भारतीय क्रिकेट का इतिहास महान खिलाड़ियों और उनके द्वारा रचे गए ऐतिहासिक कीर्तिमानों से भरा पड़ा है। सुनील गावस्कर से लेकर कपिल देव और महेंद्र सिंह धोनी तक, भारत ने दुनिया को कई लीजेंड्स दिए हैं। लेकिन जब भी क्रिकेट की दुनिया में ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ (God of Cricket) और ‘किंग’ (King) की बात आती है, तो जेहन में सिर्फ दो ही नाम उभरते हैं – सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) और विराट कोहली (Virat Kohli)। इन दोनों दिग्गजों के बीच का रिश्ता सिर्फ एक सीनियर और जूनियर खिलाड़ी का नहीं है, बल्कि यह गुरु और शिष्य, एक आदर्श और उसके सबसे बड़े प्रशंसक का रिश्ता है।
हाल ही में एक बार फिर खेल जगत में भावनाओं का सैलाब तब उमड़ पड़ा, जब विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान और सार्वजनिक मंच से यह स्वीकार किया कि उनके क्रिकेट के आदर्श (Idol) सचिन की बराबरी करना किसी के लिए भी नामुमकिन है। आज के इस विस्तृत न्यूज़ ब्लॉग में हम 2026 के नवीनतम अपडेट्स, ऐतिहासिक विश्व कप के पल, और इन दोनों के बीच के उस अटूट रिश्ते की गहराई में जाएंगे, जो हर क्रिकेट प्रेमी के लिए एक मिसाल है।
The Recent Revelation: “I am a mess playing those shots”
फरवरी 2026 में, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के आगामी 19वें सीजन की शुरुआत से ठीक पहले, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) द्वारा एक इंटरव्यू वीडियो जारी किया गया। इस वीडियो में जब विराट कोहली से पूछा गया कि वह क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से कौन सी एक खूबी या शॉट चुराना चाहेंगे, तो किंग कोहली का जवाब ऐसा था जिसने एक बार फिर करोड़ों फैंस का दिल जीत लिया।
विराट कोहली ने पूरी विनम्रता के साथ कहा, “मैं सचिन पाजी का वह स्मूथ लैप शॉट (Lap Shot) लेना चाहूंगा। वह पहले ऐसे बल्लेबाज थे जिन्होंने स्पिनर्स के खिलाफ इतनी सटीकता से लैप शॉट खेलना शुरू किया था। उनका यह शॉट इतना सहज होता था कि ऐसा लगता ही नहीं था कि वह जल्दबाजी में हैं। जब मैं उन शॉट्स को खेलने की कोशिश करता हूं, तो मैं पूरी तरह से उलझ जाता हूं (I am a mess playing those shots)। इसलिए, हाँ, मैं वह स्मूथ लैप शॉट उनसे लेना चाहूंगा।”
इस छोटे से बयान में बहुत बड़ी बात छिपी है। आज विराट कोहली खुद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के शिखर पर बैठे हैं। उनके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन कवर ड्राइव (Cover Drive) और फ्लिक शॉट्स हैं, लेकिन फिर भी उनमें यह स्वीकार करने की विनम्रता है कि सचिन तेंदुलकर के तरकश के कुछ तीर ऐसे थे, जिन्हें वह आज तक नहीं सीख पाए। इस इंटरव्यू के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने जमकर प्यार लुटाया और हर जगह यही चर्चा होने लगी कि कैसे इतने बड़े मुकाम पर पहुंचने के बावजूद विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान।
Chasing the Benchmark: 28,000 Runs and the Second Spot Globally
क्रिकेट के आंकड़ों की बात करें तो विराट कोहली अब सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड्स के सबसे करीब खड़े एकमात्र बल्लेबाज हैं। साल 2026 की शुरुआत ही विराट कोहली के लिए एक और ऐतिहासिक मील के पत्थर के साथ हुई। जनवरी 2026 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ वड़ोदरा (Vadodara) में खेले गए पहले वनडे इंटरनेशनल (ODI) मैच में विराट कोहली ने एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।
