मध्य पूर्व (West Asia) इस समय एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर खड़ा है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में जल रहा है। आज, 7 मार्च 2026 को, इस संघर्ष को शुरू हुए ठीक एक सप्ताह हो चुका है।
1. मार्च 2026: युद्ध के आठवें दिन की ताजा स्थिति
शनिवार, 7 मार्च की सुबह तक इस युद्ध ने और भी भयानक रूप ले लिया है। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के भीतर अपने लक्ष्यों का दायरा बढ़ा दिया है।
इजरायल का ‘फ्रेश वेव’ हमला: इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने आज सुबह जानकारी दी कि उन्होंने 80 से अधिक फाइटर जेट्स का उपयोग करते हुए ईरान की राजधानी तेहरान और पश्चिमी-मध्य ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है।
- लक्ष्य: इस हमले में तेहरान स्थित ‘इमाम हुसैन यूनिवर्सिटी’ को निशाना बनाया गया, जिसे इजरायल रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अधिकारियों का ट्रेनिंग सेंटर मानता है। इसके अलावा भूमिगत मिसाइल गोदामों और कमांड सेंटर्स को भी ध्वस्त किया गया है।
डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि ईरान को “अत्यधिक कड़ा प्रहार” (Hit very hard) सहना पड़ेगा। उन्होंने ईरान की “बिना शर्त आत्मसमर्पण” (Unconditional Surrender) की मांग को दोहराया है और कहा है कि वे ऐसे समूहों और क्षेत्रों को भी निशाना बनाने पर विचार कर रहे हैं जिन्हें पहले छोड़ दिया गया था।

2. ईरान का रुख: राष्ट्रपति की माफी और जवाबी कार्रवाई
युद्ध के एक सप्ताह बाद, ईरान की राजनीति में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
राष्ट्रपति पेज़ेशकियान की माफी: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने आज सुबह एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपने पड़ोसी खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, बहरीन) से माफी मांगी है।
- कारण: ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोनों ने गलती से इन देशों के नागरिक ठिकानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाया था। राष्ट्रपति ने इसे “कमांड और कंट्रोल की कमी” (Lack of command and control) बताया, जिसका कारण 28 फरवरी के हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ कमांडरों की मौत है।
आत्मसमर्पण से इनकार: हालांकि राष्ट्रपति ने पड़ोसियों से माफी मांगी, लेकिन उन्होंने अमेरिका के सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने ट्रम्प की आत्मसमर्पण की मांग पर कहा, “यह एक ऐसा सपना है जिसे वे (अमेरिका) अपने साथ कब्र में ले जाएंगे।” ईरान ने आज सुबह भी इजरायल पर मिसाइलें दागीं, जिससे यरूशलेम और अन्य शहरों में खतरे के सायरन गूंज उठे।
3. वैश्विक प्रभाव: तेल संकट और आर्थिक मंदी का डर
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है।
- कच्चे तेल की कीमतें: ईरान पर हमलों और प्रतिशोध की कार्रवाई के कारण होर्मुज जलડમરૂમધ્ય (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।
- मुद्रास्फीति (Inflation): तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो वैश्विक आर्थिक विकास दर (Global Growth Rate) में भारी गिरावट आ सकती है।
- हवाई यात्रा: दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर मिसाइल हमलों के कारण उड़ानों को रद्द या डायवर्ट करना पड़ा है।
4. रूस की भूमिका और बदलती कूटनीति
7 मार्च की रिपोर्टों में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों (CBS News) ने पुष्टि की है कि रूस अब ईरान को खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा है। * रूस द्वारा ईरान को क्षेत्र में अमेरिकी सेना की स्थितियों और गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है, जिससे ईरान को जवाबी हमले करने में आसानी हो रही है।
- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान के बीच आज फोन पर बातचीत भी हुई है, जो इस युद्ध में रूस के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
5. मानवीय त्रासदी: हताहतों का आंकड़ा
युद्ध के केवल 7 दिनों में मानवीय क्षति का आंकड़ा डरावना है:
- ईरान: ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, अब तक 1,230 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हैं।
- लेबनान: इजरायली हमलों में लेबनान में भी 200 से अधिक लोगों की जान गई है।
- इजरायल और अमेरिका: इजरायल में 11 और अमेरिका के 6 सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। अमेरिका के तीन F-15E विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं।
6. आगे क्या? (Expert Analysis)
BBC के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का मुख्य लक्ष्य ईरान में “शासन परिवर्तन” (Regime Change) करना है। अमेरिका और इजरायल ने अब तक 1,250 से अधिक ठिकानों को नष्ट किया है, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता शामिल है।
हालांकि, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने हार मानने का कोई संकेत नहीं दिया है। रूस का समर्थन और ईरान का ‘प्रोक्सी नेटवर्क’ इस युद्ध को एक लंबी और खूनी जंग में बदल सकता है।
7 मार्च 2026 की यह स्थिति दर्शाती है कि मध्य पूर्व का संकट अपने चरम पर है। कूटनीति फिलहाल मिसाइलों और हवाई हमलों के शोर में दब गई है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी बनेगा या अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति बहाली के लिए कोई ठोस कदम उठा पाएगा।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
