बाजार में भूचाल और फिर रिकवरी का चमत्कार
शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट में अक्सर उतार-चढ़ाव होते रहते हैं, लेकिन फरवरी 2026 के पहले हफ्ते में जो हुआ, उसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। सोने और चांदी की कीमतों में एक ऐसा ‘यू-टर्न’ (U-Turn) देखने को मिला, जिसकी कल्पना बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों ने भी नहीं की थी।
1 फरवरी को पेश हुए बजट के बाद बाजार में मायूसी छाई थी। 2 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। निवेशकों में हाहाकार मच गया। चांदी ₹17,000 से लेकर ₹26,000 प्रति किलो तक टूट गई और सोना भी ₹5,000 से ज्यादा सस्ता हो गया। ऐसा लग रहा था कि अब बुलियन मार्केट (Bullion Market) का बुरा दौर शुरू हो गया है।
लेकिन फिर आया 3 फरवरी का दिन – एक ऐसा दिन जिसने पूरी बाजी पलट दी।
सुबह होते ही बाजार में एक नई खबर आई, और देखते ही देखते ‘क्रैश’ ‘रैली’ में बदल गया। चांदी, जो कल तक रसातल में जा रही थी, उसने एक ही झटके में ₹21,000 प्रति किलो की छलांग लगा दी। सोना भी पीछे नहीं रहा और ₹5,000 प्रति 10 ग्राम तक उछल गया।
आखिर 24 घंटे में ऐसा क्या जादू हो गया? वो कौन सी खबर थी जिसने गिरते हुए बाजार को रॉकेट बना दिया? क्या यह अमेरिका और भारत के बीच हुई उस ‘सीक्रेट डील’ का असर है जिसकी चर्चा वाइट हाउस से लेकर दिल्ली तक हो रही है?
भाग 1: द ग्रेट क्रैश (The Great Crash) – 1 और 2 फरवरी की काली रात
इस यू-टर्न को समझने के लिए हमें पहले उस ‘एक्सीडेंट’ को समझना होगा जो इससे ठीक पहले हुआ था। फरवरी की शुरुआत निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थी।
1. बजट का झटका (Post-Budget Blues): 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री ने बजट पेश किया। बुलियन मार्केट को उम्मीद थी कि सरकार सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) में बड़ी कटौती करेगी। लेकिन बजट में कोई बड़ी राहत नहीं मिली।
- उम्मीद टूटने से निवेशकों ने धड़ाधड़ बिकवाली (Profit Booking) शुरू कर दी।
- जिन लोगों ने बजट से पहले तेजी की उम्मीद में सोना खरीदा था, वे अपना माल बेचने लगे।

2. ग्लोबल फैक्टर और फेड का डर: उसी समय अमेरिका से खबरें आ रही थीं कि फेडरल रिजर्व (US Fed) ब्याज दरें कम नहीं करेगा।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘केविन वॉर्श’ (Kevin Warsh) को फेड चेयरमैन के लिए नामित किया, जो महंगाई को लेकर सख्त माने जाते हैं।
- इस खबर से डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) मजबूत हो गया। और नियम सीधा है – जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना कमजोर होता है।
3. मार्जिन का खेल: गिरावट इतनी तेज थी कि कमोडिटी एक्सचेंज (CME Group) ने सोने-चांदी के ट्रेडिंग पर ‘मार्जिन’ बढ़ा दिया। इसका मतलब है कि अब ट्रेड करने के लिए ज्यादा पैसा जमा करना पड़ेगा। इससे छोटे निवेशक घबरा गए और अपनी पोजीशन काटने लगे।
परिणाम: 2 फरवरी को चांदी MCX पर ₹2.65 लाख के स्तर से गिरकर ₹2.33 लाख के आसपास आ गई। सोना भी ₹1.52 लाख से फिसलकर ₹1.43 लाख पर आ गया। चारों तरफ सिर्फ लाल निशान (Red Zone) दिख रहे थे।
भाग 2: द बिग यू-टर्न (The Big U-Turn) – 3 फरवरी का चमत्कार
जब सब मान चुके थे कि बाजार और गिरेगा, तभी वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच हॉटलाइन खनखना उठी। 3 फरवरी की सुबह भारतीय बाज़ारों के लिए ‘संजीवनी बूटी’ लेकर आई।
