बिहार में मौसम ने अपना मिजाज पूरी तरह बदल लिया है। नए साल की शुरुआत के साथ ही राज्य में ठंड का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। समूचा उत्तर भारत और विशेषकर बिहार इस समय भीषण Bihar Cold Wave (शीतलहर) की चपेट में है। बर्फीली हवाओं और घने कोहरे ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
मौसम विभाग का अलर्ट और शीतलहर का व्यापक प्रभाव
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पटना जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। पटना के जिलाधिकारी (DM) ने आदेश जारी करते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में कक्षा 8 तक की शैक्षणिक गतिविधियों को 13 जनवरी तक बंद रखने का निर्देश दिया है। यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
1. पटना में स्कूलों पर ताला: डीएम का आदेश और अभिभावकों की राहत
राजधानी पटना में गिरते तापमान और सुबह के समय दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण जिला प्रशासन हरकत में आया है। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने धारा 144 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया।
आदेश की मुख्य बातें: जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, पटना जिले के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में प्री-स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों से लेकर कक्षा 8 तक की पढ़ाई 13 जनवरी तक स्थगित रहेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। प्रशासन का तर्क है कि सुबह के समय चलने वाली ठंडी पछुआ हवाएं और कम तापमान बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया: इस आदेश से अभिभावकों ने बड़ी राहत की सांस ली है। बोरिंग रोड निवासी, सुमित कुमार कहते हैं, “सुबह 7 बजे बच्चों को स्कूल भेजने में डर लग रहा था। कोहरा इतना घना होता है कि कुछ दिखाई नहीं देता, और ठंड इतनी है कि बच्चों को सर्दी-जुकाम हो रहा था। प्रशासन का यह फैसला स्वागतयोग्य है।”
हालांकि, कक्षा 9 और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए स्कूल खुले रह सकते हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। उन्हें सुबह 9:00 बजे या उसके बाद ही संचालित करने की अनुमति दी गई है, ताकि सुबह की भीषण ठंड से बचा जा सके। Patna School Closed का यह फैसला न केवल पटना, बल्कि मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा जैसे अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर बन गया है, जहां के प्रशासन भी स्थानीय मौसम को देखते हुए ऐसे ही कदम उठा रहे हैं।
2. बिहार में मौसम का हाल: शिमला जैसा एहसास
अगर आप सोच रहे हैं कि यह ठंड सामान्य है, तो आप गलत हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के कई जिलों का तापमान पहाड़ी राज्यों के करीब पहुंच गया है।
ताजा तापमान के आंकड़े:
- पटना: राजधानी का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया है। दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से 5-6 डिग्री नीचे चल रहा है, जिससे ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की स्थिति बनी हुई है।
- गया: गया राज्य का सबसे ठंडा स्थान बना हुआ है, जहां पारा 3.5 डिग्री से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है।
- पूर्णिया और भागलपुर: इन इलाकों में घने कोहरे की वजह से दिन में भी धूप के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं।
पछुआ हवाओं का कहर: इस Bihar Cold Wave का मुख्य कारण हिमालय की ओर से आ रही बर्फीली पछुआ हवाएं हैं। ये हवाएं 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हैं। जब हवा में नमी होती है और तापमान कम होता है, तो शरीर को महसूस होने वाली ठंड (Wind Chill Factor) वास्तविक तापमान से भी कम होती है। यही कारण है कि 7 डिग्री तापमान में भी लोगों को 2 डिग्री जैसी ठंड का एहसास हो रहा है।

3. ‘कोल्ड डे’ और ‘कोल्ड वेव’ का विज्ञान
मौसम विभाग बार-बार Cold Day Alert जारी कर रहा है। इसे समझना जरूरी है।
