प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। जोधपुर जेल में बंद वांगचुक पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को चुनौती देने वाली याचिका पर आज, 7 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
जोधपुर जेल में बंद सोनम वांगचुक पर लगाए गए NSA (National Security Act) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होगी।
Sonam Wangchuk Jodhpur Jail Update: लद्दाख की स्वायत्तता और पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक पिछले 100 से अधिक दिनों से राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उनकी पत्नी, गीतांजलि अंगमो, द्वारा दायर ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ आज सुनवाई करेगी।
1. क्यों लगाया गया NSA? (प्रशासन का पक्ष)
लद्दाख प्रशासन और केंद्र सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में वांगचुक की हिरासत को जायज ठहराया है:
- हिंसा भड़काने का आरोप: प्रशासन का दावा है कि 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा (जिसमें 4 लोगों की मौत हुई थी) के पीछे वांगचुक के ‘भड़काऊ’ भाषण और वीडियो थे।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सरकार का तर्क है कि उनके द्वारा ‘अरब स्प्रिंग’ और ‘नेपाल आंदोलन’ जैसे संदर्भ देना देश की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा है।
- निवारक निरोध (Preventive Detention): NSA के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है, यदि वह सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माना जाए।

2. याचिकाकर्ता के तर्क (सोनम वांगचुक का पक्ष)
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, जो गीतांजलि अंगमो का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कोर्ट में निम्नलिखित बिंदु रखे हैं:
- असहमति को दबाना: याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार लद्दाख की ‘छठी अनुसूची’ (Sixth Schedule) की मांग को दबाने के लिए इस काले कानून का दुरुपयोग कर रही है।
- शांतिपूर्ण विरोध: वांगचुक गांधीवादी तरीके से अनशन कर रहे थे, और उन पर हिंसा का आरोप लगाना निराधार और राजनीति से प्रेरित है।
- मानवाधिकारों का उल्लंघन: बिना ठोस आधार के 100 दिनों तक हिरासत में रखना मौलिक अधिकारों का हनन है।
3. अब तक की कानूनी कार्यवाही (Timeline of Case)
- 26 सितंबर 2025: सोनम वांगचुक को लेह से गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया।
- अक्टूबर-नवंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में संशोधन की अनुमति दी और सरकार से जवाब मांगा।
- 15 दिसंबर 2025: कोर्ट ने समय की कमी के कारण सुनवाई 7 जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी।
- आज की सुनवाई: आज जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच इस पर फैसला कर सकती है कि क्या वांगचुक की हिरासत जारी रहेगी या उन्हें रिहा किया जाएगा।
4. लद्दाख में बढ़ता आक्रोश
वांगचुक की गिरफ्तारी ने लद्दाख में एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया है। ‘एपेक्स बॉडी लेह’ (ABL) और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस’ (KDA) ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वांगचुक और अन्य प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे केंद्र सरकार के साथ किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होंगे।
