिकल ऑपरेशंस सेंटर) पर कामिकाजे ड्रोन्स (Kamikaze drones) से अचूक हमला किया। इस हमले में 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई और 18 गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा, एक हैरान करने वाली घटना में कुवैत के ऊपर अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली की तकनीकी खराबी (‘Friendly fire’) के कारण तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान क्रैश हो गए।
इजरायल में दहशत का माहौल:
इजरायल की ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ मिसाइल रक्षा प्रणालियों के बावजूद, ईरान द्वारा एक साथ दागे गए सैकड़ों ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों ने इजरायल के भीतर तबाही मचाई। यरुशलम के पास बेत शेमेश (Beit Shemesh), रामत गान, और तेल अवीव में इमारतों पर मिसाइलें गिरने से 13 इजरायली नागरिकों की मौत हो गई और 2,000 से अधिक लोग घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। इजरायल के सैन्य ठिकानों पर हुए नुकसान की सटीक जानकारी इजरायली रक्षा बलों (IDF) द्वारा गुप्त रखी गई है।
4. लेबनान: मध्य पूर्व का नया ‘गाजा’
ईरान पर हमले के तुरंत बाद, उसके सबसे मजबूत प्रॉक्सी (Proxy) ‘हिजबुल्लाह’ (Hezbollah) ने इजरायल पर रॉकेटों की बारिश शुरू कर दी। इसके जवाब में इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला बोल दिया है।
लेबनान का स्वास्थ्य मंत्रालय 394 मौतों की पुष्टि कर चुका है, जिसमें 83 मासूम बच्चे शामिल हैं। बेरूत के दक्षिणी उपनगरों (दाहियाह) को इजरायली जेट्स ने मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। 1,130 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
विस्थापन का संकट (Displacement Crisis):
संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते के भीतर लेबनान में 5 लाख से अधिक लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। सरकारी पोर्टल पर 517,000 विस्थापित लोगों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक है। शरणार्थी शिविरों में भोजन, पानी और दवाओं का भारी संकट पैदा हो गया है। सीरियाई सीमा पर भी लेबनानी नागरिकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
5. खाड़ी देशों (Gulf Countries) में फैली युद्ध की आग
यह युद्ध केवल ईरान और इजरायल की सीमाओं तक सीमित नहीं है। अमेरिका के सैन्य बेस खाड़ी देशों में स्थित हैं, जिसके कारण ये देश भी ईरान के सीधे निशाने पर आ गए हैं।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दुबई और अबू धाबी जैसे सुरक्षित और चमकते शहरों में सायरन गूंज रहे हैं। ईरानी ड्रोन्स को इंटरसेप्ट करने के दौरान गिरे मलबे से UAE में 4 लोगों की मौत हो गई है और 112 लोग घायल हुए हैं। पर्यटन के लिए मशहूर दुबई में कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा है, और राष्ट्रपति ने दुर्लभ टेलीविजन संबोधन में देश के ‘युद्ध काल’ (Period of war) में होने की घोषणा की है।
- सऊदी अरब और कतर: ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी रास तनूरा रिफाइनरी (Ras Tanura Refinery) को निशाना बनाने की कोशिश की है। कतर के रास लाफान (Ras Laffan) गैस प्लांट पर भी आंशिक असर पड़ा है, जो वैश्विक LNG सप्लाई का अहम केंद्र है।
- कुवैत और बहरीन: कुवैत में क्रॉसफायर में 6 नागरिकों की जान गई है, जबकि बहरीन के सलमान इंडस्ट्रियल सिटी में मिसाइल हमले के बाद भयंकर आग लग गई, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत और 40 घायल हुए।
6. हिंद महासागर में नौसैनिक युद्ध: ‘IRIS Dena’ का जलसमाधि लेना
इस महायुद्ध का सबसे चौंकाने वाला अध्याय हिंद महासागर में श्रीलंका के तट के पास लिखा गया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका था जब अमेरिकी नौसेना ने सीधे तौर पर किसी दुश्मन देश के युद्धपोत को टॉरपीडो (Torpedo) मार कर डुबो दिया।
ईरान का युद्धपोत ‘IRIS Dena’ (आईरिस देना) 16 से 26 फरवरी तक भारत के साथ एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद ईरान वापस लौट रहा था। अमेरिकी पनडुब्बी ने इस जहाज को निशाना बनाया। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए हैं, जबकि 32 को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस घटना ने युद्ध के दायरे को फारस की खाड़ी से निकालकर सीधे भारत के पड़ोस (Indian Ocean Region) तक पहुंचा दिया है।
7. भारत पर प्रभाव: विदेश मंत्री एस. जयशंकर का संसद में बयान
भारत के लिए यह युद्ध कूटनीतिक और मानवीय, दोनों मोर्चों पर एक बड़ी चुनौती है। खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ (10 मिलियन) भारतीय काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
9 मार्च 2026 को भारतीय संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (Dr. S. Jaishankar) ने स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट किया:
“यह संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। खाड़ी देशों में हमारे एक करोड़ नागरिक रहते हैं। अब तक 67,000 भारतीयों को अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कराकर सुरक्षित निकाला जा चुका है। ईरान में पढ़ने और काम करने वाले छात्रों को तेहरान से बाहर सुरक्षित स्थानों पर रिलोकेट किया गया है

