Pakistan-Afghanistan War

दक्षिण एशिया इस समय एक बेहद खतरनाक और अभूतपूर्व सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा है। कभी एक-दूसरे के रणनीतिक सहयोगी माने जाने वाले पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के तालिबान शासकों के बीच अब ‘खुली जंग’ (Open War) का ऐलान हो चुका है। दोनों देशों की सीमा, जिसे डूरंड लाइन (Durand Line) कहा जाता है, इस समय तोपों की भारी गोलाबारी और लड़ाकू विमानों की बमबारी से दहल रही है।

1 मार्च 2026 की नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, यह संघर्ष अब केवल सीमा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल (Kabul) और तालिबान के आध्यात्मिक केंद्र कंधार (Kandahar) तक को अपना निशाना बनाया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा उस आंकड़े की है जिसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया है— Pakistan-Afghanistan War: पाक एयरस्ट्राइक, अफगानिस्तान में 400 से ज्यादा मौतों का दावा किया गया है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि यह टकराव अब एक भयानक युद्ध में तब्दील हो चुका है।

अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को समझना चाहते हैं, या वैश्विक समाचारों में रुचि रखते हैं, तो यह विस्तृत न्यूज़ ब्लॉग आपको इस युद्ध के हर पहलू, इसके इतिहास, सैन्य दावों और भविष्य के परिणामों के बारे में गहराई से जानकारी देगा।

1. घटनाक्रम की टाइमलाइन: कैसे भड़की इस विनाशकारी युद्ध की चिंगारी?

इस ‘खुली जंग’ की शुरुआत अचानक नहीं हुई है, बल्कि यह महीनों से सुलग रहे तनाव का नतीजा है। आइए इस युद्ध के ताज़ा घटनाक्रम (Timeline) को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं:

  • 21-22 फरवरी 2026 (शुरुआती एयरस्ट्राइक): पाकिस्तान में लगातार हो रहे आतंकी हमलों (विशेषकर इस्लामाबाद और बाजौर में) के जवाब में, पाकिस्तानी वायुसेना ने 21 फरवरी की देर रात अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार, पक्तिका और खोस्त प्रांतों में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान का दावा था कि उसने प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) और ISIS-K के 7 ठिकानों को नष्ट कर दिया है और 80 से अधिक आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, अफ़ग़ानिस्तान ने दावा किया कि इस हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 18 निर्दोष नागरिक मारे गए।
  • 26-27 फरवरी 2026 (तालिबान का पलटवार): अपने हवाई क्षेत्र के उल्लंघन और नागरिकों की मौत से बौखलाए अफगान तालिबान ने गुरुवार (26 फरवरी) रात को पाकिस्तान के सीमावर्ती सैन्य ठिकानों (विशेषकर मीरानशाह और स्पिन वाम में) पर भारी हथियारों और ड्रोन्स से हमला कर दिया।
  • 27 फरवरी 2026 (‘ओपन वॉर’ का ऐलान): अफ़ग़ानिस्तान के इस दुस्साहस के बाद, 27 फरवरी की सुबह पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दोनों देशों के बीच ‘खुली जंग’ (Open War) की घोषणा कर दी।
  • 28 फरवरी – 1 मार्च 2026 (ऑपरेशन गज़ब-लिल-हक): पाकिस्तान ने अपने अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक, ‘ऑपरेशन गज़ब-लिल-हक’ (Operation Ghazab Lil Haqq – ‘सच्चाई के लिए क्रोध’) की शुरुआत की। इसके तहत पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी हिस्सों—काबुल, कंधार, पक्तिया और नंगरहार—में 22 से अधिक सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की।

2. मौतों के आंकड़ों पर घमासान: दावों और पलटवारों का दौर

युद्ध के इस माहौल में दोनों पक्ष मनोवैज्ञानिक बढ़त (Psychological Warfare) हासिल करने के लिए भारी दावों का सहारा ले रहे हैं। कैजुअल्टी (हताहतों) के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे इस बात की गवाही देते हैं कि यह टकराव कितना हिंसक हो चुका है।

Pakistan-Afghanistan War

पाकिस्तान के दावे (ISPR और सरकारी बयान)

1 मार्च 2026 को पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार और सेना की मीडिया विंग ISPR के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए:

  • मृतकों की संख्या: पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से Pakistan-Afghanistan War: पाक एयरस्ट्राइक, अफगानिस्तान में 400 से ज्यादा मौतों का दावा (415 तालिबानी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि) किया है।
  • घायलों और नुकसान का आंकड़ा: पाकिस्तानी दावों के अनुसार 500 से अधिक अफगान लड़ाके घायल हुए हैं। इसके अलावा 115 अफगान टैंक और बख्तरबंद वाहन (Armored Vehicles) नष्ट कर दिए गए हैं।
  • सैन्य चौकियों पर कब्ज़ा: पाकिस्तान का दावा है कि उसने तालिबान की 73-74 पोस्ट (चौकियों) को तबाह कर दिया है और 18 अन्य पर कब्जा कर लिया है।
  • अपना नुकसान: पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि इस संघर्ष में उसके 12 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए हैं और 27 घायल हैं।

