Modern Farming Tools

हल-बैल से आगे निकलती भारत की कृषि

“जय जवान, जय किसान” का नारा आज के दौर में “जय विज्ञान” के बिना अधूरा है। एक समय था जब खेती का मतलब होता था—कड़ी धूप में बैलों के पीछे चलते किसान, हाथों से बुवाई और महीनों चलने वाली कटाई। उस समय मेहनत ज्यादा थी और पैदावार कम। लेकिन आज 21वीं सदी का भारत बदल रहा है। आज का किसान सिर्फ मेहनती नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट’ है।

बढ़ती जनसंख्या के लिए अनाज की मांग पूरी करना, मौसम की अनिश्चितता से निपटना और खेती में मजदूरों की कमी (Labor Shortage) जैसी समस्याओं का समाधान केवल एक ही चीज में छिपा है— आधुनिक कृषि यंत्र (Modern Farming Tools)

आज ट्रैक्टर सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता पावरहाउस है। आसमान में उड़ते ड्रोन अब सिर्फ निगरानी नहीं करते, बल्कि खाद छिड़कते हैं। और मोबाइल से चलने वाले पंप घर बैठे खेतों की प्यास बुझाते हैं। यंत्रीकरण (Mechanization) ने न केवल खेती को आसान बनाया है, बल्कि लागत (Cost) कम करके मुनाफे को कई गुना बढ़ाया है।

भाग 1: मिट्टी की तैयारी के यंत्र (Soil Preparation Tools) – मजबूत नींव, शानदार फसल

खेती की शुरुआत होती है मिट्टी को तैयार करने से। अगर मिट्टी भुरभुरी और समतल नहीं होगी, तो बीज का अंकुरण सही नहीं होगा। पुराने जमाने के हल अब इतिहास बन चुके हैं।

1. लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveler)

यह आधुनिक खेती का सबसे महत्वपूर्ण यंत्र है, खासकर पानी की बचत के लिए।

  • क्या है? यह एक कंप्यूटर और लेजर गाइडेड मशीन है जो ट्रैक्टर के पीछे लगती है। यह खेत की जमीन को बिल्कुल समतल (Level) कर देती है।
  • फायदा: उबड़-खाबड़ जमीन में पानी कहीं ज्यादा भर जाता है और कहीं सूखा रह जाता है। लेजर लेवलर से समतल किए गए खेत में पानी एक समान फैलता है। इससे 30-40% पानी की बचत होती है और पैदावार में 15-20% की वृद्धि होती है।
  • उपयोग: धान और गेहूं की खेती से पहले इसका प्रयोग अनिवार्य हो गया है।

2. रोटावेटर (Rotavator)

रोटावेटर ने कल्टीवेटर और डिस्क हैरो की जगह ले ली है।

  • काम: यह मिट्टी को काटकर, उसे उलट-पुलट कर और पीसकर एकदम भुरभुरा (Powder) बना देता है। यह पिछली फसल के अवशेषों (जैसे डंठल) को भी काटकर मिट्टी में मिला देता है, जो खाद का काम करते हैं।
  • समय की बचत: जहां हल से जुताई में कई बार खेत जोतना पड़ता था, रोटावेटर एक या दो बार में ही खेत को बुवाई के लिए तैयार कर देता है। इससे डीजल और समय दोनों बचते हैं।
Modern Farming Tools

3. रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल (Reversible MB Plough)

गहरी जुताई के लिए यह सबसे बेहतरीन औजार है।

  • विशेषता: यह मिट्टी की निचली परत को ऊपर और ऊपरी परत को नीचे कर देता है। इससे मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है और हानिकारक कीड़े-मकोड़े या खरपतवार की जड़ें धूप में आकर नष्ट हो जाती हैं। यह सख्त मिट्टी को भी मक्खन की तरह काट देता है।

भाग 2: बुवाई और रोपाई के आधुनिक यंत्र (Sowing & Planting Tools) – सही बीज, सही दूरी

