Kaziranga Elevated Corridor

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अक्सर ‘अष्टलक्ष्मी’ कहा जाता है, और असम इन राज्यों का प्रवेश द्वार है। विकास और विरासत के बीच संतुलन साधने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम की धरती पर पधार चुके हैं। उनकी यह यात्रा केवल राजनीतिक या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि यह असम की संस्कृति, यहां की जैव विविधता और आधुनिक बुनियादी ढांचे के संगम का उत्सव है। प्रधानमंत्री 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन (शिलान्यास) और साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात देंगे जो आने वाले दशकों तक असम की तस्वीर बदल देंगी।

1. पूर्वोत्तर में एक नई सुबह: यात्रा का उद्देश्य और महत्व

17 जनवरी, 2026 की शाम गुवाहाटी के लिए एक उत्सव की शाम है। प्रधानमंत्री का विमान जब लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, तो उनका स्वागत असम की पारंपरिक गर्मजोशी के साथ किया गया। लेकिन इस स्वागत के पीछे एक गहरा उद्देश्य छिपा है। पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने ‘लुक ईस्ट’ नीति को ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में बदला है। प्रधानमंत्री की यह 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन उसी नीति का प्रमाण है।

इस यात्रा के दो मुख्य स्तंभ हैं:

  1. सांस्कृतिक संरक्षण: बोडो समुदाय की विरासत को सम्मान देना।
  2. सतत विकास (Sustainable Development): काजीरंगा में वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात को सुगम बनाना।

असम के मुख्यमंत्री और राज्य प्रशासन ने इस यात्रा को ‘विकास का महाकुंभ’ करार दिया है। उनका कहना है कि जिन परियोजनाओं की नींव आज रखी जा रही है, वे न केवल असम बल्कि पूरे देश के लिए इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेंगी।

2. पहला दिन: संस्कृति का महाकुंभ ‘बगुरंबा ध्वौ’

यात्रा के पहले दिन, यानी 17 जनवरी को प्रधानमंत्री का मुख्य कार्यक्रम गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित ‘बगुरंबा ध्वौ 2026’ (Bagurumba Dwhou) में भाग लेना है। यह केवल एक नृत्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि शांति और समृद्धि का प्रतीक है।

बोडो समुदाय और शांति समझौता: बोडो समुदाय असम का सबसे बड़ा स्वदेशी जनजातीय समूह है। दशकों तक यह क्षेत्र अशांति और उग्रवाद का शिकार रहा। लेकिन 2020 में ऐतिहासिक बोडो शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, बंदूक की जगह संस्कृति और विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार मुख्यधारा में लौटे लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।

10,000 कलाकारों का विश्व रिकॉर्ड: इस कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 10,000 से अधिक बोडो कलाकार एक साथ पारंपरिक ‘बगुरंबा’ नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं। बगुरंबा को ‘तितली नृत्य’ भी कहा जाता है। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों (डोखना) में सजी महिलाएं जब पक्षियों और तितलियों की तरह हाथ फैलाकर नृत्य करती हैं, तो वह दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। प्रधानमंत्री ने इस आयोजन को “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का जीवंत उदाहरण बताया है। यह आयोजन दुनिया को यह संदेश देता है कि असम अब हड़तालों और बंद के लिए नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति के लिए जाना जाएगा।

Kaziranga Elevated Corridor

3. दूसरा दिन: काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर – प्रकृति और प्रगति का संगम

यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित हिस्सा 18 जनवरी को होने जा रहा है। नगांव जिले के कालियाबोर में प्रधानमंत्री एक ऐसी परियोजना की आधारशिला रखेंगे जिसकी मांग दशकों से की जा रही थी। जैसा कि शीर्षक में बताया गया है, वे अपनी 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन (शिलान्यास) के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेंगे।

काजीरंगा की समस्या क्या थी? काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो एक सींग वाले गैंडे (One-Horned Rhinoceros) का घर है, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। लेकिन इस उद्यान के बीचोबीच से राष्ट्रीय राजमार्ग-715 (पुराना NH-37) गुजरता है। यह सड़क असम के ऊपरी और निचले हिस्से को जोड़ने वाली जीवन रेखा है। हर साल मॉनसून के दौरान जब ब्रह्मपुत्र नदी का पानी काजीरंगा में भर जाता है, तो जानवरों को अपनी जान बचाने के लिए पार्क के निचले इलाकों से निकलकर दक्षिण में स्थित कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों की ओर जाना पड़ता है। इस प्रवास के दौरान उन्हें NH-715 को पार करना पड़ता है। दुर्भाग्यवश, तेज रफ्तार गाड़ियों की चपेट में आने से हर साल सैकड़ों जानवर मारे जाते थे। इसमें दुर्लभ गैंडे, हाथी, हिरण और कभी-कभी रॉयल बंगाल टाइगर भी शामिल होते थे। वन विभाग को हर साल बैरिकेड्स लगाने पड़ते थे और गाड़ियों की रफ्तार 40 किमी/घंटा तक सीमित करनी पड़ती थी, जिससे भीषण ट्रैफिक जाम लगता था।

