Owaisi statement on Umar Khalid and Sharjeel Imam

भारतीय राजनीति में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अपने तीखे तेवरों और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। अक्सर उनके निशाने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) रहती है, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी बंदूक का रुख देश की सबसे पुरानी पार्टी, कांग्रेस (Congress) की तरफ मोड़ दिया है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए Owaisi का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम अगर आज जेल की सलाखों के पीछे हैं, तो उसकी मुख्य वजह भाजपा नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी है।

ओवैसी के इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष एकजुट होने की कोशिश कर रहा है और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर रस्साकशी जारी है।

इस विस्तृत लेख में हम ओवैसी के इस आरोप की गहराई में जाएंगे, उमर खालिद और शरजील इमाम के केस को समझेंगे, और जानेंगे कि आखिर ओवैसी ने कांग्रेस को इसका जिम्मेदार क्यों ठहराया है।

असदुद्दीन ओवैसी ने आखिर क्या कहा?

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक रैली के दौरान गरजते हुए कहा कि कथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां (Secular Parties) मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझती हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बात आती है, तो वे पीछे हट जाती हैं।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “आज अगर उमर खालिद और शरजील इमाम जेल में सड़ रहे हैं, तो इसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। यह कांग्रेस ही थी जिसने UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) कानून को इतना सख्त बनाया था, जिसका इस्तेमाल आज हुकूमत हमारे नौजवानों के खिलाफ कर रही है।”

ओवैसी का तर्क यह है कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उन्होंने ऐसे कानूनों को मंजूरी दी जिन्होंने पुलिस और जांच एजेंसियों को असीमित शक्तियां दीं। आज जब उसी कानून का इस्तेमाल हो रहा है, तो कांग्रेस के नेता खामोश हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इनके पक्ष में बोलने से हिंदू वोट नाराज हो जाएगा।

Owaisi statement on Umar Khalid and Sharjeel Imam

कांग्रेस पर ओवैसी के आरोप के मुख्य बिंदु

ओवैसी के हमले को समझने लिए हमें उनके तर्कों को विस्तार से देखना होगा। वे कांग्रेस को केवल एक विपक्षी पार्टी नहीं, बल्कि वर्तमान स्थिति का ‘सूत्रधार’ मानते हैं।

यूएपीए (UAPA) कानून का इतिहास ओवैसी बार-बार याद दिलाते हैं कि UAPA कानून में संशोधन करके उसे कठोर बनाने का काम कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार ने किया था। 2008 और उसके बाद के वर्षों में, आतंकवाद से निपटने के नाम पर इस कानून को इतना कड़ा कर दिया गया कि इसमें जमानत मिलना लगभग नामुमकिन हो गया। ओवैसी का कहना है, “आपने (कांग्रेस ने) हथियार बनाया और भाजपा आज उस हथियार का इस्तेमाल कर रही है।”

चुप्पी और दोहरा चरित्र ओवैसी का दूसरा सबसे बड़ा आरोप यह है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य बड़े नेता ‘भारत जोड़ो’ की बात तो करते हैं, लेकिन वे कभी भी खुलकर उमर खालिद और शरजील इमाम का नाम नहीं लेते। ओवैसी पूछते हैं, “क्या ये नौजवान भारत के नागरिक नहीं हैं? क्या इनके मानवाधिकार नहीं हैं? कांग्रेस इनके लिए धरना क्यों नहीं देती? क्योंकि उन्हें डर है कि उन पर ‘मुस्लिम परस्त’ होने का ठप्पा लग जाएगा।”

कौन हैं उमर खालिद और शरजील इमाम?

इस विवाद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर ये दो नाम इतने चर्चा में क्यों हैं।

उमर खालिद का मामला उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र और कार्यकर्ता हैं। उन्हें 2020 के दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के पीछे की कथित साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर UAPA के तहत मामला दर्ज है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने दंगों को भड़काने में मास्टरमाइंड की भूमिका निभाई, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल सीएए (CAA) के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। वे पिछले कई सालों से जेल में हैं और उन्हें जमानत नहीं मिल पा रही है।

