US Security Guarantee

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे महायुद्ध को अब लंबा समय बीत चुका है। बारूद की गंध और मिसाइलों के शोर के बीच, पूर्वी यूरोप की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आने वाला है, जो न केवल इस युद्ध की दिशा बदल सकता है बल्कि आने वाले दशकों के लिए वैश्विक सुरक्षा के समीकरण भी तय कर सकता है। कीव से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा दावा किया है जिसने मास्को से लेकर वाशिंगटन तक हलचल तेज कर दी है।

जेलेंस्की ने घोषणा की है कि यूक्रेन-अमेरिका सुरक्षा समझौता (Ukraine-US Security Agreement) का ड्राफ्ट पूरी तरह से तैयार है। उनके शब्दों में, “टेक्स्ट 100% तैयार है।” यह केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह यूक्रेन के अस्तित्व और भविष्य के लिए अमेरिका द्वारा दी जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा गारंटी है।

क्या है इस समझौते में? क्यों इसे ‘ऐतिहासिक’ माना जा रहा है? और क्या यह समझौता यूक्रेन को नाटो (NATO) की सदस्यता के करीब ले जाएगा या रूस के गुस्से को और भड़काएगा? आज के इस विस्तृत ब्लॉग में, हम इस समझौते की एक-एक परत खोलेंगे और समझेंगे कि कैसे यह डील युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीतिक गलियारों तक सब कुछ बदलने की क्षमता रखती है।

जेलेंस्की का बड़ा ऐलान: “हम फिनिश लाइन पर हैं”

रविवार की रात अपने नियमित वीडियो संबोधन में, राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था। पिछले कुछ हफ्तों में, जहां रूसी सेना खार्किव (Kharkiv) क्षेत्र में आक्रामक हो रही थी, वहीं इस कूटनीतिक जीत ने कीव के मनोबल को बढ़ा दिया है।

जेलेंस्की ने कहा, “हमारी टीम और अमेरिकी टीम ने समझौते के टेक्स्ट पर काम पूरा कर लिया है। हम कह सकते हैं कि यह 100% तैयार है। यह एक ऐसा समझौता होगा जो वास्तव में मजबूत है और यूक्रेन की सुरक्षा को लंबे समय तक सुनिश्चित करेगा।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया की निगाहें आगामी शांति शिखर सम्मेलन और G7 की बैठक पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और जेलेंस्की जल्द ही एक औपचारिक समारोह में इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • समझौता पूरी तरह से तैयार है।
  • यह दीर्घकालिक सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है।
  • हथियारों की आपूर्ति, खुफिया जानकारी साझा करना और रक्षा उद्योग का विकास इसमें शामिल है।
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क्या है यह ‘सिक्योरिटी एग्रीमेंट’? (Decoding the Deal)

आम पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह कोई सामान्य संधि नहीं है। इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। विनियस (Vilnius) में हुए नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान, G7 देशों ने यूक्रेन को द्विपक्षीय सुरक्षा गारंटी देने का वादा किया था। ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस पहले ही ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। अब बारी सुपरपावर अमेरिका की है।

इस यूक्रेन-अमेरिका सुरक्षा समझौते के तहत निम्नलिखित प्रावधान होने की संभावना है:

1. हथियारों की निरंतर आपूर्ति

यह समझौता सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका, यूक्रेन को भविष्य में भी आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और रक्षा उपकरण देता रहेगा। यह केवल वर्तमान युद्ध के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण को रोकने (Deterrence) के लिए होगा।

2. खुफिया जानकारी साझा करना (Intelligence Sharing)

आधुनिक युद्ध केवल बंदूकों से नहीं, बल्कि सटीक जानकारी से लड़े जाते हैं। अमेरिका अपनी अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजरी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस डेटा यूक्रेन के साथ साझा करना जारी रखेगा, जो युद्ध के मैदान में गेम-चेंजर साबित हुआ है।

3. संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण

समझौते में यूक्रेनी सैनिकों को अमेरिकी मानकों के अनुसार प्रशिक्षण देने का प्रावधान होगा। इसमें एफ-16 (F-16) फाइटर जेट्स की ट्रेनिंग से लेकर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम का संचालन शामिल है।

4. रक्षा उद्योग में सहयोग

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका, यूक्रेन को अपना खुद का रक्षा उद्योग (Defense Industry) खड़ा करने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य यूक्रेन को हथियारों के लिए आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वह हमेशा पश्चिमी मदद पर निर्भर न रहे।