खबर क्या थी? – भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) अचानक खबर आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता (Trade Deal) हो गया है।
डील की मुख्य बातें:
- टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले आयात शुल्क (Tariff) को 50% से घटाकर सीधे 18% कर दिया।
- दंडात्मक शुल्क हटाया: पहले भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने 25% का एक्स्ट्रा टैक्स लगाया था, जिसे ‘पनिशमेंट टैरिफ’ कहा जा रहा था। इस डील के तहत वह टैक्स पूरी तरह हटा दिया गया।
- रूसी तेल पर फैसला: बदले में, भारत ने वादा किया कि वह रूस से तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से ज्यादा ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा।
बाजार पर इसका असर: इस खबर ने बाजार के सेंटिमेंट (Sentiment) को 180 डिग्री घुમા दिया।
- रिस्क-ऑन (Risk-On) मोड: निवेशकों को लगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (भारत और अमेरिका) के बीच तनाव खत्म हो गया है। इससे बाजार में विश्वास लौटा।
- शॉर्ट कवरिंग (Short Covering): जिन ट्रेडरस ने मंदी का सौदा (Short Selling) किया था, वे इस खबर से घबरा गए और उन्होंने बाजार भाव पर खरीदारी शुरू कर दी। इसी ‘पैनिक बाइंग’ ने कीमतों को आसमान में पहुंचा दिया।
भाग 3: ₹21,000 की तेजी का गणित – चांदी क्यों बनी रॉकेट?
चांदी में आई ₹21,000 की तेजी कोई आम बात नहीं है। यह ऐतिहासिक है। लेकिन सोने के मुकाबले चांदी में इतना बड़ा उछाल क्यों आया?
1. चांदी: इंडस्ट्रियल मेटल भी है सोना एक ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) है, लेकिन चांदी का इस्तेमाल इंडस्ट्री में होता है – सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), और 5G टेक्नोलॉजी में।
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील का मतलब था कि व्यापार बढ़ेगा। व्यापार बढ़ने का मतलब है कि फैक्ट्री और इंडस्ट्री में मांग बढ़ेगी।
- इसलिए, जैसे ही टैरिफ हटने की खबर आई, इंडस्ट्रियल मांग की उम्मीद में चांदी में आग लग गई।
2. ओवरसोल्ड जोन (Oversold Zone) तकनीकी भाषा में कहें तो 2 फरवरी को चांदी ‘ओवरसोल्ड’ हो चुकी थी। यानी, जितनी गिरनी चाहिए थी, उससे ज्यादा गिर चुकी थी।
- जब कोई चीज स्प्रिंग की तरह बहुत ज्यादा दब जाती है, तो वह उतनी ही तेजी से उछलती है।
- ₹2.33 लाख के स्तर पर बड़े निवेशकों (Whales) ने एंट्री ली और इसे वापस ₹2.54 लाख के पार पहुंचा दिया।
3. डॉलर की कमजोरी ट्रेड डील की खबर के बाद डॉलर इंडेक्स थोड़ा नरम पड़ा, जिससे कमोडिटीज को सहारा मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी चांदी 8% तक उछल गई।

भाग 4: सोना भी चमका – ₹5,000 की रिकवरी
चांदी की चमक में सोने की तेजी छिपनी नहीं चाहिए। MCX पर सोना भी ₹5,000 प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया।
- सेंट्रल बैंक की खरीदारी: मंदी के दौरान भी दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (जैसे चीन और रूस) सोना खरीद रहे थे। इस ‘डिप’ (Dip) का फायदा उन्होंने भी उठाया।
- शादियों का सीजन: भारत में शादियों का सीजन चल रहा है। 2 फरवरी को जब भाव गिरे, तो ज्वैलर्स और आम जनता ने जमकर फिजिकल गोल्ड खरीदा। इस हाजिर मांग (Physical Demand) ने भी कीमतों को सपोर्ट दिया।
भाग 5: आम आदमी पर असर – आपकी जेब पर क्या गुजरेगी?
