27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी

रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को खाड़ी देशों (Gulf Countries) का आसमान मिसाइलों की रोशनी और सायरन की डरावनी आवाजों से गूंज उठा। पूरी दुनिया की मीडिया और कूटनीतिक गलियारों में इस समय सिर्फ एक ही हेडलाइन सबसे बड़ी दहशत का कारण बनी हुई है— IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे अपने इतिहास का ‘सबसे खूंखार आक्रामक अभियान’ (Most intense offensive) करार दिया है।

1. प्रतिशोध की छठी लहर: ईरान का ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’

अयातुल्लाह खामेनेई की मौत की पुष्टि होते ही ईरान की सत्ता ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की। लेकिन इस शोक के साथ-साथ ईरान की सेना (IRGC) ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जखीरे का मुंह खोल दिया।

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी (Tasnim News Agency) और स्टेट टीवी ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दुनिया को चौंका दिया। IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब किसी भी ‘रेड लाइन’ (Red Line) को मानने के लिए तैयार नहीं है। इसे ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ (Operation True Promise) की पांचवीं और छठी लहर (Sixth Wave) का नाम दिया गया है।

इस भयंकर हमले में मुख्य रूप से ईरान की उन्नत ‘कद्र’ (Qadr) और ‘इमाद’ (Emad) बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ सैकड़ों ‘शहीद-136’ (Shahed-136) सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया है।

2. इज़रायल के दिल पर वार: तेल अवीव में मचा हाहाकार

ईरान के इस महा-आक्रमण का पहला और सबसे बड़ा लक्ष्य इज़रायल था। IRGC के आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने इज़रायल के सबसे सुरक्षित और रणनीतिक ठिकानों को सफलतापूर्वक भेदने का दावा किया है।

इज़रायल में निशाना बने प्रमुख सैन्य ठिकाने:

  • तेल नोफ एयरबेस (Tel Nof Airbase): यह इज़रायल के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण वायुसेना अड्डों में से एक है। ईरान का दावा है कि भारी मिसाइल बैराज ने इस एयरबेस के रनवे और हैंगर्स को भारी नुकसान पहुंचाया है।
  • हाकिर्या (HaKirya) कमांड मुख्यालय: तेल अवीव के मध्य में स्थित यह इज़रायली सेना (IDF) और रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च मुख्यालय (General Staff Headquarters) है। इस अति-संवेदनशील इलाके में मिसाइलों का गिरना इज़रायल के रक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है।
  • डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स: तेल अवीव के पास स्थित इज़रायल के सबसे बड़े रक्षा उद्योग परिसरों में से एक पर भी मिसाइलें दागी गईं, जहां उन्नत हथियारों का निर्माण होता है।

इज़रायल की ‘आयरन डोम’ (Iron Dome), ‘डेविड्स स्लिंग’ (David’s Sling) और ‘एरो’ (Arrow) एयर डिफेंस सिस्टम्स ने आसमान में अनगिनत मिसाइलों को इंटरसेप्ट (नष्ट) किया, जिसके कारण तेल अवीव और नेगेव (Negev) मरुस्थल के ऊपर रात भर आग के गोले दिखाई देते रहे।

27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी

3. अमेरिका के 6 देशों में फैले 27 सैन्य अड्डों पर सीधा हमला

इस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि ईरान ने अब अमेरिका को सीधे युद्ध में घसीट लिया है। जब मीडिया में खबर आई कि IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी हुई है, तो उसमें सबसे बड़ी संख्या खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेसों की थी।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कतर, यूएई आदि) को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वे या तो अपने यहां से अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद कर दें, या फिर ईरान के सीधे हमले झेलने के लिए तैयार रहें। चूंकि इन देशों ने अमेरिकी अड्डों को बंद नहीं किया, इसलिए ईरान ने उन पर मिसाइलों की बारिश कर दी।

किन अमेरिकी अड्डों (US Bases) को बनाया गया निशाना?

