‘सुसाइड स्क्वॉड’

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बार फिर भूचाल आ गया है। दशकों तक जिस तालिबान को पाकिस्तान ने पाला-पोसा, आज वही तालिबान उसके लिए भस्मासुर साबित हो रहा है। हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। फरवरी 2026 में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की राजधानी काबुल, कंधार, पक्तिया और नंगरहार में की गई भीषण एयरस्ट्राइक (Airstrikes) के बाद हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए हैं। इस एयरस्ट्राइक के जवाब में जो खबर सामने आई है, उसने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी (पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय) तक खलबली मचा दी है। पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार—यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं है, बल्कि दोनों इस्लामिक देशों के बीच एक ‘ओपन वॉर’ (Open War) की खौफनाक शुरुआत है।

The Breaking Point: Pakistan’s Midnight Airstrikes on Afghanistan

विवाद की यह ताज़ा और सबसे भयंकर कड़ी तब शुरू हुई जब पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत के बाजौर (Bajaur) और बन्नू (Bannu) जिलों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) द्वारा भीषण आत्मघाती हमले किए गए। इन हमलों में पाकिस्तानी सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल सहित 11 से अधिक जवान मारे गए। पाकिस्तान सरकार और सेना का दावा था कि इन हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी अफगानी नागरिक थे और उन्हें अफगानिस्तान में बैठे TTP कमांडरों से निर्देश मिल रहे थे।

इन हमलों से बौखलाई पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) और वायुसेना (PAF) ने आधी रात को अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया। पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने काबुल, कंधार, पक्तिका (Paktika) और नंगरहार (Nangarhar) प्रांतों में जमकर बमबारी की।

पाकिस्तानी दावों की मुख्य बातें:

  1. पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार (Attaullah Tarar) के अनुसार, यह खुफिया जानकारी पर आधारित (Intelligence-based) ऑपरेशन था।
  2. पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने काबुल और कंधार में तालिबान के मिलिट्री बेस और हथियारों के डिपो को तबाह कर दिया है।
  3. पाकिस्तान के अनुसार उसने इस हमले में ‘फितना अल ख्वारिज’ (TTP) और आईएसकेपी (ISKP) के सात बड़े कैंपों को नेस्तनाबूद किया।

हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद (Zabihullah Mujahid) ने बताया कि पाकिस्तान ने नागरिकों के घरों और मदरसों को निशाना बनाया है, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों निर्दोष लोग मारे गए हैं।

Taliban’s Retaliation: “पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार”

अफगान तालिबान कभी भी विदेशी हमलों को बर्दाश्त नहीं करने के लिए जाना जाता है। जैसे ही पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक खत्म हुई, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने जवाबी कार्रवाई का आदेश दे दिया। तालिबान ने डूरंड लाइन (Durand Line) पर पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर भारी तोपखाने और मोर्टार से हमला बोल दिया।

इसी बीच, तालिबान के शीर्ष कमांडरों की तरफ से वह खौफनाक बयान आया जिसने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार कर लिया गया है। तालिबान के पास कोई पारंपरिक वायुसेना (Air Force) नहीं है, लेकिन उनके पास दुनिया की सबसे खतरनाक “असममित युद्ध कला” (Asymmetric Warfare) की ताकत है—उनके आत्मघाती हमलावर (Suicide Bombers)।

क्या है तालिबान का सुसाइड स्क्वॉड?

  • बदरी 313 (Badri 313 Battalion): यह तालिबान की सबसे एलीट और खतरनाक स्पेशल फोर्स है। इस फोर्स के जवान आधुनिक अमेरिकी हथियारों (M4 राइफल्स, नाइट विजन गॉगल्स, हम्वीज) से लैस हैं।
  • मंसूरी ब्रिगेड (Mansoori Brigade): यह तालिबान की वह कुख्यात ब्रिगेड है जिसे विशेष रूप से ‘फिदायीन’ (आत्मघाती) हमलों के लिए तैयार किया गया है।
  • इस्तिशादी (Istishadi – Martyrdom Seekers): तालिबान अपनी सेना में आत्मघाती हमलावरों को एक नियमित सैन्य विंग की तरह इस्तेमाल करता है। उनके लिए आत्मघाती बमबारी कोई आतंकी कृत्य नहीं, बल्कि एक सैन्य रणनीति है।

तालिबान के कमांडरों ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान ने दोबारा अफगान सीमा में घुसने की हिमाकत की, तो उनके ‘सुसाइड स्क्वॉड’ पाकिस्तान के प्रमुख शहरों—पेशावर, इस्लामाबाद और रावलपिंडी—में तबाही मचा देंगे। तालिबान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तानी सेना की हर उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब उनके सैन्य ठिकानों पर आत्मघाती हमलों से देगा।

