oral cancer

क्या आप भी दांत में दर्द होने पर तुरंत पेनकिलर (Painkiller) खा लेते हैं? या लौंग का तेल लगाकर दर्द के अपने आप ठीक होने का इंतज़ार करते हैं? हम में से अधिकांश लोग दांत या मसूड़ों के दर्द को एक आम समस्या मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। कैविटी (Cavity), मसूड़ों में सूजन या सेंसिटिविटी होना आम बात है, लेकिन अगर यह दर्द हफ्तों तक बना रहे और किसी भी सामान्य इलाज से ठीक न हो, तो यह खतरे की एक बहुत बड़ी घंटी हो सकती है।

हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों और ऑन्कोलॉजी (Oncology) विशेषज्ञों की चेतावनियों के अनुसार, दांतों या जबड़े में लगातार होने वाला दर्द केवल एक साधारण डेंटल समस्या नहीं है, बल्कि यह मुंह के कैंसर (Oral Cancer) का एक प्रारंभिक और गंभीर संकेत हो सकता है।

1. दांत दर्द और ओरल कैंसर के बीच का वैज्ञानिक संबंध (The Medical Link)

दांत में दर्द आमतौर पर तब होता है जब दांत की सबसे भीतरी परत (Dental Pulp) में मौजूद नसों में बैक्टीरियल इन्फेक्शन के कारण सूजन आ जाती है। लेकिन जब यह दर्द कैंसर से जुड़ा होता है, तो इसके पीछे की पैथोलॉजी (Pathology) बिल्कुल अलग होती है।

कैंसर में दांत दर्द क्यों होता है?

  • ट्यूमर का नसों पर दबाव: मुंह के अंदर (जैसे मसूड़ों, जीभ के नीचे या गाल के अंदरूनी हिस्से में) विकसित हो रहा कोई घातक ट्यूमर (Malignant Tumor) जब बड़ा होने लगता है, तो वह ट्राइजेमिनल नर्व (Trigeminal Nerve – चेहरे और जबड़े की मुख्य नस) की शाखाओं पर भारी दबाव डालता है। इस दबाव के कारण दांतों और पूरे जबड़े में तेज, टीस मारने वाला दर्द महसूस होता है।
  • हड्डी का क्षरण (Bone Invasion): एडवांस्ड स्टेज में, ओरल कैंसर की कोशिकाएं मसूड़ों से होते हुए जबड़े की हड्डी (Mandible या Maxilla) को नष्ट करना शुरू कर देती हैं। जब हड्डी कमजोर हो जाती है, तो उस पर टिके दांतों की जड़ें हिलने लगती हैं, जिससे बिना किसी कैविटी के भी दांतों में भयंकर दर्द होता है और दांत अपने आप टूटने लगते हैं।
  • रेफर्ड पेन (Referred Pain): कई बार कैंसर गले या जीभ के पिछले हिस्से में होता है, लेकिन नसों के इंटरकनेक्शन के कारण मरीज को लगता है कि दर्द उसके दांत या कान में हो रहा है। इसे मेडिकल भाषा में ‘रेफर्ड पेन’ कहा जाता है।

अगर डेंटिस्ट ने आपके दांत का एक्स-रे किया है और उसमें कोई कैविटी, रूट कैनाल इन्फेक्शन या मसूड़ों की बीमारी (Periodontitis) नहीं दिख रही है, फिर भी दर्द लगातार बना हुआ है, तो यह स्थिति ओरल कैंसर की स्क्रीनिंग की ओर इशारा करती है।

2. ओरल कैंसर क्या है? (Understanding Oral Cancer)

ओरल कैंसर, जिसे मुंह का कैंसर भी कहा जाता है, सिर और गर्दन के कैंसर (Head and Neck Squamous Cell Carcinoma – HNSCC) का एक प्रमुख प्रकार है। यह कैंसर मुंह के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है:

  • होंठ (Lips)
  • गाल के अंदरूनी हिस्से (Buccal Mucosa)
  • दांतों के मसूड़े (Gums/Gingiva)
  • जीभ (Tongue)
  • जीभ के नीचे का हिस्सा (Floor of the mouth)
  • मुंह का ऊपरी हिस्सा (Hard and Soft Palate)
  • अक्ल दाढ़ के पीछे का हिस्सा (Retromolar Trigone)

मुंह के 90% से अधिक कैंसर ‘स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा’ (Squamous Cell Carcinoma) होते हैं। यह मुंह के अंदरूनी हिस्से को अस्तर (Lining) करने वाली चपटी और पतली कोशिकाओं (Squamous cells) में डीएनए म्यूटेशन (DNA Mutation) के कारण शुरू होता है।

