SpiceJet फ्लाइट

24 फरवरी, 2026: आसमान में हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान में अगर अचानक एक जोरदार धमाका हो और पायलट अनाउंस करे कि “हमारा एक इंजन फेल हो गया है”, तो उस वक्त यात्रियों की मनोदशा क्या होगी? मौत को सामने देखकर सांसें थम जाना लाजमी है। भारतीय विमानन क्षेत्र (Indian Aviation Sector) से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने देश भर में हवाई यात्रा की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्पाइसजेट (SpiceJet) की एक कमर्शियल फ्लाइट, जिसने उड़ान भरी ही थी, को मिड-एयर (Mid-air) तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा। विमान का एक इंजन पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पायलटों ने तुरंत एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क किया और ‘मेडे’ (Mayday) कॉल देते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर ‘फुल इमरजेंसी’ (Full Emergency) घोषित कर दी।

1. घटना का विस्तृत विवरण: टेकऑफ़ से लेकर ‘फुल इमरजेंसी’ तक का घटनाक्रम (Timeline of the Incident)

यह घटना विमानन सुरक्षा के नजरिए से बेहद संवेदनशील है। सूत्रों और शुरुआती एटीसी (ATC) ट्रांसक्रिप्ट के अनुसार, घटनाक्रम कुछ इस प्रकार तेजी से बदला:

टेकऑफ़ और शुरुआती संकेत

विमान (संभवतः बोइंग 737 मैक्स या Q400 टर्बोप्रॉप) ने अपने निर्धारित गंतव्य के लिए दिल्ली के IGI एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। टेकऑफ़ के कुछ ही मिनटों बाद, जब विमान चढ़ाई (Climb) कर रहा था और लगभग 10,000 से 15,000 फीट की ऊंचाई पर था, तभी कॉकपिट (Cockpit) में इंजन नंबर 1 (या 2) के लिए चेतावनी अलार्म बजने लगे।

जोरदार आवाज और झटके

यात्रियों के बयानों के अनुसार, उड़ान के लगभग 15 से 20 मिनट बाद उन्हें विमान के एक हिस्से से एक जोरदार ‘बैंग’ (Bang) की आवाज सुनाई दी। इसके तुरंत बाद विमान में भारी कंपन (Vibrations) शुरू हो गया। कुछ यात्रियों ने खिड़की से इंजन से हल्का धुआं या चिंगारी निकलते हुए भी देखने का दावा किया है। यह ‘कंप्रेसर स्टॉल’ (Compressor Stall) या बर्ड स्ट्राइक (Bird Strike) का स्पष्ट संकेत हो सकता है।

एटीसी से संपर्क और टर्न-बैक (Turn-Back)

स्थिति को भांपते हुए, कैप्टन ने तुरंत इंजन को ‘आइडल’ (Idle) या ‘शटडाउन’ (Shutdown) करने का फैसला किया ताकि आग लगने या आगे के नुकसान को रोका जा सके। पायलट ने तुरंत दिल्ली एटीसी से संपर्क साधा, स्थिति की गंभीरता (Pan-Pan या Mayday) बताई और वापस दिल्ली एयरपोर्ट पर तत्काल लैंडिंग (Priority Landing) की अनुमति मांगी।

2. ‘फुल इमरजेंसी’ का अर्थ क्या होता है? IGI एयरपोर्ट पर क्या तैयारियां थीं? (Decoding ‘Full Emergency’)

जब खबर आती है कि एयरपोर्ट पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई है, तो इसका मतलब कोई सामान्य अलर्ट नहीं होता। यह विमानन की दुनिया का सबसे उच्च स्तर का अलर्ट है।

एयरपोर्ट का ‘वॉर रूम’ में तब्दील होना

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI) दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है। जैसे ही एटीसी ने फुल इमरजेंसी की घोषणा की, पूरे एयरपोर्ट का परिदृश्य मिनटों में बदल गया:

  • रनवे खाली करना: जिस रनवे पर स्पाइसजेट के विमान को उतरना था, उस पर आने और जाने वाली अन्य सभी उड़ानों को तुरंत रोक दिया गया (Hold position) या हवा में ही डायवर्ट (Divert) कर दिया गया।
  • फायर टेंडर्स और एंबुलेंस का डिप्लॉयमेंट: क्रैश फायर टेंडर्स (CFTs – विशेष प्रकार के भारी दमकल वाहन), दर्जनों एंबुलेंस और मेडिकल रेस्पॉन्स टीमों को रनवे के दोनों ओर तैनात कर दिया गया। ये वाहन फोम (Foam) और रसायनों से भरे होते हैं ताकि क्रैश या आग लगने की स्थिति में कुछ ही सेकंड में प्रतिक्रिया दी जा सके।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management): सीआईएसएफ (CISF), दिल्ली पुलिस और स्थानीय अस्पतालों को स्टैंडबाय (Standby) पर रखा गया। ‘लोकल स्टैंडबाय’ से लेकर ‘फुल इमरजेंसी’ तक का यह सफर एयरपोर्ट के सभी विभागों के बीच एक बेहतरीन समन्वय (Coordination) का उदाहरण था।

