साउथ फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति के गलियारों से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। थलपति विजय की बहुचर्चित फिल्म ‘जना नायकन’ (Jana Nayakan), जो अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी विवादों में घिरी हुई है, उसे लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है।
मद्रास हाईकोर्ट में फिल्म की पैरवी कर रहे वकील कोई और नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के दिग्गज कमल हासन के भतीजे हैं। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैन्स के बीच हलचल तेज हो गई है।
विजय की ‘जना नायकन’ का कानूनी दंगल: कमल हासन के भतीजे कोर्ट में बने ढाल
थलपति विजय, जिन्होंने हाल ही में अपनी राजनीतिक पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) लॉन्च की है, उनकी फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर तमिलनाडु में भारी विवाद चल रहा है। फिल्म पर आरोप है कि इसके कुछ दृश्य और संवाद मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हैं, जिसके चलते सेंसर बोर्ड और कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है।

कौन हैं वो वकील जो लड़ रहे हैं विजय का केस?
मद्रास हाईकोर्ट में फिल्म ‘जना नायकन’ के पक्ष में दलीलें पेश कर रहे मशहूर वकील का नाम सी. अरिवमणी (C. Arivumani) है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अरिवमणी रिश्ते में कमल हासन के भतीजे लगते हैं। वे कमल हासन के बड़े भाई चारुहासन के परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
केस की मुख्य बातें और विवाद की वजह
- राजनीतिक एजेंडा का आरोप: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म विजय की राजनीतिक पारी को प्रमोट करने के लिए बनाई गई है और इसमें कुछ भड़काऊ कंटेंट है।
- सेंसर बोर्ड का रुख: फिल्म को सर्टिफिकेट देने में हो रही देरी के खिलाफ विजय की प्रोडक्शन टीम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
- कमल हासन का कनेक्शन: चूँकि कमल हासन खुद भी राजनीति में सक्रिय हैं (मक्कल निधि मय्यम), उनके परिवार के सदस्य का विजय की फिल्म के लिए लड़ना एक ‘पावरफुल’ संदेश दे रहा है।
फिल्म ‘जना नायकन’ में क्या है खास?
विजय की यह फिल्म उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जा रही है क्योंकि:
- राजनीतिक थ्रिलर: फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जो आम जनता का नायक (Jana Nayakan) बनकर व्यवस्था को बदलता है।
- संन्यास से पहले की फिल्म: विजय ने घोषणा की है कि वे राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने के लिए फिल्मों से संन्यास ले लेंगे, ऐसे में यह उनकी आखिरी कुछ फिल्मों में से एक है।
- भारी भरकम बजट: फिल्म को बहुत बड़े स्तर पर फिल्माया गया है और इसके एक्शन सीन्स की तुलना हॉलीवुड से की जा रही है।
फैन्स के बीच ‘विजय-कमल’ बॉन्ड की चर्चा
सोशल मीडिया पर फैन्स इस बात को लेकर काफी उत्साहित हैं कि कमल हासन के परिवार का सदस्य विजय की मदद कर रहा है। फैन्स इसे ‘दो दिग्गजों का मिलन’ बता रहे हैं। ट्विटर (X) पर लोग लिख रहे हैं कि जब कमल हासन की ‘विश्वरूपम’ संकट में थी, तब पूरी इंडस्ट्री साथ खड़ी थी, और अब विजय की फिल्म के लिए हासन परिवार का आगे आना एक अच्छी मिसाल है।
कोर्ट का फैसला कब आएगा?
मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2026 की तारीख तय की है। वकील अरिवमणी ने कोर्ट में दलील दी है कि “अभिव्यक्ति की आजादी” के तहत फिल्म को रिलीज होने से नहीं रोका जा सकता।
‘जना नायकन’ केवल एक फिल्म नहीं रह गई है, बल्कि यह विजय के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा माध्यम बन गई है। कमल हासन के भतीजे का इस केस से जुड़ना इसे और भी हाई-प्रोफाइल बना देता है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट से विजय को राहत मिलती है या नहीं।

जना नायकन’ विवाद: कोर्ट रूम ड्रामे के पीछे की अनकही कहानियां
1. वकील सी. अरिवमणी का ट्रैक रिकॉर्ड और हासन विरासत
वकील सी. अरिवमणी केवल कमल हासन के रिश्तेदार होने के कारण चर्चा में नहीं हैं, बल्कि वे मद्रास हाईकोर्ट के एक मंझे हुए वकील माने जाते हैं।
- संविधान के जानकार: अरिवमणी को ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ (Article 19) से जुड़े मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। इससे पहले भी उन्होंने कई फिल्मों के सेंसरशिप विवादों को सुलझाया है।
- पारिवारिक प्रभाव: हासन परिवार (चारुहासन और कमल हासन) हमेशा से ही तार्किक और निडर विचारों के लिए जाना जाता रहा है। अरिवमणी की कोर्ट में दी गई दलीलें भी इसी ‘रैशनलिस्ट’ विचारधारा की झलक पेश करती हैं।
2. क्या यह ‘विजय-कमल’ के नए राजनीतिक गठबंधन का संकेत है?