एलिवेटेड कॉरिडोर: एक तकनीकी चमत्कार: इस समस्या का स्थायी समाधान यह एलिवेटेड कॉरिडोर है। यह परियोजना लगभग 6,950 करोड़ रुपये की है।

  • संरचना: इसमें लगभग 35 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड (फ्लाईओवर जैसा ढांचा) बनाया जाएगा। यह सड़क जंगल के ऊपर से गुजरेगी।
  • स्वतंत्र आवाजाही: इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि नीचे की जमीन जानवरों के लिए पूरी तरह खुली रहेगी। गाड़ियां ऊपर से फर्राटे भरेंगी और नीचे से गैंडे और हाथी बिना किसी डर के अपने प्राकृतिक गलियारों (Animal Corridors) का उपयोग करके पहाड़ियों तक जा सकेंगे।
  • इंजीनियरिंग: इस कॉरिडोर में टनल (सुरंगें) और विशेष पिलर का उपयोग किया जाएगा ताकि जंगल के इकोसिस्टम को कम से कम नुकसान हो। इसमें ध्वनि अवरोधक (Sound Barriers) भी लगाए जाएंगे ताकि गाड़ियों के शोर से जानवरों को परेशानी न हो।

यह परियोजना साबित करती है कि विकास के लिए प्रकृति की बलि देना जरूरी नहीं है। प्रधानमंत्री द्वारा 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन करने का निर्णय भारत की ‘ग्रीन ग्रोथ’ (Green Growth) रणनीति का हिस्सा है।

4. अमृत भारत ट्रेनें: कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

सड़क के साथ-साथ रेलवे भी इस यात्रा के एजेंडे में प्रमुख है। प्रधानमंत्री कालियाबोर से ही रिमोट के माध्यम से दो नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाएंगे।

1. गुवाहाटी (कामाख्या) – रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस: यह ट्रेन पूर्वोत्तर भारत को सीधे हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के करीब जोड़ेगी। इससे छात्रों, सेना के जवानों और व्यापारियों को बहुत लाभ होगा।

2. डिब्रूगढ़ – लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस: ऊपरी असम का शहर डिब्रूगढ़, जो चाय और तेल के लिए प्रसिद्ध है, अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सीधे जुड़ जाएगा। यह ट्रेन मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी जो इलाज के लिए बड़े शहरों में जाते हैं।

‘अमृत भारत’ ट्रेनें खास तौर पर आम आदमी के लिए डिजाइन की गई हैं। ये गैर-वातानुकूलित (Non-AC) स्लीपर और जनरल कोच वाली ट्रेनें हैं, जो ‘पुश-पुल’ तकनीक से चलती हैं। इसका मतलब है कि ये ट्रेनें कम समय में ज्यादा दूरी तय करती हैं और किराया भी किफायती होता है।

Kaziranga Elevated Corridor

5. पूर्वोत्तर का बुनियादी ढांचा: 2014 के बाद बदलाव

जब हम प्रधानमंत्री की 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन कार्यक्रम का विश्लेषण करते हैं, तो हमें इसे व्यापक संदर्भ में देखना होगा। 2014 से पहले पूर्वोत्तर भारत को अक्सर ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के उस पार एक अलग-थलग हिस्सा माना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में यहां बुनियादी ढांचे की सुनामी आई है।

  • बोगीबील ब्रिज: डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र पर बना यह भारत का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है, जिसने सेना और नागरिकों के लिए अरुणाचल प्रदेश तक पहुंच आसान कर दी है।
  • धोला-सादिया ब्रिज: भूपेन हजारिका सेतु ने असम और अरुणाचल के बीच की दूरी को घंटों से मिनटों में बदल दिया है।
  • ब्रॉड गेज और विद्युतीकरण: आज त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम जैसे राज्य भी रेलवे के नक्शे पर आ चुके हैं। असम में रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण लगभग पूरा हो चुका है।
  • हवाई संपर्क: उड़ान (UDAN) योजना के तहत पूर्वोत्तर में नए हवाई अड्डे बने हैं और पुराने हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण हुआ है।

काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर इस श्रृंखला में एक और मोती है। यह परियोजना न केवल जानवरों को बचाएगी, बल्कि ऊपरी असम और नागालैंड जाने वाले वाहनों के लिए यात्रा के समय को भी कम करेगी, क्योंकि उन्हें अब जानवरों के कारण धीमी गति से नहीं चलना पड़ेगा।

