Death Physiology Study

क्या सच में पूरी जिंदगी आंखों के सामने तैर जाती है?

मृत्यु (Death)—यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर ही इंसान के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह जीवन का सबसे बड़ा सच है, लेकिन साथ ही सबसे बड़ा रहस्य भी। सदियों से दार्शनिक, धार्मिक गुरु और वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं: “मरते समय इंसान को कैसा महसूस होता है?” (What does one feel before dying?)

क्या अंधेरा छा जाता है? क्या दर्द होता है? या जैसा कि फिल्मों में दिखाया जाता है, क्या सच में मरने से ठीक पहले इंसान की पूरी जिंदगी एक फिल्म की रील की तरह उसकी आंखों के सामने से गुजरती है?

साल 2026 की शुरुआत में विज्ञान जगत से एक बड़ी खबर आई है। वैज्ञानिकों ने पहली बार एक मरते हुए इंसान के दिमाग की Brain Activity (मस्तिष्क गतिविधि) को रिकॉर्ड करने में सफलता हासिल की है। इस अध्ययन ने उन दावों पर मुहर लगा दी है जो अब तक सिर्फ किस्से-कहानियों में सुने जाते थे।

Death Physiology Study

1. वह एक्सीडेंटल खोज जिसने बदल दिया विज्ञान (The Accidental Discovery)

विज्ञान में कई बार सबसे बड़ी खोजें गलती से या संयोग से होती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ जब वैज्ञानिकों की एक टीम एक 87 वर्षीय मरीज का इलाज कर रही थी।

मामला क्या था? वह मरीज मिर्गी (Epilepsy) के दौरों से जूझ रहा था। डॉक्टर उसके दिमाग की गतिविधियों को मॉनिटर करने के लिए Electroencephalography (EEG) मशीन का उपयोग कर रहे थे। अचानक, इलाज के दौरान मरीज को Heart Attack (दिल का दौरा) पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई।

चूंकि वह मशीन से जुड़ा हुआ था, वैज्ञानिकों के पास इतिहास में पहली बार एक मरते हुए इंसान के दिमाग की रिकॉर्डिंग आ गई।

क्या दिखा रिकॉर्डिंग में? वैज्ञानिकों ने देखा कि दिल धड़कना बंद करने के 30 सेकंड पहले और 30 सेकंड बाद तक, दिमाग में Brain Waves (मस्तिष्क तरंगों) की बाढ़ आ गई थी। यह ठीक वैसी ही तरंगें थीं जो हम तब महसूस करते हैं जब हम:

  1. सपना देख रहे होते हैं।
  2. गहरा ध्यान (Meditation) कर रहे होते हैं।
  3. या अपनी पुरानी यादों को याद (Memory Recall) कर रहे होते हैं।

2. ‘जीवन का फ्लैशबैक’: क्या यादें सच में लौटती हैं? (Life Review)

इस शोध का सबसे चौंकाने वाला पहलू Gamma Oscillations (गामा दोलन) था। हमारे दिमाग में अलग-अलग प्रकार की तरंगें होती हैं (Alpha, Beta, Delta, Gamma)।

  • Gamma Waves: ये तरंगें तब सक्रिय होती हैं जब हमारा दिमाग बहुत ज्यादा एकाग्र होता है या हम अपनी याददाश्त (Memory) का इस्तेमाल कर रहे होते हैं।

वैज्ञानिकों का निष्कर्ष: शोधकर्ताओं का मानना है कि मरते समय दिमाग “शट डाउन” होने से पहले अपनी सारी ऊर्जा इकट्ठा करके ‘अंतिम प्रयास’ करता है। इस दौरान वह जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यादों को Recall करता है।

  • बचपन की यादें।
  • शादी या प्यार के पल।
  • माता-पिता का चेहरा।

जिसे हम अक्सर “Life flashing before eyes” कहते हैं, वह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि एक जैविक प्रक्रिया (Biological Process) हो सकती है। दिमाग आपको आखिरी बार सुकून देने के लिए अच्छे पलों को रीप्ले करता है।