इस मैच में 41 रन बनाते ही विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (टेस्ट, वनडे और टी-20 मिलाकर) के इतिहास में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने श्रीलंका के महान बल्लेबाज कुमार संगकारा (Kumar Sangakkara) के 28,016 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, विराट कोहली ने सबसे तेज 28,000 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने का रिकॉर्ड भी कायम किया। उन्होंने यह कारनामा महज 624 पारियों में कर दिखाया, जबकि सचिन तेंदुलकर को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 644 पारियां लगी थीं।
अब वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों की सूची (Most Runs in International Cricket) कुछ इस प्रकार है:
- सचिन तेंदुलकर (भारत) – 34,357 रन
- विराट कोहली (भारत) – 28,017+ रन
- कुमार संगकारा (श्रीलंका) – 28,016 रन
- रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया) – 27,483 रन
भले ही विराट कोहली ने संगकारा और पोंटिंग जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन जब भी उनसे पूछा जाता है कि क्या वह सचिन के 34,357 रनों के पहाड़ जैसे रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे, तो कोहली हमेशा बेहद सम्मानजनक रवैया अपनाते हैं। उनका मानना है कि सचिन जिस दौर में खेलते थे और जिस तरह से उन्होंने 24 सालों तक भारतीय क्रिकेट का भार उठाया, उसकी कोई तुलना नहीं हो सकती।

The Historic 50th ODI Century: A Bow to the ‘God of Cricket’
अगर हम विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर के रिश्ते के सबसे भावुक और ऐतिहासिक पल की बात करें, तो हमें थोड़ा पीछे जाकर नवंबर 2023 के वनडे विश्व कप (ICC ODI World Cup 2023) के सेमीफाइनल मैच को याद करना होगा। यह मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम (Wankhede Stadium) में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ खेला जा रहा था। यह वही मैदान है जहां 2011 में भारत ने विश्व कप उठाया था और यह वही मैदान है जहां सचिन तेंदुलकर ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था।
इस बड़े और दबाव वाले मैच में विराट कोहली ने 117 रनों की शानदार पारी खेली। जैसे ही उन्होंने लोकी फर्ग्यूसन की गेंद पर दो रन लेकर अपना शतक पूरा किया, क्रिकेट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। यह विराट का 50वां वनडे शतक था। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के 49 वनडे शतकों के उस रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जिसके बारे में कभी कहा जाता था कि यह असंभव है।
लेकिन इस रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद कोहली का सेलिब्रेशन (Celebration) देखने लायक था। उन्होंने हवा में छलांग लगाई, अपना हेलमेट उतारा, और फिर वीआईपी स्टैंड्स (VIP Stands) की तरफ देखकर अपने घुटनों पर बैठ गए। उन्होंने अपना सिर झुकाकर ‘गॉड ऑफ क्रिकेट’ को सजदा किया। वीआईपी स्टैंड में खुद सचिन तेंदुलकर मौजूद थे और वह खड़े होकर तालियां बजा रहे थे।
जब पूरी दुनिया में यह तस्वीर लाइव ब्रॉडकास्ट हुई, तो हर क्रिकेट फैन की आंखें नम हो गईं। यह वह पल था जब शब्दों की कोई जरूरत नहीं थी। स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों और टीवी पर देख रहे करोड़ों दर्शकों ने देखा कि कैसे विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के अहंकार से कोसों दूर, विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान। पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ (Mohammad Kaif) ने भी इस पल की तारीफ करते हुए कहा था, “यह विराट कोहली के असली चरित्र को दर्शाता है। एक बड़ा खिलाड़ी होने के बावजूद, अपने गुरु को इस तरह सम्मान देना उनकी महानता का प्रतीक है।”
“He Carried the Burden of the Nation” – The 2011 World Cup Tribute
