असम के संगीत जगत के बेताज बादशाह और युवाओं के दिलों की धड़कन जुबिन गर्ग (Zubeen Garg) एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया गाना या सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि एक गहराता हुआ अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद है। 14 जनवरी 2026 की सुबह असम के लोगों के लिए एक चौंकाने वाली खबर लेकर आई। सिंगापुर की एक अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान एक ऐसा नाटकीय मोड़ आया है जिसने न केवल जुबिन गर्ग के प्रशंसकों को चिंता में डाल दिया है, बल्कि असम पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिंगर जुबिन गर्ग पर लगे चौंकाने वाले आरोप
मामला एक हाई-प्रोफाइल इवेंट और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी सामने आई। कल तक जो पुलिस प्रशासन जुबिन गर्ग को इस मामले में ‘क्लीन चिट’ देने या इसे महज एक ‘गलतफहमी’ बता रहा था, आज उसी पुलिस ने सिंगापुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने एक नया हलफनामा (Affidavit) दायर कर जुबिन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।
1. सिंगापुर का वो इवेंट और विवाद की शुरुआत
इस पूरे मामले की जड़ें दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में हुए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ी हैं। सिंगापुर में प्रवासी भारतीयों और असमिया समुदाय द्वारा आयोजित एक भव्य संगीत समारोह में जुबिन गर्ग को मुख्य कलाकार के रूप में आमंत्रित किया गया था। यह आयोजन भारत और सिंगापुर के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था।
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोजन के बाद आयोजकों और जुबिन गर्ग की मैनेजमेंट टीम के बीच भुगतान और अनुबंध की शर्तों को लेकर कुछ विवाद हुआ था। उस समय इसे एक सामान्य दीवानी (Civil) मामला माना जा रहा था। असम पुलिस ने भी उस वक्त बयान जारी कर कहा था कि यह दो पक्षों के बीच का आपसी समझौता विवाद है और इसमें कोई आपराधिक कोण (Criminal Angle) नहीं है।

लेकिन 14 जनवरी 2026 को स्थिति पूरी तरह बदल गई। सिंगापुर पुलिस द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर मामला अदालत में पहुंचा, जहां असम पुलिस को एक पक्ष के रूप में अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया था। सबको उम्मीद थी कि असम पुलिस अपने स्टार कलाकार का बचाव करेगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी ने पूरे मामले को एक नया और खतरनाक मोड़ दे दिया है।
2. असम पुलिस का यू-टर्न: बचाव से अभियोजन तक
अदालत की कार्यवाही के दौरान जो सबसे हैरान करने वाला पहलू रहा, वह था असम पुलिस का बदलता हुआ रुख। इससे पहले, गुवाहाटी में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा था कि जुबिन गर्ग को फंसाया जा रहा है और राज्य सरकार उन्हें कानूनी मदद मुहैया कराएगी।
लेकिन सिंगापुर कोर्ट में दाखिल किए गए आधिकारिक दस्तावेजों में असम पुलिस ने जुबिन गर्ग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने अदालत को बताया है कि जुबिन गर्ग के खिलाफ पहले भी भारत में कई मामले दर्ज रहे हैं और उनका व्यवहार ‘असहयोगी’ रहा है। यह बयान बचाव पक्ष के लिए किसी झटके से कम नहीं था।
सवाल यह उठता है कि आखिर कुछ ही दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी? क्या यह किसी राजनीतिक दबाव का नतीजा है? या फिर पुलिस के हाथ कोई ऐसा सबूत लगा है जो अब तक जनता से छिपा था? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगापुर जैसे देश में, जहां कानून व्यवस्था बेहद सख्त है, वहां पुलिस का यह बयान जुबिन की जमानत याचिका को खारिज करवाने के लिए काफी है।
3. जुबिन गर्ग पर लगे चौंकाने वाले आरोप