शरजील इमाम और शाहीन बाग शरजील इमाम भी जेएनयू के छात्र रहे हैं और शाहीन बाग प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए थे। उन पर भी देशद्रोह और UAPA के तहत आरोप लगे हैं। उनके एक भाषण को आधार बनाकर उन पर “भारत के टुकड़े” करने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। Owaisi का बड़ा बयान इन दोनों युवाओं को मुस्लिम नेतृत्व और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखता है, जिन्हें सिस्टम ने कुचल दिया है।

मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और कांग्रेस की दुविधा

ओवैसी का यह हमला विशुद्ध रूप से राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। भारत में मुसलमान पारंपरिक रूप से कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय धर्मनिरपेक्ष दलों का वोट बैंक रहे हैं। ओवैसी इस वोट बैंक में सेंध लगाना चाहते हैं।

कांग्रेस को बेनकाब करने की रणनीति ओवैसी मुसलमानों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वे कहते हैं, “भाजपा डंडे से मारती है और कांग्रेस मीठा जहर देती है।” उमर खालिद और शरजील इमाम का मुद्दा उठाकर वे युवाओं को यह संदेश दे रहे हैं कि जब आप पर मुसीबत आएगी, तो राहुल गांधी या प्रियंका गांधी आपको बचाने नहीं आएंगे, केवल ओवैसी ही आपकी आवाज उठाएगा।

कांग्रेस की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ छवि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2014 के बाद से कांग्रेस ने अपनी छवि बदलने की कोशिश की है। वे मंदिरों में जाते हैं और जनेऊ दिखाते हैं ताकि भाजपा के ‘हिंदू-विरोधी’ आरोपों का मुकाबला कर सकें। इसी चक्कर में वे कट्टरपंथी छवि वाले या विवादित मुस्लिम मुद्दों से दूरी बनाकर रखते हैं। ओवैसी इसी ‘दूरी’ को कांग्रेस की ‘गद्दारी’ बता रहे हैं।

Owaisi statement on Umar Khalid and Sharjeel Imam

यूएपीए (UAPA): वह कानून जो विवाद की जड़ है

ओवैसी के बयान का सबसे मजबूत आधार UAPA कानून है। इसे समझना जरूरी है।

कानून की सख्ती गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, यानी UAPA, एक ऐसा कानून है जिसमें पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने के लिए लंबा समय मिलता है और आरोपी को जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है। सामान्य कानूनों में “दोषी साबित होने तक निर्दोष” का सिद्धांत चलता है, लेकिन UAPA के कई प्रावधानों में “निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी” आरोपी पर आ जाती है।

कांग्रेस की भूमिका ओवैसी सही कहते हैं कि इस कानून को समय-समय पर कांग्रेस सरकारों ने ही मजबूत किया था। पी. चिदंबरम जब गृह मंत्री थे, तब इसमें कई कड़े प्रावधान जोड़े गए थे। ओवैसी का तर्क है कि अगर कांग्रेस ने उस वक्त मानवाधिकारों का ख्याल रखा होता, तो आज सरकार इसका दुरुपयोग नहीं कर पाती।

ओवैसी के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

जैसे ही ओवैसी ने यह बयान दिया, राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

कांग्रेस का पलटवार कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने ओवैसी को भाजपा की ‘बी-टीम’ (B-Team) करार दिया है। उनका कहना है, “ओवैसी का काम सिर्फ धर्मनिरपेक्ष वोटों को काटना और भाजपा को जिताना है। जब हम संसद में सरकार से लड़ते हैं, तब ओवैसी जी भाजपा की मदद करने वाले बयान देते हैं। उमर खालिद की गिरफ्तारी भाजपा सरकार ने की है, तो ओवैसी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस को क्यों कोस रहे हैं?”

भाजपा की चुकी भाजपा इस पूरे मामले पर मजे ले रही है। उनके लिए यह सुखद स्थिति है कि विपक्ष आपस में ही लड़ रहा है। भाजपा का मानना है कि कानून अपना काम कर रहा है और उमर खालिद और शरजील इमाम ने देश विरोधी काम किया है, इसलिए वे जेल में हैं।

जेल में बंद कार्यकर्ताओं की स्थिति

ओवैसी ने अपने भाषण में जेल में बंद इन कार्यकर्ताओं की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ पढ़े-लिखे मुस्लिम नौजवानों को बिना किसी ठोस सबूत के सालों-साल जेल में रखा जा रहा है।

दिल्ली दंगों के मामलों में कई अन्य कार्यकर्ता भी जेल में हैं। अदालतों में सुनवाई की गति धीमी है। ओवैसी का कहना है कि यह एक तरह की “सामूहिक सजा” (Collective Punishment) है जो पूरे समुदाय को डराने के लिए दी जा रही है।

क्या ओवैसी मुस्लिम नेतृत्व का एकमात्र विकल्प बनना चाहते हैं?

