UAE President India Visit

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बिसात पर भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की दोस्ती एक मिसाल बन चुकी है। पिछले एक दशक में, इन दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की परिभाषा को ही बदल दिया है। जहाँ पहले यह रिश्ता केवल ‘तेल और व्यापार’ (Buyer-Seller) तक सीमित था, वहीं आज यह एक व्यापक ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) में तब्दील हो चुका है।

ताजा राजनयिक गलियारों से आ रही ब्रेकिंग न्यूज़ ने एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, UAE के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) की भारत यात्रा को लेकर उच्च स्तरीय मंथन जारी है। यद्यपि तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है, लेकिन दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच इस संभावित यात्रा के एजेंडे, समझौतों और रणनीतिक रोडमैप को लेकर गहन चर्चाएं चल रही हैं।

वर्ष 2026 की शुरुआत में इस यात्रा की सुगबुगाहट ही यह बताने के लिए काफी है कि भारत और यूएई के रिश्ते अब किसी औपचारिक प्रोटोकॉल के मोहताज नहीं रहे, बल्कि यह दो भाइयों के बीच का रिश्ता बन चुका है। इस ब्लॉग में हम इस संभावित यात्रा के हर पहलू, इसके भू-राजनीतिक मायने, व्यापारिक समझौतों और भविष्य की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करेंगे

भाग 1: यात्रा की पृष्ठभूमि – क्यों अहम है यह दौरा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच की ‘केमिस्ट्री’ जगजाहिर है। जब भी ये दोनों नेता मिलते हैं, दुनिया देखती है। प्रोटोकॉल तोड़कर गले मिलना और एक-दूसरे को “भाई” कहकर संबोधित करना इन दोनों देशों के प्रगाढ़ संबंधों का प्रतीक है।

1. निरंतरता का प्रतीक

पिछले कुछ वर्षों में (2022-2025), दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे के देश का दौरा किया है। चाहे वह ‘वाइब्रेंट गुजरात’ हो, G20 शिखर सम्मेलन हो, या अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन। 2026 में इस यात्रा की योजना इस बात का संकेत है कि दोनों देश संवाद की गति को धीमा नहीं होने देना चाहते।

2. बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य

मध्य पूर्व (Middle East) में चल रही उथल-पुथल, लाल सागर (Red Sea) में सुरक्षा चुनौतियां और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, भारत और यूएई का साथ आना स्थिरता का संकेत है। भारत के लिए यूएई, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और कूटनीति का प्रवेश द्वार है। वहीं, यूएई के लिए भारत एक उभरती हुई महाशक्ति और सबसे भरोसेमंद साझेदार है।

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3. ‘एक्शन’ का समय

यह यात्रा केवल शिष्टाचार भेंट नहीं होगी। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा का उद्देश्य पिछले समझौतों (जैसे CEPA और IMEEC) की समीक्षा करना और नए सेक्टर्स (जैसे सेमीकंडक्टर, स्पेस और एआई) में सहयोग को धरातल पर उतारना है।

भाग 2: CEPA की सफलता और $100 बिलियन का लक्ष्य

भारत और यूएई के रिश्तों की रीढ़ उनकी अर्थव्यवस्था है। मई 2022 में लागू हुआ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ है। इस संभावित यात्रा के केंद्र में भी व्यापार ही रहने वाला है।

नॉन-ऑयल ट्रेड का विस्तार

CEPA लागू होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार में अभूतपूर्व उछाल आया है। दोनों देशों ने 2030 तक 100 बिलियन डॉलर के गैर-तेल व्यापार (Non-Oil Trade) का लक्ष्य रखा था।

  • समीक्षा: इस यात्रा के दौरान, दोनों पक्ष यह समीक्षा करेंगे कि वे इस लक्ष्य के कितने करीब पहुंचे हैं।
  • नए क्षेत्र: रत्न और आभूषण, टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों के अलावा, अब फोकस फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर होगा। भारतीय एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए यूएई एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है।

रुपया-दिरहम व्यापार (Local Currency Settlement)

डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारत और यूएई ने अपनी स्थानीय मुद्राओं (INR और AED) में व्यापार शुरू किया है। इस यात्रा के दौरान इस प्रणाली को और अधिक सुव्यवस्थित और व्यापक बनाने पर मंथन हो सकता है। इसका सीधा फायदा भारतीय आयातकों को होगा, जिन्हें मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) में होने वाले नुकसान से राहत मिलेगी।

यूएई का भारत में निवेश

यूएई भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशक है। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और मुबाडाला जैसी सॉवरेन वेल्थ फंड्स भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल एनर्जी और स्टार्टअप्स में भारी निवेश कर रही हैं। उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान कई बड़े ‘इन्वेस्टमेंट पैक्ट्स’ पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो भारत की ‘विकसित भारत 2047’ की यात्रा में ईंधन का काम करेंगे।