यह सब पढ़कर एक आम भारतीय के मन में यही सवाल आता है – “मेरे लिए इसका क्या मतलब है?”
1. ज्वैलरी खरीदारों के लिए: अगर आप 2 फरवरी को ज्वैलरी खरीदने से चूक गए, तो आपको अफ़सोस हो सकता है।
- 3 फरवरी को शोरूम खुलते ही सोने के भाव वापस ₹1.50 लाख (प्रति 10 ग्राम, 24 कैरेट) के करीब पहुँच गए।
- चांदी की पायल या बर्तन खरीदने वालों को अब प्रति किलो ₹20,000 से ₹25,000 ज्यादा चुकाने पड़ेंगे।
2. निवेशकों (Investors) के लिए: जिन्होंने ऊंचे भाव पर सोना-चांदी खरीदा था और गिरावट देखकर डर रहे थे, उनके लिए यह राहत की सांस है। आपका पोर्टफोलियो (Portfolio) फिर से हरे निशान में आ गया होगा।
3. ट्रेडर्स के लिए: यह बाजार अभी बहुत ज्यादा अस्थिर (Volatile) है। ₹21,000 की तेजी के बाद अगले दिन ₹10,000 की गिरावट भी आ सकती है। इसलिए छोटे ट्रेडर्स को बिना ‘स्टॉप लॉस’ (Stop Loss) के काम नहीं करना चाहिए।
भाग 6: एक्सपर्ट्स की राय – क्या अब 5 लाख जाएगी चांदी?
बाजार के दिग्गज इस यू-टर्न को कैसे देख रहे हैं? क्या यह तेजी टिकेगी या यह ‘डेड कैट बाउंस’ (Dead Cat Bounce – गिरते बाजार में मामूली उछाल) है?
बुलिश (Bullish) नजरिया:
- मनोज कुमार जैन (पृथ्वी फिनमार्ट): उनका मानना है कि चांदी अभी भी अपने ऑल-टाइम हाई (जो ₹4 लाख के ऊपर गया था) से काफी नीचे है। यह गिरावट खरीदारी का अच्छा मौका थी। लंबी अवधि में चांदी ₹5 लाख का स्तर छू सकती है क्योंकि ग्रीन एनर्जी (सोलर) में इसकी मांग कम नहीं होने वाली।
- अभिलाश कोइकारा (नुवामा): इनका कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका-ईरान तनाव और डॉलर की अनिश्चितता सोने को सपोर्ट करती रहेगी। उनका टारगेट साल के अंत तक सोने के लिए ₹2.15 लाख है।
सावधानी वाला नजरिया:
- जे.पी. मॉर्गन: ग्लोबल एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशक थोड़े सतर्क रहें। यह तेजी खबरों (News Based) पर आधारित है। अगर ट्रेड डील में कोई पेंच फंसा या अमेरिका ने फिर कोई नया टैक्स लगाया, तो भाव फिर गिर सकते हैं।

भाग 7: भारत-अमेरिका डील का गहरा सच – क्या वाकई सब अच्छा है?
सोने-चांदी की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण ‘ट्रम्प-मोदी डील’ है, लेकिन इसके कुछ बारीक पहलू भी समझने जरूरी हैं।
- रूसी तेल बंद: भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करने का वादा किया है। इसका मतलब है कि भारत को अब महँगा अमेरिकी या खाड़ी देशों का तेल खरीदना पड़ेगा।
- महंगाई का डर: अगर तेल महँगा हुआ, तो पेट्रोल-डीजल महँगा होगा। इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है।
- गोल्ड कनेक्शन: और याद रखिये, सोना महंगाई के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव (Hedge) है। अगर महंगाई बढ़ने का डर है, तो लोग और ज्यादा सोना खरीदेंगे, जिससे भाव और बढ़ेंगे। यानी यह डील सोने के लिए ‘डबल बोनान्ज़ा’ (Double Bonanza) है – एक तरफ टैरिफ कम हुए, दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने के डर से डिमांड बढ़ी।
भाग 8: अब आपको क्या करना चाहिए? (Investment Strategy)
इस तूफानी तेजी के बाद आपकी रणनीति क्या होनी चाहिए?
