बिहार की राजधानी पटना, जिसे शिक्षा का हब माना जाता है और जहां हजारों छात्र-छात्राएं डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना लेकर आते हैं, आज एक भयानक त्रासदी और आक्रोश के केंद्र में बदल गया है। जहानाबाद से आई एक 18 वर्षीय छात्रा, जो एनईईटी (NEET) की तैयारी कर रही थी, का सपना न केवल टूट गया, बल्कि एक हॉस्टल के बंद कमरे में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई। शुरुआत में जिसे पुलिस और प्रशासन एक ‘आत्महत्या’ या ‘दवा का ओवरडोज’ बता रहे थे, उस मामले ने 16 जनवरी 2026 को एक चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुए खुलासे ने पुलिस के पुराने दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं और इस मामले में हॉस्टल के मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पटना हॉस्टल में NEET अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है।
1. घटना का विवरण: वह मनहूस हफ्ता
मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र का है। ‘शंभू गर्ल्स हॉस्टल’ नामक एक निजी हॉस्टल में जहानाबाद जिले की रहने वाली एक 18 वर्षीय छात्रा रह रही थी। वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी करने के लिए पटना आई थी।
घटनाक्रम की शुरुआत (5-6 जनवरी): पुलिस और परिजनों के अनुसार, छात्रा 5 जनवरी 2026 को जहानाबाद स्थित अपने घर से पटना के लिए निकली थी। उसने शाम को अपने पिता को फोन करके सूचित भी किया कि वह हॉस्टल पहुंच गई है और सब कुछ सामान्य है। लेकिन अगली ही सुबह, यानी 6 जनवरी को, उसके पिता को एक फोन कॉल आता है जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी हॉस्टल के कमरे में बेहोश पड़ी है।

हॉस्टल प्रशासन ने उसे आनन-फानन में पास के एक निजी अस्पताल (कंकड़बाग क्षेत्र) में भर्ती कराया। जब परिजन वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उनकी बेटी कोमा में है और वेंटिलेटर पर है। उसके शरीर पर, विशेषकर गर्दन और सिर पर चोट के निशान थे, जिसे देखकर परिजनों का माथा ठनका।
मौत और मातम (11 जनवरी): करीब 5 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद, 11 जनवरी 2026 को छात्रा ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर फैलते ही पटना के छात्र समुदाय और उसके गृह जिले जहानाबाद में शोक की लहर दौड़ गई। लेकिन यह शोक जल्द ही गुस्से में बदल गया।
2. पुलिस की शुरूआती थ्योरी बनाम परिजनों का आरोप
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद पुलिस की शुरुआती जांच और परिजनों के आरोपों के बीच के विरोधाभास को लेकर है।
पुलिस का शुरुआती दावा: पटना पुलिस ने शुरुआत में मामले को आत्महत्या की कोशिश बताया। पुलिस का कहना था कि छात्रा के कमरे की तलाशी के दौरान उन्हें नींद की गोलियों (Sleeping Pills) के रैपर मिले थे। छात्रा के यूरिन टेस्ट में भी नींद की दवाओं की अधिकता पाई गई थी। एक महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) ने छात्रा की शुरुआती जांच की थी और अपनी रिपोर्ट में कहा था कि ‘यौन हमले (Sexual Assault) के कोई बाहरी संकेत नहीं मिले हैं’। इस आधार पर, पटना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया में बयान दिया कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या या एक्सीडेंटल ओवरडोज का मामला लगता है और सीसीटीवी फुटेज में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति कमरे में जाते हुए नहीं दिखा है।
परिजनों का आरोप: दूसरी ओर, मृतका के पिता और परिवार वाले पहले दिन से ही इसे ‘बलात्कार और हत्या’ का मामला बता रहे थे। उनका कहना था:
- चोट के निशान: अगर यह सिर्फ नींद की गोली खाने का मामला था, तो बेटी के शरीर पर खरोंच और चोट के निशान कहां से आए?
- कमरा बंद था या खुला: परिजनों ने सवाल उठाया कि अगर वह बेहोश थी, तो हॉस्टल स्टाफ कमरे में कैसे घुसा? क्या दरवाजा तोड़ा गया था?