3. हवा में दहशत: यात्रियों पर क्या गुजर रही थी? (The Mid-Air Terror for Passengers)

तकनीकी बातें अपनी जगह हैं, लेकिन उस धातु के ट्यूब (विमान) के अंदर बैठे उन 150 से अधिक यात्रियों की मानसिक स्थिति की कल्पना करना भी सिहरन पैदा कर देता है।

  • पैनिक और प्रार्थनाएं: जैसे ही विमान में झटके लगने शुरू हुए और केबिन क्रू (Cabin Crew) ने अपनी सीटों पर तेजी से वापस जाने का निर्देश दिया, यात्रियों के बीच दहशत फैल गई। कई यात्री रोने लगे और प्रार्थनाएं करने लगे।
  • पायलट का अनाउंसमेंट: ऐसे समय में पायलट का संवाद सबसे अहम होता है। कैप्टन ने सार्वजनिक उद्घोषणा (PA System) के जरिए यात्रियों को सूचित किया कि एक इंजन में तकनीकी खराबी आ गई है, लेकिन विमान पूरी तरह से नियंत्रण में है और वे दिल्ली वापस लौट रहे हैं। इस पेशेवर अनाउंसमेंट ने कुछ हद तक ‘पैनिक’ (Panic) को कम करने में मदद की।
  • इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी: क्रू मेंबर्स ने यात्रियों को ‘ब्रेस पोजिशन’ (Brace Position – आपातकालीन लैंडिंग के दौरान झटके से बचने की मुद्रा) के बारे में निर्देश दिए। यह वह पल होता है जब हर इंसान अपनी जिंदगी को एक ‘फ्लैशबैक’ (Flashback) की तरह देखता है।

4. तकनीकी विश्लेषण: विमान का इंजन हवा में क्यों फेल होता है? (Aviation Science: Causes of Engine Failure)

आधुनिक विमानन इतिहास में इंजनों को बेहद सुरक्षित (Highly Reliable) माना जाता है। लेकिन मशीनरी आखिर मशीनरी है। एक कमर्शियल जेटलाइनर (Jetliner) का इंजन हवा में फेल होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

क. बर्ड स्ट्राइक (Bird Strike)

भारत में, विशेषकर दिल्ली जैसे हवाई अड्डों के आसपास, पक्षियों का टकराना सबसे आम घटनाओं में से एक है। टेकऑफ़ या क्लाइंब के दौरान अगर कोई बड़ा पक्षी इंजन के टर्बाइन ब्लेड्स (Turbine blades) में समा जाता है, तो वह ब्लेड्स को तोड़ सकता है, जिससे इंजन का एयरफ्लो (Airflow) बिगड़ जाता है और वह काम करना बंद कर देता है या आग पकड़ लेता है।

ख. कंप्रेसर स्टॉल या सर्ज (Compressor Stall/Surge)

यह एक एरोडायनामिक (Aerodynamic) समस्या है, जहां इंजन के अंदर हवा का प्रवाह सुचारू नहीं रहता। इसके कारण इंजन से ‘बैकफायर’ (आग की लपटें) निकल सकती हैं और बहुत तेज धमाके की आवाज आती है। इसे नियंत्रित करने के लिए पायलट को इंजन की पावर कम करनी पड़ती है।

ग. तेल का रिसाव या फ्यूल लाइन की समस्या (Oil Leak or Fuel Starvation)

इंजन को ठंडा रखने और लुब्रिकेट करने के लिए तेल की आवश्यकता होती है। यदि किसी पाइप में दरार आ जाए और तेल या ईंधन (ATF) लीक होने लगे, तो इंजन सीज़ (Seize) हो सकता है या दबाव कम होने पर ऑटोमैटिक रूप से शटडाउन हो सकता है।

घ. रख-रखाव में लापरवाही (Maintenance Lapses)

यह सबसे चिंताजनक पहलू है। यदि एयरलाइन कंपनी समय पर इंजन की ओवरहालिंग (Overhauling) नहीं करती या घिसे हुए पुर्जों को नहीं बदलती, तो ‘मेटल फटीग’ (Metal Fatigue) के कारण हवा में पुर्जे टूट सकते हैं।