असम पुलिस के बदले हुए रुख के बाद, सिंगापुर के अभियोजन पक्ष ने जुबिन गर्ग पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद गंभीर हैं। ये आरोप अब केवल ‘कॉन्ट्रैक्ट ब्रीच’ (अनुबंध उल्लंघन) तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें आपराधिक साजिश की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं।
आरोप नंबर 1: वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह सबसे बड़ा आरोप इवेंट के फंड्स को लेकर है। आरोप है कि जुबिन गर्ग के नाम पर जो स्पॉन्सरशिप का पैसा आया था, उसका एक बड़ा हिस्सा किसी तीसरे देश के बैंक खाते में डायवर्ट किया गया। पुलिस ने कोर्ट में कहा है कि वे इस ‘मनी ट्रेल’ की जांच करना चाहते हैं। यह आरोप एक कलाकार की छवि को पूरी तरह धूमिल करने वाला है।
आरोप नंबर 2: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और धमकी सिंगापुर कोर्ट में यह भी कहा गया कि विवाद के दौरान जुबिन गर्ग ने कथित तौर पर आयोजकों को धमकाया और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। असम पुलिस ने अपने हलफनामे में जुबिन के पुराने मामलों (जैसे अतीत में हुए कुछ विवादों) का हवाला देते हुए यह साबित करने की कोशिश की है कि उनका “आक्रामक व्यवहार” एक आदत है।
आरोप नंबर 3: वीजा नियमों का उल्लंघन एक और चौंकाने वाला आरोप वीजा शर्तों के उल्लंघन का है। कहा जा रहा है कि जुबिन जिस वीजा पर परफॉर्म करने गए थे, उसकी शर्तों का पालन नहीं किया गया।
जब सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी सामने आई, तो उसमें इन आरोपों को बल देने वाले दस्तावेज भी संलग्न किए गए थे। यह बदलाव इतना अचानक था कि जुबिन के वकीलों को भी संभलने का मौका नहीं मिला।
4. सिंगापुर की न्याय प्रणाली और जुबिन की मुश्किलें
सिंगापुर अपनी सख्त कानून व्यवस्था के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। वहां के कानून में ‘पब्लिक ऑर्डर’ और ‘वित्तीय अपराधों’ के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति है।
भारत में अक्सर सेलिब्रिटीज को कानूनी प्रक्रियाओं में थोड़ी ढील मिल जाती है, लेकिन सिंगापुर में कानून सबके लिए बराबर है। असम पुलिस के बयान ने आग में घी का काम किया है। यदि पुलिस जुबिन के पक्ष में गवाही देती या उनके अच्छे आचरण की गारंटी लेती, तो शायद उन्हें तुरंत जमानत मिल सकती थी। लेकिन पुलिस द्वारा उनके पुराने रिकॉर्ड्स को अदालत के पटल पर रखना उनके लिए बहुत हानिकारक साबित हुआ है।
अब जुबिन को अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ा है और उन्हें सिंगापुर छोड़ने की अनुमति नहीं है। यह उनके करियर और निजी जीवन के लिए एक बड़ा संकट है। उनके कई आगामी कॉन्सर्ट्स रद्द हो गए हैं, जिससे आयोजकों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
5. असम में जन आक्रोश: “जुबिन दा के साथ अन्याय”
जैसे ही यह खबर गुवाहाटी पहुंची कि सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी, पूरे राज्य में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जुबिन गर्ग केवल एक गायक नहीं हैं, वे असमिया अस्मिता का प्रतीक माने जाते हैं। सीएए (CAA) आंदोलन हो या बाढ़ पीड़ितों की मदद, जुबिन हमेशा सबसे आगे रहे हैं।
उनके फैंस का मानना है कि यह एक राजनीतिक साजिश है। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) और कई अन्य संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है।
- प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार जुबिन की लोकप्रियता से डरती है और उन्हें विदेश में फंसाकर उनकी आवाज दबाना चाहती है।
- सोशल मीडिया पर #StandWithZubeen और #ShameOnAssamPolice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
- लोगों का सवाल है कि जिस पुलिस को अपने नागरिक की रक्षा करनी चाहिए थी, वह विदेशी धरती पर उसके खिलाफ गवाही क्यों दे रही है?
