Indian Family Shooting in US

सपनों का देश अमेरिका, जहां हर साल लाखों भारतीय एक बेहतर भविष्य की तलाश में जाते हैं। चकाचौंध, डॉलर की कमाई और एक सुरक्षित जीवन का वादा यही वो तस्वीर है जो हम अक्सर देखते हैं। लेकिन कभी-कभी इस सुनहरी तस्वीर के पीछे गहरा अंधेरा छिपा होता है। जॉर्जिया के ग्विनेट काउंटी (Gwinnett County) में हुई यह घटना उसी अंधेरे का एक भयानक उदाहरण है।

शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 की सुबह, जब लोग अपने दिन की शुरुआत करने की तैयारी कर रहे थे, अटलांटा का एक परिवार पूरी तरह से खत्म हो चुका था। विजय कुमार ने अपनी पत्नी, 43 वर्षीय मीमू डोगरा, और तीन अन्य रिश्तेदारों—गौरव कुमार (33), निधि चंदर (37), और हरीश चंदर (38)—की गोली मारकर हत्या कर दी। सबसे दुखद पहलू यह है कि यह सब कुछ घर में मौजूद तीन मासूम बच्चों के सामने हुआ, जिन्होंने अपनी जान बचाने के लिए खुद को अलमारी में बंद कर लिया था।

घटना का पूरा विवरण: उस रात क्या हुआ?

पुलिस रिपोर्ट और स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह घटना रातों-रात नहीं घटी। इसकी शुरुआत अटलांटा में विजय कुमार और उनकी पत्नी मीमू डोगरा के घर पर हुई एक बहस से हुई थी। पति-पत्नी के बीच किस बात को लेकर झगड़ा शुरू हुआ, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह बहस इतनी बढ़ गई कि विजय कुमार ने अपनी पत्नी और बच्चों के साथ लॉरेंसविले (Lawrenceville) स्थित ब्रूक आईवी कोर्ट (Brook Ivy Court) जाने का फैसला किया। यह घर उनके रिश्तेदारों का था।

लॉरेंसविले का वो खूनी घर

ब्रूक आईवी कोर्ट स्थित उस घर में गौरव कुमार, निधि चंदर और हरीश चंदर रहते थे। जब विजय वहां पहुंचा, तो वहां भी बहस जारी रही या शायद और भड़क गई। पुलिस का मानना है कि विजय कुमार पूरी तरह से गुस्से में बेकाबू हो चुका था। उसके पास बंदूक थी, और उसने आव देखा न ताव, एक-एक करके चारों वयस्कों को गोलियों से भून दिया।

पड़ोसियों ने बताया कि उन्हें रात के करीब 2:30 बजे गोलियों की आवाजें सुनाई दीं, लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि अंदर इतना बड़ा नरसंहार हो रहा है।

Indian Family Shooting in US

बच्चों की सूझबूझ और 911 कॉल

इस पूरे हत्याकांड में सबसे दिल तोड़ने वाला हिस्सा बच्चों का है। घर में तीन बच्चे मौजूद थे, जिनकी उम्र 7, 10 और 12 साल बताई गई है। जब गोलियां चल रही थीं, तो ये बच्चे अपनी जान बचाने के लिए एक कमरे की अलमारी (Closet) में छिपे हुए थे। विजय कुमार के 12 वर्षीय बच्चे ने ही हिम्मत दिखाते हुए अलमारी के अंदर से 911 पर कॉल किया।

उस बच्चे की आवाज में कितना खौफ होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। पुलिस को फोन पर उसने बताया कि उसके पिता ने सबको गोली मार दी है। ग्विनेट काउंटी पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो उन्हें घर के अंदर चार शव खून से लथपथ मिले। बच्चे शारीरिक रूप से सुरक्षित थे, लेकिन मानसिक रूप से वे एक ऐसे सदमे में जा चुके थे जिससे उबरना शायद पूरी जिंदगी मुमकिन न हो।