5. सिंगल-इंजन उड़ान: क्या एक इंजन पर विमान सुरक्षित लैंड कर सकता है? (The Redundancy of Twin-Engine Aircraft)

यात्रियों के मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि “अगर एक इंजन बंद हो गया, तो क्या हम आसमान से गिर जाएंगे?” एविएशन साइंस (Aviation Science) इसका स्पष्ट उत्तर ‘नहीं’ में देता है।

  • ईटीओपीएस (ETOPS) सर्टिफिकेशन: आज के सभी ट्विन-इंजन (दो इंजन वाले) कमर्शियल विमान (चाहे वह बोइंग 737 हो या एयरबस ए320) इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि वे टेकऑफ़ से लेकर लैंडिंग तक की पूरी यात्रा केवल एक इंजन के सहारे सुरक्षित रूप से पूरी कर सकते हैं।
  • अतिरिक्त पावर (Excess Thrust): एक इंजन बंद होने पर, पायलट दूसरे (जीवित) इंजन की शक्ति बढ़ा देता है। हालांकि इससे विमान की अधिकतम ऊंचाई (Maximum cruising altitude) और गति कम हो जाती है, लेकिन वह आसानी से उड़ता रहता है।
  • पायलटों की ट्रेनिंग: वाणिज्यिक पायलट (Commercial Pilots) हर 6 महीने में सिम्युलेटर (Simulator) के अंदर ‘सिंगल-इंजन फेलियर’ (Engine failure at V1) की कठोर ट्रेनिंग लेते हैं। दिल्ली में हुई यह सुरक्षित लैंडिंग पायलटों की इसी उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और ‘क्रू रिसोर्स मैनेजमेंट’ (CRM) का नतीजा है।

6. स्पाइसजेट का इतिहास और सुरक्षा रिकॉर्ड: क्या डीजीसीए (DGCA) सख्त कदम उठाएगा? (SpiceJet’s Track Record and DGCA’s Stance)

इस पूरी घटना का एक बहुत बड़ा ‘कॉर्पोरेट और रेगुलेटरी’ पहलू भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्पाइसजेट एयरलाइन पिछले कुछ वर्षों से लगातार वित्तीय संकट (Financial Crisis) और सुरक्षा खामियों (Safety Lapses) के कारण सुर्खियों में रही है।

पुरानी घटनाएं और डीजीसीए के नोटिस

साल 2022 से लेकर 2026 के बीच, स्पाइसजेट के विमानों में मिड-एयर स्नैग्स (Mid-air snags), विंडशील्ड क्रैक होने (Windshield cracking), मौसम रडार (Weather radar) खराब होने और इंजन फेलियर की दर्जनों घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

  • एक समय ऐसा भी आया था जब नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए स्पाइसजेट को अपनी कुल क्षमता की केवल 50% उड़ानों का ही संचालन करने का आदेश दिया था।
  • डीजीसीए ने स्पाइसजेट के ‘क्वालिटी कंट्रोल’ और ‘मेंटेनेंस प्रैक्टिस’ को ‘खराब’ (Poor) करार दिया था और एयरलाइन को ‘एन्हांस्ड सर्विलांस’ (Enhanced Surveillance) यानी कड़ी निगरानी में रखा था।

वित्तीय तंगी और सुरक्षा से समझौता (Financial Distress vs. Safety)

विमानन विशेषज्ञों (Aviation Experts) का मानना है कि स्पाइसजेट का वित्तीय संकट सीधे तौर पर उसकी सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। जब किसी एयरलाइन के पास स्पेयर पार्ट्स (Spare parts) खरीदने या वेंडर्स (Vendors) को समय पर भुगतान करने के पैसे नहीं होते, तो वे विमानों को ‘कैनीबलाइज’ (Cannibalize – एक विमान के पुर्जे निकालकर दूसरे में लगाना) करना शुरू कर देते हैं। इससे विमान की ‘डिस्पैच रिलायबिलिटी’ (Dispatch Reliability) बुरी तरह प्रभावित होती है।

2026 की इस घटना के बाद, डीजीसीए पर स्पाइसजेट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भारी दबाव होगा। क्या एयरलाइन का लाइसेंस (AOC) निलंबित किया जाएगा? यह एक बड़ा सवाल है।

7. आगे की जांच और विमानन मानक: ब्लैक बॉक्स खोलेगा राज (Investigation Protocols: AAIB and Black Box)

