Mukesh Khanna:

बॉलीवुड में ऐतिहासिक महापुरुषों के जीवन पर फिल्में बनाना हमेशा से एक जोखिम भरा काम रहा है। जब साल 2022 में अक्षय कुमार की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ आई थी, तब इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन अब, दिग्गज अभिनेता Mukesh Khanna ने इस फिल्म में अक्षय कुमार की कास्टिंग को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। मुकेश खन्ना का मानना है कि अक्षय कुमार इस महान हिंदू सम्राट के किरदार के साथ न्याय करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

अपने यूट्यूब चैनल और हालिया इंटरव्यू में Mukesh Khanna ने फिल्म के निर्देशक और अक्षय कुमार दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ऐतिहासिक योद्धा का किरदार निभाने के लिए जिस शारीरिक भाषा (Body Language) और चेहरे के तेज की जरूरत होती है, वह अक्षय में गायब था। आइए विस्तार से जानते हैं कि मुकेश खन्ना ने इस कास्टिंग को लेकर और क्या-क्या कड़े शब्द कहे हैं।

“चेहरे पर तेज की कमी”: मुकेश खन्ना का तीखा विश्लेषण

मुकेश खन्ना ने अपने बयान में सबसे ज्यादा जोर ‘लुक’ और ‘फील’ पर दिया। Mukesh Khanna के अनुसार, “सम्राट पृथ्वीराज चौहान एक महान योद्धा थे। उनके चेहरे पर एक अलग चमक और आंखों में एक खास तेज होना चाहिए था। अक्षय कुमार को देखकर ऐसा लगा ही नहीं कि वे पृथ्वीराज हैं। सिर्फ मूंछें लगा लेना या विग पहन लेना किसी को ऐतिहासिक महापुरुष नहीं बना देता।”

Mukesh Khanna:

उन्होंने आगे कहा कि अक्षय कुमार की इमेज एक ‘खिलाड़ी’ या एक्शन हीरो की है, जो समकालीन फिल्मों में तो अच्छी लगती है, लेकिन जब बात 12वीं सदी के सम्राट की हो, तो वहां दर्शक किसी ऐसे अभिनेता को देखना चाहते हैं जो उस कालखंड का हिस्सा लगे।

कास्टिंग पर सवाल: क्या अक्षय कुमार गलत चुनाव थे?

ऐतिहासिक फिल्मों में कास्टिंग सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। Mukesh Khanna ने सवाल उठाया कि क्या मेकर्स ने केवल स्टार पावर के चक्कर में अक्षय कुमार को चुना? उन्होंने तर्क दिया कि किसी नए या अधिक वजनदार आवाज वाले अभिनेता को यह मौका दिया जाना चाहिए था।

मुकेश खन्ना ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह नीतीश भारद्वाज ‘कृष्ण’ के रूप में या वे खुद ‘भीष्म पितामह’ के रूप में फिट बैठे थे, वैसा जादू अक्षय कुमार पैदा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि फिल्म देखते समय बार-बार अक्षय कुमार ही नजर आ रहे थे, सम्राट पृथ्वीराज चौहान नहीं।

शूटिंग के समय पर आपत्ति: 40 दिन में कैसे बनी ऐतिहासिक फिल्म?

Mukesh Khanna ने अक्षय कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अक्षय कुमार अपनी फिल्मों को बहुत कम समय (40-45 दिन) में पूरा करने के लिए जाने जाते हैं। खन्ना ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “एक ऐतिहासिक फिल्म के लिए महीनों की तैयारी, भाषा पर पकड़ और किरदार में ढलने की जरूरत होती है। आप इसे किसी रैंडम कॉमेडी फिल्म की तरह 40 दिन में खत्म करके महानता का दावा नहीं कर सकते।”

Mukesh Khanna:

निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी पर भी बरसे ‘भीष्म पितामह’

मुकेश खन्ना की नाराजगी केवल अक्षय कुमार तक सीमित नहीं थी। उन्होंने फिल्म के निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी पर भी निशाना साधा। खन्ना ने कहा कि जिस निर्देशक ने ‘चाणक्य’ जैसा महान धारावाहिक बनाया, उनसे ऐसी चूक की उम्मीद नहीं थी।

Mukesh Khanna ने सवाल किया कि निर्देशक ने अक्षय कुमार को उस तरह से तैयार क्यों नहीं किया या फिर कास्टिंग के समय किसी ऐसे चेहरे को क्यों नहीं चुना जिसकी कद-काठी और आवाज सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसी भव्य हो।

सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया और विवाद

मुकेश खन्ना के इस बयान के बाद इंटरनेट पर दो गुट बन गए हैं। एक गुट का मानना है कि Mukesh Khanna बिल्कुल सही कह रहे हैं और बॉलीवुड को अब केवल स्टार्स के पीछे भागने के बजाय किरदारों की गहराई पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, अक्षय कुमार के फैंस का कहना है कि अभिनेता ने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की थी और फिल्म का फ्लॉप होना केवल कास्टिंग की गलती नहीं थी।

ऐतिहासिक फिल्मों का भविष्य और कास्टिंग की चुनौतियां

इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या बॉलीवुड ऐतिहासिक तथ्यों और पात्रों के साथ खिलवाड़ कर रहा है? Mukesh Khanna के अनुसार, यदि आने वाले समय में भी केवल बड़े नाम के आधार पर ऐतिहासिक फिल्में बनाई गईं, तो दर्शक उन्हें नकारते रहेंगे।

उन्होंने सुझाव दिया कि निर्माताओं को दक्षिण भारतीय फिल्मों (जैसे बाहुबली या पोन्नियिन सेलवन) से सीखना चाहिए कि कैसे किरदारों को भव्यता और प्रमाणिकता के साथ पर्दे पर उतारा जाता है।

क्या मुकेश खन्ना की बात में दम है?

निष्कर्ष के तौर पर, Mukesh Khanna का यह बयान बॉलीवुड के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है। एक कलाकार के रूप में अक्षय कुमार की अपनी उपलब्धियां हैं, लेकिन हर भूमिका हर किसी के लिए नहीं होती। ऐतिहासिक किरदारों के साथ दर्शकों की भावनाएं जुड़ी होती हैं, और अगर वहां थोड़ी भी चूक होती है, तो फिल्म का हश्र ‘सम्राट पृथ्वीराज’ जैसा ही होता है। मुकेश खन्ना ने अपनी बेबाकी से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे फिल्म जगत में गुणवत्ता और परंपरा के कट्टर समर्थक हैं।

F Mukesh Khanna का यह बयान FAQ :

मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna) ने अक्षय कुमार के बारे में क्या कहा?

मुकेश खन्ना ने कहा कि अक्षय कुमार ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ के किरदार में बिल्कुल फिट नहीं थे और केवल विग या मूंछें लगा लेने से कोई ऐतिहासिक योद्धा नहीं बन जाता।

क्या अक्षय कुमार की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी?

नहीं, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी और इसे एक बड़ी फ्लॉप माना गया था।

मुकेश खन्ना ऐतिहासिक किरदारों के लिए किस तरह के अभिनेता की वकालत करते हैं?

उनका मानना है कि ऐतिहासिक किरदारों के लिए ऐसे अभिनेता होने चाहिए जिनकी आवाज में गंभीरता हो, चेहरे पर तेज हो और जो उस कालखंड की भाषा और हाव-भाव में ढलने के लिए लंबा समय देने को तैयार हों।

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