नई दिल्ली, 1 मार्च 2026: दुनिया एक बार फिर एक विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। मध्य पूर्व (Middle East / West Asia) में रातों-रात हालात इतने बेकाबू हो गए हैं कि वैश्विक कूटनीति, शेयर बाजार और आम जनजीवन में भूचाल आ गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सबसे बड़े और अचूक संयुक्त सैन्य हमले (Operation Epic Fury / Roaring Lion) में ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है।
इस भयंकर वैश्विक उथल-पुथल और तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) की आहट के बीच, भारत सरकार पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। इसी कड़ी में सबसे बड़ी खबर यह है कि West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता।
अगर आप अंतरराष्ट्रीय संबंधों, वैश्विक अर्थव्यवस्था या रक्षा मामलों में रुचि रखते हैं, या आपके कोई परिचित मध्य पूर्व (दुबई, सऊदी अरब, कतर, ईरान आदि) में रहते हैं, तो यह विस्तृत न्यूज़ ब्लॉग आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस लॉन्ग-फॉर्म आर्टिकल में हम ईरान-इजरायल युद्ध की इनसाइड स्टोरी, CCS बैठक के मुख्य एजेंडे, भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव और खाड़ी देशों में फंसे लगभग 1 करोड़ भारतीयों के रेस्क्यू प्लान का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
1. रात 10 बजे का अल्टीमेटम: West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता
रविवार, 1 मार्च 2026 की रात भारतीय कूटनीति और रक्षा प्रतिष्ठान के लिए बहुत लंबी होने वाली है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय चुनावी और आधिकारिक दौरे (राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी) से आज रात करीब 9:30 बजे दिल्ली लौट रहे हैं। दिल्ली लैंड करते ही, बिना कोई समय गंवाए, प्रधानमंत्री देश की सुरक्षा से जुड़ी सबसे सर्वोच्च संस्था ‘कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी’ (CCS) की एक आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
जब यह खबर आई कि West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता, तो इससे यह स्पष्ट हो गया कि हालात सामान्य नहीं हैं। यह बैठक रात लगभग 10:00 बजे प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) पर शुरू होने की संभावना है।
आखिर CCS (Cabinet Committee on Security) क्या है?
कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति) भारत सरकार की वह सर्वोच्च संस्था है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा रणनीति, सैन्य अभियानों और विदेशी मामलों पर अंतिम और सबसे अहम फैसले लेती है। इस समिति में निम्नलिखित शीर्ष मंत्री शामिल होते हैं:
- प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी (अध्यक्ष)
- रक्षा मंत्री: राजनाथ सिंह
- गृह मंत्री: अमित शाह
- विदेश मंत्री: एस. जयशंकर
- वित्त मंत्री: निर्मला सीतारमण
इसके अलावा, इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA), चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), तीनों सेनाओं के प्रमुख और विदेश सचिव भी मौजूद रह सकते हैं। इतनी उच्च स्तरीय बैठक का रात के समय बुलाया जाना स्थिति की गंभीरता (Gravity of the situation) को दर्शाता है।
2. बैठक के मुख्य एजेंडे: CCS की टेबल पर आज रात क्या होगा?
जब West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता, तो इस हाई-वोल्टेज मीटिंग में मुख्य रूप से तीन सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होगी और अहम फैसले लिए जाएंगे।

एजेंडा 1: मध्य पूर्व में फंसे 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा (Operation Evacuation?)
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय वहां रहने वाले भारतीय नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे पश्चिम एशिया / खाड़ी क्षेत्र (UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन, कुवैत आदि) में लगभग 9.6 मिलियन (करीब 1 करोड़) भारतीय रहते और काम करते हैं। अकेले ईरान में लगभग 10,000 भारतीय मौजूद हैं।
- कश्मीरी छात्रों का संकट: जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने पीएम मोदी से गुहार लगाई है कि ईरान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे लगभग 1,200 कश्मीरी और भारतीय छात्रों को तुरंत वहां से सुरक्षित निकाला जाए।
- दुबई ट्रांजिट में फंसे भारतीय: ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और ओमान के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमले किए गए हैं। इसके कारण खाड़ी क्षेत्र का एयरस्पेस (Airspace) पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। एयर इंडिया, इंडिगो और एमिरेट्स जैसी एयरलाइंस ने उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हजारों भारतीय ट्रांजिट में फंस गए हैं।
- क्या नया रेस्क्यू ऑपरेशन लॉन्च होगा?: CCS की बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो क्या वायुसेना (IAF) और नौसेना (Indian Navy) को स्टैंडबाय पर रखकर ‘ऑपरेशन अजय’ (Operation Ajay) या ‘ऑपरेशन गंगा’ (Operation Ganga) की तर्ज पर कोई नया मेगा इवैक्यूएशन प्लान (Evacuation Plan) शुरू किया जाए।
एजेंडा 2: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना और ऊर्जा सुरक्षा
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है, जिसमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर दिया है।
- दुनिया की 20% तेल सप्लाई ठप: होर्मुज जलडमरूमध्य वह संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम सप्लाई का 20% (लगभग 20 मिलियन बैरल तेल प्रतिदिन) और 15% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है।