विराट और सचिन के बीच इस गहरे रिश्ते की नींव बहुत पहले ही पड़ चुकी थी। 2011 में जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वनडे विश्व कप का सूखा खत्म किया था, तब वह पल सचिन तेंदुलकर के लिए उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना सच होने जैसा था। यह सचिन का छठा विश्व कप था और अंततः उन्होंने ट्रॉफी उठा ली थी।
जीत के बाद, भारतीय टीम के युवा खिलाड़ियों ने सचिन तेंदुलकर को अपने कंधों पर उठा लिया और पूरे वानखेड़े स्टेडियम का ‘विक्ट्री लैप’ (Victory Lap) लगाया। सचिन को कंधों पर उठाने वाले उन युवा खिलाड़ियों में सबसे आगे 22 साल के विराट कोहली थे।
जब मैच के बाद एक इंटरव्यू में विराट कोहली से पूछा गया कि उन्होंने सचिन को कंधों पर क्यों उठाया, तो उनका जवाब क्रिकेट इतिहास के सबसे आइकॉनिक (Iconic) बयानों में से एक बन गया। कोहली ने कहा था:
“सचिन तेंदुलकर ने 21 सालों तक इस देश की उम्मीदों का भार अपने कंधों पर उठाया है, अब समय आ गया था कि हम उन्हें अपने कंधों पर उठाएं।”
यह बयान सिर्फ एक भावुक पंक्ति नहीं थी, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट में ‘बैटन पास’ (Passing the Baton) यानी जिम्मेदारी सौंपने का एक प्रतीकात्मक क्षण था। सचिन के बाद भारतीय बल्लेबाजी की धुरी कौन बनेगा, इसका जवाब उस 22 साल के लड़के ने दे दिया था, जिसने अगले डेढ़ दशक तक अपने गुरु के नक्शेकदम पर चलकर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
No Comparisons, Only Admiration: Virat’s Stance on the Debate
जब भी कोई खिलाड़ी बहुत अच्छा प्रदर्शन करता है, तो मीडिया और क्रिकेट पंडितों की पुरानी आदत होती है कि वे उसकी तुलना पुराने दिग्गजों से करने लगते हैं। विराट कोहली की कंसिस्टेंसी (Consistency) और चेज़ मास्टर (Chase Master) वाली छवि को देखते हुए, क्रिकेट जगत में ‘विराट बनाम सचिन’ (Virat vs Sachin) की बहस हमेशा से गर्म रही है।
लेकिन इस बहस को लेकर विराट कोहली का रुख हमेशा एकदम स्पष्ट और सख्त रहा है। 2017 में एक मशहूर टॉक शो ‘ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस’ (Breakfast With Champions) में जब उनसे इस तुलना के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने बेहद नाराजगी और स्पष्टता के साथ कहा था:
“मैं तुलनाओं में विश्वास नहीं करता। आप मेरी तुलना उस इंसान से कर रहे हैं जिसकी वजह से मैंने क्रिकेट खेलना और देखना शुरू किया। स्किल लेवल (Skill Level) के मामले में कोई मुकाबला ही नहीं है। वह अब तक के सबसे ‘कम्पलीट बैट्समैन’ (Complete Batsman) हैं। तुलना कैसे हो सकती है? मैंने हमेशा कहा है कि यह उनके साथ नाइंसाफी है। उन्होंने हमें जो कुछ दिया है, उसके बाद वह इस बात के हकदार नहीं हैं कि उनकी तुलना हम जैसे खिलाड़ियों से की जाए। हमारी पीढ़ी में ऐसा कोई नहीं है।”
विराट कोहली का यह स्पष्ट दृष्टिकोण यह साबित करता है कि उनके मन में सचिन के लिए जो जगह है, वह किसी भी रिकॉर्ड या आंकड़ों से बहुत ऊपर है। हर बार जब मीडिया दोनों के बीच लकीर खींचने की कोशिश करती है, तो अपनी विनम्रता के जरिए विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान यह संदेश देता है कि गुरु हमेशा गुरु ही रहता है।

The Differences in Eras: Apples and Oranges
भले ही विराट कोहली तुलना को खारिज करते हों, लेकिन खेल विश्लेषकों के अनुसार इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने युग (Era) में जो डोमिनेंस (Dominance) दिखाया है, वह अद्वितीय है।
सचिन तेंदुलकर का युग (The 90s and 2000s): सचिन ने उस दौर में क्रिकेट खेला जब नियम गेंदबाजों के पक्ष में अधिक झुके हुए थे। एक ही गेंद से पूरे 50 ओवर फेंके जाते थे, जिससे पारी के अंत में रिवर्स स्विंग (Reverse Swing) का सामना करना पड़ता था। वसीम अकरम, वकार यूनिस, ग्लेन मैकग्राथ, कर्टनी वॉल्श, शेन वॉर्न और मुथैया मुरलीधरन जैसे खूंखार गेंदबाज अपने चरम पर थे। उस समय टी-20 क्रिकेट का चलन नहीं था और 50 ओवरों के खेल में 250 का स्कोर भी विनिंग टोटल (Winning Total) माना जाता था। सचिन अक्सर 90 के दशक में भारतीय टीम के ‘वन-मैन आर्मी’ (One-Man Army) हुआ करते थे।