अफगान तालिबान के पलटवार

दूसरी ओर, अफ़ग़ानिस्तान सरकार के मुख्य प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद और रक्षा मंत्रालय के उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने पाकिस्तान के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है:

  • पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान: तालिबान का दावा है कि उनके भीषण पलटवार में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और अफ़ग़ान बलों ने 27 पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट्स पर कब्ज़ा कर लिया है।
  • अपने नुकसान को नकारा: तालिबान ने दावा किया कि उनके केवल 13 सैनिक मारे गए हैं, लेकिन पाकिस्तान जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बना रहा है, जिससे 52 से अधिक आम नागरिकों की जान गई है।

नोट: दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से (Independently) पुष्टि करना फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मीडिया और संस्थाओं के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है।

3. टीटीपी (TTP): वह नासूर जिसने दो ‘रणनीतिक दोस्तों’ को दुश्मन बना दिया

इस ‘खुली जंग’ की जड़ में जाने के लिए हमें पाकिस्तान की उस पुरानी नीति को समझना होगा जिसे ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ (Strategic Depth) कहा जाता है।

दशकों तक पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए अफगान तालिबान का समर्थन किया, उन्हें हथियार दिए और सुरक्षित पनाहगाहें मुहैया कराईं। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अगस्त 2021 में जब काबुल में तालिबान की वापसी होगी, तो अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान के इशारों पर नाचेगा।

लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा। अफ़ग़ान तालिबान के सत्ता में आते ही उनकी वैचारिक जुड़वां संस्था तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हौसले बुलंद हो गए।

  • TTP का आतंक: TTP एक खूंखार आतंकी संगठन है जो पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंककर वहां ‘शरिया कानून’ लागू करना चाहता है।
  • अफ़ग़ानिस्तान की पनाहगाहें: 2021 के बाद से TTP के सरगना (जैसे नूर वली महसूद) अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर सुरक्षित छिपकर बैठे हैं और वहीं से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान प्रांतों में आत्मघाती हमले करवा रहे हैं।
  • तालिबान का इनकार: पाकिस्तान ने बार-बार अफगान तालिबान से TTP लीडर्स को सौंपने की मांग की, लेकिन तालिबान ने ‘पश्तूनवाली’ (अतिथि सत्कार की परंपरा) और वैचारिक भाईचारे का हवाला देकर हर बार इनकार कर दिया।

यही वह नासूर है जिसने पाकिस्तान के धैर्य का बांध तोड़ दिया और उसे अपने ही ‘पालतू’ समूह के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतरने को मजबूर कर दिया।

4. सैन्य ताकत की तुलना: पाकिस्तानी सेना बनाम अफगान तालिबान

जब बात ‘खुली जंग’ की आती है, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि सैन्य रूप से कौन कितना ताकतवर है और क्या अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान जैसी परमाणु शक्ति संपन्न सेना के सामने टिक पाएगा?

Pakistan Afghanistan airstrike

पाकिस्तान की सैन्य शक्ति (The Conventional Power)

लंदन के ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज’ (IISS) की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया की 9वीं सबसे ताकतवर सेना है।

  • सक्रिय सैनिक: लगभग 6.6 लाख (660,000) एक्टिव सैनिक।
  • हथियार: 6,000 से अधिक बख्तरबंद गाड़ियां, 4,600 आर्टिलरी (तोपें), और चीन से मिले अत्याधुनिक हथियार।
  • वायुसेना और नौसेना: 465 आधुनिक फाइटर जेट्स (जिनमें F-16 और JF-17 थंडर शामिल हैं) और 260 अटैक हेलीकॉप्टर्स। अफ़ग़ानिस्तान के पास पाकिस्तान जैसी वायुसेना का कोई मुकाबला नहीं है, यही कारण है कि ‘ऑपरेशन गज़ब-लिल-हक’ के तहत पाकिस्तान आसानी से काबुल तक बमबारी कर पा रहा है।

अफगान तालिबान की ताकत (The Guerrilla Force)

संख्या और पारंपरिक हथियारों के मामले में अफ़ग़ानिस्तान (दुनिया में 55वें नंबर पर) काफी पीछे है, लेकिन उनकी ताकत उनका अनुभव और भौगोलिक स्थिति है।