जैसे ही स्पाइसजेट के इस विमान ने दिल्ली IGI एयरपोर्ट पर सुरक्षित टचडाउन (Touchdown) किया और फायर ब्रिगेड ने इंजन का निरीक्षण किया, विमान को तुरंत ग्राउंड (Ground) कर दिया गया। अब यह मामला जांच एजेंसियों के हाथ में है।

एएआईबी (AAIB) की भूमिका

भारत में ऐसी ‘गंभीर घटनाओं’ (Serious Incidents) की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (Aircraft Accident Investigation Bureau – AAIB) द्वारा की जाती है।

  • फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR): सबसे पहले विमान के ‘ब्लैक बॉक्स’ (Black Box) को सीज किया जाएगा। सीवीआर से पता चलेगा कि घटना के समय पायलटों ने क्या बातचीत की और एफडीआर से इंजन के तापमान, दबाव और कंपन के सटीक आंकड़े मिलेंगे।
  • इंजन टियर-डाउन (Engine Tear-down): इंजन बनाने वाली कंपनी (संभवतः CFM International या Pratt & Whitney) के इंजीनियरों को बुलाया जाएगा। इंजन को खोलकर देखा जाएगा कि क्या किसी पुर्जे में दरार (Crack) थी, या कोई बाहरी वस्तु (FOD/Bird) उसमें फंसी थी।
  • मेंटेनेंस लॉगबुक (Maintenance Logbook): जांच अधिकारी विमान की लॉगबुक खंगालेंगे यह देखने के लिए कि क्या पिछली उड़ानों में किसी पायलट ने इंजन के बारे में कोई शिकायत दर्ज की थी, और यदि हां, तो क्या ग्राउंड इंजीनियर्स ने उसे सही तरीके से ठीक किया था या नहीं।

8. यात्रियों के अधिकार: मुआवजा और रिफंड के नियम (Passenger Rights & Compensation)

इस भयावह अनुभव से गुजरने वाले यात्रियों के लिए अब आगे क्या नियम हैं? नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) के ‘यात्री चार्टर’ (Passenger Charter) के अनुसार:

  1. वैकल्पिक उड़ान की व्यवस्था: चूंकि विमान को दिल्ली में ग्राउंड कर दिया गया है, इसलिए स्पाइसजेट की जिम्मेदारी है कि वह सभी यात्रियों को जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक विमान (Alternate aircraft) की व्यवस्था करे।
  2. भोजन और आवास (Refreshments and Accommodation): यदि दूसरी उड़ान में भारी देरी (Delay) होती है, तो एयरलाइन को यात्रियों को मुफ्त भोजन, पानी और यदि आवश्यकता हो तो होटल में रुकने की सुविधा (Hotel accommodation) प्रदान करनी होगी।
  3. रिफंड का विकल्प (Refund Option): यदि कोई यात्री इस सदमे के बाद यात्रा नहीं करना चाहता है, तो उसे अपनी टिकट का 100% रिफंड मांगने का पूरा कानूनी अधिकार है। हालांकि, भारत में ‘मानसिक आघात’ (Mental Trauma) के लिए एयरलाइंस द्वारा वित्तीय मुआवजा (Financial Compensation) देने का कोई स्पष्ट कानून नहीं है, जब तक कि कोई शारीरिक चोट न लगी हो।

क्या भारत का आसमान सुरक्षित है? ( Is the Indian Sky Safe?)

स्पाइसजेट विमान में इंजन फेल होने और दिल्ली में फुल इमरजेंसी घोषित किए जाने की यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि विमानन की दुनिया में सुरक्षा (Safety) हमेशा सर्वोपरि होनी चाहिए।

हालांकि हम भारतीय पायलटों (Indian Pilots) के उत्कृष्ट कौशल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की मुस्तैदी की सराहना करते हैं जिन्होंने 150 से अधिक जिंदगियों को सुरक्षित जमीन पर उतार लिया; लेकिन इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। एक एयरलाइन की खराब वित्तीय स्थिति कभी भी यात्रियों की जान के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए।

अब डीजीसीए (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-cause notice) जारी करने से आगे बढ़कर कुछ कड़े और दंडात्मक कदम उठाने होंगे। भारतीय विमानन बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यह विकास तभी मायने रखता है जब ‘जीरो एक्सीडेंट’ (Zero Accident) और ‘जीरो स्नैग’ (Zero Snag) की नीति को सख्ती से लागू किया जाए।

आज के वे यात्री जो मौत को छूकर वापस आए हैं, वे शायद जीवन भर इस खौफनाक सफर को नहीं भूल पाएंगे। लेकिन उनका यह अनुभव पूरे सिस्टम के लिए एक सख्त चेतावनी होना चाहिए कि “सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं।”

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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