परिदृश्य 1: अगर आप सोना/चांदी खरीदना चाहते हैं (Buying)
- जल्दबाजी न करें: ₹21,000 की तेजी के बाद बाजार थोड़ा सुस्ता सकता है (Correction)। थोड़ा इंतज़ार करें।
- SIP करें: एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा खरीदें।
- SGB (Sovereign Gold Bond): अगर आपको फिजिकल गोल्ड नहीं पहनना है, तो सरकार के गोल्ड बॉन्ड का इंतज़ार करें या गोल्ड ईटीएफ (ETF) में निवेश करें।
परिदृश्य 2: अगर आप बेचना चाहते हैं (Selling)
- अगर आपने निचले स्तरों पर खरीदा था और अच्छा मुनाफा हो रहा है, तो थोड़ा प्रॉफिट बुक (Profit Booking) करने में कोई बुराई नहीं है। बाजार बहुत वोलेटाइल है, मुनाफा घर ले जाना समझदारी है।
परिदृश्य 3: अगर आप होल्ड कर रहे हैं (Holding)
- लंबी अवधि (3-5 साल) के लिए सोने और चांदी का भविष्य अभी भी उज्ज्वल (Bright) है। 2026 में चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर रहने वाली है। घबराहट में न बेचें।
भाग 9: तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) – चार्ट्स क्या कहते हैं?
उन पाठकों के लिए जो ट्रेडिंग समझते हैं, यहाँ थोड़ा तकनीकी ज्ञान है।
- चांदी (MCX):
- सपोर्ट (Support): ₹2,35,000 – ₹2,40,000 एक बहुत मजबूत सपोर्ट है। जब तक भाव इसके ऊपर हैं, डरने की बात नहीं है।
- रेसिस्टेंस (Resistance): ₹2,90,000 और फिर ₹3,25,000। अगर चांदी ₹2.90 लाख के ऊपर टिकती है, तो अगली रैली ₹3.50 लाख तक जा सकती है।
- RSI: डेली चार्ट पर RSI अभी भी न्यूट्रल है, मतलब तेजी की गुंजाइश बाकी है।
- सोना (MCX):
- ₹1,40,000 का स्तर एक मनोवैज्ञानिक सपोर्ट बन गया है। जब तक सोना इसके नीचे क्लोजिंग नहीं देता, ट्रेंड पॉजिटिव (Bullish) है।
अनिश्चितता ही एकमात्र निश्चितता है
फरवरी 2026 की यह घटना हमें बाजार का सबसे बड़ा पाठ सिखाती है – “मार्केट में कुछ भी संभव है।”
जिस चांदी को 2 फरवरी को कोई पूछ नहीं रहा था, 3 फरवरी को वही सबकी आँखों का तारा बन गई। ₹21,000 का यह यू-टर्न इतिहास में याद रखा जाएगा। यह घटना साबित करती है कि सोने और चांदी की कीमतें अब सिर्फ मांग और आपूर्ति (Demand and Supply) से तय नहीं होतीं, बल्कि वाशिंगटन और दिल्ली के फैसलों, जियो-पॉलिटिक्स और ट्रेड वॉर से तय होती हैं।
निवेशकों के लिए सबक साफ है: घबराहट में न बेचें और लालच में न खरीदें।
सोना और चांदी कोई ‘लॉटरी का टिकट’ नहीं हैं, ये आपकी संपत्ति की सुरक्षा के पहरेदार हैं। चाहे भाव ₹1.5 लाख हो या ₹2 लाख, आपके पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा हमेशा इन कीमती धातुओं में होना चाहिए।
आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत-अमेरिका की यह नई दोस्ती जमीन पर कैसे उतरती है। क्या डॉलर और कमजोर होगा? क्या फेड ब्याज दरें घटाएगा? इन सवालों के जवाब ही सोने-चांदी की अगली चाल तय करेंगे।
तब तक, इस सुनहरी चमक का आनंद लें और अपने निवेश को सुरक्षित रखें।