गुवाहाटी के लतासिल मैदान में हजारों की संख्या में युवा जमा हुए और उन्होंने “जुबिन तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं” के नारे लगाए। यह भावनात्मक जुड़ाव इस मामले को केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बना देता है।
6. पुलिस का तर्क: “कानून से ऊपर कोई नहीं”
जनता के भारी आक्रोश के बीच, असम पुलिस के डीजीपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम तथ्यों को अदालत के सामने रखना है, चाहे आरोपी कोई भी हो।
अधिकारियों का कहना है कि सिंगापुर पुलिस ने उनसे जुबिन के पुराने रिकॉर्ड्स की जानकारी मांगी थी। चूंकि यह दो देशों के बीच कानूनी सहयोग (Mutual Legal Assistance Treaty – MLAT) का मामला है, इसलिए असम पुलिस झूठी जानकारी नहीं दे सकती थी। उन्होंने तर्क दिया कि सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी वास्तव में ‘कहानी बदलना’ नहीं, बल्कि ‘सच्चाई सामने रखना’ है।
पुलिस का कहना है कि अगर वे तथ्यों को छिपाते और बाद में सिंगापुर की जांच में वह बात सामने आ जाती, तो इससे असम पुलिस और भारत सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होती। इसलिए, उन्होंने वही किया जो प्रोटोकॉल के तहत जरूरी था। हालांकि, यह स्पष्टीकरण जुबिन के समर्थकों के गले नहीं उतर रहा है।
7. राजनीतिक कोण: क्या यह प्रतिशोध है?
जुबिन गर्ग अक्सर अपने बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई बार राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति सरकार के लिए एक मौका बन गई है।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पुलिस पर दबाव डालकर हलफनामा बदलवाया है।
- विपक्ष के नेता ने कहा, “यह बदले की राजनीति का घिनौना उदाहरण है। एक कलाकार जिसने असम का नाम रोशन किया, उसे विदेश में अपमानित किया जा रहा है।”
- उनका दावा है कि पहले पुलिस ने ‘नो ऑब्जेक्शन’ देने का मन बनाया था, लेकिन गुवाहाटी से एक ‘फोन कॉल’ ने सब कुछ बदल दिया।
अगर यह आरोप सच साबित होते हैं, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक है। लेकिन सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और सरकार किसी को बचाने या फंसाने में हस्तक्षेप नहीं करती।
8. जुबिन गर्ग की लीगल टीम की रणनीति
जुबिन के वकीलों के लिए अब चुनौती दोगुनी हो गई है। उन्हें न केवल सिंगापुर के अभियोजन पक्ष से लड़ना है, बल्कि अपने ही राज्य की पुलिस के बयानों को भी काटना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबिन ने सिंगापुर के सबसे महंगे वकीलों में से एक को हायर किया है। उनकी रक्षा रणनीति (Defense Strategy) अब इस बात पर केंद्रित होगी कि:
- असम पुलिस के बयान ‘राजनीति से प्रेरित’ हैं और मामले की मेरिट से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
- जिस वित्तीय अनियमितता की बात की जा रही है, वह वास्तव में आयोजकों की गलती है, जुबिन की नहीं।
- जुबिन एक सम्मानित कलाकार हैं और उनके सामाजिक कार्यों के सबूत अदालत में पेश किए जाएंगे।
वकीलों का कहना है कि सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी से केस कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं हुआ है। वे मानहानि का मुकदमा भी दायर करने पर विचार कर रहे हैं।
9. जुबिन की पत्नी और परिवार का बयान
इस मुश्किल घड़ी में जुबिन की पत्नी गरिमा गर्ग ने एक वीडियो संदेश जारी किया है। उन्होंने रोते हुए असम की जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।
गरिमा ने कहा:
“जुबिन निर्दोष हैं। उन्हें एक गहरी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। हमें उम्मीद थी कि हमारा राज्य हमारा साथ देगा, लेकिन पुलिस ने जो किया उसने हमें तोड़ दिया है। लेकिन हमें न्यायपालिका और भगवान पर भरोसा है। जुबिन ने हमेशा असम के लिए लड़ाई लड़ी है, आज असम को उनके लिए लड़ना होगा।”
यह वीडियो सोशल मीडिया पर बेहद वायरल हो रहा है और इसने लोगों की सहानुभूति को और बढ़ा दिया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें पुलिस प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही है और वे विदेश में अकेले पड़ गए हैं।
10. अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भारत की छवि
जब किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का मामला विदेशी अदालत में जाता है, तो वह केवल एक व्यक्तिगत मामला नहीं रह जाता। यह देश की छवि का सवाल बन जाता है। सिंगापुर मीडिया इस खबर को प्रमुखता से दिखा रहा है। वहां की हेडलाइन्स में भारत की अंदरूनी कलह और पुलिस प्रणाली पर चर्चा हो रही है। सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह संदेश दिया है कि भारतीय एजेंसियां अपने ही नागरिकों के खिलाफ विरोधाभासी बयान दे सकती हैं।
भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है। वे जुबिन को कांसुलर एक्सेस (Consular Access) प्रदान कर रहे हैं, लेकिन कानूनी मामले में सीधा हस्तक्षेप करने से बच रहे हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि भारत सरकार नहीं चाहती कि एक कलाकार की वजह से सिंगापुर के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों पर कोई आंच आए।
11. जुबिन गर्ग का करियर: क्या यह अंत है?