आरोपी की गिरफ्तारी और आरोप

पुलिस के पहुंचने से पहले विजय कुमार वहां से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे घटनास्थल से थोड़ी ही दूरी पर गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई बंदूक भी बरामद कर ली गई है।

विजय कुमार पर अब जॉर्जिया के कानूनों के तहत बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं:

  • 4 मामले मैलिस मर्डर (Malice Murder): यानी इरादतन और द्वेषपूर्ण हत्या।
  • 4 मामले गुंडागर्दी और हत्या (Felony Murder): किसी अन्य गंभीर अपराध को अंजाम देते समय हुई हत्या।
  • 4 मामले एग्रेवेटेड असाल्ट (Aggravated Assault): जानलेवा हमला।
  • क्रुएलिटी टू चिल्ड्रन (Cruelty to Children): बच्चों के सामने हिंसा करने और उन्हें मानसिक आघात पहुंचाने के लिए।

जॉर्जिया में हत्या के लिए मौत की सजा या बिना पैरोल के आजीवन कारावास का प्रावधान है। विजय कुमार का भविष्य अब अंधकारमय है, लेकिन उसने अपने पीछे जो तबाही छोड़ी है, वह उससे कहीं ज्यादा भयानक है।

भारतीय प्रवासियों में घरेलू हिंसा: एक ‘साइलेंट पैंडेमिक’

यह घटना कोई अपवाद (Exception) नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में भारतीय और दक्षिण एशियाई परिवारों में घरेलू हिंसा और हत्या-आत्महत्या (Murder-Suicide) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि हुई है। 2026 की शुरुआत में ही यह घटना बताती है कि समस्या कितनी गहरी है।

साउथ एशियन सोअर (South Asian SOAR) और अन्य संगठनों के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में रहने वाले लगभग 48% दक्षिण एशियाई लोग किसी न किसी रूप में शारीरिक हिंसा का अनुभव करते हैं। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है क्योंकि हम अक्सर भारतीय समुदाय को ‘मॉडल माइनॉरिटी’ (Model Minority) के रूप में देखते हैं—पढ़े-लिखे, सफल और शांतिप्रिय। लेकिन बंद दरवाजों के पीछे की कहानी अक्सर कुछ और होती है।

1. “लोग क्या कहेंगे” का दबाव

भारतीय संस्कृति में परिवार की इज्जत और सामाजिक प्रतिष्ठा (Image) को बहुत महत्व दिया जाता है। अक्सर महिलाएं घरेलू हिंसा को इसलिए सहती रहती हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि अगर बात बाहर गई, तो समाज क्या कहेगा। तलाक को आज भी एक कलंक (Stigma) माना जाता है। विजय कुमार और मीमू डोगरा के बीच क्या चल रहा था, यह शायद उनके करीबी भी नहीं जानते होंगे, क्योंकि दिखावे की दुनिया में सब कुछ ‘परफेक्ट’ दिखाने का दबाव होता है।

2. वीज़ा और कानूनी निर्भरता (H4 Visa Trap)

अमेरिका में घरेलू हिंसा का एक बड़ा कारण इमिग्रेशन स्टेटस भी है। कई भारतीय महिलाएं H4 वीज़ा (आश्रित वीज़ा) पर अमेरिका आती हैं। इसका मतलब है कि उनका अमेरिका में रहना पूरी तरह से उनके पति के H1B वीज़ा पर निर्भर है।

  • अगर वे पति के खिलाफ शिकायत करती हैं, तो उन्हें डर होता है कि पति का वीज़ा रद्द हो सकता है और उन्हें डिपोर्ट (Deport) किया जा सकता है।
  • हिसक पति अक्सर इसी बात का फायदा उठाते हैं। वे धमकी देते हैं—”अगर तुमने मुंह खोला, तो तुम्हें वापस भारत भेज दूंगा और बच्चों को यहीं रख लूंगा।”
  • विजय कुमार के मामले में भी यह जांच का विषय है कि क्या मीमू डोगरा या अन्य रिश्तेदार किसी तरह के इमिग्रेशन दबाव में थे।

