Vibrant Gujarat Summit Business

गांधीनगर में चल रहे Vibrant Gujarat Global Summit 2026 के मंच से आज एक ऐसी खबर आई है जो न केवल गुजरात बल्कि पूरे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। भारत का सबसे बड़ा सरकारी बंदरगाह (Major Port), Deendayal Port Authority (DPA), Kandla, अब सिर्फ कार्गो हैंडलिंग तक सीमित नहीं रहेगा।

DPA के चेयरमैन Sushil Kumar Singh (सुशील कुमार सिंह) ने आज समिट के दौरान एक विज़नरी रोडमैप पेश किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांडला पोर्ट का अगला चरण Sustainability (स्थिरता/हरित ऊर्जा) और Shipbuilding (जहाज निर्माण) पर केंद्रित होगा।

चेयरमैन ने घोषणा की है कि DPA ने ग्रीन हाइड्रोजन हब और शिपबिल्डिंग पार्क विकसित करने के लिए हज़ारों करोड़ रुपये के MoUs (Memorandum of Understanding) साइन किए हैं।

1. DPA चेयरमैन का बड़ा बयान: “हम सिर्फ पोर्ट नहीं, एनर्जी हब बन रहे हैं”

वाइब्रेंट गुजरात समिट के ‘मैरीटाइम सेक्टर’ सेशन में बोलते हुए, DPA चेयरमैन ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा:

“दीनदयाल पोर्ट (कांडला) पिछले डेढ़ दशक से कार्गो वॉल्यूम में नंबर 1 है, लेकिन अब हमें वॉल्यूम से आगे बढ़कर वैल्यू की तरफ देखना है। हमारा विज़न 2047 तक कांडला को एशिया का प्रमुख Green Hydrogen Hub और Smart Industrial Port City बनाना है। हम सस्टेनेबिलिटी और शिपबिल्डिंग के जरिए भारत की ब्लू इकोनॉमी को नई रफ्तार देंगे।”

प्रमुख घोषणाएं (Key Announcements):

  1. Green Hydrogen Export: कांडला से ग्रीन अमोनिया और हाइड्रोजन के निर्यात के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
  2. Mega Shipbuilding Park: तुना टेकरा (Tuna Tekra) के पास एक विशाल शिपबिल्डिंग और रिपेयर फैसिलिटी बनाई जाएगी।
  3. Net Zero Target: पोर्ट को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए डीजल से चलने वाली क्रेन्स और टग्स (Tugs) को इलेक्ट्रिक या ग्रीन फ्यूल में बदला जाएगा।
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2. सस्टेनेबिलिटी पर जोर: कांडला बनेगा ‘ग्रीन पोर्ट’ (Green Port Initiative)

आज पूरी दुनिया Climate Change से लड़ रही है और शिपिंग इंडस्ट्री इसमें बड़ा योगदान देती है। DPA चेयरमैन ने Sustainability को अपनी प्राथमिकता बताया है।

A. ग्रीन हाइड्रोजन और अमोनिया हब

कच्छ (Kutch) के रण में सौर और पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएं हैं। वहां बनने वाली रिन्यूएबल एनर्जी से Green Hydrogen का उत्पादन होगा।

  • भूमिका: DPA इस ग्रीन हाइड्रोजन को स्टोर करने, बंकरिंग (जहाजों में ईंधन भरने) और निर्यात करने के लिए नोडल एजेंसी बनेगा।
  • MoU: रिलायंस, अडाणी और अन्य एनर्जी कंपनियों के साथ मिलकर DPA ने एक्सपोर्ट टर्मिनल्स बनाने के लिए करार किए हैं। इसका मतलब है कि भविष्य में यूरोप और जापान को ग्रीन एनर्जी कांडला से भेजी जाएगी।

B. हरित सागर गाइडलाइन्स (Harit Sagar Guidelines)

चेयरमैन ने बताया कि पोर्ट भारत सरकार के ‘हरित सागर’ विजन का पालन कर रहा है।

  • पोर्ट परिसर में 100% रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग।
  • Green Tugs: जहाजों को धक्का देने वाले छोटे टग-बोट्स अब हाइब्रिड या बैटरी से चलेंगे।
  • ड्रेजिंग से निकलने वाली मिट्टी का पुनर्चक्रण (Recycling)।

3. शिपबिल्डिंग और रिपेयर: भारत की नई छलांग (Shipbuilding Focus)

यह इस समिट की सबसे बड़ी खबर है। अभी तक भारत अपनी शिपिंग जरूरतों के लिए चीन, दक्षिण कोरिया या जापान पर निर्भर है। रिपेयरिंग के लिए हमारे जहाज कोलंबो या दुबई जाते हैं।

DPA का मास्टरप्लान: कांडला के पास Tuna Tekra और आसपास के क्षेत्रों में विशाल भूमि उपलब्ध है। DPA चेयरमैन ने यहां एक Mega Shipbuilding & Repair Cluster बनाने की योजना पेश की है।

  • आत्मनिर्भरता: भारत में बने जहाज (Made in India Ships) अब वैश्विक समुद्र में तैरेंगे।
  • विदेशी मुद्रा की बचत: भारतीय जहाजों की रिपेयरिंग भारत में ही होगी, जिससे करोड़ों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा।
  • रोजगार: शिपबिल्डिंग एक ‘लेबर इंटेंसिव’ (Labor Intensive) उद्योग है। एक जहाज बनाने में वेल्डर्स, फिटर, इलेक्ट्रिशियन और इंजीनियरों की फौज लगती है। इससे गांधीधाम, अंजार और भुज के हजारों युवाओं को नौकरियां मिलेंगी।