- भारत की इकॉनमी पर खतरा: ईरान के इस कदम से कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल आ सकता है, जो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को बढ़ाएगा और सीधा असर महंगाई (Inflation) पर पड़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बैठक में इस आर्थिक झटके से निपटने के लिए भारत के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के उपयोग पर चर्चा कर सकती हैं।
एजेंडा 3: कूटनीतिक संतुलन (Diplomatic Tightrope Walk)
भारत के लिए यह एक बहुत ही जटिल कूटनीतिक परीक्षा (Diplomatic Test) है।
- इजरायल के साथ गहरी दोस्ती: अभी हाल ही में (25-26 फरवरी 2026 को) पीएम मोदी ने इजरायल का दौरा किया था, जहां उन्हें नेसेट (इजरायली संसद) में स्टैंडिंग ओवेशन मिला था। पीएम मोदी ने कहा था, “भारत इजरायल के साथ पूरी दृढ़ता से खड़ा है।” इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी को ‘भाई’ कहकर संबोधित किया था। इस दौरे के तुरंत बाद इजरायल का ईरान पर इतना बड़ा हमला, भारत को एक अजीब स्थिति में डाल रहा है।
- ईरान के साथ रणनीतिक हित: दूसरी ओर, ईरान के साथ भी भारत के गहरे ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध हैं (चाबहार पोर्ट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को ही ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार दोनों से अलग-अलग फोन पर बात करके तनाव कम करने (De-escalation) और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है।

3. फ्लैशबैक: मध्य पूर्व में आखिर यह महा-विस्फोट हुआ कैसे?
CCS की इस आपात बैठक की गंभीरता को समझने के लिए हमें पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम पर नजर डालनी होगी। यह कोई सामान्य सैन्य झड़प नहीं है, यह एक देश के सर्वोच्च नेतृत्व का खात्मा है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी / लायंस रोर’ (Operation Epic Fury)
शनिवार, 28 फरवरी 2026 की रात अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक भयानक और अचूक हवाई हमला किया। इस जॉइंट ऑपरेशन को ‘एपिक फ्यूरी’ और ‘लायंस रोर’ नाम दिया गया।
- टारगेट: अमेरिकी और इजरायली फाइटर जेट्स ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में ईरानी सैन्य कमांड सेंटर्स, एयर-डिफेंस सिस्टम और मिसाइल साइट्स पर बमबारी की। इजरायली सेना के अनुसार, 24 घंटे से भी कम समय में 1,000 से अधिक म्यूनिशंस (Munitions) ईरान पर गिराए गए।
- सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत: इस हमले का सबसे बड़ा परिणाम यह हुआ कि ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता, अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) मारे गए। रविवार सुबह ईरान के स्टेट-रन टीवी और IRNA न्यूज़ एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर उनके निधन की पुष्टि कर दी।
- अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान: इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कहा कि यह हमला इसलिए किया गया ताकि “ईरान कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) हासिल न कर सके।” उन्होंने ईरानी जनता से अपील की कि वे अपने देश का नियंत्रण वापस लें।
ईरान का भीषण पलटवार (The Iranian Retaliation)
अपने सर्वोच्च नेता की हत्या के बाद ईरान की सेना (IRGC) ने ‘इतिहास के सबसे भयंकर आक्रामक ऑपरेशन’ की कसम खाई है।
- इजरायल और अमेरिकी बेस पर मिसाइलें: ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स की झड़ी लगा दी है। इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इजरायल में लाखों लोगों को शेल्टर (Bunkers) में भागना पड़ा है।
- ओमान तट पर तेल टैंकर पर हमला: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करते हुए ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर हमला कर दिया है, जिसमें 15 भारतीय क्रू मेंबर सवार बताए जा रहे हैं।
4. भारत में घरेलू राजनीति और विपक्ष का तीखा प्रहार
जब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो उसका सीधा असर घरेलू राजनीति पर भी पड़ता है। जैसे ही यह खबर आई कि West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता, वैसे ही विपक्षी दलों (विशेषकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी) ने सरकार की विदेश नीति पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए।

कांग्रेस का आरोप: “भारत के मूल्यों के साथ धोखा”
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘स्वयंभू विश्वगुरु’ (Self-styled Vishwaguru) की विफलता बताया। रमेश ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “पीएम मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल गए थे, जब पूरी दुनिया जानती थी कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल का हमला आसन्न (Imminent) है। उनके वहां से लौटने के महज दो दिन बाद यह हमला हो गया। यह लक्षित हत्याएं (Targeted Assassinations) भारत के उसूलों और शांति के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने भी महात्मा गांधी के शांति संदेश को याद करते हुए लिखा कि एक संप्रभु राष्ट्र के नेतृत्व की हत्या निंदनीय है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील की कि वे इजरायल और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने घुटने टेकने के बजाय मध्य पूर्व में फंसे भारतीयों को सुरक्षित घर लाने पर ध्यान दें।
आम आदमी पार्टी (AAP) और अन्य दलों का रुख
आप सांसद संजय सिंह ने भी पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हुई थी, तब भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। “तो अब खामेनेई की हत्या पर पीएम मोदी एक शोक संदेश तक क्यों नहीं दे रहे हैं? क्या अमेरिका के डर से?”
एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस हमले को ‘अनैतिक’ (Immoral) करार दिया और भारत सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग की है।
भारत में विरोध प्रदर्शन (Protests in India)
खामेनेई की मौत की खबर के बाद, रविवार को भारत के विभिन्न हिस्सों (विशेषकर दिल्ली के जंतर मंतर, लखनऊ और कश्मीर) में शिया समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि “एक खामेनेई मारा गया है, लेकिन हजार खामेनेई पैदा होंगे।”
5. केरल, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकारों की चिंताएं
इस पूरे संकट में भारत के कुछ राज्य सबसे अधिक प्रभावित हैं क्योंकि उनका एक बहुत बड़ा डायस्पोरा (Diaspora) खाड़ी देशों में काम करता है। यही कारण है कि West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता—इस खबर पर इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की टकटकी लगी हुई है।
- केरल: केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) ने पीएम मोदी को तत्काल एक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि केरल के लाखों लोग गल्फ देशों में रहते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के लिए राजनयिक स्तर पर कड़े कदम उठाए जाएं और यदि आवश्यकता हो तो उनके सुरक्षित वापसी के लिए ‘हेल्पलाइन’ स्थापित की जाए।
- पंजाब: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रधानमंत्री से अपील की है कि जैसे ही हवाई मार्ग खुलें, वैसे ही पंजाबियों और अन्य भारतीयों को निकालने के लिए विशेष एयरलिफ्ट (Airlift) ऑपरेशन शुरू किया जाए।
- जम्मू और कश्मीर: जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, जेकेएसए (JKSA) के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने ईरान में फंसे 1,200 कश्मीरी छात्रों के रेस्क्यू की मांग की है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि FRRO (Foreigners Regional Registration Office) के माध्यम से उन विदेशी नागरिकों की भी मदद की जाएगी जो भारत में हैं और इस संकट के कारण अपनी यात्रा योजनाएं बदलने को मजबूर हुए हैं। उनकी वीजा अवधि (Visa Extension) बढ़ाने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।
6. वैश्विक शेयर बाजार और रक्षा क्षेत्र पर इसका असर
युद्ध की खबरों का पहला शिकार हमेशा अर्थव्यवस्था होती है। जब सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार (BSE Sensex और NSE Nifty) खुलेंगे, तो निवेशकों के मन में भारी दहशत (Panic) देखने को मिल सकती है। क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतों में रातों-रात 10% से 15% तक का उछाल आ सकता है क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया है। इसके कारण एविएशन कंपनियों (जैसे इंडिगो), पेंट कंपनियों और तेल आयातकों के शेयरों में भारी गिरावट आ सकती है।
हालांकि, दूसरी ओर भारत के रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) के शेयरों में तेजी आ सकती है। भारत सरकार लगातार अपने रक्षा तंत्र को मजबूत कर रही है। हाल ही में CCS ने 80,000 करोड़ रुपये की रक्षा डील को मंजूरी दी थी, जिसमें अमेरिका से 31 प्रीडेटर ड्रोन (Predator Drones) और 2 परमाणु पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। युद्ध के इस माहौल में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और मझगांव डॉक जैसी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है।
7. क्या यह तनाव ‘तीसरे विश्व युद्ध’ (World War 3) का रूप ले लेगा?
इस समय दुनिया का हर रक्षा विशेषज्ञ यही सोच रहा है कि क्या हम विश्व युद्ध 3 की दहलीज पर खड़े हैं? इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज (Israel Katz) ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक उनके सभी उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘इतिहास के सबसे खूंखार आक्रामक अभियान’ की चेतावनी दी है।
अगर इस संघर्ष में रूस (जो ईरान का करीबी सहयोगी है) और नाटो (NATO) देश सीधे तौर पर शामिल हो जाते हैं, तो यह एक वैश्विक आपदा बन जाएगा। इसके अलावा, ईरान के छद्म गुट (Proxy groups) जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह (Hezbollah), यमन में हूती (Houthis) और इराक-सीरिया के शिया मिलिशिया पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर कहर बरपा सकते हैं।
भारत की नीति हमेशा से “संवाद और कूटनीति” (Dialogue and Diplomacy) की रही है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि “भारत संघर्ष की स्थिति से गहराई से चिंतित है और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को बढ़ने से रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करता है।”
आज रात 10 बजे जब West Asia संकट पर आज CCS बैठक, नरेंद्र मोदी करेंगे अध्यक्षता, तो वह कमरा केवल भारत की ही नहीं, बल्कि कई मायनों में दक्षिण एशिया की भविष्य की कूटनीतिक दिशा तय करेगा। एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती है, तो दूसरी तरफ 1 करोड़ भारतीयों की जान का सवाल। एक तरफ इजरायल और अमेरिका जैसे शक्तिशाली मित्र हैं, तो दूसरी तरफ ईरान जैसा ऐतिहासिक साझेदार।
