सूर्य ग्रहण 2026

ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है और आज, 17 फरवरी 2026 की तारीख खगोल विज्ञान के प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। आज साल का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) लग रहा है। यह कोई साधारण ग्रहण नहीं, बल्कि एक ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) है, जिसे दुनिया भर में “Ring of Fire” (आग का छल्ला) के नाम से जाना जाता है।

हालाँकि, भारतीय खगोल प्रेमियों और धार्मिक लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

1. वलयाकार सूर्य ग्रहण: आखिर आज क्या हो रहा है?

सबसे पहले, हमें यह समझना होगा कि आज की घटना ‘खग्रास’ (पूर्ण) सूर्य ग्रहण से कैसे अलग है।

सूर्य ग्रहण का विज्ञान: सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा (Moon), पृथ्वी (Earth) और सूर्य (Sun) के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है।

वलयाकार (Annular) ग्रहण क्या है? आज का ग्रहण ‘वलयाकार’ है। इसका मतलब है कि चंद्रमा आज पृथ्वी से अपनी कक्षा में काफी दूर (Apogee) है। दूर होने के कारण, चंद्रमा का आकार पृथ्वी से देखने पर सूर्य से छोटा दिखाई देता है।

  • जब चंद्रमा सूर्य के बिल्कुल बीच में आता है, तो वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता।
  • परिणामस्वरुप, चंद्रमा के काले घेरे के चारों ओर सूर्य का एक चमकीला किनारा दिखाई देता है।
  • यह किनारा एक सोने की अंगूठी या आग के छल्ले (Ring of Fire) जैसा दिखता है। इसीलिए इसे वलयाकार ग्रहण कहते हैं।

2. समय और दृश्यता: भारत में क्यों नहीं दिखेगा?

यह ग्रहण भारतीय समयानुसार (IST) आज शाम को शुरू होगा और देर रात तक चलेगा। लेकिन भौगोलिक स्थिति के कारण यह भारत में अदृश्य रहेगा।

ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार – अनुमानित):

  • ग्रहण स्पर्श (शुरुआत): शाम 04:50 बजे (लगभग)
  • परमग्रास (पीक): शाम 07:30 बजे
  • ग्रहण मोक्ष (समाप्ति): रात 10:45 बजे

कहाँ दिखाई देगा? (Visibility Map): यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में दिखाई देगा।

  • अंटार्कटिका: यहाँ ‘रिंग ऑफ फायर’ का सबसे अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।
  • दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका: इन महाद्वीपों के कुछ दक्षिणी हिस्सों में आंशिक (Partial) सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।
  • भारत: चूंकि जब ग्रहण अपने चरम पर होगा, तब भारत में सूर्यास्त हो चुका होगा या होने वाला होगा, और ग्रहण की छाया (Shadow Path) भारत के ऊपर से नहीं गुजर रही है, इसलिए यहाँ यह दिखाई नहीं देगा।
सूर्य ग्रहण 2026

3. सूतक काल: क्या मंदिर बंद रहेंगे?

भारत में सूर्य ग्रहण को लेकर सबसे बड़ा प्रश्न ‘सूतक काल’ का होता है। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु जैसे प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सूतक के नियम बहुत स्पष्ट हैं।

आज का नियम:

  • शास्त्रों के अनुसार, “जहाँ ग्रहण दिखता है, वहीं उसका सूतक मान्य होता है।” (यत्र दृश्यते ग्रहणं, तत्रैव सूतकं भवेत्)।
  • चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।

इसका मतलब क्या है?

  1. मंदिर खुले रहेंगे: भारत के सभी प्रमुख मंदिर (जैसे तिरुपति, काशी विश्वनाथ, महाकाल, सोमनाथ) आज अपने निर्धारित समय पर खुले रहेंगे और पूजा-आरती नित्य कर्म की तरह होगी।
  2. पूजा-पाठ: आप घर में भी पूजा कर सकते हैं।
  3. खान-पान: भोजन में तुलसी दल डालने की या खाना न पकाने की कोई धार्मिक बाध्यता आज भारत में नहीं है।

4. ज्योतिषीय दृष्टिकोण: कुंभ राशि पर ग्रहण का साया

भले ही ग्रहण भारत में दिखाई न दे, लेकिन ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, ग्रहों की चाल का असर पूरी पृथ्वी पर होता है। यह ग्रहण कुंभ राशि (Aquarius) और शतभिषा नक्षत्र में लग रहा है।

सूर्य आत्मा का कारक है और चंद्रमा मन का। जब इन पर राहु/केतु का प्रभाव पड़ता है, तो मानसिक और सामाजिक उथल-पुथल की संभावना रहती है।

राशियों पर प्रभाव (संक्षिप्त राशिफल):

  1. मेष (Aries): आर्थिक लाभ हो सकता है, लेकिन बड़े भाई-बहनों से विवाद से बचें।
  2. वृषभ (Taurus): कार्यक्षेत्र में बदलाव आ सकता है। बॉस के साथ संबंध मधुर रखें।
  3. मिथुन (Gemini): भाग्य थोड़ा कमजोर रह सकता है। यात्रा में सावधानी बरतें।
  4. कर्क (Cancer): स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मानसिक तनाव हो सकता है। शिव आराधना करें।
  5. सिंह (Leo): दांपत्य जीवन में तनाव आ सकता है। जीवनसाथी की सेहत का ध्यान रखें।
  6. कन्या (Virgo): शत्रुओं पर विजय मिलेगी। पुरानी बीमारी से राहत मिल सकती है।
  7. तुला (Libra): संतान पक्ष से चिंता रह सकती है। विद्यार्थियों का मन पढ़ाई से भटक सकता है।
  8. वृश्चिक (Scorpio): माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रॉपर्टी के मामलों में जल्दबाजी न करें।
  9. धनु (Sagittarius): पराक्रम बढ़ेगा। छोटी यात्राएं लाभदायी रहेंगी।
  10. मकर (Capricorn): वाणी पर संयम रखें। धन हानि की आशंका है।
  11. कुंभ (Aquarius): ग्रहण आपकी ही राशि में है। मानसिक भटकाव, सिरदर्द और निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। धैर्य रखें।
  12. मीन (Pisces): खर्चों में बढ़ोतरी होगी। विदेश से जुड़े कार्यों में बाधा आ सकती है।