The Heavy Toll: Casualties and the Declaration of “Open War”

तालिबान की जवाबी कार्रवाई बेहद आक्रामक थी। अफगान रक्षा मंत्रालय के दावों के अनुसार, तालिबान लड़ाकों ने डूरंड लाइन पार करके पाकिस्तान की 19 से अधिक सैन्य चौकियों और 2 बड़े मिलिट्री बेस को तबाह कर दिया।

  • अफगानिस्तान का दावा: तालिबान का कहना है कि उसने इस संघर्ष में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया है और कई सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया है।
  • पाकिस्तान का दावा: दूसरी ओर, पाकिस्तान के अधिकारियों (Mosharraf Ali Zaidi) ने अफगान दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनके केवल दो जवान मारे गए हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी एयरस्ट्राइक और जवाबी फायरिंग में 133 से अधिक अफगान लड़ाके मारे गए हैं और 200 से अधिक घायल हुए हैं।

इस भारी खून-खराबे के बाद, पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस स्थिति को एक “Open War” (खुला युद्ध) करार दिया है। 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि “अफगानों ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं।” लेकिन आज, वही पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ खुली जंग लड़ रहा है। यह पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ (Strategic Depth) की नीति की सबसे बड़ी विफलता है।

 ‘सुसाइड स्क्वॉड’

Understanding the Root Cause: Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP)

इस पूरे युद्ध और तनाव के केंद्र में एक ही आतंकी संगठन है—तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)। इसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है।

TTP का इतिहास और लक्ष्य: TTP का गठन 2007 में बैतुल्लाह महसूद ने किया था। इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंकना और पाकिस्तान में शरिया कानून (Sharia Law) लागू करना है। TTP, अफगान तालिबान (Islamic Emirate of Afghanistan) की ही वैचारिक शाखा है और उसने अफगान तालिबान के सर्वोच्च नेता (अमीर-उल-मोमिनीन) हेबतुल्लाह अखुंदजादा के प्रति निष्ठा की शपथ ली है।

पाकिस्तान की परेशानी: पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल में अफगान तालिबान की सरकार बनने के बाद से TTP के आतंकियों को अफगानिस्तान में “सुरक्षित पनाहगाह” (Safe Havens) मिल गए हैं। TTP के आतंकी अफगानिस्तान की सीमा से पाकिस्तान में घुसपैठ करते हैं, पाकिस्तानी सेना, पुलिस और मस्जिदों पर आत्मघाती हमले करते हैं, और वापस अफगानिस्तान भाग जाते हैं। पाकिस्तान लगातार काबुल से मांग कर रहा है कि वह TTP के खिलाफ कार्रवाई करे या उन्हें पाकिस्तान को सौंप दे।

अफगान तालिबान का रुख: अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करता है। उसका कहना है कि TTP पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान अपनी सुरक्षा विफलताओं का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ रहा है। इसके अलावा, पश्तून भाईचारे और वैचारिक समानता के कारण अफगान तालिबान कभी भी TTP के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य ऑपरेशन नहीं चलाएगा। इसी हताशा में पाकिस्तान ने सीधे अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर एयरस्ट्राइक करने का फैसला किया, जिसके बाद पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार वाली स्थिति उत्पन्न हो गई।

The Historical Dispute: The Durand Line Conflict

इस युद्ध को पूरी तरह समझने के लिए हमें डूरंड लाइन (Durand Line) के इतिहास को समझना होगा। डूरंड लाइन पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2,611 किलोमीटर लंबी एक विवादित सीमा रेखा है।

विवाद क्या है? 1893 में ब्रिटिश राज के राजनयिक सर मोर्टिमर डूरंड (Sir Mortimer Durand) और अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच एक समझौते के तहत इस रेखा को खींचा गया था। इस रेखा ने पश्तून (Pashtun) और बलूच (Baloch) जनजातियों को दो हिस्सों में बांट दिया।

  • अफगानिस्तान का नजरिया: अफगानिस्तान (चाहे वह लोकतांत्रिक सरकार हो या तालिबान) ने कभी भी डूरंड लाइन को एक अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं दी है। उनका मानना है कि खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान का एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से अफगानिस्तान का है।
  • पाकिस्तान की बाड़बंदी: पाकिस्तान इस सीमा को पक्का करने के लिए इस पर कंटीले तारों की बाड़ (Fencing) लगा रहा है। तालिबान लड़ाके अक्सर इस बाड़ को उखाड़ फेंकते हैं, जिसके कारण दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच गोलीबारी होती रहती है।

