भारत इस समय एक अभूतपूर्व जलवायु संकट के मुहाने पर खड़ा है। हाल ही में जारी ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर’ (CEEW) और अन्य प्रमुख शोध संस्थानों की रिपोर्टों ने देश की धड़कनें तेज कर दी हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत के 57% जिले अब ‘भीषण गर्मी’ (Extreme Heat) के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में आ चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन जिलों में देश की 76% आबादी निवास करती है।
1. आंकड़ों की जुबानी: संकट कितना गहरा है?
CEEW के अध्ययन “How Extreme Heat is Impacting India” के अनुसार, भारत के 734 जिलों में से 417 जिले ‘उच्च’ से ‘अत्यंत उच्च’ (High to Very High) जोखिम श्रेणी में हैं।
- जनसंख्या का दबाव: इन 417 जिलों में भारत की लगभग तीन-चौथाई आबादी रहती है।
- बढ़ते गर्म दिन और रातें: पिछले एक दशक (2012-2022) में लगभग 70% जिलों ने हर गर्मी में कम से कम 5 अतिरिक्त ‘अत्यंत गर्म रातों’ (Very Warm Nights) का अनुभव किया है।
- आर्द्रता का तड़का: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों (Indo-Gangetic Plains) में सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) में 10% तक की वृद्धि देखी गई है, जो गर्मी को और अधिक जानलेवा बनाती है।
2. लू (Heatwave) और हीट स्ट्रेस (Heat Stress) के बीच का अंतर
अक्सर लोग इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल एक ही संदर्भ में करते हैं, लेकिन विज्ञान की दृष्टि से इनमें बड़ा अंतर है:
- लू (Heatwave): यह एक मौसम संबंधी घटना है। जब किसी क्षेत्र का अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5°C या उससे अधिक बढ़ जाता है, तो उसे ‘लू’ घोषित किया जाता है।
- हीट स्ट्रेस (Heat Stress): यह एक शारीरिक स्थिति है। जब शरीर बाहरी गर्मी और उच्च आर्द्रता के कारण अपना तापमान (37°C) नियंत्रित नहीं कर पाता, तो उसे ‘हीट स्ट्रेस’ कहते हैं। आर्द्रता (Humidity) पसीने के सूखने की प्रक्रिया को रोक देती है, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता।
3. जोखिम के प्रमुख कारक: गर्मी क्यों बनी जानलेवा?
भारत में गर्मी के जोखिम को बढ़ाने वाले तीन मुख्य स्तंभ हैं:
A. गर्म रातें (Warm Nights) – शरीर को नहीं मिल रहा आराम
दिन की गर्मी के बाद रात का ठंडा होना शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी है। लेकिन शहरों में कंक्रीट के जंगल दिनभर गर्मी सोखते हैं और रात में उसे छोड़ते हैं (Urban Heat Island Effect)। यदि रात का तापमान भी 95वें पर्सेंटाइल से ऊपर रहता है, तो शरीर ठंडा नहीं हो पाता, जिससे हीटस्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

B. आर्द्रता में वृद्धि (Rising Humidity)
उत्तर भारत के वे शहर जो पारंपरिक रूप से सूखे (Dry Heat) रहते थे, जैसे दिल्ली, जयपुर और वाराणसी, अब वहां नमी बढ़ रही है। 40°C तापमान और 50% आर्द्रता मिलकर शरीर को वैसा ही महसूस कराते हैं जैसा 50°C की सूखी गर्मी में होता है। इसे ‘वेट-बल्ब टेम्परेचर’ (Wet-bulb Temperature) का खतरा कहा जाता है।
C. शहरीकरण और जनसंख्या घनत्व
दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे महानगरों में जनसंख्या घनत्व और ऊंची इमारतें हवा के प्रवाह को रोकती हैं, जिससे गर्मी के ‘हॉटस्पॉट्स’ बन जाते हैं।
4. सबसे अधिक प्रभावित राज्य और क्षेत्र