3. खतरे की घंटी: दांत दर्द के अलावा ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षण (Warning Signs)

ओरल कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में यह अक्सर दर्द रहित होता है। दर्द तब शुरू होता है जब ट्यूमर नसों या हड्डियों तक पहुंच जाता है। दांत दर्द के साथ-साथ आपको अपने मुंह में इन असामान्य बदलावों पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए:

A. मुंह में न भरने वाले छाले (Non-healing Ulcers): मुंह में छाले (Mouth ulcers/Canker sores) होना आम है, जो विटामिन की कमी या पेट की खराबी से होते हैं और 10-14 दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर कोई छाला या घाव 3 सप्ताह से अधिक समय तक ठीक न हो, उसमें से खून आता हो, और वह छूने पर सख्त महसूस हो, तो यह कैंसर का सबसे बड़ा रेड फ्लैग (Red Flag) है।

B. ल्यूकोप्लाकिया और एरिथ्रोप्लाकिया (Pre-cancerous Lesions):

  • ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia): मसूड़ों, गाल के अंदर या जीभ पर सफेद रंग के मोटे धब्बे जो रगड़ने पर भी साफ नहीं होते।
  • एरिथ्रोप्लाकिया (Erythroplakia): मुंह के अंदर लाल रंग के मखमली धब्बे। लाल धब्बे सफेद धब्बों की तुलना में कैंसर में बदलने (Malignancy) का बहुत अधिक जोखिम रखते हैं।

C. दांतों का बिना कैविटी के हिलना (Unexplained Loose Teeth): अगर आपके मसूड़े स्वस्थ दिख रहे हैं, लेकिन अचानक आपके एक या एक से अधिक दांत हिलने लगे हैं, तो इसका मतलब है कि दांतों को पकड़ कर रखने वाली जबड़े की हड्डी को कोई ट्यूमर अंदर ही अंदर खा रहा है।

D. निगलने या चबाने में कठिनाई (Dysphagia): खाना निगलते समय गले में ऐसा महसूस होना कि कुछ अटका हुआ है, या चबाते और बोलते समय जीभ को घुमाने में तकलीफ होना।

E. गर्दन में गांठ (Lump in the Neck): जब मुंह का कैंसर बढ़ता है, तो वह सबसे पहले गर्दन की लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) में फैलता है। यदि आपकी गर्दन में कोई दर्दरहित और सख्त गांठ महसूस हो रही है, तो तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट (Oncologist) से संपर्क करें।

F. आवाज में बदलाव या सुन्नपन: होंठ, जीभ या मुंह के किसी हिस्से का अचानक सुन्न (Numb) हो जाना या आवाज में भारीपन आना नसों के डैमेज होने का संकेत है।

4. भारत में ओरल कैंसर की भयावह स्थिति (Public Health Perspective)

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पूरी दुनिया में भारत को ‘ओरल कैंसर की राजधानी’ (Capital of Oral Cancer) माना जाता है।

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पुरुषों में होने वाले सभी कैंसरों में मुंह का कैंसर पहले स्थान पर है।
  • भारत में हर साल ओरल कैंसर के 1 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं, और 50,000 से अधिक लोगों की मौत इसके कारण हो जाती है।
  • इसका सबसे बड़ा कारण भारत में बड़े पैमाने पर ‘धुआं रहित तंबाकू’ (Smokeless Tobacco) जैसे कि गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाले का बेतहाशा सेवन है।

5. ओरल कैंसर के मुख्य कारण और जोखिम कारक (Risk Factors & Carcinogens)

स्वस्थ कोशिकाओं के कैंसर कोशिकाओं में बदलने के पीछे कई हानिकारक तत्व (Carcinogens) और जीवनशैली से जुड़ी आदतें जिम्मेदार होती हैं:

1. तंबाकू का सेवन (Tobacco – The Biggest Culprit): चाहे वह सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पीना हो, या गुटखा और खैनी चबाना हो—तंबाकू में 70 से अधिक ऐसे ज्ञात रसायन (जैसे Nitrosamines, Benzene) होते हैं जो सीधे तौर पर कोशिकाओं के डीएनए (DNA) को नुकसान पहुंचाते हैं। तंबाकू चबाने वालों को उस जगह पर कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है जहां वे तंबाकू दबाकर रखते हैं (जैसे गाल और मसूड़े के बीच)।

