मशहूर अभिनेत्री और फिल्म निर्माता तिस्का चोपड़ा अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बॉलीवुड के मौजूदा हालात पर तीखा प्रहार किया है। तिस्का का मानना है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री अब नई कहानियों और प्रयोगों के बजाय सुरक्षित रास्ता चुनने में लगी है, जो कि सिनेमा के भविष्य के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

यहाँ तिस्का चोपड़ा के बयान की प्रमुख बातें और बॉलीवुड पर उनके कटाक्ष का विश्लेषण दिया गया है:
1. “बॉलीवुड रिस्क लेने से कतराता है”
तिस्का ने कहा कि आज की फिल्म इंडस्ट्री पूरी तरह से ‘बॉक्स ऑफिस डेटा’ और ‘एल्गोरिदम’ पर चल रही है।
- बयान: “इंडस्ट्री अब कला (Art) के बजाय केवल व्यापार (Business) बन गई है। मेकर्स कुछ भी नया करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर फिल्म नहीं चली तो उनका पैसा डूब जाएगा।”
- नतीजा: इसी डर की वजह से ओरिजिनल कहानियों की कमी हो गई है।
2. “पुराने फॉर्मूले में थोड़ा बदलाव” (The ‘Rehash’ Culture)
तिस्का ने बॉलीवुड के ‘क्रिएटिव दिवालियापन’ पर चोट करते हुए कहा कि आज की ज्यादातर फिल्में पुराने सफल फॉर्मूले का ही नया वर्जन हैं।
- सीक्वल और रीमेक: उन्होंने निशाना साधा कि इंडस्ट्री या तो दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक बना रही है या फिर 90 के दशक की हिट फिल्मों के सीक्वल।
- तंज: “मेकर्स को लगता है कि पुराने फॉर्मूले में थोड़ा मसाला या रंग बदल देने से दर्शकों को बेवकूफ बनाया जा सकता है, लेकिन आज का दर्शक ग्लोबल कंटेंट देख रहा है और वह स्मार्ट है।”

3. ओटीटी (OTT) बनाम बॉलीवुड
तिस्का चोपड़ा, जो खुद ‘दहन’ (Dahan) जैसी सफल वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्मों का हिस्सा रही हैं, उन्होंने ओटीटी की तारीफ की।
- उनका मानना है कि ओटीटी पर लेखक और निर्देशक नए विषयों के साथ प्रयोग कर पा रहे हैं, जबकि बड़े पर्दे (सिनेमाघरों) के लिए बनने वाली फिल्में अभी भी एक तय ढांचे में फंसी हुई हैं।
4. बॉलीवुड की वर्तमान चुनौतियां (एक नज़र में)
| चुनौती | तिस्का चोपड़ा का नजरिया |
| ओरिजिनलिटी | लेखक की कल्पना के बजाय ‘ट्रेंड’ को फॉलो किया जा रहा है। |
| स्टार पावर | केवल बड़े सितारों के भरोसे फिल्म बेची जा रही है, स्क्रिप्ट पर ध्यान कम है। |
| बजट मैनेजमेंट | भारी-भरकम बजट के कारण रिस्क लेने की क्षमता खत्म हो गई है। |
5. क्या है समाधान?
तिस्का का सुझाव है कि बॉलीवुड को फिर से ‘राइटर्स’ (लेखकों) को प्राथमिकता देनी होगी। जब तक लेखकों को खुलकर लिखने की आजादी नहीं मिलेगी और मेकर्स छोटे बजट की लेकिन मजबूत कहानियों पर दांव नहीं लगाएंगे, तब तक इंडस्ट्री इसी ‘पुराने फॉर्मूले’ के चक्रव्यूह में फंसी रहेगी।
निष्कर्ष: तिस्का चोपड़ा का यह गुस्सा केवल उनका अकेले का नहीं है, बल्कि कई सिनेप्रेमियों और विशेषज्ञों का भी यही मानना है। बॉलीवुड को अब अपनी पहचान बचाने के लिए ‘सेफ’ खेलने के बजाय ‘साहसी’ होने की जरूरत है।

अंकिता गौतम एक अभिनेत्री, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। Tez Khabri पर वे मनोरंजन जगत (Entertainment), बॉलीवुड और लाइफस्टाइल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट साझा करती हैं। अपनी रचनात्मक शैली और सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ के कारण, वे युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