राजनीतिक पंडित इस कानूनी मदद को केवल एक प्रोफेशनल केस के रूप में नहीं देख रहे हैं।
- परदे के पीछे की राजनीति: कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम (MNM) और विजय की पार्टी TVK दोनों ही तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति में तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रही हैं।
- मदद का हाथ: फैन्स का मानना है कि कमल हासन ने अपने परिवार के सबसे भरोसेमंद वकील को विजय की मदद के लिए भेजकर एक ‘मौन समर्थन’ (Silent Support) दिया है। क्या 2026 के विधानसभा चुनावों में ये दोनों दिग्गज साथ दिखेंगे? यह सवाल अब गलियारों में गूंज रहा है।
3. ‘जना नायकन’ के वो विवादित सीन जो कोर्ट तक पहुंचे
ब्लॉग के इस हिस्से में हम उन दृश्यों की बात करेंगे जिन पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई गई है:
- फ्रीबीज (Freebies) पर कटाक्ष: फिल्म के एक सीन में विजय को मुफ्त उपहार बांटने वाली राजनीति की आलोचना करते दिखाया गया है। सत्ताधारी दलों का मानना है कि यह सीधे तौर पर उनकी योजनाओं पर निशाना है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण: फिल्म में एक लंबा मोनोलॉग (भाषण) है जिसमें विजय सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत के लिए सिस्टम को जिम्मेदार ठहराते हैं।
- सेंसर बोर्ड की कैंची: सूत्रों के अनुसार, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 15 से ज्यादा कट्स लगाने का सुझाव दिया था, जिसे विजय और उनकी लीगल टीम ने मानने से इनकार कर दिया है।
4. सोशल मीडिया पर #JusticeForJanaNayakan का ट्रेंड
विजय के फैन्स ने इस कानूनी लड़ाई को सोशल मीडिया पर एक जंग की तरह लिया है:
- डिजिटल प्रोटेस्ट: पिछले 48 घंटों में ट्विटर (X) पर लाखों ट्वीट किए गए हैं। फैन्स का कहना है कि सरकार विजय की लोकप्रियता से डरी हुई है, इसलिए फिल्म को रोकने की कोशिश की जा रही है।
- इन्फोग्राफिक्स और वीडियो: फैन्स वकील अरिवमणी और विजय की तस्वीरों के साथ वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिससे इस फिल्म को लेकर एक जबरदस्त ‘सिम्पैथी वेव’ (Sympathy Wave) पैदा हो गई है।
5. बॉक्स ऑफिस पर ‘विवाद’ का फायदा
इतिहास गवाह है कि जब-जब विजय की फिल्मों पर बैन लगाने की कोशिश हुई है, फिल्म ने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है।
- ‘मर्सल’ और ‘सरकार’ की याद: ‘मर्सल’ के समय भी जीएसटी वाले सीन पर विवाद हुआ था, जिसके बाद फिल्म ब्लॉकबस्टर रही थी।
- प्रेडिक्शन: ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि इस कानूनी विवाद के कारण ‘जना नायकन’ की एडवांस बुकिंग 2026 की अब तक की सबसे बड़ी बुकिंग साबित हो सकती है। विवाद ने फिल्म को मुफ्त की पब्लिसिटी दिला दी है।
6. मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी और भविष्य
पिछले सुनवाई के दौरान जज ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी— “सिनेमा एक कला है, और लोकतंत्र में कला का गला नहीं घोंटा जा सकता।” * अरिवमणी ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि अगर फिल्म को रोका गया, तो यह प्रोडक्शन हाउस को होने वाले करोड़ों के नुकसान के साथ-साथ दर्शकों के अधिकारों का भी हनन होगा।