2. शराब का अत्यधिक सेवन (Heavy Alcohol Consumption): शराब (Alcohol) अपने आप में एक जोखिम कारक है, लेकिन जो लोग तंबाकू और शराब दोनों का एक साथ सेवन करते हैं, उनमें ओरल कैंसर होने का जोखिम सामान्य व्यक्ति की तुलना में 15 से 30 गुना बढ़ जाता है। शराब तंबाकू के रसायनों को मुंह की त्वचा के भीतर गहराई तक प्रवेश करने में मदद करती है।

3. ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV Infection): आजकल ओरल कैंसर का एक नया और तेजी से बढ़ता कारण HPV (विशेष रूप से HPV-16 स्ट्रेन) है। यह वही वायरस है जो महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का कारण बनता है। ओरल सेक्स (Oral Sex) के माध्यम से यह वायरस मुंह और गले (Oropharyngeal area) में प्रवेश करता है और कैंसर का कारण बनता है। यह युवा और बिना तंबाकू खाने वाले लोगों में कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है।

4. क्रोनिक डेंटल ट्रॉमा (Sharp Teeth & Ill-fitting Dentures): यह एक ऐसा कारण है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि आपका कोई दांत टूटा हुआ या बहुत नुकीला (Sharp) है, जो बार-बार आपकी जीभ या गाल को काट रहा है, तो उस जगह पर लगातार होने वाला घाव (Chronic Trauma) वर्षों बाद कैंसर का रूप ले सकता है। इसी तरह, सही से फिट न होने वाले नकली दांत (Dentures) भी मसूड़ों पर लगातार रगड़ पैदा करके कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं।

5. खराब ओरल हाइजीन और आहार: नियमित रूप से ब्रश न करना, मुंह में बैक्टीरिया का जमाव (Plaque) और ताजे फलों व सब्जियों (एंटीऑक्सीडेंट्स) की कमी वाली डाइट भी कैंसर के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है।

6. डायग्नोसिस और स्क्रीनिंग: डेंटिस्ट कैसे पकड़ते हैं कैंसर? (Diagnosis Process)

यदि आप दांत या जबड़े के लगातार दर्द की शिकायत लेकर डेंटिस्ट के पास जाते हैं, और उन्हें किसी ट्यूमर का संदेह होता है, तो वे निम्नलिखित वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया अपनाते हैं:

A. क्लिनिकल ओरल एग्जामिनेशन (Visual & Physical Exam): डेंटिस्ट एक अच्छी रोशनी और शीशे की मदद से आपके मुंह के हर कोने (होंठ, गाल, जीभ के नीचे, तालू) की जांच करेंगे। वे गर्दन और जबड़े के नीचे की लिम्फ नोड्स को टटोलकर (Palpation) सूजन की जांच करेंगे।

B. बायोप्सी (Biopsy – द गोल्ड स्टैण्डर्ड): कैंसर की पुष्टि करने का एकमात्र 100% सटीक तरीका बायोप्सी है।

  • इंसीज़नल बायोप्सी (Incisional Biopsy): इसमें संदिग्ध घाव या ट्यूमर का एक छोटा सा टुकड़ा लोकल एनेस्थीसिया देकर काटा जाता है और पैथोलॉजी लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे जांच के लिए भेजा जाता है।
  • ब्रश बायोप्सी (Brush Biopsy): यह एक दर्द रहित प्रक्रिया है जिसमें एक छोटे ब्रश की मदद से घाव की ऊपरी कोशिकाओं को खुरच कर जांच के लिए लिया जाता है।

C. इमेजिंग टेस्ट्स (Imaging Scans): यदि बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि हो जाती है, तो यह पता लगाने के लिए कि कैंसर कितना गहरा है और शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे जबड़े की हड्डी या फेफड़ों) में फैला है या नहीं, एडवांस्ड स्कैन किए जाते हैं:

  • सीटी स्कैन (CT Scan) और एमआरआई (MRI): यह ट्यूमर के आकार और आसपास के ऊतकों (Tissues) में उसके फैलाव की 3D तस्वीर देता है।
  • पेट स्कैन (PET Scan): यह पूरे शरीर का स्कैन है जो यह बताता है कि क्या कैंसर लिम्फ नोड्स या अन्य अंगों (Metastasis) तक पहुंच चुका है।

7. ओरल कैंसर के विभिन्न चरण (Stages of Oral Cancer: The TNM System)

कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस स्टेज में है। ऑन्कोलॉजिस्ट ‘TNM’ (Tumor, Node, Metastasis) प्रणाली का उपयोग करके कैंसर को स्टेज 1 से 4 में बांटते हैं:

  • स्टेज 1 (Stage I): ट्यूमर का आकार बहुत छोटा (2 सेंटीमीटर या उससे कम) होता है और यह लिम्फ नोड्स तक नहीं फैला होता है। इस स्टेज में पकड़ में आने पर मरीज के पूरी तरह से ठीक होने (Cure rate) की संभावना 80-90% होती है।
  • स्टेज 2 (Stage II): ट्यूमर का आकार 2 से 4 सेंटीमीटर के बीच होता है, लेकिन अभी भी यह लिम्फ नोड्स तक नहीं पहुंचा है।
  • स्टेज 3 (Stage III): ट्यूमर 4 सेंटीमीटर से बड़ा हो जाता है, या वह किसी भी आकार का हो लेकिन गर्दन की कम से कम एक लिम्फ नोड (Lymph node) तक फैल चुका होता है।
  • स्टेज 4 (Stage IV – Advanced): यह सबसे गंभीर चरण है। इसमें ट्यूमर जबड़े की हड्डी, चेहरे की मांसपेशियों, त्वचा या शरीर के अन्य दूरस्थ अंगों (जैसे फेफड़े या लिवर) तक फैल (Metastasize) चुका होता है।

8. आधुनिक चिकित्सा और उपचार के विकल्प (Advanced Treatment Modalities)

ओरल कैंसर का इलाज एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (Multi-disciplinary team) द्वारा किया जाता है, जिसमें हेड एंड नेक सर्जन (Head and Neck Surgeon), मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और डेंटिस्ट शामिल होते हैं।

इलाज मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर टिका है:

1. सर्जरी (Surgical Oncology): शुरुआती चरणों में, ट्यूमर को जड़ से काटकर निकाल देना ही सबसे कारगर इलाज है।

  • ट्यूमर रिसेक्शन (Tumor Resection): कैंसरग्रस्त हिस्से (जैसे जीभ का कुछ भाग या गाल का हिस्सा) को सुरक्षित मार्जिन के साथ काट कर निकालना।
  • मैंडिबुलेक्टोमी (Mandibulectomy): यदि कैंसर जबड़े की हड्डी तक पहुंच गया है (जो दांत दर्द का मुख्य कारण होता है), तो जबड़े की हड्डी के कुछ हिस्से को काटकर निकालना पड़ता है।
  • नेक डिसेक्शन (Neck Dissection): यदि कैंसर गर्दन की लिम्फ नोड्स में फैल गया है, तो सर्जरी करके उन प्रभावित लिम्फ नोड्स को भी निकाला जाता है।

2. रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): इसमें उच्च-ऊर्जा वाली एक्स-रे किरणों (High-energy X-rays) या प्रोटॉन बीम का उपयोग करके बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। अक्सर सर्जरी के बाद बीमारी को वापस लौटने से रोकने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। एडवांस्ड तकनीकों जैसे IMRT (Intensity-Modulated Radiation Therapy) से स्वस्थ ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचता है।

3. कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी (Chemotherapy & Targeted Therapy): एडवांस्ड स्टेज में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए शक्तिशाली एंटी-कैंसर दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो नसों (IV) के जरिए दी जाती हैं। आधुनिक ‘टार्गेटेड थेरेपी’ (जैसे Cetuximab) सीधे कैंसर कोशिकाओं के विकास वाले प्रोटीन (EGFR) पर हमला करती है, जिससे साइड इफेक्ट्स कम होते हैं।

4. इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह ऑन्कोलॉजी में नवीनतम क्रांति है। यह दवाएं (जैसे Pembrolizumab या Nivolumab) मरीज के शरीर के ‘इम्यून सिस्टम’ (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को ही कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए एक्टिवेट कर देती हैं।

पुनर्निर्माण और पुनर्वास (Reconstructive Surgery & Rehab): मुंह की सर्जरी के बाद व्यक्ति के चेहरे का आकार बिगड़ सकता है और उसे खाने या बोलने में दिक्कत आ सकती है। इसके लिए प्लास्टिक सर्जन पैर की हड्डी (Fibula free flap) या हाथ की त्वचा का उपयोग करके जबड़े और जीभ का पुनर्निर्माण (Reconstructive surgery) करते हैं। बाद में स्पीच थेरेपिस्ट (Speech Therapist) मरीज को दोबारा सही से बोलना और खाना निगलना सिखाते हैं।

9. बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है: प्रिवेंशन और सेल्फ-एग्जामिनेशन (Prevention Strategies)

ओरल कैंसर उन कुछ कैंसरों में से एक है जिसे अपनी जीवनशैली में बदलाव करके काफी हद तक रोका जा सकता है।

क्या करें और क्या न करें?