- साजिश: परिजनों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल संचालक और कुछ प्रभावशाली लोग मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें केस वापस लेने के लिए पैसों का लालच दिया गया।
3. 16 जनवरी का यू-टर्न: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदला सब कुछ
16 जनवरी, 2026 का दिन इस केस में ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। छात्रा का पोस्टमार्टम एक मेडिकल बोर्ड द्वारा वीडियोग्राफी के साथ कराया गया था। जब यह रिपोर्ट सामने आई, तो पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई।
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि “Sexual violence cannot be ruled out” (यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सकता)। इसका मतलब था कि पुलिस की वह थ्योरी गलत साबित हो सकती है जिसमें उन्होंने यौन हमले से साफ इनकार किया था। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर ‘एंटीमॉर्टम इंजरी’ (मौत से पहले की चोटें) का भी जिक्र था।
बिल्डिंग मालिक मनीष कुमार रंजन गिरफ्तार: इस नई रिपोर्ट के आधार पर, पटना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस बिल्डिंग के मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर लिया, जिसमें हॉस्टल चल रहा था। पुलिस के अनुसार, जिस वक्त छात्रा बेहोश मिली थी, मनीष कुमार रंजन हॉस्टल परिसर में मौजूद था। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि जांच अब हत्या और दुष्कर्म की दिशा में आगे बढ़ रही है।
4. सड़कों पर संग्राम: कारगिल चौक बना युद्ध का मैदान
जैसे ही छात्रा की मौत की खबर आई और पुलिस का ढुलमुल रवैया सामने आया, पटना की सड़कों पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। 12 जनवरी की शाम को परिजनों ने छात्रा का शव लेकर पटना के व्यस्ततम कारगिल चौक (गांधी मैदान के पास) को जाम कर दिया।

प्रदर्शन का मंजर: हजारों की संख्या में छात्र और स्थानीय लोग जमा हो गए। “हमें न्याय चाहिए” और “पटना पुलिस मुर्दाबाद” के नारे गूंजने लगे। प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर रास्ता रोक दिया। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कई छात्र घायल हुए और पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया। इस प्रदर्शन ने सरकार पर भारी दबाव बनाया। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की और मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की। सोशल मीडिया पर #JusticeForPatnaNEETAspirant ट्रेंड करने लगा।
5. पटना के हॉस्टल्स: सुरक्षा या साजिश के अड्डे?
पटना हॉस्टल में NEET अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर बिहार में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए निजी हॉस्टल्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।
असुरक्षा का माहौल: पटना के बोरिंग रोड, कंकड़बाग, और बाजार समिति जैसे इलाकों में हजारों गर्ल्स हॉस्टल चलते हैं। इनमें से कई बिना किसी रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के चल रहे हैं।
- सीसीटीवी का अभाव: कई हॉस्टल्स में सीसीटीवी कैमरे या तो खराब होते हैं या ऐसी जगहों पर होते हैं जहां से पूरी निगरानी संभव नहीं है। इस केस में भी पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी हार्ड डिस्क को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, जिससे छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।
- पुरुष स्टाफ की एंट्री: गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष मालिकों या स्टाफ की बेरोक-टोक एंट्री एक बड़ी समस्या है। गिरफ्तार आरोपी मनीष कुमार रंजन का हॉस्टल में मौजूद होना इसी खामी को दर्शाता है।
- नियमों की अनदेखी: प्रशासन का इन हॉस्टल्स पर कोई कड़ा नियंत्रण नहीं है। आग से सुरक्षा से लेकर छात्रों की निजता तक, सब कुछ भगवान भरोसे है।
6. अब आगे क्या? न्याय की उम्मीद
मनीष कुमार रंजन की गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत है। पुलिस अब उसका रिमांड लेकर पूछताछ करेगी।
- फॉरेंसिक सबूत: अब विसरा रिपोर्ट (Viscera Report) का इंतजार है, जिससे यह साफ होगा कि छात्रा के शरीर में जहर या नशीला पदार्थ कैसे पहुंचा। क्या उसने खुद खाया या उसे जबरदस्ती दिया गया?
- हार्ड डिस्क की जांच: क्या सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए गए थे? अगर हां, तो किसने किए? यह पता लगाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होगी।
- अन्य संलिप्तता: क्या इस अपराध में कोई और भी शामिल था? क्या यह सामूहिक दुष्कर्म का मामला है? पुलिस अब इन सभी एंगल्स पर जांच कर रही है।
7. एक बेटी की मौत, हजारों सवाल
यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, यह उस विश्वास की हत्या है जिसके सहारे माता-पिता अपनी बेटियों को घर से दूर पढ़ने भेजते हैं। पटना हॉस्टल में NEET अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत ने साबित कर दिया है कि हमारे शहर हमारी बेटियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं।
क्या नींद की गोलियां सिर्फ एक कहानी थीं? क्या हॉस्टल के बंद कमरे में उस रात कोई दरिंदगी हुई थी जिसे छुपाने के लिए रसूख का इस्तेमाल किया गया? पुलिस को अपनी शुरुआती गलती सुधारनी होगी और इस मामले की निष्पक्ष जांच करनी होगी। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं या मामले को दबाने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
हम उम्मीद करते हैं कि जहानाबाद की इस बेटी को न्याय मिलेगा और दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो एक नजीर बने। लेकिन तब तक, पटना का हर छात्र और हर अभिभावक दहशत के साये में जीने को मजबूर है।
यह एक डेवलपिंग स्टोरी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नए खुलासे सामने आएंगे।
