नागपुर से एक बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 12 साल के मासूम बच्चे को उसके ही माता-पिता ने कथित तौर पर दो महीने तक जंजीरों से बांधकर रखा। पुलिस ने इस मामले में बच्चे को छुड़ा लिया है और माता-पिता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
यहाँ इस घटना की विस्तृत जानकारी दी गई है:
12 साल के बेटे को 2 महीने तक जंजीरों से बांधा
1. क्या है पूरा मामला?
नागपुर के वाठोडा इलाके में रहने वाले एक दंपति ने अपने 12 वर्षीय बेटे को प्रताड़ित करने की सभी हदें पार कर दीं। पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, बच्चे के पैर लोहे की जंजीर से बंधे हुए थे और उसे एक कमरे में कैद कर रखा गया था।

2. माता-पिता की दलील: “सुधारने के लिए किया”
जब पुलिस ने माता-पिता से पूछताछ की, तो उन्होंने जो कारण बताए वे हैरान करने वाले थे:
- मोबाइल चोरी का आरोप: माता-पिता का दावा है कि बेटा घर से मोबाइल चोरी करता था और उन्हें बेच देता था।
- बदतमीजी और व्यवहार: उनका कहना था कि बच्चा बात नहीं मानता था और पड़ोसियों के साथ बदतमीजी करता था।
- तर्क: उन्होंने पुलिस से कहा कि वे उसे “सुधारने” और घर से भागने से रोकने के लिए जंजीरों से बांधते थे।
3. पुलिस की कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों और एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने घर पर छापा मारा।
- बच्चे की हालत: पुलिस को बच्चा बेहद डरा हुआ और कमजोर स्थिति में मिला। उसके पैरों के निशान बता रहे थे कि वह लंबे समय से जंजीरों में जकड़ा हुआ था।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने माता-पिता को हिरासत में ले लिया है। उनके खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
- काउंसलिंग: बच्चे को सुरक्षित स्थान पर भेजकर उसकी काउंसलिंग कराई जा रही है।
4. कानून क्या कहता है? (Child Protection Laws)
भारत में बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा या उन्हें बंधक बनाना एक गंभीर अपराध है:
| कानून | प्रावधान |
| जुवेनाइल जस्टिस एक्ट | बच्चों के साथ क्रूरता करने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान। |
| अनुच्छेद 21 | हर बच्चे को गरिमा के साथ जीने का मौलिक अधिकार है। |
| BNS (पुरानी IPC 342) | किसी को गलत तरीके से बंधक बनाना (Wrongful Confinement) दंडनीय है। |
5. सामाजिक प्रभाव
यह घटना समाज में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परवरिश (Parenting) के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुशासन के नाम पर शारीरिक प्रताड़ना बच्चों को सुधारने के बजाय उन्हें गहरे मानसिक आघात (Trauma) में धकेल देती है।
महत्वपूर्ण नोट: यदि आप अपने आसपास किसी भी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा होते देखें, तो तुरंत Childline Number 1098 पर कॉल करें।
निष्कर्ष: गरीबी या व्यवहारिक समस्याएं किसी भी बच्चे को जंजीरों में बांधने का बहाना नहीं हो सकतीं। नागपुर पुलिस की तत्परता से एक मासूम की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने आधुनिक समाज की संवेदनशीलता पर दाग लगा दिया है।