3. अलगाव और अकेलेपन का शिकार

भारत में संयुक्त परिवार और पड़ोसी अक्सर मदद के लिए मौजूद होते हैं। अमेरिका में, विशेषकर उपनगरीय इलाकों (Suburbs) में, परिवार अक्सर बिल्कुल अकेले होते हैं। मीमू डोगरा के पास शायद वह सपोर्ट सिस्टम नहीं था जिससे वह अपने डर या परेशानियों को साझा कर पातीं। जब एक महिला सात समंदर पार एक नए देश में होती है, जहां की कानून व्यवस्था और भाषा उसके लिए नई हो सकती है, तो वह खुद को फंसा हुआ महसूस करती है।

अमेरिका का गन कल्चर: आग में घी का काम

इस त्रासदी में एक और बड़ा विलेन है—अमेरिका का गन कल्चर। क्या यह घटना इतनी भयावह होती अगर विजय कुमार के हाथ में बंदूक न होती? शायद बहस होती, शायद हाथापाई भी होती, लेकिन चार लोगों की जान नहीं जाती।

अमेरिका में बंदूक खरीदना सब्जी खरीदने जितना आसान है। जॉर्जिया जैसे राज्यों में गन लॉज (Gun Laws) काफी ढीले हैं। एक गुस्से में भरा व्यक्ति जब इतनी आसानी से घातक हथियार पा लेता है, तो परिणाम विजय कुमार जैसे कांड के रूप में सामने आते हैं। भारतीय समुदाय, जो भारत में सख्त गन कंट्रोल का आदि है, अमेरिका आकर इस खुली छूट का शिकार बन रहा है।

आंकड़े बताते हैं कि जब घर में बंदूक होती है, तो घरेलू हिंसा के जानलेवा बनने की संभावना 500 गुना बढ़ जाती है। विजय कुमार ने गुस्से के एक पल में ट्रिगर दबाया और सेकंडों में चार जिंदगियां खत्म कर दीं। यह गन कल्चर और घरेलू कलह का एक घातक मिश्रण है।

पीड़ितों की पहचान और उनके अधूरे सपने

  • मीमू डोगरा (43): एक पत्नी और मां, जो शायद अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थीं।
  • गौरव कुमार (33), निधि चंदर (37), हरीश चंदर (38): ये सभी युवा थे। 30 से 40 की उम्र वह होती है जब इंसान अपने करियर और जीवन के शिखर पर होता है।

ये सभी एक ही छत के नीचे एक खुशहाल जीवन जीने की उम्मीद कर रहे थे। निधि और हरीश संभवतः एक दंपत्ति थे या भाई-बहन, जो एक साथ रह रहे थे। उनका क्या कसूर था? सिर्फ यह कि वे एक ऐसे व्यक्ति के रिश्तेदार थे जो अपने गुस्से पर काबू नहीं रख सका। इन मौतों ने भारत में बैठे उनके बुजुर्ग माता-पिता और रिश्तेदारों को ऐसा जख्म दिया है जो कभी नहीं भरेगा।

बच्चों का भविष्य: सबसे बड़ा सवाल

इस पूरी घटना के सबसे बड़े पीड़ित वे तीन बच्चे हैं।

  • उन्होंने अपनी मां को मरते देखा।
  • उन्होंने अपने पिता को कातिल बनते देखा।
  • अब वे अनाथ हैं—मां दुनिया में नहीं रही और पिता जेल की सलाखों के पीछे है, जिसे शायद कभी रिहाई न मिले।

अमेरिका में चाइल्ड प्रोटेक्टिव सर्विसेज (CPS) अब इन बच्चों की देखरेख करेगी। क्या उन्हें भारत भेजा जाएगा? या उन्हें अमेरिका में ही किसी फोस्टर केयर (Foster Care) में रखा जाएगा? एक 12 साल का बच्चा, जिसने 911 पर कॉल किया, उसे पूरी जिंदगी इस ट्रॉमा (Trauma) के साथ जीना होगा कि उसने अपने पिता को पकड़वाया। समुदाय को अब इन बच्चों के पुनर्वास के लिए आगे आना होगा।

क्या रोका जा सकता था यह हत्याकांड?

विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू हिंसा के मामले रातों-रात हत्या में नहीं बदलते। इसके संकेत (Red Flags) पहले से मिल रहे होंगे।

  • क्या विजय कुमार पहले भी हिंसक था?
  • क्या पड़ोसियों या दोस्तों ने कभी चीख-पुकार सुनी थी?
  • क्या मीमू डोगरा ने कभी किसी से मदद मांगी थी?

अक्सर हम “दूसरों के फटे में टांग नहीं अड़ाना चाहिए” की मानसिकता के चलते खामोश रहते हैं। अगर किसी ने समय रहते हस्तक्षेप किया होता, या अगर मीमू के पास कोई सुरक्षित जगह (Shelter) जाने का विकल्प होता, तो शायद आज ये चार लोग जिंदा होते।

रक्षा (Raksha) जैसी संस्थाएं, जो जॉर्जिया में ही स्थित हैं, दक्षिण एशियाई महिलाओं की मदद के लिए काम करती हैं। लेकिन जानकारी का अभाव और सांस्कृतिक शर्म अक्सर पीड़ितों को इन संस्थाओं तक पहुंचने से रोकती है।

भारतीय समुदाय के लिए चेतावनी

यह घटना अमेरिका में रह रहे हर भारतीय परिवार के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है।

  1. मानसिक स्वास्थ्य पर बात करें: तनाव, अवसाद और गुस्से को छिपाएं नहीं। अगर आपको या आपके साथी को एंगर मैनेजमेंट की समस्या है, तो प्रोफेशनल हेल्प लें। अमेरिका में थेरेपी लेना सामान्य है, इसे पागलपन से न जोड़ें।
  2. कानूनी अधिकारों को जानें: H4 वीज़ा धारक महिलाओं को पता होना चाहिए कि घरेलू हिंसा के मामलों में उन्हें VAWA (Violence Against Women Act) के तहत सुरक्षा मिल सकती है। वे अपने पति से अलग होकर भी अमेरिका में कानूनी रूप से रह सकती हैं।
  3. बंदूक से दूरी: अपने घरों में हथियार रखने से पहले सौ बार सोचें। अगर घर में मानसिक तनाव या कलह है, तो बंदूक रखना बारूद के ढेर पर बैठने जैसा है।
  4. सपोर्ट सिस्टम बनाएं: केवल पार्टी करने या त्योहार मनाने के लिए नहीं, बल्कि दुख-सुख साझा करने के लिए दोस्त बनाएं। अगर आपका कोई दोस्त या रिश्तेदार परेशान लग रहा है, तो उससे बात करें।

लॉरेंसविले की वो खूनी सुबह हमें याद दिलाती रहेगी कि सफलता और समृद्धि का कोई मोल नहीं अगर घर की शांति ही छिन जाए। विजय कुमार ने एक पल के गुस्से में न केवल चार लोगों की जान ली, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों (अपने बच्चों) का जीवन भी बर्बाद कर दिया।

यह समय है कि हम ‘आदर्श परिवार’ का मुखौटा उतारकर असल समस्याओं पर बात करें। घरेलू हिंसा कोई निजी मामला नहीं है, यह एक सामाजिक अपराध है। अगर हम अब भी चुप रहे, तो शायद कल कोई और मीमू डोगरा या निधि चंदर किसी और विजय कुमार का शिकार बन जाएगी।

ईश्वर मृतकों की आत्मा को शांति दे और उन मासूम बच्चों को इस पहाड़ जैसे दुख को सहने की शक्ति दे।

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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