(उपाय: सभी राशियों के लोग आज ‘ओम नमः शिवाय’ या ‘गायत्री मंत्र’ का जाप करें।)

सूर्य ग्रहण 2026

5. गर्भवती महिलाएं क्या करें? (Myth vs Reality)

सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) को लेकर भारतीय समाज में कई धारणाएं हैं।

  • मान्यता: बाहर नहीं निकलना चाहिए, चाकू-कैंची का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, सिलाई-कढ़ाई नहीं करनी चाहिए।
  • आज की स्थिति: चूंकि ग्रहण भारत में नहीं है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। वे अपनी दिनचर्या सामान्य रूप से जारी रख सकती हैं।
  • सावधानी: फिर भी, अगर घर के बड़े-बुजुर्ग आग्रह करें, तो मानसिक शांति के लिए आप भगवान का नाम ले सकती हैं या धार्मिक पुस्तकों का पाठ कर सकती हैं। लेकिन डरने का कोई वैज्ञानिक या शास्त्रीय कारण नहीं है।

6. विज्ञान की नजर से: ग्रहण क्यों महत्वपूर्ण है?

वैज्ञानिकों के लिए सूर्य ग्रहण एक प्रयोगशाला (Laboratory) की तरह होता है।

  • कोरोना का अध्ययन: जब सूर्य का मुख्य भाग ढक जाता है, तो वैज्ञानिक सूर्य के बाहरी वातावरण (Corona) का अध्ययन कर पाते हैं, जो सामान्य दिनों में सूर्य की तेज चमक के कारण नहीं दिखता।
  • हीलियम की खोज: आपको जानकर हैरानी होगी कि ‘हीलियम’ गैस की खोज 1868 में एक सूर्य ग्रहण के दौरान ही हुई थी।
  • आइंस्टीन की थ्योरी: 1919 के सूर्य ग्रहण ने ही अल्बर्ट आइंस्टीन की ‘जनरल रिलेटिविटी’ थ्योरी को सही साबित किया था, जब यह देखा गया कि सूर्य का गुरुत्वाकर्षण तारों की रोशनी को मोड़ देता है।

आज भी, नासा (NASA) और इसरो (ISRO) के वैज्ञानिक अंटार्कटिका के पास से डेटा एकत्र करेंगे ताकि अंतरिक्ष के मौसम (Space Weather) को बेहतर समझा जा सके।

7. ग्रहण देखने का सही तरीका (Safe Viewing)

जो लोग भारत के बाहर हैं और इस ग्रहण को देख सकते हैं, उनके लिए चेतावनी:

  • नंगी आंखों से कभी न देखें: वलयाकार ग्रहण में भी सूर्य का प्रकाश इतना तेज होता है कि यह रेटिना को हमेशा के लिए जला सकता है (Solar Retinopathy)।
  • एक्लिप्स ग्लासेस: हमेशा ISO सर्टिफाइड सूर्य ग्रहण चश्मे का उपयोग करें।
  • कैमरा/टेलीस्कोप: बिना सोलर फिल्टर लगाए कैमरे या दूरबीन से सूर्य को न देखें।

भारत में कैसे देखें? भारत में आप इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकते हैं। NASA और कई खगोल विज्ञान चैनल यूट्यूब पर इसका सीधा प्रसारण करेंगे। तकनीक की मदद से आप घर बैठे अंटार्कटिका का नजारा ले सकते हैं।

8. पौराणिक कथा: राहु और सूर्य का बैर

ग्रहण के पीछे की पौराणिक कथा बड़ी दिलचस्प है। समुद्र मंथन के समय, स्वरभानु नाम का एक राक्षस देवताओं का रूप धरकर अमृत पीने बैठ गया था। सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया। लेकिन अमृत पीने के कारण वह मरा नहीं।

  • सिर: राहु बना।
  • धड़: केतु बना।

माना जाता है कि उसी समय से राहु, सूर्य और चंद्रमा को अपना दुश्मन मानता है और समय-समय पर उन्हें निगलता है, जिसे हम ग्रहण कहते हैं। चूंकि उसका धड़ नहीं है, इसलिए सूर्य/चंद्रमा उसके गले से वापस बाहर आ जाते हैं, और ग्रहण समाप्त हो जाता है।

9. डरे नहीं, अद्भुत नज़ारे का आनंद लें

17 फरवरी 2026 का यह सूर्य ग्रहण खगोलीय घटनाओं की सुंदर कड़ी है। भले ही हम भारतवासी इसे अपनी छत से न देख पाएं, लेकिन यह हमें याद दिलाता है कि हम एक विशाल ब्रह्मांड का हिस्सा हैं।

सारांश (Key Takeaways):

  1. ग्रहण का प्रकार: वलयाकार (Ring of Fire)।
  2. भारत में दृश्यता: नहीं (Not Visible)।
  3. सूतक काल: मान्य नहीं।
  4. मंदिर: खुले रहेंगे।
  5. गर्भवती महिलाएं: सामान्य दिनचर्या का पालन करें।

प्रकृति के इस खेल का सम्मान करें। अंधविश्वासों से दूर रहें और विज्ञान व धर्म के सही समन्वय को अपनाएं।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *