Tusshar Kapoor

पिता का साहस और एक बेटे का संकल्प

नमस्कार दोस्तों! आज तारीख १४ फरवरी २०२६, शनिवार है। वेलेंटाइन डे के दिन हम अक्सर प्रेमी-प्रेमिकाओं के प्यार की बात करते हैं, लेकिन आज हम एक ऐसे प्यार की बात करेंगे जो दुनिया के हर रिश्ते से बढ़कर है—एक पिता का अपने बच्चे के लिए प्यार।

बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर (Tusshar Kapoor) ने भारतीय समाज में ‘सिंगल फादरहुड’ (Single Fatherhood) की परिभाषा को बदलकर रख दिया है। जब उन्होंने आईवीएफ (IVF) और सरोगेसी (Surrogacy) के जरिए पिता बनने का फैसला किया था, तब यह एक क्रांतिकारी कदम था। उनके बेटे लक्ष्य (Laksshya) अब बड़े हो रहे हैं, और कपूर परिवार की आंखों का तारा हैं।

लेकिन, हाल ही में १४ फरवरी २०२६ के आसपास दिए गए एक साक्षात्कार में तुषार कपूर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने सरोगेसी के जरिए पिता बनने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने पिता, दिग्गज अभिनेता जितेंद्र (Jeetendra) से कोई सलाह नहीं ली थी। उन्होंने यह फैसला अकेले लिया था।

एक संयुक्त परिवार (Joint Family) में, जहाँ हर छोटा फैसला बड़ों की मर्जी से होता है, वहां इतना बड़ा कदम अकेले उठाना? इसके पीछे क्या वजह थी? क्या यह डर था? क्या यह आत्मविश्वास था? या यह Internal Forces (आंतरिक शक्तियों) का वह वेग था जिसे तुषार रोक नहीं पाए?

भाग १: तुषार का कबूलनामा – “मैंने पापा से क्यों नहीं पूछा?”

तुषार कपूर हमेशा से ही एक शांत और सुलझे हुए व्यक्ति माने जाते हैं। अपनी किताब ‘बैचलर डैड’ (Bachelor Dad) और हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने अपने दिल की बात कही।

डर और हिचकिचाहट:

तुषार ने स्वीकार किया कि उन्हें डर था कि उनके माता-पिता (जितेंद्र और शोभा कपूर) शायद इस विचार को तुरंत स्वीकार न करें।

  • वे ८० और ९० के दशक की सोच वाले माता-पिता हैं। उस समय शादी के बिना पिता बनना एक टैबू (Taboo) था।
  • तुषार को लगा कि अगर उन्होंने सलाह मांगी, तो शायद उन्हें “थोड़ा रुक जाओ” या “पहले शादी कर लो” जैसी सलाह मिलेगी।
  • Decisive Forces: तुषार के अंदर पिता बनने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि उन्होंने किसी भी Opposing Forces (विरोधी ताकतों) को अपने निर्णय को कमजोर करने का मौका नहीं दिया। वे चाहते थे कि जब वे अपने माता-पिता को बताएं, तो यह एक ‘विचार’ न हो, बल्कि एक ‘निर्णय’ हो।

सरप्राइज एलिमेंट:

तुषार ने कहा, “मैं चाहता था कि जब मैं उन्हें बताऊं, तो मैं पूरी तैयारी के साथ जाऊं। मैं उन्हें यह नहीं पूछना चाहता था कि ‘क्या मैं यह करूँ?’, बल्कि मैं उन्हें बताना चाहता था कि ‘मैं यह करने जा रहा हूँ’।” यह आत्मविश्वास ही उनकी जीत बना।

भाग २: जितेंद्र का रिएक्शन – जब लीजेंड को पता चला

जितेंद्र, जिन्हें हम ‘जंपिंग जैक’ के नाम से जानते हैं, एक बहुत ही पारंपरिक पारिवारिक व्यक्ति रहे हैं। जब तुषार ने उन्हें बताया कि वे सरोगेसी के जरिए पिता बनने वाले हैं, तो उनका रिएक्शन क्या था?

Tusshar Kapoor Surrogacy Statement

खामोशी और स्वीकृति:

शुरुआत में शायद एक पल की खामोशी रही होगी। लेकिन जितेंद्र ने वह परिपक्वता दिखाई जो एक पिता से अपेक्षित होती है।

  • उन्होंने तुषार के फैसले का विरोध नहीं किया।
  • उन्होंने महसूस किया कि उनका बेटा अब बड़ा हो गया है और अपनी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है।
  • Generational Forces: यहाँ दो पीढ़ियों की सोच का टकराव हो सकता था, लेकिन जितेंद्र ने अपनी पुरानी मान्यताओं को आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने तुषार की Emotional Forces (भावनात्मक शक्ति) का सम्मान किया।

लक्ष्य के जन्म के बाद:

जैसे ही लक्ष्य का जन्म हुआ, जितेंद्र की दुनिया बदल गई। आज २०२६ में, जितेंद्र अपने पोते लक्ष्य के बिना एक पल भी नहीं रह सकते। वे कहते हैं, “लक्ष्य ने मुझे मेरी जवानी लौटा दी है।” तुषार का वह जोखिम भरा फैसला आज पूरे परिवार के लिए खुशी का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।

भाग ३: सरोगेसी का सफर – आसान नहीं थी राह

तुषार कपूर भारत के पहले ऐसे सिंगल सेलिब्रिटी थे जिन्होंने सरोगेसी को अपनाया। यह २०१६ की बात है, जब सरोगेसी के नियम इतने सख्त नहीं थे, लेकिन सामाजिक स्वीकार्यता बहुत कम थी।

डॉ. फिरोजा पारीख की भूमिका:

तुषार ने जसलोक अस्पताल की डॉ. फिरोजा पारीख (Dr. Firuza Parikh) से संपर्क किया।

  • यह एक लंबी मेडिकल प्रक्रिया थी।
  • कई बार आईवीएफ साइकिल्स फेल भी होते हैं। यह मानसिक रूप से तोड़ने वाला हो सकता है।
  • Biological Forces: तुषार को अपनी जैविक संतान चाहिए थी। इसके लिए उन्हें धैर्य रखना पड़ा। इस दौरान उन्होंने यह बात अपने तक ही सीमित रखी, ताकि अगर असफलता मिले, तो परिवार को दुख न हो।

अकेलेपन से लड़ाई:

जब आप एक पारंपरिक रास्ते (शादी) से हटकर चलते हैं, तो समाज आपको जज करता है। तुषार ने उन Societal Forces (सामाजिक ताकतों) का सामना किया जो एक सिंगल मैन को पिता के रूप में देखने की आदी नहीं थीं।

Tusshar Kapoor Surrogacy Statement

भाग ४: क्यों नहीं की शादी? – तुषार का स्पष्ट नजरिया

अक्सर लोग पूछते हैं कि तुषार ने शादी क्यों नहीं की? क्या वे शादी के खिलाफ हैं?

  • सही पार्टनर का इंतजार: तुषार का कहना है कि वे शादी में विश्वास रखते हैं, लेकिन सिर्फ पिता बनने के लिए गलत इंसान से शादी करना सही नहीं होता।
  • प्राथमिकता: ३० के दशक के अंत में, उनकी प्राथमिकता पिता बनना थी। उन्हें लगा कि अगर वे सही पार्टनर के मिलने का इंतजार करते रहे, तो पिता बनने की उम्र निकल जाएगी।
  • Time Forces: समय किसी के लिए नहीं रुकता। तुषार ने समय की नब्ज को पहचाना और अपनी बायोलॉजिकल क्लॉक (Biological Clock) को महत्व दिया।

भाग ५: एकता कपूर – भाई की ढाल

इस पूरे सफर में अगर किसी ने तुषार का सबसे ज्यादा साथ दिया, तो वह उनकी बहन और टीवी क्वीन एकता कपूर (Ekta Kapoor) थीं।

  • एकता खुद बाद में (२०१९ में) सरोगेसी के जरिए मां बनीं (बेटे रवि की मां)।
  • लेकिन तुषार के फैसले के समय, एकता ने एक मजबूत स्तंभ की तरह काम किया।
  • उन्होंने जितेंद्र और शोभा कपूर को समझाने में भी मदद की होगी।
  • Sibling Forces: भाई-बहन का यह रिश्ता बॉलीवुड में एक मिसाल है। दोनों ने समाज की परवाह किए बिना अपनी शर्तों पर जिंदगी जी है।

भाग ६: सिंगल फादरहुड – २०२६ की वास्तविकता

आज लक्ष्य लगभग १० साल के (अनुमानित) हो चुके हैं। एक सिंगल फादर के रूप में तुषार का अनुभव कैसा रहा है?

माँ और बाप, दोनों की भूमिका:

तुषार कहते हैं, “मुझे कभी नहीं लगा कि लक्ष्य को मां की कमी खल रही है। मैं ही उसका पिता हूँ और मैं ही उसकी मां हूँ।”

  • सुबह स्कूल के लिए तैयार करना।
  • होमवर्क कराना।
  • पेरेंट-टीचर मीटिंग (PTA) में जाना।
  • तुषार ने अपनी फिल्मों से ब्रेक लिया ताकि वे लक्ष्य को पूरा समय दे सकें। यह Nurturing Forces (पालन-पोषण की शक्ति) का बेहतरीन उदाहरण है।

दादा-दादी का साथ:

एकल पिता होने के बावजूद, तुषार अकेले नहीं हैं। जितेंद्र और शोभा कपूर ने लक्ष्य को पालने में अहम भूमिका निभाई है। एक संयुक्त परिवार में बच्चे को जो प्यार मिलता है, वह लक्ष्य को भरपूर मिला है।

भाग ७: समाज पर प्रभाव – एक ट्रेंडसेटर

तुषार कपूर के इस कदम ने बॉलीवुड और भारतीय समाज में एक नई लहर पैदा की।

Tusshar Kapoor Surrogacy Statement
  • करण जौहर (Karan Johar): तुषार के बाद करण जौहर ने भी सरोगेसी के जरिए यश और रूही का स्वागत किया।
  • आम आदमी: कई आम लोग जो शादी नहीं करना चाहते थे या नहीं कर पाए, उन्होंने तुषार से प्रेरणा लेकर सिंगल पेरेंटिंग का रास्ता चुना।
  • तुषार ने साबित किया कि परिवार बनाने के लिए ‘पति-पत्नी’ का होना जरूरी नहीं, ‘प्यार’ का होना जरूरी है। उन्होंने Cultural Forces (सांस्कृतिक मान्यताओं) को चुनौती दी और जीते।

भाग ८: आलोचना और ट्रोल्स – Negative Forces का सामना

सोशल मीडिया के दौर में कोई भी फैसला आलोचना से परे नहीं होता।

  • तुषार को कई बार ट्रोल किया गया। “बच्चे को मां का प्यार नहीं मिलेगा,” “यह प्रकृति के खिलाफ है,” जैसी बातें कही गईं।
  • लेकिन तुषार ने कभी पलटकर जवाब नहीं दिया। उन्होंने अपने काम (परवरिश) से जवाब दिया।
  • आज जब लोग लक्ष्य को एक खुशहाल और संस्कारवान बच्चे के रूप में देखते हैं, तो सारे ट्रोल्स खामोश हो जाते हैं।

भाग ९: तुषार की किताब – ‘बैचलर डैड

तुषार ने अपने अनुभवों पर एक किताब लिखी है—’Bachelor Dad’.

  • इसमें उन्होंने उस पल का विस्तार से वर्णन किया है जब उन्होंने पहली बार अपने पिता जितेंद्र को यह खबर दी थी।
  • यह किताब उन सभी पुरुषों के लिए एक गाइड है जो पिता बनना चाहते हैं।
  • इसमें उन्होंने Emotional Forces और लॉजिस्टिकल चुनौतियों (डायपर बदलने से लेकर स्कूल एडमिशन तक) का जिक्र किया है।

भाग १०: जितेंद्र का बदलता स्वरूप – सख्त पिता से नरम दादा तक

जितेंद्र अपनी जवानी में काम में बहुत व्यस्त रहते थे। वे तुषार और एकता को ज्यादा समय नहीं दे पाए थे (जैसा कि उस दौर के स्टार्स के साथ होता था)।

  • लेकिन लक्ष्य के साथ उन्हें वह ‘दूसरा मौका’ मिला है।
  • वे अपनी शूटिंग छोड़कर लक्ष्य के साथ खेलते हैं।
  • तुषार का फैसला जितेंद्र के लिए एक वरदान साबित हुआ। इसने परिवार के Bonding Forces (जुड़ाव की शक्तियों) को फिर से जीवंत कर दिया।

भाग ११: सरोगेसी कानून – क्या अब यह संभव है?

यहाँ एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य है। भारत में अब सरोगेसी कानून (Surrogacy Regulation Act) बदल चुके हैं।

  • २०२६ के संदर्भ में, कमर्शियल सरोगेसी प्रतिबंधित है।
  • अब सिंगल पुरुषों के लिए सरोगेसी के जरिए पिता बनना भारत में कानूनी रूप से बहुत जटिल या असंभव हो गया है।
  • तुषार भाग्यशाली थे कि उन्होंने सही समय पर (२०१६ में) यह फैसला लिया।
  • यह दिखाता है कि कैसे Legal Forces (कानूनी शक्तियां) व्यक्तिगत निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। अगर तुषार ने तब “पापा से पूछने” में देर कर दी होती, तो शायद वे आज पिता न होते।

भाग १२: बच्चों की परवरिश – मीडिया से दूरी

कपूर परिवार ने एक अच्छी बात यह की है कि उन्होंने लक्ष्य (और एकता के बेटे रवि) को पैपराजी कल्चर से थोड़ा दूर रखा है।

  • तैमूर या अन्य स्टार किड्स की तरह उनकी हर तस्वीर वायरल नहीं होती।
  • तुषार चाहते हैं कि लक्ष्य एक सामान्य बचपन जिएं।
  • वे उसे स्टारडम की Glamour Forces से बचाकर रखना चाहते हैं।

भाग १३: भविष्य की योजनाएं – क्या दूसरी शादी?

अक्सर तुषार से पूछा जाता है कि क्या वे अब शादी करेंगे?

  • तुषार का जवाब होता है, “मैं अभी पूरा हूँ। मेरा परिवार पूरा है।”
  • लेकिन वे भविष्य की संभावनाओं को नकारते नहीं हैं।
  • फिलहाल, उनका पूरा ध्यान लक्ष्य के करियर और शिक्षा पर है।

भाग १४: पिता का धर्म

अंत में, १४ फरवरी २०२६ के इस ब्लॉग का सार यही है कि “पिता बनना एक जैविक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन पिता होना एक जिम्मेदारी है।”

तुषार कपूर ने अपने पिता जितेंद्र से सलाह न लेकर कोई अपमान नहीं किया था। उन्होंने बस अपनी Intuitive Forces (अंतर्ज्ञान) पर भरोसा किया। उन्हें पता था कि उनका परिवार अंततः उनके प्यार को समझेगा।

यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी जीवन में बड़े फैसले अकेले लेने पड़ते हैं। अगर आपकी नीयत साफ है और मकसद प्यार है, तो कायनात (Universe) भी आपका साथ देती है।

आज जितेंद्र गर्व से कहते हैं, “तुषार मुझसे बेहतर पिता है।” एक बेटे के लिए इससे बड़ा सर्टिफिकेट और क्या हो सकता है?

By Isha Patel

Isha Patel Tez Khabri के साथ जुड़ी एक समाचार रिपोर्टर हैं। वे भारत और राज्यों से जुड़ी ताज़ा, ब्रेकिंग और जनहित से संबंधित खबरों को कवर करती हैं। Isha Patel शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर सत्यापित व तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करती हैं।

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