पैदावार बढ़ाने का सबसे बड़ा मंत्र है—बीज से बीज की सही दूरी और सही गहराई। हाथों से बुवाई (Broadcasting) करने पर बीज बर्बाद होते हैं और पौधे असमान उगते हैं।

1. सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल (Seed Cum Fertilizer Drill)

यह मशीन एक साथ दो काम करती है—बीज बोना और खाद डालना।

  • तकनीक: इसमें अलग-अलग बॉक्स होते हैं। यह मशीन एक निश्चित गहराई पर बीज डालती है और उसके ठीक बगल में या नीचे खाद डालती है।
  • फायदा: इससे बीजों का अंकुरण (Germination) बहुत अच्छा होता है क्योंकि हर बीज को तुरंत पोषण मिल जाता है। हाथों से छिड़काव के मुकाबले इसमें 20-25% बीज की बचत होती है।

2. न्यूमेटिक प्लांटर (Pneumatic Planter)

महंगी और नकदी फसलों (जैसे मक्का, कपास, सूरजमुखी) के लिए यह मशीन वरदान है।

  • काम: यह मशीन हवा के दबाव (Air Pressure) का उपयोग करके एक-एक बीज को सटीक दूरी पर गिराती है।
  • सटीकता: इसमें ‘सिंगल सीड’ गिरता है, यानी न तो कहीं दो बीज गिरेंगे और न ही कोई जगह खाली रहेगी। इससे पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होती है और हर पौधे को पूरा धूप-पानी मिलता है।
Modern Farming Tools

3. पैडी ट्रांसप्लांटर (Paddy Transplanter)

धान की खेती में सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की कमी है। मजदूर मिलते नहीं और अगर मिलें तो रोपाई में बहुत समय लगता है।

  • समाधान: पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन नर्सरी में तैयार धान की पौध (Mat Nursery) को खेत में रोपती है।
  • क्षमता: एक मशीन एक दिन में 4-5 एकड़ खेत में रोपाई कर सकती है, जिसे करने में 20-30 मजदूरों की जरूरत पड़ती। इससे लागत आधी हो जाती है और कतार से कतार की दूरी एकदम सीधी रहती है, जिससे बाद में निराई-गुड़ाई आसान होती है।

4. जीरो टिलेज मशीन (Zero Tillage Machine)

यह मशीन पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी है।

  • क्या है? धान की कटाई के बाद खेत की जुताई किए बिना ही यह मशीन सीधे गेहूं की बुवाई कर देती है।
  • फायदा: इससे खेत की तैयारी का खर्च और समय पूरी तरह बच जाता है। मिट्टी की नमी बनी रहती है, जिससे पहला पानी देर से देना पड़ता है।

भाग 3: फसल सुरक्षा और देखभाल (Crop Care & Protection) – ड्रोन का दौर

फसल बोने के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है उसे कीड़ों और बीमारियों से बचाना। पीठ पर टंकी लादकर दवा छिड़कना अब पुराना हो गया है।

1. कृषि ड्रोन (Agriculture Drones)

2026 में खेती का सबसे बड़ा ‘गेम चेंजर’ ड्रोन है।

  • छिड़काव: एक ड्रोन 10 मिनट में 1 एकड़ खेत में कीटनाशक या नैनो-यूरिया (Nano Urea) का छिड़काव कर सकता है।
  • फायदा:
    • समान छिड़काव: ड्रोन के पंखों की हवा से दवा पत्तों के नीचे भी पहुंच जाती है।
    • पानी की बचत: पारंपरिक तरीके में 100-150 लीटर पानी लगता है, जबकि ड्रोन से मात्र 10 लीटर पानी में काम हो जाता है।
    • स्वास्थ्य सुरक्षा: किसान जहरीले रसायनों के संपर्क में आने से बच जाते हैं।
    • निगरानी (Monitoring): मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमरे वाले ड्रोन यह बता सकते हैं कि खेत के किस हिस्से में बीमारी लगी है या कहां पानी की कमी है।