विराट कोहली का युग (The 2010s and 2020s): दूसरी ओर, विराट कोहली ने उस दौर में अपना दबदबा बनाया जब टी-20 क्रिकेट ने बल्लेबाजों की मानसिकता को पूरी तरह से बदल दिया था। वनडे क्रिकेट में दो नई गेंदों का इस्तेमाल शुरू हुआ, फील्डिंग के नियम बदले (पावरप्ले) और बल्ले अधिक मोटे और भारी हो गए। लेकिन विराट कोहली की महानता इस बात में है कि उन्होंने आधुनिक क्रिकेट की आक्रामकता को क्लासिक क्रिकेट की तकनीक के साथ मिलाया। रनों का पीछा करते हुए (Run Chases) जो दबाव झेलने की क्षमता विराट कोहली के पास है, वह शायद क्रिकेट इतिहास में किसी और के पास नहीं है।
दोनों अलग-अलग पीढ़ियों के प्रतीक हैं, और इसीलिए क्रिकेट के जानकार मानते हैं कि दोनों की तुलना करना ‘सेब और संतरे’ (Apples and Oranges) की तुलना करने जैसा है।
The Guru-Shishya Parampara in Modern Indian Cricket
भारतीय संस्कृति में ‘गुरु-शिष्य परंपरा’ का बहुत महत्व है। भारतीय क्रिकेट में यह परंपरा हमें सचिन और विराट के बीच साफ दिखाई देती है। जब विराट कोहली अपने करियर के शुरुआती दौर में संघर्ष कर रहे थे, खासकर 2014 के इंग्लैंड दौरे पर (जहां वह एंडरसन की गेंदों पर लगातार आउट हो रहे थे), तब उन्होंने स्वदेश लौटकर सबसे पहले सचिन तेंदुलकर से संपर्क किया था।
सचिन ने विराट के साथ मुंबई में समय बिताया, उनके स्टांस (Stance) को थोड़ा आगे (Forward Press) करने की सलाह दी और उनके आत्मविश्वास को वापस लौटाया। इसके बाद विराट ने उसी इंग्लैंड की धरती पर 2018 में रनों का अंबार लगा दिया। विराट हमेशा अपनी उस सफलता का श्रेय सचिन पाजी की दी गई उस अहम सलाह को देते हैं।
यह सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है। मैदान के बाहर भी, जब विराट कोहली ने अपनी अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन के दर्शन किए थे या जब भी उनके जीवन में कोई बड़ा निजी पल आया, सचिन तेंदुलकर का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा। इसी तरह, जब भी सचिन तेंदुलकर से जुड़े कोई महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, विराट अपनी उपस्थिति दर्ज कराना नहीं भूलते।
How Sachin Reacted: The Master’s Blessing
जिस तरह से विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान, ठीक उसी तरह सचिन तेंदुलकर ने भी कभी विराट को अपना प्यार और आशीर्वाद देने में कोई कंजूसी नहीं की।
जब विराट कोहली ने विश्व कप 2023 में सचिन का 49 वनडे शतकों का रिकॉर्ड तोड़ा था, तब सचिन ने सोशल मीडिया (X/Twitter) पर एक बेहद भावुक और लंबा पोस्ट लिखा था। सचिन ने लिखा: “जब मैं पहली बार तुमसे भारतीय ड्रेसिंग रूम में मिला था, तो टीम के अन्य खिलाड़ियों ने मेरे पैर छूने को लेकर तुम्हारे साथ प्रैंक (मजाक) किया था। मैं उस दिन बहुत हंसा था। लेकिन जल्द ही, तुमने अपने जुनून और अपने खेल से मेरे दिल को छू लिया। मैं बहुत खुश हूं कि वह युवा लड़का आज एक ‘विराट’ खिलाड़ी बन गया है।”
सचिन ने आगे लिखा था: “मुझे इस बात से ज्यादा खुशी नहीं हो सकती कि एक भारतीय ने मेरा रिकॉर्ड तोड़ा है। और वह भी विश्व कप के सेमीफाइनल जैसे बड़े मंच पर और मेरे घरेलू मैदान पर, यह मेरे लिए सोने पे सुहागा है।”
एक दशक पहले, जब सचिन तेंदुलकर से एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि उनका रिकॉर्ड कौन तोड़ सकता है, तो उन्होंने बेझिझक दो नाम लिए थे – रोहित शर्मा और विराट कोहली। यह सचिन की महानता है कि वह अपने ही रिकॉर्ड टूटने पर सबसे ज्यादा खुश होते हैं क्योंकि अंततः वह रिकॉर्ड भारत के ही पास रहता है।
The Mentality: Taking Inspiration from Other Legends
विराट कोहली की सफलता का एक बड़ा राज यह भी है कि वह हमेशा सीखते रहने की मानसिकता (Learning Mentality) रखते हैं। उसी हालिया 2026 के इंटरव्यू में, जहां उन्होंने सचिन के लैप शॉट की तारीफ की, विराट से कुछ अन्य हस्तियों के गुणों के बारे में भी पूछा गया।
- एमएस धोनी (MS Dhoni): विराट ने कहा कि वह अपने पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से ‘संतुष्टि और ठहराव’ (Contentment) सीखना चाहेंगे। धोनी जिस तरह से हार या जीत के बाद शांत रहते हैं, विराट उस खूबी के मुरीद हैं।
- क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo): विराट कोहली ने फुटबॉल के दिग्गज रोनाल्डो की ‘अनुशासन’ (Discipline) की तारीफ की। यह जगजाहिर है कि विराट ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस (Fitness) की जो क्रांति लाई है, उसके पीछे रोनाल्डो जैसी एथलेटिक मानसिकता का बड़ा हाथ है।
- शाहरुख खान (Shah Rukh Khan): बॉलीवुड के किंग खान के बारे में विराट ने कहा कि वह उनकी ‘विनम्रता’ (Humility) अपनाना चाहेंगे।
इन सब बातों से पता चलता है कि एक व्यक्ति के रूप में विराट कोहली कितने परिपक्व (Mature) हो चुके हैं। वह जानते हैं कि दुनिया में कोई भी ‘परफेक्ट’ नहीं होता और हर महान इंसान से कुछ न कुछ सीखा जा सकता है।
The Legacy Continues: Preparing for the 2027 ODI World Cup
विराट कोहली ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) और टेस्ट (Test) क्रिकेट के कुछ प्रारूपों से अपने वर्कलोड को मैनेज करने के लिए दूरी बना ली है, लेकिन वह अभी भी वनडे इंटरनेशनल (ODI) क्रिकेट में भारत की दीवार बने हुए हैं। 2026 की उनकी शानदार फॉर्म यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि उनकी निगाहें 2027 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले वनडे विश्व कप (2027 ODI World Cup) पर टिकी हैं।
आज भारतीय टीम ‘नो विराट कोहली, नो पार्टी’ (No Virat Kohli, no party) की थ्योरी को अच्छी तरह समझती है। जब भी लक्ष्य का पीछा करने (Run Chase) की बात आती है, खासकर दबाव वाले बड़े मैचों में, तो आज भी पूरे देश की उम्मीदें विराट कोहली के इर्द-गिर्द ही घूमती हैं – ठीक वैसे ही जैसे 90 के दशक में सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही टीवी सेट बंद कर दिए जाते थे।
A Bond Transcending Generations
अंत में, हम यही कह सकते हैं कि क्रिकेट के आंकड़े, रन, शतक और रिकॉर्ड्स तो समय के साथ बनते और टूटते रहेंगे। कल को शायद कोई और युवा खिलाड़ी आए जो विराट कोहली के 50 वनडे शतकों का रिकॉर्ड भी तोड़ दे। लेकिन खेल भावना, पारस्परिक सम्मान और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की जो मिसाल सचिन और विराट ने पेश की है, वह क्रिकेट के इतिहास में हमेशा अमर रहेगी।
दुनिया को यह याद नहीं रहेगा कि 15 नवंबर 2023 को भारत ने कितने रनों से मैच जीता था, बल्कि लोगों को यह याद रहेगा कि उस दिन विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर के लिए जताया सम्मान और पूरी दुनिया के सामने अपने घुटनों पर बैठकर यह साबित कर दिया कि कोई भी रिकॉर्ड इंसान के चरित्र से बड़ा नहीं होता।
सचिन तेंदुलकर ने भारतीय क्रिकेट को अपने सपनों के पंख दिए, और विराट कोहली ने उन पंखों को एक नई उड़ान दी। दोनों ने अलग-अलग युगों में देशवासियों को मुस्कुराने के, जश्न मनाने के और खुद पर गर्व करने के अनगिनत मौके दिए हैं। भारतीय क्रिकेट फैंस के रूप में हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमने ‘गॉड’ को खेलते हुए देखा और अब ‘किंग’ को उनके नक्शेकदम पर चलते हुए देख रहे हैं।