ओवैसी की राजनीति अब हैदराबाद से निकलकर उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और बंगाल तक फैल रही है। उनका यह बयान उनकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।

वे जानते हैं कि मुस्लिम समुदाय में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो महसूस करता है कि उनके पास कोई राजनीतिक आवाज नहीं है। तथाकथित सेक्युलर पार्टियां उनका वोट तो लेती हैं लेकिन उनके मुद्दों (जैसे सीएए, एनआरसी, मॉब लिंचिंग, या जेल में बंद युवा) पर चुप रहती हैं। ओवैसी इसी खालीपन (Vacuum) को भरना चाहते हैं। Owaisi का बड़ा बयान इसी रणनीति का हिस्सा है कि मुसलमानों को कांग्रेस के ‘भ्रम’ से बाहर निकाला जाए।

सोशल मीडिया पर जंग

इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो खेमों में बंट गया है।

  • एक वर्ग ओवैसी की तारीफ कर रहा है और कह रहा है कि “शेर ने सच बोला है।” वे #UmarKhalid और #SharjeelImam के समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं।
  • दूसरा वर्ग (ज्यादातर कांग्रेस और वामपंथी समर्थक) ओवैसी की आलोचना कर रहा है। उनका कहना है कि ओवैसी का मकसद अभी हो रहे अत्याचारों से ध्यान हटाकर पुरानी बातों पर ले जाना है, जिससे अंततः दक्षिणपंथी ताकतों को ही फायदा होगा।

भविष्य की राजनीति और इसका असर

आने वाले चुनावों में इस बयान का असर देखने को मिल सकता है। अगर मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस से छिटककर ओवैसी या अन्य क्षेत्रीय दलों की तरफ जाता है, तो इससे भाजपा विरोधी गठबंधन (जैसे INDIA अलायंस) को नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस के लिए यह एक चेतावनी है। उन्हें यह तय करना होगा कि वे उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे मुद्दों पर क्या स्टैंड लेते हैं। क्या वे मानवाधिकारों के आधार पर इनका समर्थन करेंगे या बहुसंख्यक वोटों के डर से चुप रहेंगे? यह चुप्पी उनके लिए महंगी साबित हो सकती है, क्योंकि ओवैसी अब चुप रहने वाले नहीं हैं।

कानूनी लड़ाई और मानवाधिकार संगठनों की राय

सिर्फ ओवैसी ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी भारत में UAPA के इस्तेमाल और इन कार्यकर्ताओं की लंबे समय तक कैद पर सवाल उठा चुके हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने भी कहा है कि राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

हालांकि, भारतीय न्यायपालिका ने कई बार कहा है कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब हिंसा भड़काना नहीं हो सकता। उमर खालिद की जमानत याचिकाओं पर अदालतों ने अब तक कड़ा रुख अपनाया है, जो दर्शाता है कि मामला कानूनी रूप से कितना पेचीदा है।

उमर खालिद और शरजील इमाम

असदुद्दीन ओवैसी ने ‘उमर खालिद और शरजील इमाम कांग्रेस की वजह से जेल में’ कहकर एक बहुत ही कड़वी बहस छेड़ दी है। यह बहस सिर्फ दो व्यक्तियों की रिहाई की नहीं है, बल्कि यह भारत में धर्मनिरपेक्षता, वोट बैंक की राजनीति और कठोर कानूनों के इतिहास के बारे में है।

ओवैसी का तर्क कानूनी और ऐतिहासिक तथ्यों (UAPA संशोधन) पर आधारित है, लेकिन उनका निशाना पूरी तरह से राजनीतिक है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस हमले का जवाब कैसे देती है और क्या देश का मुस्लिम समुदाय ओवैसी की बात मानकर अपनी राजनीतिक वफादारी बदलता है।

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