2. बूम स्प्रेयर (Boom Sprayer)

बड़े किसानों के लिए यह ट्रैक्टर चलित मशीन बहुत उपयोगी है।

  • काम: इसमें लंबे पंख (Boom) होते हैं जो 40-50 फीट की चौड़ाई कवर करते हैं। ट्रैक्टर चलता जाता है और नोजल से धुंध की तरह दवा का छिड़काव होता रहता है। यह बहुत कम समय में बड़े रकबे को कवर करता है।
Modern Farming Tools

3. पावर वीडर (Power Weeder)

खरपतवार (Weeds) फसल के सबसे बड़े दुश्मन हैं क्योंकि वे फसल का खाद-पानी खा जाते हैं। खुरपी से निराई करने में बहुत मेहनत लगती है।

  • समाधान: पावर वीडर एक छोटी इंजन वाली मशीन है जिसे किसान हाथ से पकड़कर चलाता है। यह फसलों की कतारों के बीच उगने वाले खरपतवार को काटकर मिट्टी में मिला देता है। यह गन्ने, सब्जियों और कपास की खेती के लिए बेहतरीन है।

भाग 4: सिंचाई के आधुनिक साधन (Irrigation Tools) – बूँद-बूँद में जीवन

“जल ही जीवन है” और खेती में “जल ही पैसा है”। भूजल स्तर नीचे जा रहा है, इसलिए पानी का स्मार्ट उपयोग जरूरी है।

1. ड्रिप इरिगेशन सिस्टम (Drip Irrigation)

इसे टपक सिंचाई भी कहते हैं।

  • तकनीक: इसमें प्लास्टिक की पाइपों का जाल बिछाया जाता है और पौधों की जड़ों के पास ‘ड्रिपर’ लगाए जाते हैं। पानी बूंद-बूंद करके सीधे जड़ों में गिरता है।
  • लाभ: इससे 60-70% पानी की बचत होती है। पानी के साथ घुलनशील खाद (Fertigation) भी दी जा सकती है, जिससे खाद की खपत कम होती है और पौधों का विकास तेज होता है। यह सब्जियों और बागवानी के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

2. रेन गन (Rain Gun)

गन्ने या चारे वाली फसलों के लिए, जहां ड्रिप नहीं लग सकती, वहां रेन गन काम आती है।

  • काम: यह एक तोप जैसा फव्वारा है जो पानी को बारिश की तरह 100 फीट दूर तक फेंकता है। यह कम समय में बड़े क्षेत्र की सिंचाई करता है और पत्तों को भी धो देता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) अच्छा होता है।
Modern Farming Tools

3. सोलर वाटर पंप (Solar Pumps)

डीजल की बढ़ती कीमतों और बिजली की कटौती से बचने के लिए पीएम कुसुम योजना (PM-KUSUM) के तहत सोलर पंप लगाए जा रहे हैं। यह एक बार का निवेश है जो 25 साल तक मुफ्त बिजली देता है।

भाग 5: कटाई और गहाई (Harvesting & Threshing) – समय की जीत

फसल पकने के बाद उसे आंधी-बारिश से बचाने के लिए तुरंत काटना जरूरी होता है।

1. कंबाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester)

यह खेती का ‘बाहुबली’ है।

  • काम: यह मशीन खेत में खड़ी फसल को काटती है, उसके दाने अलग करती है (Threshing), और साफ दाने टैंक में भरती है। पीछे सिर्फ भूसा बचता है।
  • उपयोग: गेहूं, धान, सोयाबीन और सरसों के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है। अब ‘ट्रैक कंबाइन’ (चेन वाली) भी आ गई हैं जो गीले खेतों में भी नहीं धंसतीं।

2. रीपर बाइंडर (Reaper Binder)

छोटे किसानों के लिए कंबाइन महंगी हो सकती है, और उन्हें पशुओं के लिए साबुत भूसा भी चाहिए होता है।