जुबिन गर्ग ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन यह अब तक का सबसे बड़ा संकट है। अगर सिंगापुर कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया, तो उन्हें जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा, उन पर भारी जुर्माना और सिंगापुर में प्रवेश पर आजीवन प्रतिबंध लग सकता है।
एक कलाकार के तौर पर उनकी साख दांव पर है। बॉलीवुड और असमिया फिल्म इंडस्ट्री के कई निर्माता अब उनके साथ काम करने से कतरा सकते हैं। ब्रांड एंडोर्समेंट रद्द हो सकते हैं। लेकिन जुबिन का इतिहास रहा है कि वे हर विवाद के बाद और मजबूत होकर उभरे हैं। उनके कट्टर प्रशंसक मानते हैं कि यह दौर भी गुजर जाएगा और “जुबिन दा” फिर से माइक थामकर स्टेज पर गरजेंगे।
12. कानूनी पेचीदगियां और प्रत्यर्पण की संभावना
अगर जुबिन जमानत पर भारत वापस आ भी जाते हैं, तो भी केस चलता रहेगा। लेकिन अगर वे दोषी साबित होते हैं और भारत में रहते हैं, तो क्या सिंगापुर उनकी कस्टडी मांगेगा? भारत और सिंगापुर के बीच प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) है। लेकिन आर्थिक अपराधों या छोटे विवादों में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। असम पुलिस का वर्तमान रुख देखते हुए, यह आशंका है कि अगर भविष्य में ऐसी स्थिति बनी, तो पुलिस उन्हें सिंगापुर सौंपने में भी संकोच नहीं करेगी। यही डर जुबिन के वकीलों को सता रहा है।
13. भविष्य की राह: अगली सुनवाई पर नजर
अब सबकी निगाहें सिंगापुर कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो 20 जनवरी 2026 को निर्धारित है। इस सुनवाई में जुबिन के वकील असम पुलिस के हलफनामे को चुनौती देंगे। वे यह साबित करने की कोशिश करेंगे कि सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी तथ्यों पर नहीं, बल्कि बाहरी प्रभावों पर आधारित है।
जुबिन को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने होंगे। क्या वे ट्रांजेक्शन डिटेल्स दिखा पाएंगे? क्या वे साबित कर पाएंगे कि उन पर लगे आरोप झूठे हैं? यह देखना दिलचस्प होगा।
14. एक स्टार, एक सिस्टम और एक जंग
अंत में, जुबिन गर्ग का यह मामला सिर्फ एक सेलिब्रिटी का कानूनी विवाद नहीं है। यह एक क्लासिक केस स्टडी है कि कैसे एक व्यक्ति सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है और कैसे सिस्टम उसे घेरने की कोशिश करता है।
असम पुलिस की भूमिका ने इस मामले को संदिग्ध बना दिया है। एक कलाकार, जो अपनी संस्कृति का दूत बनकर विदेश गया था, आज वहां अपराधी की तरह कटघरे में खड़ा है। और विडंबना यह है कि उसे कटघरे में खड़ा करने वाले कोई और नहीं, बल्कि उसके अपने राज्य के रक्षक हैं।
सिंगापुर कोर्ट में बदली असम पुलिस की कहानी ने कई सवाल छोड़ दिए हैं जिनका जवाब समय ही देगा। क्या जुबिन इस ‘चक्रव्यूह’ को तोड़ पाएंगे? या फिर कानून और राजनीति के इस गठजोड़ में उनकी आवाज दब जाएगी?
हम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही सिंगापुर से कोई नई अपडेट आएगी, हम आप तक पहुंचाएंगे। तब तक, असम और जुबिन के प्रशंसक सांसें थामे इंतजार कर रहे हैं। सत्य की जीत हो, यही सबकी कामना है।