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश गर्मी के सबसे अधिक निशाने पर हैं:
| श्रेणी | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश |
| शीर्ष जोखिम वाले राज्य | दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश |
| तटीय और दक्षिण भारत | गोवा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु |
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में बाहरी काम करने वाले कृषि मजदूरों की बड़ी संख्या होने के कारण वहां ‘मानवीय जोखिम’ (Human Vulnerability) कहीं अधिक है।
5. स्वास्थ्य पर प्रभाव: शरीर पर गर्मी का आक्रमण
भीषण गर्मी शरीर के अंगों को फेल कर सकती है। इसके प्रमुख लक्षण और बीमारियां निम्नलिखित हैं:
- हीटस्ट्रोक (Heatstroke): जब शरीर का तापमान 40°C (104°F) से ऊपर चला जाता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
- हीट थकावट (Heat Exhaustion): अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, मतली और कमजोरी।
- पुरानी बीमारियों का बढ़ना: गर्मी के कारण हृदय रोग, मधुमेह (Diabetes) और किडनी की बीमारियों से पीड़ित लोगों की स्थिति गंभीर हो सकती है।
- मानसिक स्वास्थ्य: अध्ययनों से पता चला है कि भीषण गर्मी तनाव, चिड़चिड़ापन और यहाँ तक कि आत्महत्या की दर में वृद्धि से जुड़ी है।
6. आर्थिक प्रभाव: क्या भारत की GDP झुलस रही है?
गर्मी केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, यह अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ रही है:
- उत्पादकता में कमी: निर्माण और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले लोग दोपहर के समय काम नहीं कर पाते। एक अनुमान के अनुसार, 2030 तक भारत हीट स्ट्रेस के कारण 3.5 करोड़ नौकरियां (कार्य घंटे के संदर्भ में) खो सकता है।
- GDP का नुकसान: विशेषज्ञों का मानना है कि भीषण गर्मी के कारण भारत की GDP में 4.5% तक की गिरावट आ सकती है।
- बिजली की मांग: एयर कंडीशनिंग और कूलिंग की मांग बढ़ने से बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ता है, जिससे ब्लैकआउट का खतरा रहता है।

7. समाधान और आगे की राह: हीट एक्शन प्लान (HAP)
भारत के पास इस संकट से लड़ने के लिए ‘हीट एक्शन प्लान’ (HAP) मौजूद हैं, लेकिन उन्हें और मजबूत करने की जरूरत है:
- स्थानीय स्तर पर योजना: गर्मी का प्रभाव हर शहर में अलग होता है। वार्ड स्तर पर जोखिम का आकलन जरूरी है।
- पैसिव कूलिंग (Passive Cooling): छतों पर सफेद पेंट (Cool Roofs), अधिक खिड़कियां और शहरी वनीकरण (Urban Forestry) को बढ़ावा देना।
- चेतावनी प्रणाली (Early Warning System): लोगों को फोन पर समय रहते अलर्ट भेजना ताकि वे दोपहर में बाहर न निकलें।
- सार्वजनिक सुविधाएं: शहरों में सार्वजनिक पेयजल स्टेशन और कूलिंग शेल्टर (ठंडे आश्रय स्थल) बनाना।
- काम के घंटों में बदलाव: निर्माण श्रमिकों और बाहरी कामगारों के लिए काम के समय को सुबह जल्दी या शाम को देर से शिफ्ट करना।
भारत में भीषण गर्मी अब “भविष्य का खतरा” नहीं, बल्कि “वर्तमान की कड़वी सच्चाई” है। 76% आबादी का जोखिम में होना एक गंभीर चेतावनी है। सरकार, नागरिक समाज और हर व्यक्ति को मिलकर जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) की दिशा में कदम उठाने होंगे। यदि हम आज अपनी जीवनशैली और शहरी नियोजन में बदलाव नहीं करेंगे, तो कल की गर्मियां असहनीय हो सकती हैं।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