  • काम: रीपर बाइंडर मशीन गेहूं या धान को काटती है और स्वचालित रूप से उसके बंडल (पूलियां) भी बांध देती है। यह मजदूरों के मुकाबले बहुत सस्ता और तेज काम करती है।
Modern Farming Tools

3. मल्टी-क्रॉप थ्रेशर (Multi-Crop Thresher)

पहले हर फसल के लिए अलग थ्रेशर चाहिए होता था। अब मल्टी-क्रॉप थ्रेशर आ गए हैं। सेटिंग बदलकर इसी मशीन से गेहूं, सरसों, चना, सोयाबीन और मक्का भी निकाला जा सकता है।

4. डिगर (Digger)

आलू, मूंगफली, प्याज और लहसुन जैसी जमीन के नीचे उगने वाली फसलों को निकालना बहुत कठिन काम है।

  • पोटैटो डिगर/ग्राउंडनट डिगर: यह मशीन मिट्टी को खोदकर फसल को ऊपर उठा देती है और मिट्टी झाड़कर उसे साफ कर देती है। इससे फसल कटती-फटती नहीं है और मजदूरों का खर्च 90% तक बच जाता है।

भाग 6: पराली प्रबंधन और अवशेष निस्तारण (Post-Harvest & Stubble Management)

पराली जलाना प्रदूषण का कारण है और मिट्टी के लिए भी नुकसानदायक है। सरकार अब उन मशीनों पर भारी सब्सिडी दे रही है जो पराली का समाधान करती हैं।

1. हैप्पी सीडर और सुपर सीडर (Happy Seeder / Super Seeder)

पंजाब और हरियाणा में यह मशीन क्रांति लाई है।

  • काम: यह मशीन धान की कटाई के बाद बचे हुए डंठल (पराली) को जलाए बिना, उसे चीरते हुए सीधे गेहूं की बुवाई कर देती है।
  • फायदा: पराली मल्चिंग (Mulching) का काम करती है, जिससे नमी बनी रहती है और खरपतवार नहीं उगते। किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।

2. स्ट्रॉ बेलर (Straw Baler)

अगर किसान खेत में पराली नहीं रखना चाहता, तो वह बेलर का उपयोग कर सकता है।

  • काम: यह मशीन खेत में बिखरे भूसे या पराली को इकट्ठा करके उसकी ईंटें (Bales) बना देती है। इन बंडलों को आसानी से उठाकर बिजली संयंत्रों (Power Plants) या गत्ता फैक्ट्रियों में बेचा जा सकता है। इससे ‘कचरे से कमाई’ होती है।

भाग 7: बागवानी और सब्जियों के लिए विशेष मशीनें (Horticulture Tools)

सब्जियों और फलों की खेती में भी मशीनीकरण बढ़ा है।

  • मल्चिंग मशीन (Mulching Machine): यह मशीन खेत में प्लास्टिक की मल्च फिल्म (Sheet) बिछाती है और साथ ही मिट्टी से दबाती जाती है। मल्चिंग से खरपतवार रुकते हैं और नमी बनी रहती है।
  • फ्रूट पिकर (Fruit Picker): ऊंचे पेड़ों (जैसे आम, सेब) से फल तोड़ने के लिए हाइड्रोलिक लिफ्ट वाली मशीनें आ गई हैं, जिससे फल बिना नुकसान के तोड़े जा सकते हैं।

भाग 8: भविष्य की तकनीक (Future Tech – AI & Robotics)

2026 में हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) को खेतों में उतरते देख रहे हैं।

1. चालक रहित ट्रैक्टर (Driverless Tractor)

कंपनियां ऐसे ट्रैक्टर बना रही हैं जो जीपीएस (GPS) से चलते हैं। किसान खेत के किनारे बैठकर टैबलेट से इसे कंट्रोल कर सकता है। यह 24 घंटे बिना थके काम कर सकता है।

2. मृदा सेंसर (Soil Sensors)

ये छोटे सेंसर खेत में अलग-अलग जगहों पर गाड़ दिए जाते हैं। ये सेंसर मोबाइल ऐप पर बताते हैं कि मिट्टी में नमी कितनी है, तापमान क्या है और किस पोषक तत्व (NPK) की कमी है। इससे किसान तुक्का नहीं, बल्कि विज्ञान के आधार पर खाद-पानी देता है।

भाग 9: यंत्रीकरण के लाभ (Benefits of Mechanization)

संक्षेप में, इन मशीनों को अपनाने के फायदे क्या हैं?

