Driverless Cars

भविष्य की कारों का वर्तमान सच

हम साल २०२६ में जी रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को से लेकर फीनिक्स तक, और अब धीरे-धीरे दुनिया के अन्य हिस्सों में भी बिना ड्राइवर वाली कारें (Driverless Cars) एक आम दृश्य बनती जा रही हैं। विज्ञान कथाओं में हमने जिन उड़ने वाली और खुद चलने वाली कारों की कल्पना की थी, वह आज सड़कों पर दौड़ रही हैं। Waymo, जो कि गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) का हिस्सा है, इस रेस में सबसे आगे मानी जाती है।

जब हम एक Waymo टैक्सी को सड़क पर बिना किसी इंसान के स्टीयरिंग व्हील के पीछे बैठे देखते हैं, तो हमें लगता है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का चमत्कार है। हमें बताया जाता है कि यह कार अपने सेंसर, रडार और सुपरकंप्यूटर दिमाग से चल रही है। लेकिन, क्या हो अगर मैं आपसे कहूं कि इस “जादू” के पीछे एक बहुत ही मानवीय सच्चाई छिपी है? क्या हो अगर आपको पता चले कि अमेरिका की सड़कों पर दौड़ रही इन हाई-टेक कारों को हजारों मील दूर बैठे Remote Workers गाइड कर रहे हैं?

हाल ही में हुए एक बड़े खुलासे ने टेक जगत में खलबली मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Waymo की Driverless Cars पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं हैं। जब भी ये कारें मुश्किल में फंसती हैं, तो इन्हें Philippines और अन्य देशों में बैठे रिमोट स्टाफ की मदद लेनी पड़ती है। यह खबर न केवल AI की क्षमताओं पर सवाल उठाती है, बल्कि ‘गिग इकोनॉमी’ और आउटसोर्सिंग के नैतिक पहलुओं पर भी चर्चा को जन्म देती है।

भाग 1: बड़ा खुलासा – क्या है पूरा मामला? (The Big Revelation)

टेक इंडस्ट्री में अक्सर कहा जाता है कि “AI का मतलब कई बार ‘एब्सेंट इंडियन’ (या इस केस में फिलिपिनो) होता है।” यानी, जिसे हम ऑटोमेशन समझते हैं, उसके पीछे अक्सर सस्ता मानवीय श्रम होता है।

पर्दे के पीछे की कहानी:

हालिया रिपोर्ट्स और इनसाइडर जानकारी से पता चला है कि Waymo के संचालन में मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) की मात्रा उससे कहीं अधिक है जितना कंपनी ने पहले स्वीकार किया था। जब एक Waymo कार सड़क पर किसी जटिल स्थिति का सामना करती है—जैसे कि सड़क निर्माण (Road Construction), पुलिस का इशारा, या कोई अजीबोगरीब बाधा—तो उसका AI कंफ्यूज हो जाता है। ऐसे में, कार तुरंत रुकती है और अपने ‘बेस’ को सिग्नल भेजती है।

यह सिग्नल किसी सुपरकंप्यूटर के पास नहीं, बल्कि Philippines या अमेरिका के टेक्सास/एरिज़ोना में बैठे एक इंसान के पास जाता है। ये Remote Workers कार के कैमरों से लाइव फीड देखते हैं और कार को बताते हैं कि आगे क्या करना है।

आंकड़ों का खेल:

हालांकि वेमो का दावा है कि उनकी कारें स्वायत्त हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि प्रति कुछ मील पर मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है। यह Driverless Cars के दावे को थोड़ा कमजोर करता है। यह खुलासा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि वेमो को टेस्ला (Tesla) और क्रूज (Cruise) के मुकाबले सबसे सुरक्षित और उन्नत माना जाता रहा है। लेकिन इस पर्दे के पीछे Philippines के उन हजारों वर्कर्स की मेहनत है जो स्क्रीन के सामने बैठकर इन रोबोटिक टैक्सियों को ‘दिमाग’ उधार देते हैं।

भाग 2: यह तकनीक कैसे काम करती है? (Human-in-the-Loop Technology)

इस प्रक्रिया को समझना बहुत जरूरी है। क्या Philippines में बैठा व्यक्ति जॉयस्टिक (Joystick) से कार चला रहा है? नहीं, ऐसा नहीं है। इसे ‘रिमोट कंट्रोल ड्राइविंग’ नहीं, बल्कि ‘रिमोट असिस्टेंस’ (Remote Assistance) कहा जाता है।

1. फ्लीट रिस्पॉन्स (Fleet Response):

वेमो की शब्दावली में इसे ‘फ्लीट रिस्पॉन्स’ कहा जाता है। जब कार का सॉफ्टवेयर किसी स्थिति को लेकर अनिश्चित होता है (उदाहरण के लिए: एक डिलीवरी ट्रक ने आधा रास्ता रोक रखा है और उसे पार करने के लिए डबल येलो लाइन पार करनी पड़ेगी), तो कार रुक जाती है।

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2. प्रश्न और उत्तर:

कार सिस्टम एक अलर्ट भेजता है। Remote Workers (जो कि एक ऑफिस सेटअप में कई स्क्रीन्स के सामने बैठे होते हैं) उस अलर्ट को देखते हैं। कार उनसे पूछती है, “क्या यह रास्ता सुरक्षित है?” या “मुझे यहाँ से कहाँ जाना चाहिए?” वर्कर स्क्रीन पर एक नया रास्ता (Path) ड्रा करता है या कार को आगे बढ़ने की अनुमति (Confirmation) देता है।

3. निष्पादन (Execution):

एक बार जब इंसान निर्देश दे देता है, तो कार का AI उस निर्देश का पालन करता है। यानी स्टीयरिंग, ब्रेक और एक्सीलेटर का नियंत्रण अभी भी कार के पास ही होता है, लेकिन ‘निर्णय’ इंसान का होता है।

इस मॉडल को Human-in-the-Loop AI कहा जाता है। यह पूरी तरह से Driverless Cars नहीं हैं, बल्कि ‘ह्यूमन-गाइडेड’ कारें हैं। और यह गाइडेंस अब सिलिकॉन वैली से नहीं, बल्कि Philippines जैसे देशों से आ रही है।

भाग 3: फिलीपींस ही क्यों? (Why The Philippines?)

यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। दुनिया की सबसे अमीर टेक कंपनी (Google/Alphabet) अपनी सबसे उन्नत तकनीक को संभालने के लिए Philippines के वर्कर्स पर क्यों निर्भर है? इसके पीछे विशुद्ध अर्थशास्त्र और व्यावहारिक कारण हैं।

1. लागत में कटौती (Cost Efficiency):

अमेरिका में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर या प्रशिक्षित तकनीशियन का वेतन बहुत अधिक है। इसके विपरीत, Philippines में श्रम की लागत काफी कम है। Waymo को अपनी सेवाओं को सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए परिचालन लागत (Operating Cost) कम करनी पड़ती है। रिमोट असिस्टेंस को आउटसोर्स करना इसका सबसे आसान तरीका है।

2. अंग्रेजी भाषा और बीपीओ कल्चर:

फिलीपींस दुनिया का ‘बीपीओ कैपिटल’ (BPO Capital) माना जाता है। वहां के लोग अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं और अमेरिकी संस्कृति से परिचित हैं। तकनीकी सहायता और डेटा लेबलिंग के कार्यों में उनका पुराना अनुभव है। Remote Workers का एक बड़ा और कुशल पूल वहां आसानी से उपलब्ध है।

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3. 24/7 संचालन:

टाइम जोन का अंतर भी एक कारण हो सकता है। जब अमेरिका में रात होती है, तो एशिया में दिन होता है। लेकिन चूंकि Driverless Cars 24 घंटे चलती हैं, इसलिए शिफ्ट में काम करने वाले वर्कर्स की जरूरत होती है। फिलीपींस का बीपीओ सेक्टर रात की शिफ्ट (Night Shift) में काम करने के लिए जाना जाता है।

भाग 4: एआई का भ्रम और वास्तविकता (The Illusion of AI)

हम अक्सर सोचते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान की जगह ले लेगा। लेकिन Waymo का यह खुलासा बताता है कि AI अभी भी इंसान के बिना लाचार है। इसे ‘विजार्ड ऑफ ओज़’ (Wizard of Oz) प्रभाव कहा जा सकता है – सामने एक भव्य जादूगर (AI) है, लेकिन पर्दे के पीछे एक सामान्य इंसान मशीन चला रहा है।

मैकेनिकल तुर्क (The Mechanical Turk):

अमेज़न का एक प्लेटफार्म है जिसे ‘मैकेनिकल तुर्क’ कहते हैं, जहाँ छोटे-छोटे काम इंसानों से कराए जाते हैं। Driverless Cars की दुनिया में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। कंपनियां निवेशकों और जनता को यह बेच रही हैं कि उनकी कारें पूरी तरह स्वायत्त हैं, लेकिन वास्तविकता में वे एक ‘हाइब्रिड मॉडल’ पर चल रही हैं।

यह निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अगर Waymo को विस्तार करना है (Scale Up), तो क्या उसे हर 10 कारों के पीछे 1 इंसान रखना पड़ेगा? अगर ऐसा है, तो यह बिजनेस मॉडल आर्थिक रूप से कितना टिकाऊ (Sustainable) है? Philippines के वर्कर्स का उपयोग करके वेमो इस कमी को छिपाने की कोशिश कर रहा है।

भाग 5: सुरक्षा और देरी का सवाल (Safety and Latency Issues)

जब हम सड़क सुरक्षा की बात करते हैं, तो मिलीसेकंड (Milliseconds) मायने रखते हैं। Philippines से अमेरिका तक डेटा आने-जाने में लगने वाला समय (Latency) एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।

इंटरनेट की गति और विश्वसनीयता:

क्या हो अगर Waymo कार किसी व्यस्त चौराहे पर फंस जाए और Philippines में इंटरनेट कनेक्शन धीमा हो जाए? कार बीच सड़क पर खड़ी रहेगी, जिससे ट्रैफिक जाम होगा और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाएगी। सैन फ्रांसिस्को में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जहां रोबोटैक्सियों ने एम्बुलेंस का रास्ता रोका है या फायर ब्रिगेड के काम में बाधा डाली है।

परिस्थिति की समझ (Contextual Awareness):

एक स्थानीय ड्राइवर वहां के ट्रैफिक नियमों, लोगों के व्यवहार और सड़क की स्थिति को बेहतर समझता है। क्या Philippines में बैठा एक Remote Worker, जिसने शायद कभी सैन फ्रांसिस्को की सड़कों पर गाड़ी नहीं चलाई, वहां की जटिल ट्रैफिक स्थिति को स्क्रीन पर देखकर सही फैसला ले सकता है? कैमरे का 2D व्यू और वास्तविकता के 3D व्यू में अंतर होता है। यह Driverless Cars की सुरक्षा पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह है।

भाग 6: रिमोट वर्कर्स की जिंदगी और मानसिक दबाव (The Human Cost)

इस चमक-दमक वाली तकनीक के पीछे मानवीय लागत (Human Cost) क्या है? Waymo के लिए काम करने वाले इन Remote Workers की जिंदगी आसान नहीं है।

Driverless Cars

तनावपूर्ण काम:

कल्पना कीजिए कि आपके हाथ में हजारों मील दूर चल रही एक 2-टन की धातु की मशीन (कार) की जिम्मेदारी है। आपको पता है कि आपकी एक गलत सलाह से एक्सीडेंट हो सकता है। यह काम अत्यधिक मानसिक दबाव (High Stress) वाला होता है। वर्कर्स को लगातार कई स्क्रीन्स पर नजर रखनी पड़ती है।

गिग इकोनॉमी की समस्याएं:

अक्सर ऐसे काम थर्ड-पार्टी वेंडर्स (BPO कंपनियों) के माध्यम से कराए जाते हैं। इन वर्कर्स को Waymo या गूगल का सीधा कर्मचारी नहीं माना जाता। उन्हें कम वेतन मिलता है, नौकरी की सुरक्षा नहीं होती और न ही सिलिकॉन वैली वाली सुविधाएं मिलती हैं। आलोचकों का कहना है कि यह ‘डिजिटल स्वेटशॉप’ (Digital Sweatshop) जैसा है, जहाँ अमीर देशों की तकनीक को गरीब देशों के सस्ते श्रम के दम पर चलाया जा रहा है।

भाग 7: टेस्ला और क्रूज से तुलना (Waymo vs Competitors)

Waymo अकेला नहीं है जो चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उसका दृष्टिकोण दूसरों से अलग है।

  • Tesla (टेस्ला): टेस्ला का ‘फुल सेल्फ ड्राइविंग’ (FSD) मॉडल अलग है। वे रिमोट असिस्टेंस पर कम और अपने न्यूरल नेटवर्क पर ज्यादा भरोसा करते हैं। लेकिन टेस्ला में ड्राइवर सीट पर बैठा इंसान जिम्मेदार होता है। वेमो में कोई ड्राइवर नहीं होता, इसलिए Remote Workers की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
  • Cruise (क्रूज): जनरल मोटर्स (GM) की कंपनी क्रूज को २०२३-२४ में भारी संकट का सामना करना पड़ा था। यह बात सामने आई थी कि उनकी कारों को हर 4-5 मील पर मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती थी। एक दुर्घटना के बाद उनका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया था।

वेमो की रणनीति अधिक सतर्क है, लेकिन Philippines के वर्कर्स पर निर्भरता यह दिखाती है कि ‘लेवल 5 ऑटोनॉमी’ (पूर्णतः मानवीय हस्तक्षेप रहित ड्राइविंग) अभी भी एक दूर का सपना है।

भाग 8: अमेरिकी जॉब मार्केट पर असर

एक तरफ Waymo अमेरिका में टैक्सी ड्राइवरों और ट्रक ड्राइवरों की नौकरियों के लिए खतरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ, यह खुलासा बताता है कि ड्राइविंग की नौकरियां खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि वे ‘शिफ्ट’ हो रही हैं—स्टीयरिंग व्हील से कंप्यूटर स्क्रीन पर, और अमेरिका से Philippines में।

यह वैश्वीकरण (Globalization) का एक नया रूप है। पहले मैन्युफैक्चरिंग जॉब्स एशिया गए, फिर कॉल सेंटर जॉब्स, और अब ‘ड्राइविंग’ (अप्रत्यक्ष रूप से) भी आउटसोर्स हो रही है। अमेरिकी यूनियन्स और श्रमिक संगठन इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर Driverless Cars को इंसानों की ही जरूरत है, तो वे इंसान स्थानीय (Local) होने चाहिए ताकि सुरक्षा और जवाबदेही तय हो सके।

भाग 9: कानूनी और विनियामक चुनौतियां (Legal Hurdles)

Waymo का यह मॉडल कानूनी पेंच भी फंसा सकता है।

  • दायित्व (Liability): अगर Remote Worker की गलती से एक्सीडेंट होता है, तो जिम्मेदार कौन होगा? वेमो? फिलीपींस की वेंडर कंपनी? या वह वर्कर? अंतर्राष्ट्रीय कानून इस मामले में अभी स्पष्ट नहीं हैं।
  • डेटा प्राइवेसी: अमेरिकी सड़कों का लाइव वीडियो फीड दूसरे देश में भेजा जा रहा है। इसमें पैदल चलने वालों के चेहरे, गाड़ियों के नंबर प्लेट आदि शामिल हैं। क्या यह डेटा प्राइवेसी कानूनों का उल्लंघन नहीं है?

नियामकों (Regulators) को अब न केवल कार के सॉफ्टवेयर की जांच करनी होगी, बल्कि उस पूरे नेटवर्क की भी जांच करनी होगी जो Philippines तक फैला हुआ है।

भाग 10: भविष्य क्या है? (Future of Autonomous Driving)

आज ८ फरवरी २०२६ को जब हम वडोदरा में बैठकर यह विश्लेषण कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि तकनीक ने बहुत प्रगति की है, लेकिन ‘जादू’ अभी अधूरा है।

क्या Waymo हमेशा के लिए Remote Workers पर निर्भर रहेगा? शायद नहीं। कंपनी का कहना है कि यह एक ‘लर्निंग फेज’ है। वर्कर्स जो फैसले लेते हैं, वे डेटा के रूप में AI को फीड किए जाते हैं। यानी, आज इंसान जो कर रहा है, उसे देखकर मशीन सीख रही है ताकि कल उसे इंसान की जरूरत न पड़े।

लेकिन आलोचक कहते हैं कि दुनिया इतनी जटिल और अप्रत्याशित (Unpredictable) है कि ‘एज केसेस’ (Edge Cases – दुर्लभ परिस्थितियां) हमेशा आते रहेंगे। इसलिए, Human-in-the-Loop हमेशा बना रहेगा, चाहे वह Philippines में हो या कहीं और।

निष्कर्ष: तकनीक और इंसान का सह-अस्तित्व

अंत में, Waymo का यह खुलासा हमें तकनीक को देखने का एक नया नजरिया देता है। Driverless Cars का मतलब यह नहीं है कि इंसान की जरूरत खत्म हो गई है। इसका मतलब बस इतना है कि इंसान की भूमिका बदल गई है।

Philippines के रिमोट वर्कर्स इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि सबसे उन्नत AI के पीछे भी मानवीय बुद्धि और श्रम की आवश्यकता होती है। यह एक सहजीवी संबंध (Symbiotic Relationship) है।

हमें ‘ऑटोनॉमस’ शब्द पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय सवाल पूछने चाहिए। यह तकनीक शानदार है, सुविधाजनक है, लेकिन यह अभी भी ‘परफेक्ट’ नहीं है। जब अगली बार आप किसी Waymo कार को देखें, तो याद रखें कि उसकी ‘आंखें’ भले ही सेंसर हों, लेकिन उसका ‘सहारा’ सात समंदर पार बैठा एक इंसान हो सकता है।

अतिरिक्त विश्लेषण: केस स्टडी – एक ‘रिमोट ड्राइवर’ का दिन

(पाठकों को गहराई से समझाने के लिए एक काल्पनिक परिदृश्य)

मनीला, फिलीपींस में सुबह के 4 बज रहे हैं। 25 वर्षीय ‘मार्क’ (काल्पनिक नाम) अपनी शिफ्ट शुरू करता है। उसकी स्क्रीन पर अमेरिका के एरिजोना की दोपहर का दृश्य है। एक Waymo कार एक स्कूल ज़ोन के पास रुकी है। बच्चे सड़क पार कर रहे हैं, लेकिन क्रॉसिंग गार्ड का इशारा AI को समझ नहीं आ रहा।

कार की स्क्रीन पर “Waiting for assistance” फ़्लैश होता है। मार्क तुरंत स्थिति का आकलन करता है। वह देखता है कि गार्ड ने रुकने का इशारा किया है। वह सिस्टम में इनपुट डालता है – “Hold” (रुको)। 30 सेकंड बाद, गार्ड जाने का इशारा करता है। मार्क कार को निर्देश देता है – “Proceed with Caution” (सावधानी से आगे बढ़ो)।

कार चल पड़ती है। यात्री को लगता है कि कार ने खुद फैसला लिया। लेकिन असल में, यह फैसला मार्क का था। मार्क को इस एक फैसले के लिए कुछ सेंट्स (Cents) मिलेंगे, जबकि वेमो यात्री से पूरी किराया वसूलेगा। यह है Driverless Cars की छिपी हुई अर्थव्यवस्था।

यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे Remote Workers इस सिस्टम की रीढ़ हैं। बिना मार्क के, वह कार वहीं खड़ी रहती और ट्रैफिक जाम करती।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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