- कोल्ड डे (Cold Day): जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम हो और अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री से 6.4 डिग्री तक कम हो जाए, तो उसे ‘कोल्ड डे’ कहा जाता है। बिहार में अभी यही स्थिति है। दिन में धूप न निकलने के कारण धरती गर्म नहीं हो पा रही है।
- शीतलहर (Cold Wave): जब मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाए या सामान्य से बहुत अधिक गिरावट दर्ज हो, तो उसे शीतलहर कहते हैं। गया और दक्षिण बिहार के कई जिलों में शीतलहर की स्थिति बनी हुई है।
इस Weather Update Bihar ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने के आसार कम हैं। 14 जनवरी को मकर संक्रांति है, और परंपरा के अनुसार माना जाता है कि तिल सकरात के बाद ठंड कम होती है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जनवरी का पूरा दूसरा पખवाड़ा कड़ाके की ठंड वाला हो सकता है।
4. कोहरे की चादर: यातायात व्यवस्था चरमराई
ठंड के साथ-साथ घने कोहरे (Dense Fog) ने बिहार की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सुबह और रात के समय दृश्यता (Visibility) 50 मीटर से भी कम रह जाती है, जिसका सीधा असर रेल, सड़क और हवाई यातायात पर पड़ा है।
रेलवे पर असर: भारतीय रेलवे के लिए यह समय सबसे चुनौतीपूर्ण है। नई दिल्ली-हावड़ा और नई दिल्ली-पटना रूट की दर्जनों ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 5 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं।
- राजधानी एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति और मगध एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें घंटों लेट हैं।
- पैसेंजर ट्रेनों को कई जगह रद्द करना पड़ा है।
- पटना जंक्शन और दानापुर स्टेशन पर यात्री कड़ाके की ठंड में प्लेटफॉर्म पर ट्रेनों का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। रेलवे ने फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाए हैं, लेकिन कोहरा इतना घना है कि ट्रेनों की गति 30-40 किमी/घंटा तक सीमित करनी पड़ रही है।
हवाई सेवा बाधित: पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कम दृश्यता के कारण सुबह की फ्लाइट्स या तो रद्द करनी पड़ रही हैं या उन्हें डाइवर्ट (Divert) किया जा रहा है। कई विमान दोपहर 12 बजे के बाद ही लैंड कर पा रहे हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हो रही है।
सड़क दुर्घटनाओं का खतरा: नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर कोहरे के कारण गाड़ियों की रफ़्तार थम गई है। Bihar Cold Wave के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ जाती है। प्रशासन ने चालकों को फॉग लाइट का उपयोग करने और धीमी गति से वाहन चलाने की अपील की है। विशेषकर गंगा किनारे वाले रास्तों, जैसे मरीन ड्राइव और गांधी सेतु पर कोहरा बहुत घना होता है।
5. स्वास्थ्य पर प्रहार: हार्ट और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
भीषण ठंड केवल ठिठुरन नहीं लाती, बल्कि यह अपने साथ कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आती है। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
हार्ट अटैक और बीपी: डॉक्टरों के अनुसार, ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं (Vasoconstriction), जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे दिल पर दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा बढ़ जाता है। पटना के IGIMS और PMCH में पिछले एक हफ्ते में हार्ट के मरीजों की संख्या में 20-30% की बढ़ोतरी देखी गई है। बुजुर्गों को सुबह की सैर (Morning Walk) बंद करने की सलाह दी गई है।
બ્રેન સ્ટ્રોક: ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) का जोखिम भी बढ़ता है। यह जानलेवा हो सकता है।
बच्चों में निमोनिया: Patna School Closed करने का निर्णय मुख्य रूप से इसी खतरे को देखते हुए लिया गया है। बच्चों में कोल्ड डायरिया और निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रोटावायरस का संक्रमण भी ठंड में अधिक फैलता है।
सांस के मरीज: कोहरे के साथ प्रदूषण (Smog) मिलकर एक जहरीली हवा बनाता है। अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों के लिए यह समय काल समान है। सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ रही हैं।