4. कांडला की रणनीतिक स्थिति (Strategic Importance)

आखिर DPA कांडला को ही क्यों चुना गया? इसके पीछे ठोस भौगोलिक और आर्थिक कारण हैं।

  1. लोकेशन: कांडला पोर्ट मध्य पूर्व (Middle East) और यूरोप के सबसे करीब का बड़ा भारतीय बंदरगाह है।
  2. जगह की उपलब्धता: मुंबई या चेन्नई पोर्ट के पास विस्तार के लिए जमीन नहीं है, जबकि DPA के पास कच्छ में हजारों एकड़ जमीन है।
  3. कनेक्टिविटी: कांडला पोर्ट अब Dedicated Freight Corridor (DFC) और नए एक्सप्रेसवे से जुड़ चुका है, जिससे दिल्ली और उत्तर भारत तक सामान पहुंचाना बेहद आसान और सस्ता है।

5. आर्थिक प्रभाव: गुजरात और भारत के लिए क्या मायने हैं?

DPA चेयरमैन के इस बयान के गहरे आर्थिक मायने हैं। यह सिर्फ़ एक पोर्ट का विकास नहीं, बल्कि पूरे रीजन का कायाकल्प है।

Impact Analysis:

  • निवेश: समिट में साइन हुए MoUs से कांडला क्षेत्र में लगभग ₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ (अनुमानित) का निवेश आ सकता है।
  • SME सेक्टर: शिपबिल्डिंग पार्क बनने से छोटी कंपनियों (MSMEs) को बड़ा फायदा होगा जो नट-बोल्ट, स्टील प्लेट्स, पेंट और इलेक्ट्रिकल सामान बनाती हैं।
  • जीडीपी: यह प्रोजेक्ट गुजरात की GSDP और भारत की GDP में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

6. लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट पोर्ट सिटी (Smart Port City)

चेयरमैन ने Smart Industrial Port City (SIPC) प्रोजेक्ट पर भी अपडेट दिया। कांडला और गांधीधाम को मिलाकर एक स्मार्ट सिटी बनाई जा रही है।

  • यहां लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग जोन और आवासीय परिसर होंगे।
  • पोर्ट का डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है ताकि कागज रहित (Paperless) व्यापार हो सके और कस्टम क्लियरेंस में समय कम लगे।

7. चुनौतियां: राह आसान नहीं है (Challenges Ahead)

हालांकि विजन शानदार है, लेकिन DPA चेयरमैन ने चुनौतियों को भी स्वीकार किया।

  1. ड्रेजिंग (Dredging): कांडला एक ज्वारीय (Tidal) पोर्ट है और यहां गाद (Silt) जमा होना एक बड़ी समस्या है। बड़े जहाजों को लाने के लिए चैनल को गहरा रखना पड़ता है, जो खर्चीला है।
  2. प्रतियोगिता: मुंद्रा पोर्ट (प्राइवेट) पास में ही है और कड़ी टक्कर देता है। DPA को अपनी दक्षता (Efficiency) बढ़ानी होगी।
  3. कुशल कामगार: शिपबिल्डिंग के लिए हाई-स्किल लेबर की जरूरत होगी, जिसके लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलने पड़ेंगे।

8. मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और 2047

DPA का यह कायाकल्प पीएम मोदी के Maritime India Vision 2030 के अनुरूप है।

  • विजन है कि भारतीय पोर्ट्स को ‘लैंडलॉर्ड मॉडल’ (Landlord Model) पर चलाया जाए, जहां पोर्ट अथॉरिटी जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर दे और प्राइवेट प्लेयर्स ऑपरेशन संभालें।
  • DPA ने हाल ही में अपने कई टर्मिनल्स पीपीपी (PPP) मोड पर प्राइवेट कंपनियों को दिए हैं, जिससे एफिशिएंसी बढ़ी है।

9. निवेशकों का भरोसा: वाइब्रेंट गुजरात की सफलता

वाइब्रेंट गुजरात समिट 2026 में निवेशकों ने DPA के स्टॉल पर भारी रुचि दिखाई है।

  • DP World: लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी ने नए कंटेनर टर्मिनल में रुचि दिखाई है।
  • Larsen & Toubro (L&T): डिफेंस शिपबिल्डिंग और ग्रीन हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग के लिए चर्चा चल रही है।

कांडला 2.0 की शुरुआत

DPA Kandla Chairman Statement ने यह साफ कर दिया है कि दीनदयाल पोर्ट अब अपने पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर ‘कांडला 2.0’ बनने की राह पर है।

सस्टेनेबिलिटी और शिपबिल्डिंग पर जोर देकर DPA ने भविष्य की जरूरतों को पहचान लिया है। यह न केवल कच्छ के विकास की नई इबारत लिखेगा, बल्कि भारत को एक वैश्विक समुद्री शक्ति (Maritime Superpower) बनाने में धुरी का काम करेगा।

आने वाले 5 साल कांडला के लिए सुनहरे साबित होने वाले हैं।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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