हालिया संघर्ष में भी, तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा करने का दावा किया है, जो इसी डूरंड लाइन के आसपास स्थित हैं। सीमा विवाद इस ‘ओपन वॉर’ में घी का काम कर रहा है।

Military Dynamics: Pakistan’s Conventional Army vs Taliban’s Guerrilla Warfare

अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध (Full-scale war) छिड़ता है, तो इसके सैन्य समीकरण बहुत जटिल होंगे।

पाकिस्तान की ताकत:

  • पाकिस्तान के पास एक विशाल, पेशेवर सेना है।
  • उनके पास अत्याधुनिक लड़ाकू विमान (F-16, JF-17) और ड्रोन तकनीक है।
  • उनके पास भारी तोपखाने और मिसाइल सिस्टम हैं।

तालिबान की ताकत (Asymmetric Advantage):

  • तालिबान के पास वायुसेना या आधुनिक रडार सिस्टम नहीं हैं, लेकिन उन्हें गुरिल्ला युद्ध (Guerrilla Warfare) में महारत हासिल है।
  • उन्होंने 20 साल तक दुनिया की सबसे ताकतवर सेना (US/NATO) को छकाया है।
  • अफगानिस्तान का पहाड़ी और दुर्गम इलाका तालिबान के पक्ष में है।
  • सबसे खतरनाक हथियार: पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार। तालिबान के फिदायीन लड़ाके पाकिस्तान के शहरों में घुसकर भयंकर तबाही मचा सकते हैं, जिससे पाकिस्तान में आंतरिक गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।

यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान की पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था (Economy) पूरी तरह से ढह जाएगी। पाकिस्तान इस समय IMF के कर्ज पर जिंदा है और एक लंबा युद्ध उसके लिए आर्थिक आत्महत्या (Economic Suicide) के समान होगा।

Geopolitical Ramifications: How the World is Watching

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पूरे क्षेत्र और दुनिया की महाशक्तियों पर पड़ेगा।

1. चीन (China) का रुख: चीन के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक है। चीन ने पाकिस्तान में CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) के तहत अरबों डॉलर का निवेश किया है। TTP और मजीद ब्रिगेड (बलूच विद्रोही) पहले ही चीनी इंजीनियरों को निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा, चीन अफगानिस्तान में लिथियम और तांबे की खदानों में भी निवेश कर रहा है। दोनों देशों के बीच युद्ध चीन के आर्थिक हितों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। चीन पर्दे के पीछे से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता (Mediation) कराने की पूरी कोशिश करेगा।

2. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की स्थिति: अमेरिका के लिए यह एक ‘I told you so’ (मैंने तो पहले ही कहा था) वाला क्षण है। अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान पर ‘गुड टेररिज्म’ और ‘बैड टेररिज्म’ का खेल खेलने का आरोप लगाता रहा है। आज पाकिस्तान उसी आतंकवाद का शिकार हो रहा है जिसे उसने अमेरिका के खिलाफ तालिबान की मदद के लिए पाला था। हालांकि, अमेरिका कभी नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान (जो एक परमाणु संपन्न देश है) पूरी तरह से अस्थिर हो जाए।

3. इस्लामिक स्टेट (ISKP) का फायदा: इस अफरातफरी का सबसे ज्यादा फायदा ‘इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस’ (ISKP) को होगा। ISKP तालिबान और पाकिस्तान दोनों का दुश्मन है। अगर तालिबान का पूरा ध्यान पाकिस्तानी सीमा पर केंद्रित हो जाता है, तो ISKP को अफगानिस्तान के भीतर खुद को मजबूत करने का मौका मिल जाएगा, जो पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।

India’s Position and Strategic Implications

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही इस ‘ओपन वॉर’ पर नई दिल्ली (New Delhi) बहुत पैनी नजर रखे हुए है। भारत के लिए इस स्थिति में कुछ रणनीतिक लाभ हैं, तो कुछ गंभीर सुरक्षा चिंताएं भी हैं।

भारत के लिए रणनीतिक लाभ:

  • पाकिस्तान का टू फ्रंट वॉर (Two-Front War): पाकिस्तान हमेशा भारत को टू-फ्रंट वॉर (चीन और पाकिस्तान) की धमकी देता था। लेकिन आज, पाकिस्तान खुद एक टू-फ्रंट वॉर में फंस गया है। उसकी सेना का एक बड़ा हिस्सा पूर्वी सीमा (भारत) की बजाय अब पश्चिमी सीमा (अफगानिस्तान) पर तैनात है। इससे भारत की सीमाओं (LoC) पर पाकिस्तानी सेना का दबाव और घुसपैठ की घटनाएं कम होंगी।
  • अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का रुख सही साबित होना: भारत हमेशा से दुनिया को यह बताता आया है कि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री है। आज जब पाकिस्तान खुद पाले हुए आतंकियों से लड़ रहा है, तो भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही साबित हो रहा है।