बचाव के उपाय: स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग खुद को कई परतों (Layers) में कपड़े पहनकर रखें। सिर, कान और पैरों को ढककर रखना अनिवार्य है। गुनगुना पानी पिएं और ताज़ा गर्म भोजन करें।

6. जनजीवन और दिहाड़ी मजदूरों का संघर्ष
जब हम रजाई में बैठकर चाय की चुस्की ले रहे होते हैं, तब समाज का एक बड़ा तबका इस Sheetlahar से अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहा होता है। रिक्शा चालक, ठेले वाले, और दिहाड़ी मजदूर इस मौसम की सबसे बड़ी मार झेलते हैं।
रैन बसेरों की स्थिति: पटना नगर निगम और बिहार सरकार ने बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों (Night Shelters) की व्यवस्था की है। कंकड़बाग, गांधी मैदान और स्टेशन रोड के रैन बसेरों में जगह कम पड़ रही है। प्रशासन ने कंबलों का वितरण भी शुरू किया है, लेकिन मांग के मुकाबले आपूर्ति कम है।
अलाव का सहारा: शाम ढलते ही चौराहों पर लोग अलाव (Bonfire) के चारों ओर सिमटे नजर आते हैं। सरकार ने प्रमुख स्थानों पर लकड़ी गिराने की व्यवस्था की है। अलाव ही इन गरीबों के लिए हीटर का काम करता है।
बाजारों पर भी ठंड का असर साफ दिख रहा है। शाम 7 बजे के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। दुकाने जल्दी बंद हो रही हैं। हालांकि, गर्म कपड़ों, हीटर, ब्लोअर और गीजर के बाजार में बंपर बिक्री हो रही है। वूलन मार्केट (तिब्बती मार्केट) में ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है।
7. खेती-किसानी: वरदान या अभिशाप?
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, और मौसम का हर बदलाव खेती को प्रभावित करता है। यह Bihar Cold Wave किसानों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आई है।
गेहूं के लिए सोना: कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं की फसल (Rabi Crop) के लिए यह ठंड वरदान समान है। जितनी ज्यादा ठंड पड़ेगी और ओस गिरेगा, गेहूं की बालियां उतनी ही अच्छी निकलेंगी और दाना मोटा होगा। इससे गेहूं के बंपर उत्पादन की उम्मीद जगी है।
आलू और सरसों को खतरा: दूसरी तरफ, पाला (Frost) गिरने से आलू, सरसों और टमाटर की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। पाला पत्तियों को जला देता है, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों में हल्की सिंचाई करें ताकि जमीन का तापमान बना रहे और पाले का असर कम हो।
8. मकर संक्रांति की तैयारी और ठंड
बिहार में 14 और 15 जनवरी को मकर संक्रांति का महापर्व मनाया जाता है। इसे ‘तिल सकरात’ या ‘खिचड़ी’ भी कहते हैं। ठंड के बावजूद इस त्योहार का उत्साह कम नहीं हुआ है।
- दही-चूड़ा और तिलकुट: ठंड में तिल और गुड़ खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। गया का प्रसिद्ध तिलकुट बाजारों की शोभा बढ़ा रहा है। लोग ठंड से बचने के लिए इनका सेवन कर रहे हैं।
- गंगा स्नान: मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। प्रशासन ने घाटों पर अलाव और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की है, लेकिन इस बार बर्फीले पानी में डुबकी लगाना श्रद्धालुओं के लिए एक कड़ी परीक्षा होगी। IMD Forecast के अनुसार, संक्रांति के दिन भी कोहरा छाया रह सकता है।
9. बिहार के अन्य जिलों का हाल
केवल पटना ही नहीं, बल्कि पूरा बिहार कांप रहा है।
- मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार की राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर में भी दृश्यता शून्य के करीब है। यहां भी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है।
- दरभंगा और मधुबनी: मिथिलांचल के इन जिलों में कनकनी बहुत ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में लोग दिन-दिन भर आग तापते नजर आ रहे हैं।
- सीवान और छपरा: यहां पछुआ हवा का जोर सबसे अधिक है।
- भागलपुर: सिल्क सिटी भागलपुर में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री के आसपास बना हुआ है।
हर जिले के डीएम को अधिकार दिया गया है कि वे स्थानीय मौसम के अनुसार स्कूलों को बंद करने या समय बदलने का निर्णय ले सकें। इसलिए, Patna School Closed के अलावा अन्य जिलों के अभिभावकों को भी स्थानीय समाचारों पर नजर रखनी चाहिए।
