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प्रस्तावना: चांद से मिट्टी लाने का सपना 23 अगस्त 2023 को जब ‘चंद्रयान-3’ ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी, तब पूरा भारत गर्व से झूम उठा था। वह भारत की अंतरिक्ष यात्रा का एक ऐतिहासिक क्षण था। लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) वहीं नहीं रुका। अब इसरो अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन ‘चंद्रयान-4’ (Chandrayaan-4) की तैयारी में जुट गया है।

यह मिशन सिर्फ चांद पर उतरने के बारे में नहीं है, बल्कि यह उससे कई कदम आगे की बात है। चंद्रयान-4 का लक्ष्य चंद्रमा की सतह से पत्थर और मिट्टी के नमूने (Lunar Samples) इकट्ठा करना और उन्हें सुरक्षित रूप से वापस धरती पर लाना है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि चंद्रयान-4 क्या है, यह पिछले मिशनों से कैसे अलग है और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं।

चंद्रयान-4

1. चंद्रयान-4 क्या है? (Mission Overview)

चंद्रयान-4 इसरो का अगला बड़ा चंद्र मिशन है, जिसे ‘लूनर सैंपल रिटर्न मिशन’ (Lunar Sample Return Mission) के नाम से भी जाना जाता है। अभी तक भारत ने चांद पर ऑर्बिटर भेजा (चंद्रयान-1), क्रैश लैंडिंग की (चंद्रयान-2 का लैंडर) और सफल सॉफ्ट लैंडिंग की (चंद्रयान-3)। अब अगली चुनौती है—वापस आना।

मिशन के मुख्य उद्देश्य:

  • सॉफ्ट लैंडिंग: चंद्रमा के एक विशिष्ट क्षेत्र (संभवतः शिव शक्ति पॉइंट के पास) पर सुरक्षित उतरना।
  • नमूना संग्रह: चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करना।
  • वापसी यात्रा: चंद्रमा की सतह से वापस उड़ान भरना और पृथ्वी के वायुमंडल में सुरक्षित प्रवेश करना।

2. चंद्रयान-4, चंद्रयान-3 से कितना अलग और जटिल है?

चंद्रयान-3 एक “वन-वे टिकट” जैसा था, जहाँ लैंडर और रोवर को चांद पर जाना था और वहीं अपना काम खत्म करना था। लेकिन चंद्रयान-4 एक “राउंड ट्रिप” है। इसे और अधिक जटिल बनाने वाले कुछ प्रमुख तकनीकी अंतर यहाँ दिए गए हैं:

क) मॉड्यूल की संख्या

चंद्रयान-3 में तीन मुख्य हिस्से थे (प्रोपल्शन, लैंडर और रोवर)। लेकिन चंद्रयान-4 में पाँच बड़े हिस्से (Modules) होंगे:

  1. प्रोपल्शन मॉड्यूल: इसे चांद की कक्षा तक ले जाने के लिए।
  2. लैंडर मॉड्यूल: चांद की सतह पर सुरक्षित उतरने के लिए।
  3. असेंचर मॉड्यूल (Ascender Module): यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जो चांद की सतह से वापस उड़ान भरेगा।
  4. ट्रांसफर मॉड्यूल: चांद की कक्षा में सैंपल्स को कलेक्ट करेगा।
  5. री-एंट्री मॉड्यूल: जो अंत में पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और सैंपल्स को जमीन पर सुरक्षित लैंड कराएगा।
चंद्रयान-4

ख) दो रॉकेट का इस्तेमाल

चंद्रयान-4 इतना भारी होगा कि इसे एक बार में एक रॉकेट से लॉन्च करना मुश्किल हो सकता है। इसरो की योजना के अनुसार, इसे दो अलग-अलग लॉन्च (LVM-3 और PSLV/GSLV) के जरिए अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है और फिर अंतरिक्ष में ही इन्हें जोड़ा जाएगा। इसे ‘स्पेस डॉकिंग’ कहा जाता है, जो भारत के भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भी बहुत जरूरी तकनीक है।

3. चंद्रयान-4 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह मिशन केवल वैज्ञानिक डेटा के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक और तकनीकी ताकत का प्रदर्शन है।

  • दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होना: अब तक केवल अमेरिका (अपोलो मिशन), रूस (लूना मिशन) और चीन (चांग-ई मिशन) ही चांद से मिट्टी वापस लाने में सफल रहे हैं। चंद्रयान-4 के साथ भारत इस ‘एलिट क्लब’ का चौथा सदस्य बन जाएगा।
  • मानव मिशन (Gaganyaan) की नींव: अगर हम चांद से मिट्टी वापस ला सकते हैं, तो भविष्य में हम इंसानों को भी चांद पर भेजकर वापस ला सकेंगे। यह मिशन 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चांद पर भेजने के सपने की पहली सीढ़ी है।
  • संसाधनों की खोज: चंद्रमा की मिट्टी में ‘हीलियम-3’ और ‘पानी (बर्फ के रूप में)’ मिलने की संभावना है। हीलियम-3 भविष्य में ऊर्जा का एक बहुत बड़ा स्रोत बन सकता है।

4. मिशन की समयसीमा (Timeline)

इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ के अनुसार, चंद्रयान-4 मिशन के 2028-2029 तक लॉन्च होने की संभावना है। अगले दो-तीन साल इसरो उन तकनीकों को विकसित करने में लगाएगा जो “रिटर्न मिशन” के लिए जरूरी हैं, जैसे कि अंतरिक्ष में डॉकिंग और री-एंट्री हीट शील्ड।

5. अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का भविष्य: एक नजर

चंद्रयान-4 के अलावा, भारत कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है:

  1. गगनयान (Gaganyaan): 2025 तक भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारी।
  2. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): 2035 तक अंतरिक्ष में भारत का अपना घर।
  3. शुक्रयान (Shukrayaan): शुक्र ग्रह (Venus) के रहस्यों को जानने का मिशन।

6. निष्कर्ष: एक नया युग

चंद्रयान-4 भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण मिशन होने वाला है। यह न केवल हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम होगा, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक भी होगा। जब चंद्रयान-4 चांद की मिट्टी लेकर वापस आएगा, तो वह भारत के लिए एक नए ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत होगी।

भारत अब केवल अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल नहीं है, बल्कि वह इस दौड़ का नेतृत्व कर रहा है।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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