अप्रैल 2026 में भारत के इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने सरकार के सामने एक बड़ी और चौंकाने वाली मांग रखी है।

देश में एथेनॉल का उत्पादन अब खपत से लगभग दोगुना हो गया है। इसी ‘ओवरकैपेसिटी’ (Overcapacity) से निपटने के लिए शुगर लॉबी तुरंत E22 (22% एथेनॉल ब्लेंडिंग) लागू करने का भारी दबाव बना रही है।

मध्य पूर्व के युद्ध के कारण कच्चा तेल 110 डॉलर के पार जा चुका है। लेकिन क्या E22 आपकी गाड़ी का इंजन खराब कर देगा? आइए इस नए ईंधन संकट का पूरा सच बिना किसी मिलावट के जानते हैं।

शुगर लॉबी

फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर

भारत इस समय सालाना 2,000 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाने की भारी क्षमता रखता है।

लेकिन हमारी मौजूदा E20 खपत सिर्फ 1,100 करोड़ लीटर पर ही अटकी हुई है।

ISMA के महानिदेशक दीपक बलानी ने साफ कहा है कि इतनी कम खपत पर फैक्ट्रियां चलाना आर्थिक रूप से बिल्कुल संभव नहीं है।

इसलिए वे सरकार से सीधे E27 पर छलांग लगाने के बजाय, एक सुरक्षित कदम के रूप में E22 पेट्रोल लागू करने की मांग कर रहे हैं।

अगर सरकार यह बात मान लेती है, तो देश में रातों-रात 150 करोड़ लीटर एथेनॉल की अतिरिक्त खपत शुरू हो जाएगी।

E22 ईंधन और एथेनॉल की अहम बातेंसीधा विवरण (Details)
प्रस्तावित नया ब्लेंडE22 (22% एथेनॉल, 78% पेट्रोल)
भारत की कुल उत्पादन क्षमता2,000 करोड़ लीटर
मौजूदा खपत (E20 के तहत)लगभग 1,100 करोड़ लीटर
E100 ईंधन की संभावित कीमत₹80 से ₹82 प्रति लीटर
ग्लोबल कच्चे तेल का भाव$110 प्रति बैरल के पार

क्या आपकी गाड़ी E22 पेट्रोल झेल पाएगी?

सरकार के सख्त नियमों के कारण, साल 2023 के बाद बिकी भारत की सभी नई गाड़ियां पहले से ही E20 ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

वैज्ञानिक परीक्षण बताते हैं कि E20 इंजन बिना किसी बड़े बदलाव के E22 पेट्रोल को भी आसानी से सह सकते हैं।

लेकिन देश में चल रहे लाखों पुराने वाहनों के लिए यह नया नियम एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।

ज्यादा एथेनॉल अपनी प्रकृति से क्षरण (Corrosive) करने वाला होता है, जो इंजन के रबर और प्लास्टिक पुर्जों को तेज़ी से खराब करता है।

शुगर लॉबी

फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-fuel) और 80 रुपये का पेट्रोल

ISMA का अंतिम लक्ष्य सिर्फ E22 तक सीमित नहीं है।

वे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भारत की सड़कों पर मुख्यधारा में लाना चाहते हैं, बिल्कुल ब्राजील (Brazil) की तर्ज पर।

उन्होंने सरकार से E100 (100% एथेनॉल) पर GST कम करने की जोरदार वकालत की है।

अगर करों में यह छूट मिलती है, तो पेट्रोल पंप पर E100 ईंधन आपको मात्र 80-82 रुपये प्रति लीटर में आसानी से मिल सकेगा।

एक्सपर्ट की राय: माइलेज का गिरना तय है

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का साफ मानना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा तो मजबूत होती है, लेकिन इसका सीधा आर्थिक नुकसान आम आदमी को उठाना पड़ता है।

एथेनॉल पेट्रोल से सस्ता जरूर होता है, लेकिन इसका ऊर्जा घनत्व (Energy Density) कम होता है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि E22 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी गाड़ी की माइलेज निश्चित रूप से और नीचे गिरेगी। अगर सरकार E22 लागू करती है, तो उसे ग्राहकों को पेट्रोल की कीमतों में भारी छूट देनी ही होगी।

E22 पेट्रोल और एथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े 3 आम सवाल (FAQs)

E22 पेट्रोल क्या होता है?

E22 पेट्रोल एक मिश्रित ईंधन है जिसमें 22 प्रतिशत एथेनॉल और 78 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल मिलाया जाता है। यह E20 पेट्रोल से एक कदम आगे की तकनीक है, जिसका उपयोग कच्चे तेल का आयात कम करने के लिए किया जाता है।

शुगर लॉबी E22 लागू करने की मांग क्यों कर रही है?

भारतीय एथेनॉल उद्योग इस समय ओवरकैपेसिटी (मांग से ज्यादा उत्पादन) की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। E22 लागू होने से तुरंत 150 करोड़ लीटर एथेनॉल की अतिरिक्त खपत शुरू हो जाएगी, जिससे फैक्टरियों को भारी नुकसान से बचाया जा सकेगा।

क्या E22 पेट्रोल से पुराने वाहनों का इंजन खराब हो सकता है?

जी हाँ। 2023 से पहले बनी पुरानी गाड़ियों के इंजन ज्यादा एथेनॉल के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं। E22 के इस्तेमाल से इंजन के पाइप और पुर्जे जल्दी खराब हो सकते हैं और गाड़ी की माइलेज भी घट सकती है।

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