  1. पैदावार में वृद्धि: समय पर बुवाई और सही देखभाल से पैदावार 20-30% तक बढ़ जाती है।
  2. लागत में कमी: मजदूरों पर निर्भरता कम होने और बीज-खाद की बर्बादी रुकने से खेती की लागत घटती है।
  3. समय की बचत: जो काम करने में हफ्तों लगते थे, वे घंटों में हो जाते हैं। इससे किसान एक साल में 3 फसलें (Multi-cropping) ले सकता है।
  4. युवाओं का आकर्षण: खेती में तकनीक आने से पढ़े-लिखे युवा इसे एक ‘बिजनेस’ के रूप में देखने लगे हैं और गांवों की ओर लौट रहे हैं।

भाग 10: छोटे किसानों के लिए राह – ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (CHC)

भारत में 80% किसान छोटे हैं (जिनके पास 2 एकड़ से कम जमीन है)। वे 10 लाख का ट्रैक्टर या 25 लाख की कंबाइन नहीं खरीद सकते। तो वे क्या करें?

सरकार की योजना SMAM (Sub-Mission on Agricultural Mechanization) के तहत गांवों में कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) खोले जा रहे हैं।

  • यह एक तरह का ‘मशीन बैंक’ है।
  • कोई भी उद्यमी या किसान समूह (FPO) इसे खोल सकता है, जिस पर सरकार 40% से 80% तक सब्सिडी देती है।
  • छोटे किसान यहां से बहुत कम किराए पर मशीनें ले जा सकते हैं। यह ‘Uber/Ola’ की तरह खेती के लिए है।

भाग 11: मशीन खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें (Buying Guide)

अगर आप कोई मशीन खरीदने का मन बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  1. जमीन का आकार: अगर आपके पास छोटी जोत है, तो बड़े ट्रैक्टर के बजाय मिनी ट्रैक्टर (Mini Tractor) या पावर टिलर (Power Tiller) लें।
  2. मिट्टी का प्रकार: काली मिट्टी और रेतीली मिट्टी के लिए अलग-अलग इम्प्लीमेंट्स काम करते हैं।
  3. सर्विस और स्पेयर पार्ट्स: हमेशा ऐसी कंपनी की मशीन खरीदें जिसका सर्विस सेंटर आपके जिले में हो। खेती का सीजन छोटा होता है, अगर मशीन खराब हुई और पार्ट नहीं मिला, तो भारी नुकसान हो सकता है।
  4. सब्सिडी: खरीदने से पहले अपने ब्लॉक के कृषि अधिकारी से संपर्क करें और जानें कि किस मशीन पर कितनी सरकारी सब्सिडी उपलब्ध है।

मशीनीकरण विकल्प नहीं, जरूरत है

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि आधुनिक औजार और मशीनें अब ‘लग्जरी’ नहीं, बल्कि ‘नेसेसिटी’ (जरूरत) हैं। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, जब मौसम अप्रत्याशित है, तब तेजी से काम निपटाना ही फसल बचाने का एकमात्र तरीका है।

लेजर लेवलर से पानी बचाना हो, ड्रोन से दवा छिड़कना हो, या कंबाइन से कटाई करनी हो—तकनीक किसान की सबसे अच्छी दोस्त बनकर उभरी है। जो किसान समय के साथ बदलेगा, वही मुनाफे की फसल काटेगा।

खेती को हाईटेक बनाइए, पैदावार बढ़ाइए!

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *