अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। 4 और 5 जनवरी 2026 को फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटते समय एयरफोर्स वन (Air Force One) विमान में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
इस नई चेतावनी और बयान के मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:
1. ट्रंप का बयान: “मोदी जानते थे कि मैं खुश नहीं था”
ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक “अच्छे इंसान” हैं और वे इस बात से भली-भांति परिचित थे कि अमेरिका भारत द्वारा रूस से भारी मात्रा में रियायती तेल खरीदने के पक्ष में नहीं है।

- बयान के शब्द: “मोदी को पता था कि मैं (रूसी तेल की खरीद से) खुश नहीं था, और मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ (शुल्क) बढ़ा सकते हैं।”
- दावा: ट्रंप ने संकेत दिया कि भारत ने अमेरिका की नाराजगी को देखते हुए रूसी तेल की खरीद में कटौती करना शुरू कर दिया है।
2. ‘मैसिव टैरिफ’ (Massive Tariffs) की चेतावनी
ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भारत ने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं की या अमेरिकी चिंताओं का समाधान नहीं किया, तो भारत को भारी आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
- 50% तक टैरिफ: ट्रंप प्रशासन पहले ही कुछ भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर चुका है।
- नई धमकी: उन्होंने कहा कि अमेरिका टैरिफ को “बहुत तेजी से” और अधिक बढ़ा सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी नुकसानदेह साबित होगा।
3. सीनेटर लिंडसे ग्राहम का प्रभाव
इस पूरी बातचीत के दौरान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी ट्रंप के साथ थे।
- ग्राहम ने दावा किया कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में 38% से 40% की गिरावट का मुख्य कारण ट्रंप द्वारा लगाए गए सख्त टैरिफ ही हैं।
- ग्राहम एक ऐसा विधेयक (Bill) भी ला रहे हैं जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक का जुर्माना या शुल्क लगाने की शक्ति राष्ट्रपति को देगा।
4. भारत की वर्तमान स्थिति और प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पहले भी इसी तरह के दावों पर स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा नीति किसी दबाव में नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
- आंकड़े: दिसंबर 2025 तक भारत का रूसी तेल आयात पिछले तीन वर्षों के सबसे निचले स्तर (~1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन) पर पहुँच गया है, लेकिन इसके पीछे ‘बैंकिंग प्रतिबंध’ और ‘शिपिंग चुनौतियां’ भी बड़े कारण हैं।
- बातचीत: भारत फिलहाल अमेरिका के साथ एक बड़े व्यापार समझौते (Trade Deal) पर बातचीत कर रहा है, जिसमें रूसी तेल का मुद्दा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
5. क्या यह ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान भारत पर व्यापार समझौते में अपनी शर्तें मनवाने के लिए बनाया गया एक ‘रणनीतिक दबाव’ (Strategic Pressure) है।
| ट्रंप का पक्ष | भारत का पक्ष |
| रूसी तेल की कमाई से पुतिन युद्ध (Ukraine War) लड़ रहे हैं। | भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए सस्ता तेल चाहिए। |
| भारत को अमेरिका से अधिक तेल और गैस खरीदनी चाहिए। | भारत अपनी तेल आपूर्ति को विविधता (Diversify) दे रहा है। |
| टैरिफ के जरिए भारत को ‘लाइन पर’ लाया जा सकता है। | भारत अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों से समझौता नहीं करेगा। |
निष्कर्ष: 2026 की शुरुआत भारत-अमेरिका संबंधों के लिए चुनौतीपूर्ण दिख रही है। जहाँ ट्रंप इसे अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं, वहीं भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों के बीच एक बारीक संतुलन बनाना होगा।