नाटो (NATO) सदस्यता बनाम सुरक्षा गारंटी: अंतर समझिए

बहुत से लोग इस समझौते को नाटो सदस्यता समझ रहे हैं, लेकिन यह उससे अलग है।

  • NATO का आर्टिकल 5: नाटो का सबसे महत्वपूर्ण नियम ‘आर्टिकल 5’ है, जो कहता है कि एक सदस्य पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा। यानी अगर यूक्रेन नाटो में होता, तो अमेरिका को अपनी सेना रूस से लड़ने के लिए भेजनी पड़ती।
  • सुरक्षा समझौता (Security Agreement): यह समझौता अमेरिका को अपनी सेना भेजने के लिए बाध्य नहीं करता। इसके बजाय, यह “इजराइल मॉडल” (Israel Model) पर आधारित है।

क्या है इजराइल मॉडल? जैसे अमेरिका, इजराइल को नाटो में शामिल किए बिना उसे भारी मात्रा में सैन्य सहायता और सुरक्षा गारंटी देता है, ठीक वैसे ही अब यूक्रेन के साथ किया जाएगा। इसका मतलब है—अमेरिकी बूट्स (सैनिक) जमीन पर नहीं होंगे, लेकिन अमेरिकी हथियार और तकनीक भरपूर मात्रा में होगी।

यह समझौता यूक्रेन के लिए “नाटो की सदस्यता तक का पुल” (Bridge to NATO membership) माना जा रहा है। जब तक यूक्रेन नाटो का पूर्ण सदस्य नहीं बन जाता, तब तक यह समझौता उसकी सुरक्षा ढाल बनेगा।

समय का महत्व: अभी क्यों? (Why Now?)

राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ है। यह समझौता ऐसे समय में हो रहा है जब इसके कई रणनीतिक मायने हैं।

1. खार्किव में रूसी आक्रामकता

रूस ने हाल ही में यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव की ओर एक नया मोर्चा खोला है। यूक्रेनी सेना गोला-बारूद की कमी से जूझ रही थी। ऐसे समय में, यूक्रेन को US की बड़ी सुरक्षा गारंटी मिलने की खबर सैनिकों और नागरिकों के मनोबल को ऊंचा करने के लिए संजीवनी का काम करेगी।

2. अमेरिकी चुनाव और ‘ट्रंप फैक्टर’

अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की वापसी की संभावना ने कीव और यूरोपीय राजधानियों में चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने पहले कहा है कि वह यूक्रेन की सहायता रोक सकते हैं। बाइडन प्रशासन चाहता है कि चुनाव से पहले ही यूक्रेन के साथ एक ऐसा ठोस समझौता (Institutionalize support) कर लिया जाए जिसे भविष्य में आसानी से पलटा न जा सके। यह समझौता यूक्रेन की मदद को “ट्रंप-प्रूफ” (Trump-proof) बनाने की एक कोशिश भी हो सकती है।

3. शांति शिखर सम्मेलन

स्विट्जरलैंड में जल्द ही यूक्रेन पर एक वैश्विक शांति शिखर सम्मेलन होने वाला है। इस सम्मेलन से पहले अमेरिका के साथ सुरक्षा समझौता जेलेंस्की की कूटनीतिक स्थिति को मजबूत करेगा और दुनिया को संदेश देगा कि पश्चिम अभी भी यूक्रेन के साथ खड़ा है।

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President Donald Trump and Ukraine’s President Volodymyr Zelenskyy shake hands at the start of a joint news conference following a meeting at Trump’s Mar-a-Lago club, Sunday, Dec. 28, 2025, in Palm Beach, Fla. (AP Photo/Alex Brandon)

रूस की प्रतिक्रिया: मास्को में खलबली

क्रेमलिन (Kremlin) इस समझौते को लेकर पहले से ही आक्रामक है। रूस का शुरू से यह कहना रहा है कि यूक्रेन का पश्चिमी देशों के साथ सैन्य गठबंधन उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बार-बार कहा है कि यूक्रेन को “तटस्थ” (Neutral) रहना चाहिए। लेकिन यह सुरक्षा समझौता यूक्रेन को सीधे अमेरिकी रक्षा तंत्र से जोड़ देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अपनी सैन्य आक्रामकता और बढ़ा सकता है। मास्को इसे “रेड लाइन” पार करना मान सकता है। रूस की कोशिश होगी कि वह इस समझौते के लागू होने से पहले युद्ध के मैदान में ज्यादा से ज्यादा इलाके कब्जा ले।

अमेरिकी राजनीति और कांग्रेस की भूमिका

हालांकि जेलेंस्की ने कहा है कि टेक्स्ट 100% तैयार है, लेकिन अमेरिका में किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते की राह आसान नहीं होती।