  1. कतर (Qatar) – अल उदीद एयरबेस (Al Udeid Air Base): यह मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। दोहा के ऊपर आसमान में कई भारी विस्फोट सुने गए।
  2. बहरीन (Bahrain) – यूएस फिफ्थ फ्लीट (US Fifth Fleet): मनामा के पास जुफेयर (Juffair) इलाके में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर भी मिसाइलें दागी गईं। चश्मदीदों के अनुसार, बहरीन के आसमान में धुएं का गुबार देखा गया।
  3. कुवैत (Kuwait) – अब्दुल्ला मुबारक बेस: IRGC का दावा है कि कुवैत के इस नेवल बेस पर 4 बैलिस्टिक मिसाइलें और 12 ड्रोन्स दागे गए, जिससे वहां का बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है और अमेरिकी सैनिकों को भारी कैजुअल्टी (Casualties) हुई है। हालांकि पेंटागन (Pentagon) ने इन मौतों की पुष्टि से इनकार किया है।
  4. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – अल धफरा बेस: अबू धाबी के पास स्थित इस अमेरिकी एयरबेस को भी निशाना बनाया गया।
  5. जॉर्डन (Jordan) – मुवाफ्फक अल-सल्ती एयरबेस: सीरिया और इज़रायल की सीमा के पास स्थित इस बेस पर भी ईरानी ड्रोन्स ने हमला किया।
  6. सऊदी अरब (Saudi Arabia): प्रिंस सुल्तान एयर बेस सहित अन्य रडार इंस्टॉलेशन्स पर मिसाइलें दागी गईं।

पेंटागन के अनुसार, अधिकांश मिसाइलों को ‘पैट्रियट’ (Patriot) और ‘थाड’ (THAAD) मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स ने हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन इस अभूतपूर्व हमले ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

4. समुद्र में कोहराम: हिंद महासागर और जेबेल अली में अमेरिकी जहाजों पर प्रहार

ईरान ने इस बार केवल ज़मीन पर ही नहीं, बल्कि समंदर (Maritime Domain) में भी अमेरिका को घेरने की रणनीति अपनाई है। ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के पांचवें और छठे चरण में नौसैनिक लक्ष्यों (Naval Targets) को विशेष रूप से चुना गया।

  • दुबई (जेबेल अली एंकोरेज) में हमला: IRGC नेवि ने दावा किया है कि दुबई के जेबेल अली (Jebel Ali) बंदरगाह के पास लंगर डाले एक ‘MSP जहाज’ (जो अमेरिकी जहाजों के लिए गोला-बारूद ले जा रहा था) पर 4 ‘कमिकाज़े ड्रोन्स’ से अचूक हमला किया गया। विस्फोटों के कारण जहाज पूरी तरह से अक्षम (Disabled) हो गया है।
  • हिंद महासागर (Indian Ocean) में मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने दावा किया कि हिंद महासागर में अमेरिकी युद्धपोतों के लिए ईंधन ले जा रहे एक ‘MST-क्लास कॉम्बैट सपोर्ट शिप’ पर ‘कद्र-380’ (Qadr-380) बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। IRGC ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मनों के लिए नर्क के दरवाज़े (Gates of Hell) खुले रखेंगे।”
27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी

5. दुबई, दोहा और अबू धाबी में दहशत: आम नागरिकों का क्या हाल है?

IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी का सबसे बड़ा खामियाजा उन आम नागरिकों और प्रवासियों (विशेषकर लाखों भारतीयों) को उठाना पड़ रहा है, जो खाड़ी देशों में शांति से अपना जीवन बिता रहे थे।

  • दुबई में गिरता का मलबा: भले ही यूएई के एयर डिफेंस ने ईरानी मिसाइलों को आसमान में नष्ट कर दिया हो, लेकिन मिसाइलों का जलता हुआ भारी मलबा (Debris) पाम जुमेराह (Palm Jumeirah), बुर्ज अल अरब (Burj Al Arab) और जेबेल अली के आवासीय और वाणिज्यिक इलाकों में आ गिरा। इसके कारण कई जगह आग लग गई और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
  • एविएशन सेक्टर ठप: दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर सभी उड़ानें अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई हैं। रनवे के पास मिसाइल के टुकड़े गिरने की खबरें हैं। दोहा (कतर) और मनामा (बहरीन) के एयरपोर्ट्स का भी यही हाल है। लाखों यात्री एयरपोर्ट्स पर फंसे हुए हैं।
  • भारतीयों के लिए एडवाइजरी: कुवैत, कतर, यूएई, और जॉर्डन में स्थित भारतीय दूतावासों (Indian Embassies) ने अपने नागरिकों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। सभी को सुरक्षित बंकरों (Safe Shelters) के करीब रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सख्त हिदायत दी गई है।

6. जुबानी जंग से महायुद्ध तक: ट्रंप की चेतावनी बनाम ईरान का पलटवार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी अपने चरम पर है। अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान के नए राजनीतिक नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बीच जो ‘वॉर ऑफ वर्ड्स’ चल रहा है, वह किसी भी पल परमाणु युद्ध का ट्रिगर बन सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप की सीधी धमकी:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट में लिखा:

“ईरान ने अभी बयान दिया है कि वे आज बहुत भारी हमला करने जा रहे हैं, ऐसा हमला जैसा उन पर पहले कभी नहीं हुआ। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम उन्हें ऐसी ताकत से मारेंगे जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी!” ट्रंप ने खामेनेई की हत्या वाले ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को एक बड़ी सफलता बताया और कहा कि ईरान के ढांचे को इतना नुकसान पहुंचा है जिसे बनाने में उन्हें सालों लग जाएंगे।

IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी

ईरान का पलटवार (ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन):

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian) ने खामेनेई की हत्या को ‘महान अपराध’ (Great Crime) करार दिया है। उन्होंने कहा, “यह महान अपराध कभी अनुत्तरित नहीं रहेगा। ट्रंप और नेतन्याहू ने हमारी सभी ‘रेड लाइन्स’ पार कर दी हैं। अब वे इसके परिणामों को भुगतेंगे। हमने खुद को सभी परिदृश्यों के लिए तैयार कर लिया है।”

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने कहा कि अमेरिका ने एक “बेहद खतरनाक रेड लाइन” पार कर दी है और अब ईरान आत्मरक्षा में बिना किसी सीमा या प्रतिबंध के (No limits in self-defense) हमले करता रहेगा।

7. ईरान की आंतरिक स्थिति: नया नेतृत्व और ‘सर्वाइवल मोड’

IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी एक तरफ ईरान की बाहरी आक्रामकता को दर्शाता है, वहीं अंदरूनी तौर पर ईरान अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है।

  • अंतरिम नेतृत्व परिषद (Interim Leadership Council): खामेनेई के निधन के बाद, ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत एक 3 सदस्यीय ‘लीडरशिप काउंसिल’ का गठन किया गया है। इसमें 66 वर्षीय वरिष्ठ मौलवी अली रजा अराफी (Ali Reza Arafi), राष्ट्रपति पेजेशकियन, और न्यायपालिका प्रमुख घोलम होसैन محسنی एजेही (Gholam Hossein Mohseni Ejehei) शामिल हैं। यह परिषद तब तक देश चलाएगी जब तक नया सुप्रीम लीडर नहीं चुना जाता।
  • देशभर में मातम और विरोध: ईरान के सरकारी टीवी ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और एक सप्ताह के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। लेकिन जमीन पर स्थिति बहुत तनावपूर्ण है। जहां एक ओर कट्टरपंथी लोग अमेरिका के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) और बलूच अलगाववादी गुटों की गतिविधियों के कारण ईरान की सीमाएं अंदर से भी सुलग रही हैं।

8. ग्लोबल क्राइसिस: तेल, व्यापार और दुनिया का डर

इस युद्ध की गूंज केवल मिसाइलों के धमाकों तक सीमित नहीं है; इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है।

  1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर जाम: शिपिंग डेटा के अनुसार, कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) से लदे लगभग 150 से अधिक विशाल टैंकर ओमान की खाड़ी में खुले समुद्र में लंगर डाले खड़े हैं। वे होर्मुज की संकरी पट्टी (Chokepoint) से गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं, क्योंकि ईरान किसी भी समय इस समुद्री मार्ग को ब्लॉक कर सकता है।
  2. कच्चे तेल में बेतहाशा उछाल: वैश्विक आपूर्ति रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम रातों-रात आसमान छूने लगे हैं। अगर अगले कुछ दिनों में तेल के जहाज नहीं गुजरे, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच जाएंगे, जिससे भयानक महंगाई (Global Inflation) आएगी।
  3. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की चिंता: जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अलबुदैवी ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supplies) के लिए सीधा और खतरनाक खतरा बताया है।

मानवता के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट

2 मार्च 2026 की यह सुबह दुनिया के लिए एक खौफनाक सपना लेकर आई है। IRGC का दावा: 27 अमेरिकी व इज़रायली ठिकानों पर रिकॉर्ड बमबारी महज एक सैन्य बयान नहीं है; यह इस बात का आधिकारिक ऐलान है कि कूटनीति (Diplomacy) के सभी दरवाज़े बंद हो चुके हैं और विनाश का बटन दब चुका है।

अमेरिका की अभूतपूर्व सैन्य शक्ति और इज़रायल की उन्नत तकनीक के सामने ईरान का यह ‘करो या मरो’ (Do or Die) का रुख पूरे मध्य पूर्व को राख के ढेर में बदल सकता है। जब बात किसी देश के सर्वोच्च ‘धार्मिक और राजनीतिक अस्तित्व’ को मिटाने की हो, तो पलटवार की कोई तार्किक सीमा नहीं रह जाती।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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