भारत के इतिहास में ‘बुलडोज़र’ शब्द का राजनीतिक और सामाजिक महत्व आज भले ही चर्चा में हो, लेकिन इसका सबसे खौफनाक अध्याय 1976 के आपातकाल (Emergency) के दौरान लिखा गया था। यह वह समय था जब संजय गांधी की एक ‘ज़िद’ ने पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था।
तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ देखना है… जब संजय गांधी की एक जिद से भारत ने जाना क्या होता है बुलडोजर एक्शन
संजय गांधी की ‘ज़िद’ और सौंदर्यीकरण का सपना
यह विवाद तब शुरू हुआ जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के तत्कालीन उपाध्यक्ष जगमोहन ने तुर्कमान गेट का दौरा किया।
- साफ नज़ारे की ख्वाहिश: ऐतिहासिक दस्तावेजों और जीवनी लेखक कैथरीन फ्रैंक के अनुसार, संजय गांधी चाहते थे कि तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद का सीधा और साफ नज़ारा (Clear View) दिखे।
- रुकावट: उनके इस सपने के बीच में हजारों झुग्गी-झोपड़ियां और पुरानी इमारतें थीं। संजय गांधी ने कथित तौर पर कहा था कि उन्हें बीच की ये बस्तियां नहीं दिखनी चाहिए। इसे एक ‘मौखिक आदेश’ मानकर बुलडोज़र एक्शन की तैयारी शुरू कर दी गई।

तुर्कमान गेट कांड: 19 अप्रैल 1976
सौंदर्यीकरण और ‘स्लम क्लीयरेंस’ (झुग्गी हटाओ) के नाम पर 13 अप्रैल 1976 को बुलडोज़र चलने शुरू हुए, लेकिन विरोध की आग 19 अप्रैल को भड़की।
- भीषण बुलडोज़र एक्शन: 10 से ज्यादा बुलडोज़रों ने मुगल काल से वहां रह रहे हजारों लोगों के घरों को ज़मींदोज करना शुरू कर दिया।
- जनता का विरोध: करीब 500 महिलाएं और बच्चे बुलडोज़रों के सामने खड़े हो गए। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्हें शहर से बहुत दूर यमुना पार (वर्तमान कल्याणपुरी/खिचड़ीपुर) भेजा जा रहा है, जहाँ कोई सुविधा नहीं थी।
- पुलिस की बर्बरता: जब भीड़ ने पथराव शुरू किया, तो पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और फिर गोलियां चलाईं। आधिकारिक आंकड़ों में मौतों की संख्या कम बताई गई, लेकिन जनश्रुतियों और शाह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा और गोलीबारी में 150 से अधिक लोग मारे गए थे।
ऐतिहासिक प्रभाव और वर्तमान संदर्भ
तुर्कमान गेट कांड आपातकाल के “काले अध्यायों” में से एक माना जाता है।
- जबरन विस्थापन: लगभग 70,000 लोगों को उनके घरों से बेदखल कर दिया गया।
- नसबंदी अभियान: इसी दौरान इलाके में जबरन नसबंदी का अभियान भी चलाया गया, जिसने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया।
- 2026 की कार्रवाई: हाल ही में (जनवरी 2026) दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास फिर से बुलडोज़र एक्शन हुआ, जिसने स्थानीय लोगों के मन में 1976 की उन कड़वी यादों को फिर से ताज़ा कर दिया है।
इस वीडियो में इमरजेंसी के दौरान तुर्कमान गेट पर बुलडोज़र एक्शन की पूरी ऐतिहासिक कहानी को विस्तार से बताया गया है, जो उस दौर की राजनीतिक स्थिति को समझने में मदद करेगी।