भारतीयों की मौत:
विदेश मंत्री ने भारी मन से सदन को सूचित किया कि इस युद्ध की चपेट में आकर कमर्शियल शिपिंग लाइन्स पर काम करने वाले दो भारतीय मर्चेंट नेवी (Indian Mariners) नाविकों की दुखद मृत्यु हो गई है और एक अभी भी लापता है।
कूटनीतिक संतुलन:
भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी युद्धपोत ‘लावन’ (Lavan) को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी, जिसके लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार व्यक्त किया। हालांकि, एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ईरान के नए और अस्थायी नेतृत्व के साथ संपर्क साधना अत्यंत कठिन हो रहा है।
8. वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट (The Economic Meltdown)
इस युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला दिया है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया की ऊर्जा (Oil and Gas) का दिल है, और इस दिल की धड़कन रुकने के कगार पर है।
1. तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल:
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत, जो अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका से महंगाई (Inflation) का खतरा मंडराने लगा है।
2. कतर की गैस सप्लाई ठप:
ईरानी हमलों के डर से कतर एनर्जी (QatarEnergy) ने प्राकृतिक गैस (LNG) का उत्पादन और शिपमेंट अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे यूरोप और एशियाई बाजारों में गैस का भारी संकट पैदा हो गया है।
3. युद्ध का आर्थिक खर्च:
लड़ाई लड़ना सस्ता नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पहले 24 घंटों में ही 779 मिलियन डॉलर (करीब 6,400 करोड़ रुपये) फूंक दिए हैं। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS Gerald R Ford) को खाड़ी में तैनात रखने का खर्च ही 6.5 मिलियन डॉलर प्रतिदिन है। अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था को ट्रिलियनों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ेगा।
9. आगे क्या? ट्रम्प की योजना और ईरान का भविष्य
अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस से स्पष्ट किया है कि यह युद्ध कोई ‘अंतहीन युद्ध’ (Endless War) नहीं होगा, लेकिन इसके लिए कोई समय सीमा भी तय नहीं है। ट्रम्प के अनुसार, “हमने 4-5 हफ्तों का लक्ष्य रखा था, लेकिन हम अपने शेड्यूल से बहुत आगे हैं। एक ही दिन में हमने ईरान के शीर्ष 49 नेताओं को खत्म कर दिया है।” अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य ईरान के मिसाइल नेटवर्क को पूरी तरह तबाह करना है ताकि वह कभी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) न बना सके।
इजरायल की रणनीति:
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने घोषणा की है कि वे अपनी पूरी ताकत के साथ इस युद्ध को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे। इजरायल का दावा है कि उसने ईरान के आसमान पर अब लगभग पूर्ण नियंत्रण (Total air supremacy) हासिल कर लिया है।
ईरान का अगला कदम:
सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान में एक संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। ईरान की ‘विशेषज्ञों की सभा’ (Assembly of Experts) की आपात बैठक बुलाई गई है, ताकि देश का नया सर्वोच्च नेता चुना जा सके। हालांकि, नेतृत्व के बिना भी ईरान की सेना (IRGC) अपने डिसेंट्रलाइज्ड कमांड स्ट्रक्चर के कारण लगातार मिसाइलें दाग रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन क्षेत्र में शांति चाहते थे, लेकिन अमेरिका के इस हमले ने शांति की हर गुंजाइश को खत्म कर दिया है।
मार्च 2026 का यह महायुद्ध केवल दो देशों की लड़ाई नहीं है; यह एक ऐसा भू-राजनीतिक भूकंप है जिसके झटके पूरी दुनिया महसूस कर रही है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल अपनी तकनीकी और सामरिक श्रेष्ठता के बल पर ईरान के वजूद को मिटाने पर तुले हैं, तो दूसरी तरफ ईरान अपने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (Axis of Resistance) के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट को आग लगाने में सक्षम साबित हो रहा है।
मौतों का आंकड़ा 1,500 को पार कर गया है और हर गुजरते घंटे के साथ यह बढ़ता जा रहा है। स्कूल की बच्चियों से लेकर कुवैत में सो रहे अमेरिकी सैनिकों तक, इस युद्ध ने साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में कोई भी सुरक्षित नहीं है। भारत जैसे देशों के लिए यह एक कूटनीतिक परीक्षा की घड़ी है, जहां एक तरफ अपने एक करोड़ नागरिकों को सुरक्षित निकालना है, तो दूसरी तरफ अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को सुनिश्चित करना है।
दुनिया अब सांस रोके हुए देख रही है कि क्या यह युद्ध एक नए परमाणु युग (Nuclear age) की शुरुआत करेगा या फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस तबाही को रोकने में सफल होगी।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