भारत के लिए चिंताएं:

  • क्षेत्रीय अस्थिरता: भारत के पड़ोस में कोई भी बड़ी अस्थिरता चिंता का विषय है। यदि पाकिस्तान पूरी तरह से बिखर जाता है, तो वहां के परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) के आतंकियों के हाथ लगने का खतरा बढ़ जाएगा।
  • हथियारों की तस्करी: अफगानिस्तान से लूटे गए अमेरिकी हथियार (M4 राइफल्स, स्नाइपर आदि) टीटीपी के रास्ते कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक पहुंच सकते हैं, जो कश्मीर घाटी की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

भारत फिलहाल “वेट एंड वॉच” (Wait and Watch) की नीति अपना रहा है और किसी भी देश के पक्ष में सीधे तौर पर बयान देने से बच रहा है।

The Humanitarian Crisis: A Tragedy for the Civilians

इस पूरे भू-राजनीतिक खेल में सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों (Civilians) का हो रहा है। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक में अफगानिस्तान के अंदर महिलाओं और बच्चों की मौत हुई है। वहीं, टीटीपी के हमलों में पाकिस्तान के बाजारों और मस्जिदों में निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं।

  • शरणार्थियों का संकट (Refugee Crisis): सीमा पर जारी बमबारी के कारण डूरंड लाइन के दोनों तरफ के हजारों गांव वाले अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं। पाकिस्तान पहले ही लाखों अफगान शरणार्थियों को जबरन अफगानिस्तान वापस भेज रहा है, जिससे अफगानिस्तान में एक बड़ा मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) पैदा हो गया है।
  • भुखमरी और गरीबी: अफगानिस्तान पहले से ही भयंकर गरीबी, सूखे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार झेल रहा है। युद्ध की इस स्थिति में वहां तक पहुंचने वाली मानवीय सहायता (Humanitarian Aid) भी रुक सकती है।

Future Outlook: What Next for Pakistan and the Taliban?

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, स्थिति और अधिक तनावपूर्ण होती जा रही है। पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार ने इस युद्ध को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां से पीछे हटना दोनों के लिए नाक का सवाल बन गया है।

पाकिस्तान की सरकार और सेना पर घरेलू दबाव है कि वह TTP के हमलों का कड़ा जवाब दे। वहीं, तालिबान को अफगानिस्तान की जनता के सामने खुद को एक मजबूत और संप्रभु सरकार के रूप में पेश करना है जो किसी भी विदेशी हमले का मुंहतोड़ जवाब दे सके।

आगे क्या हो सकता है?

  1. सीमित युद्ध (Limited Border Skirmishes): दोनों देश डूरंड लाइन पर गोलाबारी और छोटे स्तर के हमले जारी रखेंगे, लेकिन पूर्ण युद्ध से बचेंगे।
  2. अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता: कतर (Qatar) या चीन जैसे देश हस्तक्षेप करके दोनों के बीच कोई शांति समझौता कराने का प्रयास कर सकते हैं।
  3. टीटीपी के हमलों में वृद्धि: तालिबान के समर्थन और हथियारों की आपूर्ति से टीटीपी पाकिस्तान के अंदर अपने हमलों (खासकर सुसाइड बॉम्बिंग) को कई गुना बढ़ा देगा, जिससे पाकिस्तान के अंदर अराजकता फैलेगी।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहा यह खूनी संघर्ष इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह एक दिन उसी में गिरता है। पाकिस्तान ने भारत और अफगानिस्तान को अस्थिर करने के लिए दशकों तक आतंकवादियों को “स्ट्रैटेजिक एसेट्स” (Strategic Assets) के रूप में पाला। आज वे ही एसेट्स पाकिस्तान के लिए भस्मासुर बन गए हैं।

फरवरी 2026 की एयरस्ट्राइक ने साबित कर दिया है कि दोनों देशों के बीच “सब्र का प्याला छलक चुका है” (Cup of patience has overflowed)। पाक हमलों के बाद तालिबान का ऐलान, ‘सुसाइड स्क्वॉड’ तैयार जैसी धमकियां इस बात का प्रमाण हैं कि यह युद्ध जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। तालिबान के पास खोने के लिए बहुत कम है, लेकिन आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह युद्ध उसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर सकता है।

दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील होगा, या फिर दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटेंगे। फिलहाल, दक्षिण एशिया के आसमान पर युद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं, और शांति की कोई किरण दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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