  • एग्जीक्यूटिव एग्रीमेंट (Executive Agreement): संभावना है कि यह एक कार्यकारी समझौता होगा, न कि कोई संधि (Treaty)। संधियों को अमेरिकी सीनेट (Senate) से दो-तिहाई बहुमत से पास कराना होता है, जो वर्तमान राजनीतिक माहौल में मुश्किल है।
  • बाध्यता: कार्यकारी समझौता वर्तमान राष्ट्रपति (बाइडन) के प्रशासन को तो बाध्य करता है, लेकिन भविष्य के राष्ट्रपति (यदि ट्रंप जीतते हैं) इसे रद्द कर सकते हैं। यही इस समझौते की सबसे बड़ी कमजोरी हो सकती है।

फिर भी, बाइडन प्रशासन की कोशिश होगी कि इसे कांग्रेस के दोनों दलों (Democrats and Republicans) का समर्थन मिले ताकि यह एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता बन सके।

युद्ध के मैदान पर प्रभाव (Impact on the Battlefield)

कागज पर हुए हस्ताक्षर युद्ध के मैदान पर क्या बदलाव लाएंगे?

  1. दीर्घकालिक योजना: अब तक यूक्रेन को “पैकेज-दर-पैकेज” मदद मिल रही थी। उन्हें नहीं पता होता था कि अगले महीने गोला-बारूद मिलेगा या नहीं। इस सुरक्षा गारंटी के बाद, यूक्रेनी जनरल 5-10 साल की रणनीति बना सकेंगे।
  2. आत्मविश्वास: जब एक सिपाही को पता होता है कि उसके पीछे दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति खड़ी है, तो उसका लड़ने का जज्बा दोगुना हो जाता है।
  3. रूस को संदेश: यह पुतिन के लिए स्पष्ट संदेश है कि पश्चिम “थक” नहीं रहा है। रूस की रणनीति यह थी कि वह लंबे युद्ध (War of Attrition) के जरिए पश्चिम को थका देगा, लेकिन यह समझौता बताता है कि अमेरिका लंबी पारी खेलने के लिए तैयार है।

अन्य देशों के साथ समझौते: एक वैश्विक नेटवर्क

अमेरिका अकेला नहीं है। यूक्रेन ने अपनी कूटनीति का जाल बहुत सोच-समझकर बुना है। पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने निम्नलिखित देशों के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा समझौते किए हैं:

  • ग्रेट ब्रिटेन
  • जर्मनी
  • फ्रांस
  • डेनमार्क
  • कनाडा
  • इटली

अब अमेरिका के जुड़ने से यह सुरक्षा चक्र पूरा हो जाएगा। यह G7 देशों द्वारा यूक्रेन के चारों ओर बनाया गया एक “सुरक्षा कवच” है।

इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय

यूक्रेन को US की बड़ी सुरक्षा गारंटी मिलना आधुनिक भू-राजनीति (Geopolitics) की एक बड़ी घटना है। यह शीत युद्ध के बाद यूरोप में सुरक्षा ढांचे का सबसे बड़ा पुनर्निर्माण है।

जेलेंस्की का यह दावा कि समझौता “100% तैयार” है, यह दर्शाता है कि कीव और वाशिंगटन के रिश्ते अब केवल दाता और प्राप्तकर्ता (Donor and Recipient) के नहीं, बल्कि रणनीतिक साझीदार (Strategic Partners) के बन चुके हैं।

हालांकि, चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। समझौते पर हस्ताक्षर होना एक बात है और उसे जमीन पर उतारना दूसरी। रूस के मिसाइल हमले, अमेरिकी राजनीति की उठापटक और यूक्रेन में भ्रष्टाचार की समस्याएं—ये सभी इस समझौते की परीक्षा लेंगे।

लेकिन फिलहाल के लिए, यह यूक्रेन के लिए एक बड़ी जीत है। यह उस देश के लिए उम्मीद की किरण है जो पिछले दो साल से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। आने वाले दिनों में जब बाइडन और जेलेंस्की एक मंच पर आकर उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे, तो वह केवल स्याही नहीं होगी, वह यूरोप के भविष्य की रूपरेखा होगी।

दुनिया की नजरें अब वाशिंगटन पर टिकी हैं—क्या यह समझौता वास्तव में शांति लाएगा, या यह युद्ध की आग को और भड़काएगा? समय ही बताएगा।

By Meera Shah

मीरा तेज खबरी (Tez Khabri) के साथ जुड़ी एक समाचार लेखिका हैं। वे सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, महिला संबंधित विषयों और जनहित से जुड़ी खबरों पर लेखन करती हैं। मीरा का उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सत्यापित, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाना है।

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