3. शरीर में होने वाले बदलाव: मौत की प्रक्रिया (The Physical Process of Dying)

मौत कोई स्विच ऑफ होने जैसी घटना नहीं है, यह एक प्रक्रिया है। जब Clinical Death (नैदानिक मृत्यु) होती है, तो शरीर के अंदर एक तूफान आता है।

A. हृदय और रक्त संचार (The Heart Stops)

सबसे पहले दिल धड़कना बंद करता है। इससे शरीर के अंगों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है। इसे Cardiac Arrest कहते हैं।

B. मस्तिष्क की छटपटाहट (Brain Hypoxia)

जैसे ही ऑक्सीजन की सप्लाई रुकती है, दिमाग Hypoxia (ऑक्सीजन की कमी) में चला जाता है। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है।

  • आम तौर पर हम सोचते हैं कि ऑक्सीजन न मिलने पर दिमाग तुरंत काम करना बंद कर देगा।
  • लेकिन नई स्टडी बताती है कि इस समय दिमाग Hyperactive (अति-सक्रिय) हो जाता है। न्यूरॉन्स तेजी से फायर करते हैं, जिससे बहुत ज्यादा इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी पैदा होती है। यही वह समय है जब इंसान को तेज रोशनी या अजीब अनुभव होते हैं।
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C. अंग शिथिल पड़ना

शरीर का तापमान गिरने लगता है और मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं।

4. सुनने की शक्ति: सबसे अंत में जाने वाला साथी (Hearing is the Last Sense)

यह बहुत ही भावुक और महत्वपूर्ण जानकारी है। University of British Columbia के एक शोध में पाया गया कि मरते समय इंसान की Hearing (सुनने की क्षमता) सबसे अंत तक बनी रहती है।

  • जब मरीज कोमा में होता है या मृत्यु के एकदम करीब होता है, तब भी उसका Auditory Cortex (दिमाग का वह हिस्सा जो आवाज सुनता है) सक्रिय रहता है।
  • भले ही वह इंसान आपकी बात का जवाब न दे पाए, या अपनी उंगली भी न हिला पाए, लेकिन वह संभवतः आपकी बातें सुन रहा होता है।

सलाह: इसलिए डॉक्टर और धर्मगुरु सलाह देते हैं कि मरते हुए इंसान के पास रोने-धोने के बजाय, उससे अच्छी बातें करनी चाहिए, उसे यह कहना चाहिए कि “हम ठीक रहेंगे, आप सुकून से जाओ।” यह उसे शांति दे सकता है।

5. नियर डेथ एक्सपीरियंस (NDE): सुरंग और रोशनी का सच

दुनिया भर में ऐसे लाखों लोग हैं जो मौत के मुंह से वापस आए हैं (जैसे कोमा से जागे लोग या जिनका दिल रुकने के बाद सीपीआर से चल पड़ा)। उनके अनुभव काफी हद तक एक जैसे होते हैं। इसे Near-Death Experience (NDE) कहा जाता है।

सामान्य अनुभव:

  1. सफेद रोशनी: एक अंधेरी सुरंग के अंत में तेज चमकदार रोशनी देखना।
  2. Out-of-Body Experience: खुद को अपने शरीर से बाहर निकलकर हवा में तैरते हुए देखना। डॉक्टर को अपने ही शरीर का इलाज करते हुए देखना।
  3. दिवंगत परिजनों से मिलन: मरे हुए माता-पिता या दोस्तों को देखना जो उन्हें लेने आए हैं।

वैज्ञानिक कारण: आध्यात्मिक लोग इसे आत्मा की यात्रा कहते हैं, लेकिन विज्ञान इसका कारण रसायनों को मानता है।

  • DMT (Dimethyltryptamine): यह एक शक्तिशाली साइकेडेलिक रसायन है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि मरते समय पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) भारी मात्रा में DMT छोड़ती है, जिससे इंसान को ये ‘हैलुसिनेशन’ (भ्रम) होते हैं।

6. क्या मौत दर्दनाक होती है? (Is Death Painful?)

यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। जवाब है: जरूरी नहीं।

जब शरीर को लगता है कि अब बचना मुश्किल है, तो वह खुद को बचाने के बजाय ‘शांति’ की ओर ले जाता है।

  • Endorphins: दिमाग भारी मात्रा में एंडोर्फिन रिलीज़ करता है, जो शरीर के नेचुरल पेनकिलर (Painkiller) हैं।
  • Serotonin: यह मूड को अच्छा करने वाला हार्मोन है।

कई मरीजों ने बताया है कि उन्हें दर्द के बजाय एक अजीब सी Euphoria (परमानंद) और शांति महसूस हुई। उन्हें ऐसा लगा जैसे वे सारे बोझ से मुक्त हो गए हैं। बेशक, यह बीमारी पर निर्भर करता है (जैसे कैंसर या हार्ट अटैक में दर्द हो सकता है), लेकिन अंतिम क्षणों में दिमाग दर्द के संकेतों को ब्लॉक करने की कोशिश करता है।

7. चेतना कब तक रहती है? (Consciousness After Heart Stops)

पहले माना जाता था कि दिल रुकते ही चेतना (Consciousness) खत्म हो जाती है। लेकिन Sam Parnia (NYU Langone Health के शोधकर्ता) के अध्ययन बताते हैं कि दिल रुकने के बाद भी कई मिनटों तक, और कभी-कभी घंटों तक, दिमाग के कुछ हिस्से काम करते रहते हैं।

इसे Lucid Death भी कहा जा सकता है। यानी इंसान तकनीकी रूप से मर चुका है, लेकिन उसका ‘मैं’ (Self) अभी भी कुछ हद तक मौजूद है। वह देख नहीं सकता, बोल नहीं सकता, लेकिन ‘महसूस’ कर रहा है।

8. क्या हम अपनी मौत को जान पाते हैं?

कई अध्ययनों और डॉक्टरों के अनुभवों के आधार पर, यह देखा गया है कि मरने से कुछ समय पहले (कुछ घंटे या दिन), इंसान को इसका आभास होने लगता है।

  • इसे Terminal Lucidity कहा जाता है।
  • अक्सर देखा गया है कि अल्जाइमर या डिमेंशिया के मरीज, जो सालों से किसी को पहचान नहीं रहे थे, मरने से ठीक पहले एकदम ठीक हो जाते हैं। वे सबको पहचानते हैं, बात करते हैं और फिर शांत हो जाते हैं। विज्ञान अभी तक इस रहस्य को पूरी तरह सुलझा नहीं पाया है।

9. विज्ञान और आध्यात्म का मिलन

दिलचस्प बात यह है कि ये नए वैज्ञानिक शोध और हमारे प्राचीन ग्रंथ (जैसे गरुड़ पुराण या तिब्बती बुक ऑफ डेथ) एक ही दिशा में इशारा करते हैं।

  • ग्रंथ कहते हैं कि “मरते समय मोह छूट जाता है और जीवन का लेखा-जोखा सामने आता है।”
  • विज्ञान कहता है कि “गामा वेव के कारण लाइफ रिव्यू होता है।”

शब्द अलग हैं, लेकिन अनुभव एक ही है। यह शोध विज्ञान और आध्यात्म के बीच की खाई को कम कर रहा है।

10. डरने की जरूरत नहीं (Conclusion)

Breaking Science News का यह खुलासा हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि तसल्ली देने के लिए है। मौत वैसी ‘काली और डरावनी’ शून्यता नहीं है जैसा हम सोचते हैं।

  • आपका दिमाग अंत तक आपका साथ देता है।
  • वह आपको आपकी सबसे प्यारी यादें दिखाता है।
  • दर्द कम करने के लिए रसायन छोड़ता है।
  • और आपको अपनों की आवाज सुनने का मौका देता है।

जीवन का अंत एक पूर्णविराम नहीं, बल्कि शायद चेतना का एक नए रूप में रूपांतरण है।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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