भाग 3: ऊर्जा सुरक्षा से ग्रीन एनर्जी तक (The Green Shift)

ऊर्जा सुरक्षा हमेशा से भारत-यूएई संबंधों का आधार रही है। यूएई भारत का एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता है। लेकिन अब बातचीत का दायरा ‘काला सोना’ (Crude Oil) से हटकर ‘हरा सोना’ (Green Energy) की तरफ बढ़ गया है।

रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves)

भारत ने मैंगलोर में अपने रणनीतिक तेल भंडार के लिए यूएई की कंपनी ADNOC के साथ साझेदारी की है। इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कुछ नए दीर्घकालिक अनुबंध (Long Term Contracts) किए जा सकते हैं, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत पर कम पड़े।

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ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल्स

यूएई COP28 की मेजबानी कर चुका है और भारत रिन्यूएबल एनर्जी में लीडर बनना चाहता है।

  • ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर: दोनों देश मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात के लिए एक कॉरिडोर बनाने पर विचार कर रहे हैं।
  • ग्रिड कनेक्टिविटी: ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ (OSOWOG) पहल के तहत भारत और यूएई के बीच अंडर-सी केबल (Under-sea cable) के जरिए बिजली व्यापार की संभावनाओं पर भी चर्चा जारी है।

यह यात्रा इस बात पर मुहर लगा सकती है कि भविष्य का ईंधन जीवाश्म (Fossil) नहीं, बल्कि नवीकरणीय होगा।

भाग 4: IMEEC – मध्य पूर्व और यूरोप का नया रास्ता

G20 शिखर सम्मेलन (2023) के दौरान घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEEC) एक ऐतिहासिक परियोजना है। यह आधुनिक ‘स्पाइस रूट’ माना जा रहा है। हालांकि, क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी प्रगति पर सवाल उठे हैं।

इस यात्रा के दौरान IMEEC को पुनर्जीवित करने और इसे तेजी से ट्रैक पर लाने पर गंभीर चर्चा होगी।

  • कनेक्टिविटी: यूएई के जेबेल अली (Jebel Ali) और फुजैराह (Fujairah) बंदरगाहों को भारत के मुंद्रा और कांदला बंदरगाहों से जोड़ने की योजना है।
  • लॉजिस्टिक्स: यह कॉरिडोर भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने के समय को 40% तक कम कर सकता है। यूएई इसमें एक महत्वपूर्ण ‘ट्रांजिट हब’ की भूमिका निभाएगा। भारत और यूएई दोनों जानते हैं कि चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) को काउंटर करने के लिए IMEEC का सफल होना कितना जरूरी है।

भाग 5: फिनटेक और डिजिटल पेमेंट्स का एकीकरण

भारत की डिजिटल प्रगति (Digital Public Infrastructure) का लोहा पूरी दुनिया मान रही है, और यूएई इसे अपनाने वाला सबसे पहला देश है।

UPI और Jaywan कार्ड

जुलाई 2024 में, भारत के RuPay और यूएई के JAYWAN कार्ड के बीच इंटरलिंकिंग की शुरुआत हुई थी। भारत का UPI (Unified Payments Interface) भी यूएई में स्वीकार्य हो रहा है।

  • इस यात्रा का एजेंडा इन डिजिटल पेमेंट्स को और अधिक सुलभ बनाना होगा।
  • लाखों भारतीय जो यूएई में काम करते हैं और पर्यटक बनकर जाते हैं, उनके लिए भुगतान करना आसान हो जाएगा।
  • रेमिटेंस (Remittance): भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है, और इसका एक बड़ा हिस्सा यूएई से आता है। दोनों देशों के केंद्रीय बैंक ऐसी प्रणाली पर काम कर रहे हैं जिससे पैसा भेजना (Money Transfer) सस्ता और रियल-टाइम हो सके।

भाग 6: रक्षा और सुरक्षा सहयोग – आतंकवाद के खिलाफ एक सुर

एक समय था जब पाकिस्तान, यूएई का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था। लेकिन पिछले दशक में बाजी पलट गई है। आज भारत और यूएई सुरक्षा के मोर्चे पर कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

आतंकवाद और कट्टरपंथ (Zero Tolerance)

दोनों देश सीमा पार आतंकवाद और धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रखते हैं। इस यात्रा में खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) और साइबर सुरक्षा पर नए समझौते हो सकते हैं।

रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing)

‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत अब रक्षा उपकरणों का निर्यातक बन रहा है। यूएई ने भारत में बने हथियारों, जैसे कि ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन में रुचि दिखाई है।