10. मौसम विभाग की भविष्यवाणी: आगे क्या?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पटना केंद्र के ताजा बुलेटिन के अनुसार, बिहारवासियों को अभी ठंड से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
आगामी 5 दिनों का पूर्वानुमान:
- 13 से 16 जनवरी: राज्य भर में ‘कोल्ड डे’ से लेकर ‘सीवियर कोल्ड डे’ (Severe Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी।
- कोहरा: सुबह के समय घना से बहुत घना कोहरा छाया रहेगा।
- तापमान: न्यूनतम तापमान में और 1-2 डिग्री की गिरावट आ सकती है।
- बारिश की संभावना: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण 16 जनवरी के बाद बिहार के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। अगर बारिश हुई, तो ठंड का प्रकोप और बढ़ जाएगा और गलन वाली सर्दी शुरू हो जाएगी।
11. बिजली की मांग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
कड़ाके की ठंड के कारण हीटर, ब्लोअर और गीजर का उपयोग बढ़ने से बिहार में बिजली की खपत (Power Consumption) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई છે. शाम के पीक आवर्स में लोड शेडिंग की समस्याएं भी सामने आ रही हैं। बिजली विभाग ने अपनी टीमों को अलर्ट पर रखा है ताकि फॉल्ट होने पर तुरंत मरम्मत की जा सके, क्योंकि ठंड में बिना बिजली के रहना लोगों के लिए असंभव हो जाएगा।
12. क्या यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है?
पर्यावरणविदों का मानना है कि मौसम का यह चरम रूप (Extreme Weather) जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का ही नतीजा है। अब गर्मियां बहुत गर्म होती हैं और सर्दियां बहुत सर्द। बारिश का पैटर्न भी अनियमित हो गया है। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में शीतलहर के दिनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यह एक चेतावनी है कि हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा।
13. इस मौसम में क्या करें और क्या न करें?
क्या करें (Do’s):
- लेयरिंग: एक मोटे कपड़े की जगह तीन-चार पतले गर्म कपड़े पहनें। ऊनी कपड़े, थर्मल वियर का प्रयोग करें।
- खानपान: गुड़, अदरक, लहसुन, हल्दी और सूखे मेवे (Dry Fruits) का सेवन बढ़ा दें। यह शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं।
- हाइड्रेशन: ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को पानी की जरूरत होती है। गुनगुना पानी पीते रहें।
- मास्क: बाहर निकलते समय मास्क पहनें। यह न केवल प्रदूषण से बचाएगा, बल्कि ठंडी हवा को सीधे फेफड़ों में जाने से भी रोकेगा।
- वाहन सावधानी: गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट और लो बीम का इस्तेमाल करें।
क्या न करें (Don’ts):
- रूम हीटर का अति प्रयोग: बंद कमरे में पूरी रात हीटर या अंगીठी जलाकर न सोएं। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड (Carbon Monoxide) गैस बन सकती है जो जानलेवा होती है।
- ठंडा पानी: ठंडे पानी से नहाना या पीना पूरी तरह टालें।
- शराब: यह एक मिथक है कि शराब ठंड भगाती है। वास्तव में, यह शरीर के तापमान को कम करती है और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ाती है।
14. सावधानी ही सुरक्षा है
बिहार में पड़ रही यह Bihar Cold Wave कोई सामान्य घटना नहीं है। यह प्रकृति का एक रौद्र रूप है जो हमारे धैर्य और तैयारियों की परीक्षा ले रहा है। Patna School Closed करने का सरकार का निर्णय बच्चों की सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम है।
13 जनवरी तक स्कूल बंद हैं, लेकिन ठंड का सितम उसके बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे में, एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही, हमारे आस-पास मौजूद जरूरतमंदों की मदद करना भी हमारा मानवीय कर्तव्य है। अगर आपके पास पुराने गर्म कपड़े हैं, तो उन्हें किसी गरीब को दान करें। इस हाड़ कंपाती ठंड में आपका एक पुराना कंबल किसी की जान बचा सकता है।
मौसम विभाग के अपडेट्स पर नजर रखें, अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षित रहें। सूर्यदेव की आराधना करें और उम्मीद करें कि मकर संक्रांति के बाद मौसम सुहावना हो जाए।
सुरक्षित रहें, गर्म रहें!
