इंदौर के बालीपुर धाम क्षेत्र में फैले दूषित जल संकट ने अब एक और परिवार को उम्र भर का दर्द दे दिया है। 6 महीने के मासूम बच्चे के बाद, अब एक दिहाड़ी मजदूर की मौत ने प्रशासन की लापरवाही की कलई खोल कर रख दी है।
मृतक मजदूर के परिवार ने जो आपबीती सुनाई है, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। यहाँ इस दुखद घटना और उस मजदूर के आखिरी पलों का पूरा विवरण दिया गया है:

आखिरी रात की दास्तां: परिवार की जुबानी
मृतक मजदूर (उम्र लगभग 42 वर्ष) परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उनके छोटे भाई और पत्नी ने सिसकते हुए उन आखिरी घंटों का ब्यौरा दिया:
- शुरुआत: रात करीब 11:00 बजे काम से लौटने के बाद उन्होंने घर में रखा पानी पिया। थोड़ी देर बाद ही उन्हें जी मिचलाने और पेट में मरोड़ की शिकायत हुई।
- लगातार उल्टियां: परिवार ने बताया कि उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं। रात 2:00 बजे तक हालत इतनी बिगड़ गई कि वह खड़े होने की स्थिति में भी नहीं थे।
- पानी की कमी (Dehydration): बार-बार होने वाली उल्टियों के कारण शरीर का पूरा पानी निकल चुका था। परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि तुरंत निजी एम्बुलेंस बुला सकें, और सरकारी मदद आने में देरी हुई।
- दम तोड़ दिया: जब तक उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, उनके शरीर में हलचल बंद हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया और प्रारंभिक कारण ‘सेवर डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग’ बताया।
“नल से जहर आ रहा है”: परिवार का आरोप
मजदूर के परिवार का सीधा आरोप नगर निगम पर है। उन्होंने मीडिया को वह बर्तन भी दिखाए जिसमें पानी भरा था:
- पानी का रंग और गंध: पानी हल्का पीला था और उसमें से ड्रेनेज जैसी तीखी बदबू आ रही थी।
- मजबूरी: “हम गरीब लोग हैं, बिसलेरी खरीद कर नहीं पी सकते। जो नल में आता है, वही पीते हैं। हमें क्या पता था कि निगम हमारे घरों में पानी नहीं, जहर भेज रहा है।” – मृतक की पत्नी।
क्षेत्र की भयावह स्थिति (Ground Report)
बालीपुर धाम और आसपास के स्लम इलाकों में स्थिति बेकाबू होती दिख रही है:
- हर घर में मरीज: रिपोर्ट के मुताबिक, इस गली के लगभग हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति उल्टी-दस्त से पीड़ित है।
- पाइपलाइन का मिलान: स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान पानी की मुख्य पाइपलाइन डैमेज हो गई थी, जिसके कारण सीवरेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया है।
- प्रशासनिक सुस्ती: लोगों का दावा है कि 3 दिन पहले ही शिकायत की गई थी, लेकिन अधिकारी तब जागे जब मौतें शुरू हुईं।

अब तक की कार्रवाई
- मृत्यु समीक्षा: प्रशासन ने दोनों मौतों (बच्चे और मजदूर) के मामले में ‘डेथ ऑडिट’ के आदेश दिए हैं।
- नल कनेक्शन काटे गए: एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र के नल कनेक्शन अस्थायी रूप से काट दिए गए हैं और टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई की जा रही है।
- मुआवजे की मांग: स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मृतक मजदूर के परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
निष्कर्ष
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में एक मजदूर का गंदा पानी पीने से मर जाना, शहरी विकास के दावों पर एक बड़ा तमाचा है। यह घटना दर्शाती है कि जब बुनियादी सुविधाएं (साफ पानी) फेल होती हैं, तो उसका सबसे पहला और सबसे घातक प्रहार समाज के गरीब तबके पर होता है।