  1. तंबाकू और गुटखा को हमेशा के लिए ‘ना’ कहें: यह ओरल कैंसर से बचने का सबसे प्रभावी और एकमात्र शर्तिया तरीका है। यदि आप वर्षों से तंबाकू खा रहे हैं, तो आज ही नशा मुक्ति केंद्र (De-addiction center) या निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) की मदद लें।
  2. शराब का सेवन सीमित करें: शराब और तंबाकू का कॉम्बिनेशन एक जानलेवा कॉकटेल है। इससे पूरी तरह बचें।
  3. नियमित डेंटल चेकअप: हर 6 महीने में कम से कम एक बार अपने डेंटिस्ट के पास जाएं। एक योग्य डेंटिस्ट आपके दांतों की सफाई के साथ-साथ आपके मुंह में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की भी जांच कर सकता है।
  4. नुकीले दांतों का इलाज: यदि आपके मुंह में कोई टूटा हुआ या नुकीला दांत है जो गाल को छील रहा है, तो तुरंत डेंटिस्ट से उसे घिसवाएं (Grinding) या निकलवा दें।
  5. HPV वैक्सीन: युवाओं (विशेषकर 9 से 26 वर्ष की आयु) को HPV संक्रमण से बचने के लिए एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine) लगवानी चाहिए।

महीने में एक बार करें ‘ओरल सेल्फ एग्जामिनेशन’ (Mouth Self-Exam): ब्रस्ट कैंसर की तरह ही ओरल कैंसर की भी घर पर जांच की जा सकती है:

  • एक अच्छी रोशनी वाले आईने के सामने खड़े हों।
  • अपने होंठों को पलटकर अंदर की तरफ देखें कि कोई सफेद या लाल धब्बा तो नहीं है।
  • अपने गालों के अंदरूनी हिस्से को उंगलियों से टटोलें और महसूस करें कि कोई सख्त गांठ या छाला तो नहीं है।
  • जीभ को बाहर निकालें और उसके किनारों (Lateral borders) और जीभ के नीचे के हिस्से की अच्छी तरह जांच करें (कैंसर अक्सर जीभ के किनारों पर ही पनपता है)।
  • मुंह का ऊपरी तालू (Palate) भी चेक करें। यदि कुछ भी असामान्य लगे, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

10. मनोवैज्ञानिक प्रभाव और सर्वाइवरशिप (Emotional Support)

कैंसर का निदान (Diagnosis) केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिवार के मन और आत्मा को भी तोड़ देता है। दांत दर्द की शिकायत लेकर जाना और कैंसर की खबर लेकर लौटना एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक सदमा (Psychological Trauma) है।

  • डिप्रेसन और एंग्जायटी: सर्जरी के बाद चेहरे का स्वरूप बदल जाने या बोलने में परेशानी होने के कारण कई मरीज गहरे अवसाद (Depression) में चले जाते हैं।
  • काउंसलिंग का महत्व: ऐसे समय में परिवार के सपोर्ट के साथ-साथ एक ऑन्कोलॉजी साइकोलॉजिस्ट (Psycho-oncologist) की काउंसलिंग बहुत जरूरी होती है। कैंसर सर्वाइवर सपोर्ट ग्रुप्स (Support Groups) से जुड़ने से मरीज को यह महसूस होता है कि वह इस लड़ाई में अकेला नहीं है और कैंसर के बाद भी एक गुणवत्तापूर्ण जीवन (Quality of life) जिया जा सकता है।

सतर्कता ही आपका सबसे बड़ा हथियार है

दांत का दर्द हमेशा सिर्फ एक कैविटी या सेंसिटिविटी नहीं होता। हमारा शरीर बेहद स्मार्ट है; जब भी कुछ गलत होता है, वह दर्द के माध्यम से हमें अलार्म (Alarm) भेजता है। यदि आपका दांत का दर्द लगातार बना हुआ है, मसूड़ों में सूजन है, मुंह में कोई ऐसा छाला है जो 3 हफ्तों से भर नहीं रहा है, या बिना किसी कारण दांत हिल रहे हैं—तो पेनकिलर खाकर समस्या को टालने की गलती बिल्कुल न करें।

तुरंत एक क्वालिफाइड डेंटिस्ट (BDS/MDS) या मैक्सिलोफेशियल सर्जन (Maxillofacial Surgeon) से मिलें। ओरल कैंसर यदि स्टेज 1 या 2 में पकड़ लिया जाए, तो इसका इलाज पूरी तरह संभव है और मरीज एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकता है। डर को खुद पर हावी न होने दें; सही जानकारी, समय पर जांच (Early Detection) और तंबाकू मुक्त जीवनशैली ही आपको इस जानलेवा बीमारी से बचा सकती है।

आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में है। आज ही अपने मुंह की जांच करें और सुरक्षित रहें!

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