  • संयुक्त सैन्य अभ्यास: ‘डेजर्ट साइक्लोन’ जैसे अभ्यासों की आवृत्ति बढ़ाई जा सकती है।
  • समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर और अरब सागर में समुद्री डकैतों और तस्करी को रोकने के लिए दोनों देशों की नौसेनाएं मिलकर काम करने की योजना बना रही हैं।

भाग 7: प्रवासी भारतीय और सांस्कृतिक सेतु

भारत और यूएई के रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी वहां रहने वाले 35 लाख से अधिक भारतीय हैं। वे यूएई की आबादी का लगभग 35% हैं।

भारतीय समुदाय का कल्याण

प्रधानमंत्री मोदी हमेशा अपने दौरों में भारतीय समुदाय (Diaspora) के हितों को प्राथमिकता देते हैं। इस यात्रा में ब्लू-कॉलर वर्कर्स (Blue-collar workers) के लिए सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर चर्चा हो सकती है। उनके कौशल विकास और बीमा योजनाओं को लेकर नई घोषणाएं संभव हैं।

सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power)

अबू धाबी में बना BAPS हिंदू मंदिर दोनों देशों के बीच सहिष्णुता और सांस्कृतिक सद्भाव का प्रतीक है। इसके अलावा, आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) का अबू धाबी कैंपस भी शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की नई इबारत लिख रहा है। इस यात्रा के दौरान शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में और अधिक छात्र विनिमय कार्यक्रमों (Student Exchange Programs) की घोषणा हो सकती है।

भाग 8: I2U2 और BRICS – वैश्विक मंच पर साझेदारी

भारत और यूएई अब केवल द्विपक्षीय साझेदार नहीं हैं, बल्कि वे बहुपक्षीय मंचों (Multilateral Forums) पर भी एक साथ काम कर रहे हैं।

I2U2 (India, Israel, UAE, USA)

इसे ‘वेस्ट एशिया का क्वाड’ कहा जाता है। इस समूह के तहत यूएई भारत में फूड पार्क्स (Food Parks) बनाने के लिए 2 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है। इस यात्रा में इन फूड पार्क्स की प्रगति की समीक्षा होगी, जो भारत में खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे।

BRICS में यूएई

हाल ही में यूएई BRICS का सदस्य बना है। ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज को बुलंद करने के लिए भारत और यूएई का साथ आना पश्चिमी शक्तियों के वर्चस्व वाली विश्व व्यवस्था में संतुलन बनाने का काम करेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर भी दोनों देशों के विचार मिलते-जुलते हैं।

भाग 9: चुनौतियां और भविष्य की राह

यद्यपि रिश्ते सुनहरे दौर में हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं।

  • क्षेत्रीय अस्थिरता: इजराइल-हमास संघर्ष या ईरान के साथ तनाव जैसे मुद्दे कभी-कभी कूटनीतिक संतुलन की मांग करते हैं। भारत को अपनी गुटनिरपेक्ष नीति और अरब जगत के साथ दोस्ती के बीच संतुलन बनाए रखना होता है।
  • चीन का प्रभाव: यूएई में चीन का बढ़ता आर्थिक प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि रणनीतिक क्षेत्रों में उसकी जगह कोई और न ले।

बावजूद इसके, दोनों नेतृत्वों की परिपक्वता ने इन चुनौतियों को कभी आड़े नहीं आने दिया।

21वीं सदी की सबसे परिभाषित साझेदारी

अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि UAE राष्ट्रपति की संभावित भारत यात्रा केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है—रिश्तों को और गहरा करने की, भरोसे को और मजबूत करने की।

भारत के लिए यूएई सिर्फ एक तेल का कुआं नहीं है, और यूएई के लिए भारत सिर्फ सस्ता श्रम उपलब्ध कराने वाला देश नहीं है। आज ये दोनों देश इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्पेस और डिफेंस में भागीदार हैं। यह रिश्ता ‘लेन-देन’ (Transactional) से आगे बढ़कर ‘परिवर्तनकारी’ (Transformational) बन चुका है।

जब शेख मोहम्मद बिन जायद और प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली में हाथ मिलाएंगे, तो वह केवल दो नेताओं का मिलन नहीं होगा, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों और अरब जगत के सपनों का मिलन होगा। 2026 में होने वाली यह यात्रा रणनीतिक साझेदारी को उस मुकाम पर ले जाएगी, जहाँ दोनों देश मिलकर न केवल अपने भविष्य को, बल्कि एशिया और दुनिया के भविष्य को आकार देंगे।

मंथन जारी है, और परिणाम निश्चित रूप से ऐतिहासिक होंगे। पूरी दुनिया की नजरें इस दोस्ती पर टिकी हैं, जो सही मायनों में “आज की कूटनीति का स्वर्ण मानक” (Gold Standard of Diplomacy) है।

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