6. पर्यटन पर प्रभाव: काजीरंगा बनेगा विश्व स्तरीय गंतव्य

काजीरंगा पहले से ही विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन ट्रैफिक की समस्या और जानवरों की सुरक्षा को लेकर नकारात्मक खबरें अक्सर पर्यटकों को चिंतित करती थीं। इस कॉरिडोर के बनने से पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

  • सीनिक ड्राइव (Scenic Drive): एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरते हुए पर्यटकों को काजीरंगा के जंगल, चाय के बागान और कार्बी पहाड़ियों का विहंगम दृश्य (Panoramic View) देखने को मिलेगा। यह अपने आप में एक पर्यटन आकर्षण होगा।
  • इको-टूरिज्म: जब जंगल में मानवीय हस्तक्षेप (गाड़ियों का शोर और प्रदूषण) कम होगा, तो जंगल का स्वास्थ्य सुधरेगा। इससे पक्षियों और जानवरों की संख्या बढ़ेगी, जो वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करेगा।
  • स्थानीय रोजगार: पर्यटन बढ़ने से होटल, होमस्टे, जीप सफारी और हस्तशिल्प उद्योग में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

7. राजनीतिक मायने: 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी?

यद्यपि यह एक विकासात्मक यात्रा है, लेकिन लोकतंत्र में हर कदम के राजनीतिक मायने होते हैं। असम में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री की यह यात्रा और हजारों करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास निश्चित रूप से राज्य के राजनीतिक वातावरण को प्रभावित करेगा।

  • बोडो समुदाय को संदेश: ‘बगुरंबा ध्वौ’ में भागीदारी के जरिए भाजपा नीत एनडीए सरकार बोडो लैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
  • ऊपरी असम पर फोकस: काजीरंगा और डिब्रूगढ़ की परियोजनाएं ऊपरी असम के मतदाताओं को साधने का प्रयास हैं, जो राज्य की राजनीति का केंद्र है।
  • विकास की राजनीति: प्रधानमंत्री यह संदेश दे रहे हैं कि उनकी राजनीति का आधार ‘डबल इंजन’ की सरकार और तेज विकास है। 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली अब दिसपुर (असम की राजधानी) से दूर नहीं है।

8. पर्यावरणविदों की प्रतिक्रिया

काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने व्यापक स्वागत किया है। प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और अन्य संस्थाओं ने इसे “देर से उठाया गया लेकिन अत्यंत आवश्यक कदम” बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया में ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं जहां एक व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग को जंगल के ऊपर उठाया गया हो। यह प्रोजेक्ट ‘स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ का उदाहरण है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने निर्माण चरण के दौरान ध्वनि प्रदूषण और धूल को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने की सलाह दी है, ताकि जानवरों को निर्माण कार्य से परेशानी न हो। सरकार ने आश्वासन दिया है कि निर्माण कार्य में आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा जिससे कंपन (Vibration) और शोर कम से कम होगा।

9. परियोजना की लागत और समयसीमा

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत 6,950 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इसमें न केवल एलिवेटेड रोड, बल्कि मौजूदा सड़क का चौड़ीकरण और सुरंगों का निर्माण भी शामिल है। यद्यपि यह एक जटिल परियोजना है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम (NHIDCL) ने इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उम्मीद है कि अगले 3 से 4 वर्षों में यह कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा। जब यह बनकर तैयार होगा, तो यह भारत की इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना होगा।

10. एक संतुलित भविष्य की ओर

अंत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17–18 जनवरी को दो दिवसीय यात्रा, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का करेंगे उद्घाटन और अन्य कार्यक्रमों में भागीदारी असम के लिए एक युगांतरकारी घटना है। यह यात्रा हमें सिखाती है कि आधुनिकता और परंपरा, विकास और पर्यावरण एक दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं।

एक तरफ, 10,000 बोडो नर्तक अपनी संस्कृति पर गर्व करेंगे, तो दूसरी तरफ, आधुनिक मशीनें काजीरंगा के ऊपर पुल बनाएंगी। एक तरफ, अमृत भारत ट्रेनें पटरियों पर दौड़ेंगी, तो दूसरी तरफ, गैंडे और हाथी जंगल के रास्तों पर बेखौफ चलेंगे। यही वह “न्यू इंडिया” है जिसकी परिकल्पना की गई है—जहां विरासत भी है और विकास भी, जहां संवेदना भी है और सुविधा भी।

असम की जनता के लिए 17 और 18 जनवरी 2026 के दिन सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएंगे। काजीरंगा का यह कॉरिडोर सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि उन बेजुबान जानवरों के लिए जीवन का उपहार है जो सदियों से बाढ़ और ट्रैफिक के बीच संघर्ष कर रहे थे।

जय हिंद, जय असम।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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