  • सक्रिय लड़ाके: करीब 1.72 लाख (172,000) लड़ाके।
  • अमेरिकी हथियार: 2021 में जब अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से भागा, तो वह अरबों डॉलर के हथियार (Humvees, M4 राइफलें, नाईट विज़न गॉगल्स और कुछ ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर) पीछे छोड़ गया। तालिबान आज उन्हीं अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रहा है।
  • रणनीति: तालिबान पारंपरिक युद्ध (Conventional Warfare) के बजाय छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) में माहिर हैं। वे दुर्गम पहाड़ों में छिपकर दुश्मन को थका देने की कला जानते हैं, जिसने अमेरिका और सोवियत संघ जैसी महाशक्तियों को भी धूल चटा दी थी।

5. ड्रोन वॉरफेयर और न्यूक्लियर फैसिलिटी पर खतरे का दावा

इस युद्ध का एक नया और डरावना पहलू ‘ड्रोन वॉरफेयर’ (Drone Warfare) का इस्तेमाल है। अफ़ग़ानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उन्होंने इस्लामाबाद, नौशेरा, और एबटाबाद (जहां कभी ओसामा बिन लादेन मारा गया था) में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर ‘सुसाइड ड्रोन्स’ के ज़रिए सफल हमले किए हैं।

न्यूक्लियर सेंटर पर हमले की अफवाह: पाकिस्तानी मीडिया और पूर्व सैन्य अधिकारियों (जैसे आदिल रजा) के हवाले से यह भी दावा किया गया कि अफ़ग़ान ड्रोन्स ने इस्लामाबाद के पास स्थित पाकिस्तान के संवेदनशील ‘परमाणु ऊर्जा केंद्रों’ (Nuclear Energy Centers) को निशाना बनाने की कोशिश की। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ छोटे ड्रोन्स स्वाबी और नौशेरा में गिराए गए हैं, जिनसे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। एहतियात के तौर पर, पूरे पाकिस्तान में निजी ड्रोन उड़ाने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

6. वैश्विक प्रतिक्रिया: भारत, UNAMA और दुनिया का रुख

दो कट्टर इस्लामिक पड़ोसी देशों के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया, विशेषकर दक्षिण एशिया की नींद उड़ा दी है।

  • भारत का रुख: भारत हमेशा से आतंकवाद का भुक्तभोगी रहा है। नई दिल्ली ने इस घटनाक्रम पर पैनी नज़र बनाए रखी है। भारत ने स्पष्ट रूप से अफ़ग़ान संप्रभुता (Sovereignty) का समर्थन करते हुए पाकिस्तान द्वारा अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के अंदर की गई एयरस्ट्राइक्स की निंदा की है और क्षेत्रीय शांति वार्ता पर जोर दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र (UNAMA): अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने रिपोर्ट दी है कि पाकिस्तानी बमबारी के कारण भारी इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान हुआ है और महिलाओं व बच्चों सहित कई नागरिक मारे गए हैं।
  • चीन और ईरान: दोनों देशों के साथ सीमा साझा करने वाले ईरान और चीन ने कूटनीतिक मध्यस्थता (Mediation) की पेशकश की है। चीन (जो पाकिस्तान का बड़ा रक्षा साझेदार है) के लिए अफ़ग़ानिस्तान में शांति आवश्यक है ताकि उसके ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) को कोई नुकसान न पहुंचे।

7. निष्कर्ष: आगे क्या होगा? (The Road Ahead)

Pakistan-Afghanistan War: पाक एयरस्ट्राइक, अफगानिस्तान में 400 से ज्यादा मौतों का दावा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह आग जल्दी बुझने वाली नहीं है।

पाकिस्तान ने वह गलती कर दी है जिसका खामियाजा उसे दशकों तक भुगतना पड़ सकता है—अपने पाले हुए ‘प्रॉक्सी’ (Proxy) के खिलाफ सीधा युद्ध लड़ना। भले ही पाकिस्तान के पास मजबूत वायुसेना है, लेकिन तालिबान के साथ जमीनी लड़ाई लड़ना किसी भी देश के लिए ‘सुसाइड’ के समान साबित हुआ है।

आने वाले दिनों में यदि अफ़ग़ानिस्तान के पक्ष से ‘तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) और बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठन पाकिस्तान के आंतरिक शहरों में आत्मघाती हमलों की झड़ी लगा देते हैं, तो पाकिस्तान गृहयुद्ध (Civil War) और आर्थिक दिवालियेपन की गहरी खाई में गिर सकता है। दूसरी ओर, काबुल और कंधार में हो रही बमबारी अफ़ग़ानिस्तान को एक बार फिर मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) की ओर धकेल रही है।

यह युद्ध न केवल इन दोनों देशों के लिए विनाशकारी है, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डालता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव में ये दोनों देश बातचीत (Dialogue) की मेज पर लौटते हैं, या यह ‘ओपन वॉर’ इस पूरे भूभाग का नक्शा बदल कर रख देगी।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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